यशस्वी जायसवाल की सफलता (संघर्ष) की कहानी (Struggle Story of the Yashasvi Jaiswal)

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यशस्वी जायसवाल.(yashasvi_jaiswal_)
यशस्वी जायसवाल.(yashasvi_jaiswal)
फोटो गूगल सौजन्य से

यशस्वी जायसवाल की सफलता (संघर्ष) की कहानी (Struggle Story of the Yashasvi Jaiswal)

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दक्षिण अफ्रीका में मंगलवार को खेले गए अंडर 19 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में भारत ने पाकिस्तान (प्रतिद्वंदी) को दस विकेटसे हरा कर सातवीं बार फाइनल में अपनी जगह बना ली है और भारत(india) की इस शानदार जीत का सारा श्रेय जाता है हमारे अंडर 19 के हीरो यशस्वी जायसवाल को यशस्वी ने इस पूरे टूर्नामेंट में 156 की औसत से सबसे अधिक रन बनाए और इस टूर्नामेंट का पहला शतक बनाया और एक विकेट भी लिया इस पूरे टूर्नामेंट में पांच मुकाबले खेले गए जिसमे यशस्वी जायसवाल ने तीन अर्धशतक बनाये और एक शतक बनाया तथा एक 29 रनो की नाबाद पारी खेली


यशस्वी जायसवाल की IPL (Indian Premier League) में लगी करोड़ों की बोली
यशस्वी ने इससे पहले एशिया कप अंडर-19 में अपना शानदार प्रदर्शन दिखाया और जमकर रन बनाये यशस्वी उत्तर प्रदेश के एक युवा बल्लेबाज है जो की मुंबई (टीम) की तरफ से खेलते है यशस्वी जायसवाल के शानदार प्रदर्शन को देखते हुए आईपीएल 2020 (Indian Premier League 2020) में राजस्थान रॉयल्स ने दो करोड़ 40 लाख रुपये में ख़रीदा है यह नीलामी गुरूवार (Thursday) को कोलकाता में हुयी थी
कैसा रहा यशस्वी जायसवाल का अंडर-१९ तक का संघर्ष पूर्ण (चुनोतियो से भरा) सफर
यशस्वी जायसवाल का जन्म 28 दिसंबर 2001 में उत्तर प्रदेश के सुरियावन (भदोही) में हुआ था इनके पिता का नाम भूपेंद्र जायसवाल और माता का नाम कंचन जायसवाल है यशस्वी जायसवाल के पिता का एक छोटा सा हार्डवेयर स्टोर है और इनकी माता एक गृहिणी (हाउसवाइफ) है यशस्वी मात्र 10 साल की उम्र में भदोही (उत्तर प्रदेश) से निकलकर मुंबई आ गए यशस्वी को क्रिकेटर बनने का सपना मुंबई ले आया पर यहाँ पर अनेको कठिनाइयों का सामना करना पड़ा परन्तु यशस्वी ने हार नहीं मानी और चुनौतियों का डट कर सामना किया

यशस्वी ने मुंबई (वर्ली ) में अपने एक रिश्तेदार (संतोष)के घर में रहने का मन बनाया परन्तु रिश्तेदार के घर में पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण यह संभव नहीं हो सका इसके बाद उन्होंने डेयरी में रहने के लिए बात की परन्तु डेयरी के मालिक ने कहा की यहाँ पर काम करना पड़ेगा लेकिन दिन भर क्रिकेट खेलने के बाद यशस्वी थक जाते और डेयरी में काम करने में सहयोग नहीं कर पते जिससे नाराज़ हो कर डेयरी मालिक ने यशस्वी को वह से निकल दिया इसके बाद किसी ने उनके रहने की व्यवस्था मुस्लिम यूनाइटेड क्लब में कर दी और यशस्वी को रहने का स्थान मिल गया पर अब खाने की व्यवस्था करनी थी क्युकी पिता कभी कभी जो रूपये भेजते थे वह पुरे नहीं होते थे और पिता से यशस्वी अपनी दर्द बरी कहानी नहीं कहना चाहते थे तब यशस्वी ने कई बार आजाद मैदान में रामलीला के दौरान (पानी-पूरी ) गोलगप्पे बेचने का काम भी किया था रामलीला के टाइम पर यशस्वी की अच्छी कमाई हो जाती थी पर यशस्वी को दर लगता था की उनका कोई क्रिकेट टीम का साथी पानी-पूरी खाने वहां आ ना जाये यशस्वी पैसे कमाने के लिए हमेशा कुछ ना कुछ करते रहटे थे कभी – कभी वह बड़े लड़कों के साथ भी क्रिकेट खेलने जाते थे और रन बनाते तो सप्ताह निकलने के लिए उनके पास 200-300 रुपए बन जाते थे

यशस्वी के दिन तो क्रिकेट खेलने और अन्य कामो में निकल जाते परन्तु राते निकलना उनके लिए बहुत मुश्किल हो जाती थी ऐसे समय में यशस्वी को अपने परिवार की बहुत याद आती थी परिवार को याद करके यशस्वी बहुत रोते थे

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