A. R. Rahman | A. R. Rahman Biography in Hindi | ए आर रहमान जीवनी

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A.  R. Rahman Biography in Hindi
A. R. Rahman Biography in Hindi
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नाम : अल्लाह रक्खा रहमान ए. आर रहमान (a.r.rahman) ए एस दिलीप कुमार
जन्म : 6 जनवरी 1967 चेन्नई
पिता : आर.के. शेखर
माता : करीमा बेग़म
विवाह : सायरा बानू

Biography of A. R. Rahman in Hindi Jivani ए आर रहमान जीवनी 

A.R.Rahman : दुनिया भर में अपनी गायकी और संगीत का लोहा मनवा चुके संगीतकार ए. आर. रहमान आज (6 जनवरी) को ए.आर रहमान का (A.R.Rahman) का (55 birthday) जन्मदिन (happy birthday A.R.Rahman) है। ए. आर रहमान की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। उनके नसीब में जितनी बड़ी कामयाबी आई, उतना ही कठिन संघर्ष भी आया है।

अपनी रचनाओं से रहमान ने ना सिर्फ देश में बल्कि दुनिया में भी नाम कमाया और तिरंगे का मान बढ़ाया है। ऐसे में आज के खास अवसर पर आपको बताते हैं ए. आर रहमान (A.R.Rahman) के दिलचस्प किस्से और उनके हिंदू से मुसलमान बनने के पीछे का वाकयाएवं ए आर रहमान जीवनी (Biography of A. R. Rahman in Hindi Jivani)

अल्लाह रक्खा रहमान हिन्दी फिल्मों के एक प्रसिद्ध संगीतकार हैं। सुरों के बादशाह रहमान ने हिंदी के अलावा अन्य कई भाषाओं की फिल्मों में भी संगीत दिया है। रहमान गोल्डन ग्लोब अवॉर्ड से सम्मानित होने वाले पहले भारतीय हैं। ए. आर. रहमान ऐसे पहले भारतीय हैं जिन्हें ब्रिटिश भारतीय फिल्म स्लम डॉग मिलेनियर में उनके संगीत के लिए तीन ऑस्कर नामांकन हासिल हुआ है। इसी फिल्म के गीत ‘जय हो’ के लिए सर्वश्रेष्ठ साउंडट्रैक कंपाइलेशन और सर्वश्रेष्ठ फिल्मी गीत की श्रेणी में दो ग्रैमी पुरस्कार मिले।

ए आर रहमान की पृष्ठभूमि

ए आर रहमान अल्लाह रक्खा रहमान (A. R. Rahman) का जन्म 6 जनवरी 1967 को चेन्नई, तमिलनाडु, भारत में हुआ। जन्म के समय उनका नाम ए एस दिलीप कुमार था उनके पिता दिलीप कुमार के बड़े प्रशंसक थे तो उन्हीं के नाम पर उन्होंने अपने बेटे का नाम रखा, जिसे बाद में बदलकर वे ए आर रहमान बने।रहमान को संगीत अपने पिता से विरासत में मिली है| उनके पिता आरके शेखर मलयाली फ़िल्मों में संगीत देते थे।

रहमान ने संगीत की शिक्षा मास्टर धनराज से प्राप्त की| मात्र 11 वर्ष की उम्र में अपने बचपन के मित्र शिवमणि के साथ रहमान बैंड रुट्स के लिए की-बोर्ड (सिंथेसाइजर) बजाने का कार्य करते थे। वे इलियाराजा के बैंड के लिए काम करते थे। रहमान को ही चेन्नई के बैंड “नेमेसिस एवेन्यू” के स्थापना का श्रेय जाता है।

वे की-बोर्ड, पियानो, हारमोनियम और गिटार सभी बजाते थे। वे सिंथेसाइजर को कला और टेक्नोलॉजी का अद्भुत संगम मानते हैं। सुरों के बादशाह रहमान ने अपनी मातृभाषा तमिऴ के अलावा हिंदी और कई अन्य भाषाओं की फिल्मों में भी संगीत दिया है।

11 साल की अल्पायु में ही वे अपने पिता के करीबी दोस्त एम.के. अर्जुन के साथ मलयालम ऑर्केस्ट्रा बजाया करते थे. बाद में उन्होंने कुछ दुसरे संगीतकारों के साथ काम करना शुरू किया, जैसे की एम.एस.विस्वनाथन, ल्लैयाराजा, रमेश नायडू और राज-कोटि, इसके बाद उन्होंने जाकिर हुसैन, कुन्नाकुदी वैद्यनाथन और एल.शंकर के साथ विश्व स्तर पर अपनी कला का प्रदर्शन भी किया. उनके हुनर को देखते हुए उन्हें ट्रिनिटी कॉलेज, लन्दन के संगीत विभाग से शिष्यवृत्ति भी मिलती थी.

रहमान जब नौ साल के थे तब उनके पिता की मृत्यु हो गई थी और पैसों के लिए घरवालों को वाद्य यंत्रों को भी बेचना पड़ा। हालात इतने बिगड़ गए कि उनके परिवार को इस्लाम अपनाना पड़ा। बैंड ग्रुप में काम करते हुए ही उन्हें लंदन के ट्रिनिटी कॉलेज ऑफ म्यूजिक से स्कॉलरशिप भी मिली, जहाँ से उन्होंने पश्चिमी शास्त्रीय संगीत में डिग्री हासिल की।

रहमान की शादी (पत्नी, बच्चे)

ए आर रहमान की पत्नी का नाम सायरा बानो है। उनके तीन बच्चे हैं- खदीजा, रहीम और अमन। वे दक्षिण भारतीय अभिनेता राशिन रहमान के रिश्तेदार भी है। रहमान संगीतकार जी वी प्रकाश कुमार के चाचा हैं।

रहमान ने अब तक 100 से भी अधिक गानों में अपना संगीत दिया है जो कि कई भाषाओ में है। उनकी कुछ सर्वश्रेष्ठ फ़िल्मों में ‘रोज़ा’, ‘बॉम्बे’, ‘दिल से’, ‘लगान’, ‘ताल’, ‘वन्दे मातरम’ शामिल है। हाल की कुछ फ़िल्मों में ‘जोधा अकबर’, ‘रंग दे बसंती’, ‘दिल्ली 6’ एवं ‘स्लमडॉग मिलेनियर’ शामिल है। रहमान ने केवल भारतीय ही नहीं बल्कि विश्व के कई बड़े कलाकारों के साथ प्रशंसनीय संगीत दिया है

रहमान का करियर

1991 में रहमान ने अपना खुद का म्यूजिक रिकॉर्ड करना शुरु किया।

रहमान ने उनका फिल्मी कैरियर १९९२ में शुरू किया। उन्होंने उपने घर के पीछे स्टूडियो शुरू किया जिसका नाम था पंचाथान रिकार्ड इन । समय के साथ यह भारत में सबसे उन्नत रिकॉर्डिंग स्टूडियो बन जाएगा । 1992 में उन्हें फिल्म डायरेक्टर मणिरत्नम ने अपनी फिल्म रोजा में संगीत देने का न्यौता दिया।

फिल्म म्यूजिकल हिट रही और पहली फिल्म में ही रहमान ने फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीता। इस पुरस्कार के साथ शुरू हुआ रहमान की जीत का सिलसिला आज तक जारी है।उन्होंने उपनी शुरूवात भारतीय वृत्तचित्र विज्ञापन और भारतीय टेलीविजन चैनलों से किया ।उन्होंने तमिल फिल्म रोजा के साथ अपना फ़िल्मी कैरियर शुरू किया।

रहमान को इसी फिल्म की वजह से रजत कमल पुरस्कार से सम्मानित किया ।रंगीला, रहमान की पहली हिन्दी भाषा की फिल्म थी जिसमे उन्होंने संगीत दिया । इसके बाद उन्होंने दिल से और ताल जैसे बेहतरीन फिल्मो का संगीत दिया ।

रहमान ने फिल्म के आलावा कई अलग काम भी किये । वंदे मातरम् सबसे अधिक बिकने वाली भारतीय गैर फ़िल्मी एल्बम है ।1999 में, रहमान ने माइकल जैक्सन से साथ जर्मनी में प्रदर्शन किया । 2000’s में उन्होंने स्वदेश और रंग दे बसंती जैसे प्रसिद फिम्लो का संगीत दिया । 2003 के अंत तक, उनके एक्सो पचास मिलियन रेकॉर्ड्स बीके थे। रहमान ने चोवीस नवंबर,२००९ में उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और बराक ओबामा के लिए वाईट हाउस में प्रदर्शन किया ।

रहमान के गानों की 200 करोड़ से भी अधिक रिकॉर्डिग बिक चुकी हैं। आज वे विश्व के टॉप टेन म्यूजिक कंपोजर्स में गिने जाते हैं। उन्होंने तहजीब, बॉम्बे, दिल से, रंगीला, ताल, जींस, पुकार, फिजा, लगान, मंगल पांडे, स्वदेश, रंग दे बसंती, जोधा-अकबर, जाने तू या जाने ना, युवराज, स्लम डॉग मिलेनियर, गजनी जैसी फिल्मों में संगीत दिया है। उन्होंने देश की आजादी की 50 वीं वर्षगाँठ पर1997 में “वंदे मातरम्‌” एलबम बनाया, जो जबर्दस्त सफल रहा।

भारत बाला के निर्देशन में बनी एलबम “जन गण मन”, जिसमें भारतीय शास्त्रीय संगीत से जुड़ी कई नामी हस्तियों ने सहयोग दिया उनका एक और महत्वपूर्ण काम था। उन्होंने स्वयं कई विज्ञापनों के जिंगल लिखे और उनका संगीत तैयार किया। उन्होंने जाने-माने कोरियोग्राफर प्रभुदेवा और शोभना के साथ मिलकर तमिल सिनेमा के डांसरों का ट्रुप बनाया,

बीस मई 2011 को रहमान ने अंग्रेजी संगीतकार मिक जैगर और प्रसिद्ध हॉलीवुड कलाकारों के साथ एक नये ग्रुप की घोषणा की । ए आर रहमान को कर्नाटकी, पाश्चात्य शास्त्रीय संगीत, हिन्दुस्तानी संगीत में महारत हासिल है. इस कारण संगीत का कोई भी भाग उनसे अछूता नहीं. वे प्रयोग करने में काफी विश्वास करते हैं. नई आवाज को वे मौका जरूर देते हैं. रहमान पर सूफीवाद का गहरा असर है और यह उनके गानों में भी नजर आता है.

पढ़ाई के लिए नहीं थे पैसे

अब देश के प्रख्यात संगीतकार बन चुके ए. आर. रहमान के पास स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के लिए भी पैसे नहीं थे। 15 वर्ष की उम्र में रहमान को कम उपस्थिति के कारण स्कूल छोड़ना पड़ा था।

पहला वेतन 50 रुपये

रहमान ने गुरबत के दिनों में रिकॉर्ड बजाने का काम संभाला। इसी से उनका और घर का गुजारा चलने लगा। रिकॉर्ड बजाने के लिए रहमान को पहली बार 50 रुपये मिले, यही उनकी जिंदगी का पहला मेहनताना है। बाद में सुभाष घई की फिल्म ताल का संगीत टिप्स म्यूजिक कंपनी ने छह करोड़ रुपये में खरीदा। किसी हिंदी फिल्म के संगीत की यह अब तक की सबसे बड़ी कीमत है।

ए. आर रहमान मुस्लिम क्यों बने?

ए. आर रहमान के हिंदू से मुसलमान बनने के पीछे का वाकया

कहा जाता है कि 1989 में रहमान की छोटी बहन काफी बीमार पड़ गई थी. सभी डॉक्टरों ने कह दिया कि उसके बचने की कोई उम्मीद नहीं है. रहमान ने अपनी छोटी बहन के लिए मस्जिदों में दुआयें मांगी जल्द हीं उनकी दुआ रंग लाई और उनकी बहन चमत्कारिक रूप से स्वस्थ हो गई. इस चमत्कार को देख रहमान ने इस्लाम कबूल कर लिया.

वही दूसरी तरफ रहमान की बायोग्राफी ‘द स्पिरिट ऑफ म्यूजिक’ में यह बताया गया है कि कैसे एक ज्योतिषी के कहने पर उन्होंने नाम बदला. रहमान ने एक इंटरव्यू में बताया कि यह भी सच है कि उन्हें अपनी नाम अच्छा नहीं लगता था. एक दिन जब मेरी मां मेरी बहन की कुंडली दिखाने एक ज्योतिषी के पास गई तो उस हिंदू ज्योतिषी ने ही मुझे नाम बदलने की सलाह दी बस फिर क्या था मेरा नाम दिलीप कुमार से ए आर रहमान पड़ गया. ए आर इसलिए क्योंकि मेरी मां चाहती थी कि उसमें अल्ला रख्खा भी जोड़ा जाए

ए. आर रहमान (A.R.Rahman) के दिलचस्प किस्से

  • 2018 में संगीतकार एआर रहमान की बायोग्राफी लॉन्च की गई थी। यह रहमान की ऑफिशियल बायोग्राफी है, जिसे कृष्णा त्रिलोक ने लिखा है। वे रहमान को फिल्म म्यूजिक में मौका दिलाने वाले त्रिलोक नायर के बेटे हैं। किताब में रहमान के जीवन के कई अनछुए पहलू सामने आए हैं, जिनकी चर्चा कम ही होती है।
  • रहमान ने अपना पहला रिकॉर्डिंग स्टूडियो ‘पंचतान रिकॉर्ड इन’ चेन्नई में अपने घर के आंगन में बनाया था। इसी स्टूडियो ने उनकी जिंदगी बदल दी।
  • रहमान की अरेंज मैरिज हुई थी। अपनी पहली मुलाकात में उन्होंने पत्नी सायरा बानो से कहा था, ‘अगर हम डिनर कर रहे होंगे और मुझे कोई धुन सूझेगी, तो हमें डिनर छोड़ना होगा।’ इस बारे में उनकी पत्नी कहती हैं कि रहमान ने उन्हें शादी से पहले ही ‘ऑटो-ट्यून’ कर दिया था।
  • कनाडा के राज्य ओंटारियो मार्खम में एक सड़क का नाम उनके नाम पर रखा गया है।
  • रहमान को पहली बार 50 रुपये मिले, यही उनकी जिंदगी का पहला मेहनताना है
  • ए. आर. रहमान के पास स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के लिए भी पैसे नहीं थे।

एक बेहतरीन संगीतकार होने के साथ रहमान एक आदर्श पुरुष भी हैं जो इतनी सफलता के बाद भी हमेशा नम्र रहते हैं. उनकी निजी जिंदगी कभी भी सवालों या विवादों के घेरे में नहीं आई ऐसा कोई नहीं है जो रहमान के गानों को चोरी किया या गलत बताए. भारत का यह सुर सम्राट आज विदेशों में भी अपनी आवाज और संगीत को पहचान दिला रहा है.

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Q : ए आर रहमान का पुराना नाम क्या है?

Ans : ए आर रहमान का पुराना नाम ए एस दिलीप कुमार है

Q : ए आर रहमान के कितने बच्चे हैं?

Ans : ए आर रहमान के तीन बच्चे हैं- खदीजा, रहीम और अमन है।

Q : ए आर रहमान के पिता का नाम क्या है?

Ans : ए आर रहमान के पिता का नाम आर.के. शेखर है

Q : ए आर रहमान मुस्लिम क्यों बने?

Ans : ए आर रहमान एक ज्योतिषी के कहने पर उन्होंने नाम बदला.

Q : आर रहमान ने कितने साल की उम्र पहला गाना गया

Ans :

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