बोनसाई व्यवसाय start bonsai plant business

न्यूज़

sangeetaspen.com ब्लॉग के माध्यम से एक बार फिर रोजगार सीरीज़ में आप सभी लोगो को कुछ ऐसे व्यवसाय की जानकारी देने का प्रयास कर रही हूँ जिनको आसानी से किया जा सकता है। इससे पहले भी में मधुमक्खी पालन

Advertisement
, पशुपालन और मछली पालन के बारे में जानकारी दी है। अगर आपने अभी तक वह पोस्ट नहीं पढ़ी है तो आप उन्हें मेरी वेबसाइट पर जाकर पढ़ सकते हैं।

आपसे मेरा अनुरोध है की आप इसको शेयर जरूर करे जिससे किसी की मदद हो सके और वह व्यक्ति दुसरो के लिए भी रोजगार उत्पन्न कर सके।

तेजी से बढ़ते शहरीकरण और जगह की कमी के कारण इंडोर प्लांट तथा बोन्साई की मांग दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही है। एक अनुमान के अनुसार बोनसाई का वैश्विक बाजार साल 2019 में 30 मिलियन अमरीकी डालर तक पहुंचने की उम्मीद की जा रही थी। 

बागबानी तनाव को दूर रखने में मदद करती है, किंतु शहरों में बागबानी मुमकिन नहीं हो पाती, ऐसे में बोनसाई एक अच्छा जरीया है.

बोनसाई क्या है

बोनसाई का अर्थ होता है। छोटे पौधे (“बौने पौधे”) बोनसाई शब्द दो शब्दों को मिलाकर बनाया गया है। बोन् और साई। बोन् का अर्थ ट्रे जो गमलो की अपेक्षा कम गहराई वाला बर्तन है। और साई का अर्थ पौधा लगाना होता है।bonsai tree

कुल मिलाकर बोनसाई एक जीवित शिल्पकला है, जिसका इतिहास और शुरुआत सदियों पुरानी है। यह बड़े पेड़ -पौधों को छोटा (लघु) और आकर्षक रूप प्रदान करने की एक जापानी कला है। इन छोटे पौधों को गमलों में आसानी से उगाया जा सकता है।

इस कला के अन्तर्गत पौधों को सुन्दर आकार देना, सींचने की विशिष्ट विधि तथा एक गमले से निकालकर दूसरे गमले में लगाना शामिल हैं। इन छोटे पौधे (बौने पौधों) को ग्रुप में रखकर घर को एक हरा -भरा और सुन्दर बगीचे (Garden) का आकार दिया जा सकता है।

बोनसाई पौधों को गमले में इस प्रकार उगाया जाता है कि उनका प्राकृतिक रूप तो बना रहे लेकिन वे आकार में बौने रह जाएं। बोनसाई को पूरे घर में कहीं भी रख सकते है।

बोनसाई शब्द जापानी भाषा से लिया गया है। जापान में जगह की कमी होती है जिस वजह से उन्होंने पेड़ -पोधो को लगाने की एक कला विकसित की जिसका नाम बोनसाई रखा। परंतु इसकी खेती का आरम्भ चीन में हुआ था, इस शब्द की उत्पति लगभग 112 वर्ष पहले हुयी थी। 

स्पष्ट शब्दों में कहा जाये तो बोन्साई का सीधा अर्थ है बड़े–बड़े पीपल, बोहड़, नींम, इमली आदि जैसे पौधों को छोटे–छोटे गमलों में उगाया जाना।आजकल बोनसाई पेड़- पोधो को पारम्परिक उपयोग के साथ घर को सजाने और मनोरंजनात्मक उद्देश्य के लिए उपयोग में लिया जाता है।

प्रकृति में आपको 60 फुट 374.3 फीट ऊंचे पेड़ देखने को मिलते है वही बोनसाई सिर्फ अठारह इंच ऊँचा हो सकता है। शहरी विकास ने इन छोटे पेड़ों की बढ़ती मांग को बढ़ाया है, और बोन्साई पेड़ों, बर्तनों और उपकरणों की बिक्री तेजी से बढ़ रही है।

बोनसाई व्यवसाय का बाजार और जोखिम

यह व्यवसाय शुरू करना आसान नहीं है क्योकि बोनसाई को तैयार करने में आपको कई साल लग सकते है, ये बहुत महंगे होते है जिसके कारण इनको खरीद कर सेल करने में लाभ नहीं होता है।   

बोनसाई के साथ-साथ आप इंडोर प्लांट का व्यवसाय शुरू कर सकते है जो आपको बोनसाई का व्यवसाय शुरू करने में मदद करेंगे क्योकि इंडोर प्लांट तैयार होने में कम समय लेते है और इनकी बाजार में मांग भी है। 

ऑनलाइन मार्किट जैसे Amazon, Flipkart में इन प्रोडक्ट को आसानी से बेचा जा सकता है। कुरियर शुल्क का भुगतान उपभोक्ता के द्वारा किया जाता है। इसके लिए आपको एक GST No. और एक बैंक अकाउंट की जरूरत होती है जिसको आप आसानी से खुद ही आवेदन कर सकते है।   

आप खुद की वेबसाइट बना कर बोनसाई को सेल कर सकते है। 

आप इन पौधो की देखरेख के वीडियो यूट्यूब पर अपलोड कर सकते है। इससे भी आपको आमदनी हो सकती है और आपकी मार्केटिंग भी हो जाती है इसके लिए आप अपने फ़ोन का इस्तेमाल कर यह वीडियो बना सकते है।

बोनसाई ट्रेनिंग देकर भी आप आमदनी कर सकते है।

बोनसाई पौधों के लिए महत्वपूर्ण बाते

गमलो का चयन

बोनसाई पेड़ की विशेषता होती है कि इन्हें विशेष गमलों में लगाया जाता है, जिससे उसकी लम्बाई और आकार का बढ़ना कम हो जाता है। बोनसाई गमले की ऊंचाई 25 सेंटीमीटर से भी कम हो, और इसका आयतन 2 से 10 लीटर तक होना चाहिए। गमला लेंने के समय, यह ध्यान रखें कि गमला इतना बड़ा हो कि पेड़ की जड़ को ढकने के लिए पर्याप्त मात्रा में मिट्टी डाली जा सके।bonsai pots

बोन्साई पौधे लगाने के लिए उभरे गमलों का प्रयोग किया जाता। ये गमले गोलाकार, वर्गाकार, 6 किनारे, चारकोने,अण्डाकार,आयताकार, आदि किसी भी तरह के दिखाई देने वाले हो सकते हैं। इनकी जड़ों के आसपास मिट्टी कम होती है। ऐसे गमले इन पौधों के लिए ठीक रहते हैं। गमलों के नीचे 3-4 छेद बनाएँ जिससे अतिरिक्त पानी गमले से बाहर हो जाए

बोनसाई पौधे का चयन

बोनसाई तैयार करने के लिए पौधे का चयन बहुत ज़रूरी है, क्योंकि हर पौधे को बोनसाई रूप दिया भी नहीं जा सकता हमारे वातावरण के अक़्नुकूल जिन पौधों को इस काम के लिए उपयोग में लिया जाता है । वह पीपल, अनार, आम, अमलताश, अमरूद, आकाशनीम, आंवला, बरगद, बॉटब्रूश, संतरा, सेमल, गूलर, गुलमोहर, पीपल, जकरेण्डा, लीची, चीड़, नीम, नींबू, केसिया प्रजाति आदि।

पतझड़ वृक्ष: ओक, बेर, बर्च, देवदार, फर, नाशपति, सेमल, चमेली, बोगनवेलिया आदि। मुख्य रूप में है। हर पौधे का विकास और दिखावट अलग ही होती है। प्रत्येक पौधे को बोन्साई रूप परिवर्तित नहीं किया जा सकता है।

बोनसाई पौधे लगाना

 गमलों में सिर्फ मिट्टी ही नहीं डाली जाती, गमले के बीच के छेद ढकने के समय नीचे की तह बहुत बारीक, कंकर पत्थर आदि की होनी चाहिए और उसके बाद मिट्टी, गली हुई गोबर की खाद आदि का मिश्रण तैयार करने के समय पौधा लगाया जाता है।

बोनसाई उगाने के लिए पानी की निकासी वाले बर्तन का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए और ये चिकनी मिट्टी, प्लास्टिक या लकड़ी के हो सकते हैं. पानी निकलने वाली जगह पर मिट्टी को रोकने के लिए एक कोयले का टुकड़ा लगाना अच्छा माना जाता है।

गमले की दीवारों से जड़ों को चिपकने नहीं देना चाहिए. इसके लिए जड़ों को समय – समय पर कैंची से काटते रहना चाहिए गमले में बोनसाई पेड़ को बीच से थोड़ा हट कर लगाना अच्छा होता है।

बोनसाई के लिए मिट्टी का चुनाव

बोनसाई के लिए मिट्टी भुरभुरी होनी चाहिए ताकि पानी आसानी से बाहर निकल जाए. बर्तनों में लाल मिट्टी, गोबर की खाद या केंचुआ खाद, रेत व पत्ती की सड़ी खाद को बराबर बराबर मात्रा में मिला कर भरनी चाहिए. ताकि पौधे की वृद्धि सही तरीके से हो। गर्मी और सर्दी की ऋतु के हिसाब को देखते ही पानी डालना चाहिए

बोनसाई के लिए गोबर की खाद, नीम की खली, मूंगफली की खली, अरंडी की खली व पत्तियों की सड़ी खाद अच्छी रहती है मूंगफली की खली और नीम की खली की 1 किलोग्राम मात्रा को 5 लीटर पानी में भिगो देना चाहिए और इसे 1 महीने तक रखना चाहिए. फिर इसे 5 गुने पानी में मिला कर पेड़ में महीने में 2 बार देना चाहिए और साथ में चुटकी भर हड्डी का चूरा और सिंगल सुपर फास्फेट को भी मिला देना चाहिए.

गमला बदलना

गमला बदलने से तात्पर्य यह है की पौधे को निकालकर दुबारा से लगाना है। धीरे बढ़ने वाले पौधे गर्म व आद्र जलवायु में तीन-चार वर्ष व शुष्क जलवायु में चार-छह वर्ष बाद गमला बदलना चाहिए।

बोनसाई कांट-छांट

बोनसाई कांट-छांट–गर्मियों के शुरू होने के साथ कांट-छांट का कार्य किया जाता है। सदाबहार पौधों की कांट-छांट सर्दियां शुरू होने से पहले की जाती है। उसकी कांट–छांट समय पर सही तरीके से करनी चाहिए।

कुछ समय के बाद जड़ों का गुच्छा बन जाता है, फिर री–पोटिंग की ज़रूरत होती है मतलब यह है कि पौधे को गमले में से बाहर निकालकर उसकी अतिरिक्त कड़ों की कांट–छांट की जाती है।

गमलों में उद्यान की मिट्टी, पत्ती की खाद और बालू रेत की बराबर मात्रा मिलाकर मिश्रण तैयार करें। पौधे को मिट्टी सहित गमले से निकालकर जड़ों से मिट्टी लकडी की सहायता से झाड़ दें। पर एक तिहाई मिट्टी जड़ों में लगी रहनी चाहिए।

कम आयु के पौधों की जड़ों को कांट-छांट गहरी व अधिक आयु के पौधों की हल्की करनी चाहिए।खाद का भी खास ध्यान रखना चाहिए ताकि वृद्धि सही तरीके से हो।

बोनसाई पौधों को आकार देना

कंटाई-छंटाई का मुख्य उद्देश्य पौधे को आकार प्रदान करना होता है। बोनसाई को लकड़ी इत्यादि का सहारा नहीं देना चाहिए।

पौधे को खूबसूरत और अनोखा रूप देने के लिए तारों की सहायता से पौधे को लपेट कर मनचाहा आकार दिया जाता है। शाखाओं के मजबूत होने पर तारों को हटा दिया जाता है।

जिसके लिए तांबे की तार या एल्युमीनियम की तार का प्रयोग किया जाता है। सभी कामों को सही रूप में करने के लिए अनेक तरह के उपकरणों की ज़रूरत पड़ती है जो मार्किट से आसानी से उपलब्ध हो जाते है।

बोनसाई पौधों की सिंचाई

प्रतिदिन हल्की सिंचाई करनी चाहिए। पौधों पर पानी फव्वारे से डालें। गमले के नीचे से रिसाव होने तक सिंचाई करें। मिट्टी गीली होने पर सिंचाई न करें। पौधों के बढ़ते समय लगातार पानी देना और ध्यानपूर्वक धूप दिखाना सुनिश्चित करें।

बोनसाई बनाने की विधि

बोनसाई ट्री आप 2 तरीकों से बना सकते हैं। एक छोटे पौधे से दूसरा बीज के द्वारा लेकिन बीज से बोनसाई बनने में बहुत समय लग सकता है इसलिए आप छोटे पौधे से ही बोनसाई बनाना शुरू करें।bonsai

सबसे पहले सावधानी से पौधे को मिट्टी से अलग करें और उसकी जड़ों पर लगी मिट्टी को हटाएं। अब उसके तनों और जड़ों की थोड़ी-थोड़ी कटाई करें ताकि वह पौधा बोनसाई गमले में फिट बैठ सकें। इस बात का ध्यान रखें कि पौधे को रखते समय गमले के किनारे से लगभग एक दो इंच की मिट्टी जड़ों से मुक्त होनी चाहिए।

अब गमले में मिट्टी डाले और दो-तीन इंच मोटी मिट्टी की परत बनाकर पौधे को रखें। फिर जड़ों के चारों और मिट्टी फैलाकर धीरे-धीरे से दबाएं। इसके बाद मिट्टी के ऊपर बजरी और कंकर फैलाएं ताकि गमला साफ सुथरा लगे।

कुछ दिनों बाद जब पौधा गमले में अच्छी तरह जम जाए तो उसकी टहनियों पर धातु की तार लपेटकर उसे मूल वृक्ष जैसी आकृति दें। वैसे टहनियों को नीचे की और झुकाने के लिए कुछ लोग वजन भी बांधते हैं।

बोनसाई से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव

बोनसाई सीधे बढ़ता है और शाखाएं एक पिरामिड या गोल आकार में बनाई जाती है। परन्तु इनके तने में कई असंतुलित घुमाव होते हैं.बोनसाई पेड़ -पौधे पेड़ का तना जड़ के दाएं या बाएं 40 के कोण पर बढ़ता है । जब बोनसाई पेड़ -पोधो में जड़ 1 निकले और 1 से अधिक तने हों, उसे बहुतना कहते हैं. बहुत बार इन पोधो को ग्रुप में (1 से ले कर 15 तक पौधे) लगाया जाता है। ताकि यह नजारा वन जैसा दिखाई दे।

बोनसाई पोधो की खूबसूरती बढ़ाने के लिए कई शाखाओं वाला कम आयु का पौधा चुना जाता है और पौधे को तांबे के तारों की मदद से झुकाया जाता है और तिकोने बरतन में लगाया जाता है।

बोनसाई पौधों का चुनाव कैसे करे

  • चुने हुए पौधे का जीवन कई सालों का होना चाहिए।
  • पौधों की पत्तियां, फूल और फल देखने में बहुत सुंदर हों।
  • पौधों की पत्तियां, फूल और फल देखने में बहुत सुंदर हों।
  • पौधा कठोर हालात सहन करने वाला होना चाहिए।

बोनसाई पोधो से रोजगार

अगर आपकी रुचि हरे-भरे वातावरण से घर को सजाने की है तो घर बैठे बोनसाई का व्यवसाय आपके लिए कई संभावनाओं के द्वार खोल देता है। चाहे आप हाउस वाइफ या व्यवसायी हो, रिटायर्ड पुरुष या महिला हों, या फिर युवा हों, सभी के लिए यह एक संपूर्ण अवसर प्रदान करता है। बोनसाई पोधो से रोजगार बहुत अच्छी आमदनी का जरिया है।

आप अलग अलग तरीके की बोनसाई तैयार करके न सिर्फ इसे मार्केट में बेच सकते हैं, बल्कि इसकी ट्रेनिंग देकर या इसे नर्सरी का रूप देकर या ऑनलाइन बेचा कर अच्छी-खासी कमाई कर सकते हैं। बोनसाई का बाजार न सिर्फ भारत में है, बल्कि इसे आप ऑनलाइन एक्सपोर्ट भी कर सकते हैं। अपने घर में बोनसाई पौधों का एक मिनी म्यूजियम बनाकर आप लोगो आकर्षित कर सकते हैं।


इस काम को करने से आपको न सिर्फ नई ऊर्जा का आभास होगा बल्कि इसे करते हुए आप एक रोमांचक जादुई दुनिया का अनुभव भी करने लगेंगे।

आपको इस काम में बहुत कुछ नया सीखने को मिलेगा इस काम को शौकिया या फिर पार्ट या फुल टाइम व्यवसाय के रूप में अपना सकते है। जैसा आपको टाइम मिले उसी अनुसार काम करे यह व्यवसाय आने वाले दिनों में इस ओर रुझान रखने वाले युवाओं के लिए एक नया करियर विकल्प होगा।

इसे अपनाकर आप एक सफल ग्रीन एन्टरप्रेन्योर भी बन सकते है। इन पौधों में ज्यादा खर्च नहीं आता है। ये पौधे एक ट्रे में उगाए जाते हैं जिसकी कीमत 30 से 35 रुपए होती है और पौधों की कीमत भी 50 रुपए से शुरू होती है। इसके साथ लगने वाली खाद और मिट्टी भी 30 रुपए तक मिल जाती है। एक बार पौधे लेने के बाद आप स्वयं भी बिज़ बना सकते है

अगर आपको यह पोस्ट उपयोगी लगी हो तो इसे शेयर अवश्य करे

2 comments

  • बहुत ही उम्दा जानकारी प्रदान की है आपने इस ब्लॉग के माध्यम से।

    मै भी एक लेखिका है और मैं बोनसाई के बारे में लिखती हूं। आका ब्लॉग पढ़ के बहुत अच्छा लगा। 🙂

    पहली बार मै हिंदी में टाइप कर रही हूं। बहुत ही रोमांचक महसूस कर रही हूं।

Leave a Reply