24 मार्च विश्व क्षयरोग दिवस : टीबी. क्यों होता है, लक्षण, कारण और इलाज

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24 मार्च विश्व क्षयरोग दिवस : टीबी. क्यों होता है, लक्षण, कारण और इलाज
24 March World Tuberculosis Day

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24 मार्च विश्व क्षयरोग दिवस : टीबी. क्यों होता है? लक्षण, कारण और इलाज

विश्व टीबी दिवस या विश्व तपेदिक दिवस या विश्व क्षयरोग दिवस’ – (24 March World Tuberculosis Day) वैश्विक तपेदिक महामारी समाप्त करने तथा तपेदिक (टीबी) के स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक परिणामों के बारे में सार्वजनिक जागरूकता प्रसारित करने के प्रयासों को बढ़ाने के लिए प्रतिवर्ष 24 मार्च को विश्व क्षयरोग दिवस मनाया जाता है। डॉ॰ रॉबर्ट कॉख ने वर्ष 1882 में आज के ही दिन (24 मार्च ) टीबी रोग फैलाने वाले के जीवाणु की खोज की थी।

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24 March World Tuberculosis Day: T.B. Why it happens, symptoms, causes and treatment

लेकि बीते कई दशकों में महत्वपूर्ण प्रगति होने के बावजूद भी टीबी विश्वभर में मृत्यु के शीर्ष दस कारणों में से एक है। वैश्विक स्तर पर टीबी के कारण अनुमानित 1.3 मिलियन लोगों की मृत्यु हुई तथा वर्ष 2017 में 10.0 मिलियन लोगों (9.0–11.1 मिलियन) में टीबी रोग विकसित हुआ। वैश्विक तपेदिक रिपोर्ट, वर्ष 2018 के अनुसार भारत में वर्ष 2017 के दौरान विश्व टीबी के मामलों की भागीदारी 27% है।

टी.बी. का पूरा नाम है ट्यूबरकुल बेसिलाइ 24 March World Tuberculosis Day – यह रोग हवा के जरिए एक से दूसरे इंसान में फैलती है। लेकिन फेफड़ों के अलावा दूसरी कोई टीबी एक से दूसरे में नहीं फैलती। इसे प्रारंभिक अवस्था में ही न रोका गया तो खतरनाक और जानलेवा साबित होता है।

टी.बी.इसलिए भी खतरनाक और जानलेवा है क्योंकि यह शरीर के जिस हिस्से में होती है, इलाज़ करे आभाव में या सही इलाज न हो पाने के कारण शरीर के उस हिस्से को बेकार कर देती है। इसलिए टीबी के आसार नजर आने पर जांच अवश्य करानी चाहिए।

टी .बी एक संक्रामक बीमारी है,जो ट्यूबरक्‍युलोसिस बैक्टीरिया के कारण होती है – TB is an infectious disease caused by the tuberculosis bacteria.

24 March World Tuberculosis Day – इस बीमारी का सबसे अधिक प्रभाव फेफडों पर होता है। फेफड़ों के अलावा ब्रेन, यूटरस, मुंह, लिवर, किडनी, गले आदि में भी टीबी हो सकती है। बताते चलें कि सबसे कॉमन फेफड़ों का टीबी है, जो कि हवा के जरिए एक से दूसरे इंसान में फैलती है।

टी .बी व्यक्ति को धीरे-धीरे मारता है। टी.बी. रोग को अन्य कई नाम से जाना जाता है, जैसे तपेदिक, क्षय रोग तथा यक्ष्मा। दुनिया में छह-सात करोड़ लोग इस बीमारी से ग्रस्त हैं और प्रत्येक वर्ष 25 से 30 लाख लोगों की इससे मौत हो जाती है। देश में हर तीन ‍मिनट में दो मरीज क्षयरोग के कारण दम तोड़ दे‍ते हैं। हर दिन चालीस हजार लोगों को इसका संक्रमण होता है।

टी.बी. रोग एक बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण होता है। इसे फेफड़ों का रोग माना जाता है, लेकिन यह फेफड़ों से रक्त प्रवाह के साथ शरीर के अन्य भागों में भी फैल सकता है, जैसे हड्डियाँ, हड्डियों के जोड़, लिम्फ ग्रंथियाँ, आँत, मूत्र व प्रजनन तंत्र के अंग, त्वचा और मस्तिष्क के ऊपर की झिल्ली आदि।

टी.बी. के बैक्टीरिया साँस द्वारा शरीर में प्रवेश करते हैं। किसी रोगी के खाँसने, बात करने, छींकने या थूकने के समय बलगम व थूक की बहुत ही छोटी-छोटी बूँदें हवा में फैल जाती हैं, जिनमें उपस्थित बैक्टीरिया कई घंटों तक हवा में रह सकते हैं और स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में साँस लेते समय प्रवेश करके रोग पैदा करते हैं।

रोग से प्रभावित अंगों में छोटी-छोटी गाँठ अर्थात्‌ टयुबरकल्स बन जाते हैं। उपचार न होने पर धीरे-धीरे प्रभावित अंग अपना कार्य करना बंद कर देते हैं और यही मृत्यु का कारण हो सकता है। सबसे अहम जरुरी बात यह हे की टी.बी. का रोग गाय में भी पाया जाता है। दूध में इसके और ये जीवाणु गाय से दूध केमाध्यम से निकलते हैं अगर कोई व्यक्ति गाय के दूध को बिना उबाले पीता है। तो उस व्यक्ति के रोगग्रस्त होने की सम्भावनाये बढ़ जाती है।

भारत में हर साल 20 लाख लोग टीबी की चपेट में आते हैं। जिनमे से लगभग 5 लाख प्रतिवर्ष मर जाते हैं। एक रिपोट के अनुसार भारत में टीबी के मरीजों की संख्या विश्व के अन्य किसी भी देश से ज्यादा है। यदि एक औसत निकालें तो दुनिया के 30 प्रतिशत टीबी रोगी भारत में पाए जाते हैं।

टी.बी. रोग के कारण – यूँ तो कई कारण हैं। जिनसे टी.बी. रोग होता है। परन्तु उनमे से मुख्य कारण

निर्धनता के कारण – निर्धनता, गरीबी के कारण अपर्याप्त व पौष्टिकता से कम भोजन, कम जगह में बहुत लोगों का रहना, स्वच्छता का अभाव तथा गाय का कच्चा दूध पीना एवं उचित समय पर बीमारी का पता नहीं चल पाना आदि हैं।

जिस व्यक्ति को टी.बी. है, उसके संपर्क में रहने से, उसकी वस्तुओं का सेवन करने, प्रयोग करने से।

टी.बी. के मरीज द्वारा यहाँ-वहाँ थूक देने से इसके विषाणु उड़कर स्वस्थ व्यक्ति पर आक्रमण कर देते हैं।

मदिरापान तथा धूम्रपान करने से भी इस रोग की चपेट में आया जा सकता है। साथ ही स्लेट फेक्टरी में काम करने वाले मजदूरों को भी इसका खतरा रहता है।

टी.बी. के रोग का फैलाव – Tb Disease Spread

टी.बी. के बैक्टीरिया साँस द्वारा फेफड़ों में पहुँच जाते हैं, फेफड़ों में ये अपनी संख्या बढ़ाते रहते हैं। इनके संक्रमण से फेफड़ों में छोटे-छोटे घाव बन जाते हैं। यह एक्स-रे द्वारा जाना जा सकता है, घाव होने की अवस्था के सिम्टम्स हल्के नजर आते हैं।

इस रोग की खास बात यह है कि ज्यादातर व्यक्तियों में इसके लक्षण उत्पन्न नहीं होते। यदि व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक शक्ति कमजोर हो तो इसके लक्षण जल्द नजर आने लगते हैं और वह पूरी तरह रोगग्रस्त हो जाता है। ऐसे व्यक्तियों के फेफड़ों अथवा लिम्फ ग्रंथियों के अंदर टी.बी. के जीवाणु पाए जाते हैं,

कुछ लोगों जिनकी रोग प्रतिरोधक शक्ति ज्यादा होती है, में ये जीवाणु कैल्शियम के या फ्राइब्रोसिस के आवरण चढ़ाकर उनके अंदर बंद हो जाते हैं। जीवाणु शरीर में फेफड़े या लिम्फ ग्रंथियों में रहते हैं। फिर ये हानि नहीं पहुँचाते, ऐसे जीवणुओं के विरुद्ध कुछ नहीं किया जा सकता।

ये जीवाणु शरीर में सोई हुई अवस्था में कई वर्षों तक बिना हानि पहुंचाए रह सकते हैं, लेकिन जैसे ही शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति कमजोर होती है, टी.बी. के लक्षण नजर आने लगते हैं। यह शरीर के किसी भी भाग में फैल सकता है।

टीबी के लक्षण – symptoms of TB

खांसी आना – टीबी सबसे ज्यादा फेफड़ो को प्रभावित करती है, इसलिए शुरुआती लक्षण खांसी आना है। पहले तो सूखी खांसी आती है लेकिन बाद में खांसी के साथ बलगम और खून भी आने लगता है। दो हफ्तों या उससे ज्यादा खांसी आए तो टीबी की जांच अवश्य करा लेनी चाहिए।

पसीना आना – पसीना आना टीबी होने का लक्षण है। मरीज को रात में सोते समय पसीना आता है। टीबी के मरीज को अधिक ठंड होने के बावजूद भी पसीना आता है।।

बुखार रहना –  जिन लोगों को टीबी होती है, उन्हें लगातार बुखार रहता है। शुरुआत में लो-ग्रेड में बुखार रहता है लेकिन बाद संक्रमण ज्यादा फैलने पर बुखार तेज होता चला जाता है।

थकावट होना – टीबी के मरीज की बीमारी से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। जिसके कारण उसकी ताकत कम होने लगती है। वहीं, मरीज के कम काम करने पर अधिक थकावट होने लगती है।

वजन घटना – टीबी हो जाने के बाद लगातार वजन घटने लगता है। खानपान पर ध्यान देने के बाद भी वजन कम होता रहता है। वहीं, टीबी के मरीज की खाने को लेकर रुचि कम होने लगती है।

सांस लेने में परेशानी – टीबी हो जाने पर खांसी आती है, जिसके कारण सांस लेने में परेशानी होती है। अधिक खांसी आने से सांस भी फूलने लगती है।

24 मार्च विश्व क्षयरोग दिवस : टीबी. क्यों होता है, लक्षण, कारण और इलाज
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टी.बी. रोग के कारण – Tb Cause of disease

  •  टी.बी. रोग के यूँ तो कई कारण हैं, प्रमुख कारण निर्धनता, गरीबी के कारण अपर्याप्त व पौष्टिकता से कम भोजन, कम जगह में बहुत लोगों का रहना, स्वच्छता का अभाव तथा गाय का कच्चा दूध पीना आदि हैं।
  • जिस व्यक्ति को टी.बी. है, उसके संपर्क में रहने से, उसकी वस्तुओं का सेवन करने, प्रयोग करने से।
  • टी.बी. के मरीज द्वारा यहाँ-वहाँ थूक देने से इसके विषाणु उड़कर स्वस्थ व्यक्ति पर आक्रमण कर देते हैं।

  • मदिरापान तथा धूम्रपान करने से भी इस रोग की चपेट में आया जा सकता है। साथ ही स्लेट फेक्टरी में काम करने वाले मजदूरों को भी इसका खतरा रहता है।

रोग का फैलाव किस तरह से होता है – How does the disease spread

टी.बी. के बैक्टीरिया साँस द्वारा फेफड़ों में पहुँच जाते हैं, फेफड़ों में ये अपनी संख्या बढ़ाते रहते हैं। इनके संक्रमण से फेफड़ों में छोटे-छोटे घाव बन जाते हैं। यह एक्स-रे द्वारा जाना जा सकता है, घाव होने की अवस्था के सिम्टम्स हल्के नजर आते हैं।

इस रोग की खास बात यह है कि ज्यादातर व्यक्तियों में इसके लक्षण उत्पन्न नहीं होते। यदि व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक शक्ति कमजोर हो तो इसके लक्षण जल्द नजर आने लगते हैं और वह पूरी तरह रोग ग्रस्त हो जाता है। ऐसे व्यक्तियों के फेफड़ों अथवा लिम्फ ग्रंथियों के अंदर टी.बी. के जीवाणु पाए जाते हैं ।

कुछ लोगों जिनकी रोग प्रतिरोधक शक्ति ज्यादा होती है, में ये जीवाणु कैल्शियम के या फ्राइब्रोसिस के आवरण चढ़ाकर उनके अंदर बंद हो जाते हैं। जीवाणु शरीर में फेफड़े या लिम्फ ग्रंथियों में रहते हैं। फिर ये हानि नहीं पहुँचाते, ऐसे जीवणुओं के विरुद्ध कुछ नहीं किया जा सकता।

ये जीवाणु शरीर में सोई हुई अवस्था में कई वर्षों तक बिना हानि पहुंचाए रह सकते हैं, लेकिन जैसे ही शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति कमजोर होती है, टी.बी. के लक्षण नजर आने लगते हैं। यह शरीर के किसी भी भाग में फैल सकता है।

टी.बी. से बचाव के तरीके – Tb Ways to avoid

  • 2 हफ्ते से ज्यादा खांसी होने पर डॉक्टर को दिखाएं। दवा का पूरा कोर्स लें। डॉक्टर से बिना पूछे दवा बंद न करे।
  • मास्क पहनें या हर बार खांसने या छींकने से पहले मुंह को पेपर नैपकिन से कवर करें।
  • मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूके और उसमें फिनाइल डालकर अच्छी तरह बंद कर डस्टबिन में डाल दें। यहां-वहां नहीं थूकें।
  • मरीज हवादार और अच्छी रोशनी वाले कमरे में रहे। साथ ही एसी, कूलर से परहेज करे।
  • पौष्टिक खाना खाए, एक्सरसाइज व योग करे
  • बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, तंबाकू, शराब आदि से परहेज करें
  • भीड़-भाड़ वाली और गंदी जगहों पर जाने से बचें
  • बच्चे के जन्म पर BCG का टीका लगवाएं।
24 मार्च विश्व क्षयरोग दिवस : टीबी. क्यों होता है, लक्षण, कारण और इलाज
24 मार्च विश्व क्षयरोग दिवस : टीबी. क्यों होता है, लक्षण, कारण और इलाज

संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम – आरएनटीसीपी (Revised National Tuberculosis Control Program) आरएनटीसीपी देश में टीबी की रोकथाम और नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार का एक कार्यक्रम है। इसमें वर्ष 2025 तक टीबी उन्मूलन की ओर बढ़ने के लिए राष्ट्रीय रणनीतिक योजना वर्ष 2017-2025 (नेशनल स्ट्रेटेजिक प्लान 2017-2025) के तहत “पता लगाना (डिटेक्ट)- उपचार (ट्रीट)- रोकथाम (प्रिवेंट)– निर्माण (बिल्ड)” (डीटीपीबी) के चार रणनीतिक स्तंभों का एकीकरण किया गया है।

संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम – आरएनटीसीपी (Revised National Tuberculosis Control Program) के तहत अन्य नई पहले इस प्रकार हैं

• निजी क्षेत्रों की भागीदारी- निजी स्वास्थ्य प्रदाता (प्राइवेट हेल्थ प्रोवाइडर इंगेजमेंट) को रोग का पता लगाने एवं टीबी के रोगियों का उपचार करने में शामिल किया गया है।

• सक्रिय टीबी के मामलों की खोज (एसीएफ)- वर्ष 2017 में उच्च जोखिम वाली जनसंख्या में एसीएफ के तीन चरणों के माध्यम से टीबी रोगियों का पता लगाया गया था।

• दैनिक उपचार पद्यति- दवा के बोझ को कम करने के लिए निश्चित दवा संयोजक की शुरुआत की गयी।

• सार्वभौमिक दवा संवेदनशीलता परीक्षण- पर्याप्त उपचार के लिए सभी टीबी रोगियों में दवा प्रतिरोधिकता की जांच।

• नयी दवा की शुरूआत- बेडाकूलाइन एवं डेलामिनिड जैसी नई विकसित दवाओं की शुरुआत को सात राज्यों/संघ शासित प्रदेशों में की गयी।

• पोषण सहयोग- सभी टीबी रोगियों को टीबी उपचार की अवधि के दौरान पोषण संबंधी सहायता के लिए प्रति माह 500 रुपये प्रदान किए जाते है।

• डिज़िटल पहल- निक्षय, 99 डॉट्स, निक्षय औषधि।

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महिलाओं में टीबी के लक्षण ?

अनियमित मासिक चक्र, योनि से विसर्जन जिसमें रक्त के धब्बे भी होते हैं, यौन सबंधों के पश्चात दर्द होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं लेकिन कई मामलों में ये लक्षण (संक्रमण) काफी बढ़ जाने के पश्चात दिखाई देते है ।

बच्चों में टीबी के लक्षण ?

बच्चों में टीबी के लक्षण जान पाना और उसका इलाज कर पाना एक खास तरह की चुनौतीपूर्ण कार्य है, लेकिन यह बीमारी यदि बच्चों में हो जाए तो यह बड़ों से भी अधिक घातक हो जाती है। क्योंकि बच्चों में वयस्कों की तुलना में रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कम होती है। बच्चों को परेशानियां होती हैं लेकिन अक्सर वह बता नहीं पाते हैं। इस कारण बच्चों में टीबी रोग भी तुरंत पता नहीं चल पाता है।

पेट टीबी के लक्षण ?

टीबी के बैक्टीरिया से संक्रमित खाना खाने या बुखार रहना, भूख कम लगना, कमजोरी आना, पेट में गांठ बनना आदि इसके लक्षणों में शामिल हैं।

टीबी के लिए टेस्ट ?

टीबी है या नहीं, इसकी मुफ्त जांच सिविल अस्पताल में अब दो घंटे में होगी। बलगम की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पताल में कल्चर सेंस्टेविटी टेस्ट की मशीन उपलब्ध कराई गई है। जिससे बलगम की जांच रिपोर्ट अब दो घंटे में आ जाएगी। इसके लिए मरीजों को सात-सात दिन तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

टीवी कितने प्रकार की होती है ?

टीवी दो प्रकार हैं। पहला, पल्मोनरी टीबी (फेफड़े संक्रमित होते) व दूसरा, एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी (फेफड़ों के बजाय शरीर के अन्य अंगों पर असर व उसी अनुसार लक्षण)।

गले की टीबी के लक्षण ?

टीबी का देशी इलाज 200 ग्राम शहद, 200 ग्राम मिश्री, 100 ग्राम गाय का घी मिलाकर रख लें। इसे 6-6 ग्राम की मात्रा में रोगी को दिन में कई बार चटाएँ। एक चम्मच मिश्री और एक चम्मच देशी-घी को मिलाकर सोने से पहले गर्म दूध के साथ लें।

सिर की टीबी के लक्षण ?

सिर दर्द, घबराहट, उल्टी लगातार होना, चक्कर आना, बुखार आना, बिस्तर पर लेटे रहना, कभी-कभी आंखों की पुतली का न चलना, कभी कभी हाथ पैर नहीं चलना।

टीवी की बीमारी कैसे होती है ?

टीबी बैक्टीरिया से होनेवाली बीमारी है, जो हवा के जरिए एक इंसान से दूसरे में फैलती है। यह आमतौर पर फेफड़ों से शुरू होती है। सबसे कॉमन फेफड़ों की टीबी ही है लेकिन यह ब्रेन, यूटरस, मुंह, लिवर, किडनी, गला, हड्डी आदि शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है। टीबी का बैक्टीरिया हवा के जरिए फैलता है

ग्लैंड टीबी क्या है ?

टीबी को जड़ से खत्म करने के प्रयास में है, वहीं पर गिल्टी की टीबी है तो वहां ग्लैंड बढ़ जाती है।

क्या टीबी दोबारा हो सकती है ?

हां जिसकी वजह बीच में इलाज छोड़ना होता है। ऐसे ही लोगों में यह बीमारी लौटकर आती है। लोग यह भी मानते हैं कि अगर यूटने की टीबी है तो घुटना बदलने पर भी दोबारा टीबी हो जाती है।

टीवी का इलाज कितने दिन चलता है ?

सरकारी अस्पतालों और डॉट्स सेंटरों में इसका फ्री इलाज होता है। टीबी का इलाज लंबा चलता है। इसे ठीक होने में 6 महीने से 2 साल तक का समय लग सकता है।

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