17 नवंबर :बाला साहेब ठाकरे जी की पुण्यतिथि

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17 November : death anniversary (punytithi) of bal thackeray,
17 November : death anniversary (punytithi) of bal thackeray
image by :Dailyhunt

17 नवंबर : बाला साहेब ठाकरे (Bala Saheb Thackeray) जी की पुण्यतिथि

आज बाला साहेब ठाकरे (Bala Saheb Thackeray) जी की पुण्यतिथि है.उनका पूरा नाम बाल केशव ठाकरे था आज ही के दिन 17 नवंबर 2012 (17 November)

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को उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया, जब भी महाराष्ट्र की बात होती है

तब बाला साहेब ठाकरे (Bala Saheb Thackeray)का नाम भी सम्मान से लिया जाता है। हिन्दूवादी विचारो के चलते उनके समर्थक उन्हें हिन्दू हृदय सम्राट की उपाधि देते है.

बाला साहेब ठाकरे (Bala Saheb Thackeray) के इर्द-गिर्द करीब चार दशक तक महाराष्ट्र की राजनीति घूमती रही. लोगों के नायक रहे बाला साहेब ठाकरे (Bala Saheb Thackeray) ने अपनी शर्तों पर जिंदगी जी. सोशल मीडिया पर आज लोग उनकी पुण्यतिथी पर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं.

ट्विटर पर हैशटैग #BalasahebThackeray ट्रेंड कर रहा है. लोग ना सिर्फ बाला साहेब ठाकरे (Bala Saheb Thackeray) को याद कर रहे हैं बल्कि उनकी कई पुरानी तस्वीरें और वीडियो भी शेयर कर रहे हैं. मानो ऐसा लग रहा है।

सोशल मीडिया बाला साहेब ठाकरे (Bala Saheb Thackeray) के पोस्ट्स से रंग गया है. लोग उनके पुराने वीडियो शेयर कर रहे हैं बल्कि इन वीडियोस पर अपने कमेंट और रिएक्शन भी दे रहे हैं.

बाला साहेब ठाकरे  ने मराठी एकता को कायम रखा

बाला साहेब ठाकरे का जन्म 23 जनवरी 1926 को पुणे (महाराष्ट्र) में हुआ था. बाला साहब का परिवार सामाजिक कार्यों में रूचि रखता था और जातिवादी का धुर विरोधी था। उसका असर बाला साहेब ठाकरे पर देखने को मिला।

17 November : death anniversary (punytithi) of bal thackeray,
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बाला साहेब ठाकरे (Bala Saheb Thackeray)ने मराठी एकता को कायम करने और मुंबई को महाराष्ट्र की राजधानी बनाने के लिए बहुत संघर्ष किया।बाला साहेब ठाकरे (Bala Saheb Thackeray) का विवाह मीना ठाकरे से हुआ था। दोनों की तीन संतानें हैं। महाराष्ट्र के वर्तमान मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे उनके सबसे छोटे बेटे हैं।

बाला साहब (Bala Saheb Thackeray) ने जीवन की सुरुवाद कार्टूनिस्ट के तोर पर की

बाला साहेब ठाकरे (Bala Saheb Thackeray)ने अपने जीवन की सुरुवाद कार्टूनिस्ट के तोर पर की बाद में उन्होंने कुछ अख़बार भी प्रकाशित किये. 1966 में उन्होंने राजनितिक पार्टी शिव सेना का गठन किया।

2006 में उनके भतीजे राज ठाकरे ने शिव सेना छोड़ एक नयी पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का गठन किया। कहा जाता है की राजनीति के अलावा बाला साहेब ठाकरे (Bala Saheb Thackeray) की रूचि फिल्मों में खूब थी।

बाला साहेब ठाकरे (Bala Saheb Thackeray) की तीन प्रतिज्ञाएं

शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे (Bala Saheb Thackeray)ने अपने जीवन में तीन प्रतिज्ञाएं की थी। एक प्रतिज्ञा ये थी कि वो कभी अपनी आत्मकथा नहीं लिखेंगे। दूसरी प्रतिज्ञा ये थी कि वो कभी किसी तरह का चुनाव नहीं लड़ेंगे और तीसरी प्रतिज्ञा ये थी कि वो कभी कोई सरकारी पद नहीं हासिल करेंगे।

सरकार से बाहर रहकर सरकार पर नियंत्रण रखना उनकी पहचान थी। 53 साल के इतिहास में पहली बार ठाकरे परिवार का कोई सदस्य मातोश्री से निकलकर राज्य सचिवालय की छठी मंजिल तक पहुंचा और इसे आगे ले जाने के प्रयास में जुटा हुआ है।

बाला साहेब ठाकरे (Bala Saheb Thackeray) सामाजिक कायकर्ता और लेखक थे


बाला साहेब ठाकरे (Bala Saheb Thackeray) के पिता केशव सीताराम ठाकरे जी भी एक सामाजिक कायकर्ता और लेखक थे उन्होंने मराठी भाषी लोगो को एकजुट करने हेतु चायवाल आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाई थी वह अंग्रेज़ी लेखक विलियम मेकपीस ठेकरे के प्रसंसक थे और उन्होंने ठेकरे को अपना सरनेम बना लिया।

बाला साहेब ठाकरे (Bala Saheb Thackeray) जिंदगी की आखिरी पडाव में स्वास्थ्य समस्याओं से जूझने लगे। श्वास लेने में कठिनाई के कारण 24 जुलाई 2012 को मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया। आखिरकार 17 नवम्बर 2012 को बाला साहेब ठाकरे (Bala Saheb Thackeray) ने आखिरी सांस ली

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना और सूचनाएं जानकारी पर आधारित हैं. https://sangeetaspen.com/ इन जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है)

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