तोरई के फायदे नुकशान और उपयोग

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तोरई के फायदे नुकशान और उपयोग
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तोरई के फायदे नुकशान और उपयोग

तोरई, तोरी या तुराई (वैज्ञानिक नाम Luffa acutangula) एक लता है जिसके फल सब्जी बनाने के काम आते हैं, भारत के इसकी तीन प्रजातियां होती हैं। जिनका प्रयोग चिकित्सा के लिए किया जाता है। इसे बिहार में नेनुआ भी कहा जाता है और बिहार में इसकी सब्जी (turai ki sabzi) बहुत ही पसंद से खाई जाती है।

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इसकी एक और प्रजाति होती है जिसे हिंदी में झींगा और अंग्रेजी में रिज गॉर्ड (Ridge Gourd) कहा जाता है। यह वर्षा ऋतु में पैदा होने वाली बेल वाली फसल है। जो जायद तथा खरीफ ऋतु में सफलतापूर्वक देश के कई स्थानों में लगायी जाती है। आज की इस पोस्ट में हम आपको तोरई के फायदे नुकशान और उपयोग (Advantages of Torai Loss and Use) बतायेगे 

घिया तोरई – यह मुलायम गाढ़े हरे रंग की तोरई (वैज्ञानिक नाम : Luffa Aegyptiaca ) है जो पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में उगाई जाती है। पकने के बाद इसका फाइबर कठोर हो जाता है, अतः यह फिर खाने योग्य नही रहती लेकिन इसके कठोर फाइबर के कारण इसका बर्तनों आदि की सफाई में उपयोग में लाया जाता है।

तोरई के फायदे नुकशान और उपयोग – Advantages of Torai Loss and Use

अनेक बार पालतू पशुओं की त्वचा की सफाई में भी पकी तोरई का इस्तेमाल होता है। कच्ची हरी तोरई में विटामिन्स की भरपूर मात्रा होती है, इसके अधिक सुपाच्य होने के कारण हर आयु के मनुष्य व रोगी इसे पौष्टिक आहार के रूप में प्रयोग में लाते हैं। भारतवर्ष में घिया तोरई की प्राजाति बहुत अधिक प्रचलित है

आयुर्वेद में कहा गया है कि तोरई (Ridge gourd ) पचने में आसान होती है, पेट के लिए थोड़ी गरम होती है। पेट को साफ करती है, भूख बढ़ाती है और हृदय के लिए अच्छी (ridge gourd benefits)होती है। तोरई (zucchini) कुकुरबिटेसी (Cucurbitaceae) कुल का है। इसका वानस्पतिक नाम लूफा ऐकटेंगुला (Syn-Luffa amara Roxb., Luffa acutangula (Linn.) Roxb.) है

तोरई को अन्य कई नामों से भी जाना जाता है, जैसे की रिजड् गुऍर्ड,पीतपुष्पा, जालिनी, कृतवेधना, झिगानी, झींग्रा तोरी, काली तोरी, तोरई, तरोई, तुरई ,जान्ही
तुरिया, घिसोडा, तुरीन,पिरकान्कई, पिकून्कई, पेयप्पीचुक्कू आदि

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तोरई के फायदे नुकशान और उपयोग – Advantages of Torai Loss and Use

तोरई के फायदे – Torai Benefits and Uses

टांसिल एवं सूजन में तोरई के फायदेमंद –  टांसिल एवं सूजन में तोरई (ridge gourd) के 10-20 मिली मात्रा में फल तथा पत्तों का काढ़ा बना कर पीने से आराम मिलता है। तथा तोरई के 2-4 ग्राम बीजो का चूर्ण बनाकर उसे शहद मिलाकर खाने से भी खाँसी एवं दम फूलना ठीक होता है।

तोरई केउपयोग से बवासीर ठीक होता है – कड़वी तोरई (turai) या तोरई के पत्तों (zucchini in hindi) को पीसकर इस रस में हल्दी पाउडर मिलाकर बवासीर के मस्सों पर लगाने से दर्द से आराम मिलता है।तोरई के पत्तों का रस लगाने से शीतपित्त, दाद और कुष्ठ आदि अन्य त्वचा सम्बन्धी रोगों में भी आराम (ridge gourd benefits) होता है।

कैंसर के लक्षणों से लड़ने में फायदेमंद तोरई –  एक रिसर्च के अनुसार तोरई में पाए जाने वाले फ्लेवनॉइड्स और टैनिन कैंसर रोग के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है। तोरई में एंटी कैंसर के गुण पाए जाते है।

तोरई खाने से दिल स्वस्थ रहता है – तोरई में पोटेशियम की अच्छी मात्रा पायी जाती है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद होती है। जिससे अनेक प्रकार के दिल संबंधी बीमारी होने का खतरा कम होता है।

इसके अलावा, कई शोध में यह सामने आया है कि, पेक्टिन जो कि एक सॉल्यूबल फाइबर है, वह बैड एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को घटाने में मदद करता है। यह सॉल्यूबल फाइबर तोरई में मौजूद होता है, जिससे दिल का स्वास्थ्य अच्छा रहता है।

तोरई से पथरी में लाभ – तोरई के डंठल को दूध या पानी में घिसकर पीने से पथरी में लाभ होता है। एलर्जी से चकत्ते हो जाते या कोई कीड़ा काट लें तो तोरई के फूल या तना को मक्खन में घिसकर लेप लगाएं आराम होगा।

तुरई के नुकसान – Side Effects of Ridge Gourd Turain

सब्जी के रूप में खाए जाने वाली तुरई को लेकर अधिकतर शोध चूहों पर हुए हैं, जिसकी वजह से इसके नुकसान स्पष्ट नहीं हैं। वहीं, कुछ संभावित तुरई के नुकसान के बारे में हम आज की पोस्ट के माध्यम बता रहे हैं।

सामान्यतय तुरई सुरक्षित ही है, लेकिन कुछ मामलों में इसे गर्भावस्था में सुरक्षित नहीं माना जाता है। ऐसे में बेहतर है गर्भावस्था में इसके सेवन से पहले डॉक्टरी सलाह लें।
इसके सेवन से लोगों को एलर्जी भी हो सकती है।

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