Ahoi Ashtami 2020 : Ahoi Ashtami Vrat कब है, and Vrat muhurt

आस्था
Ahoi Ashtami 2020
Ahoi Ashtami 2020

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अहोई का अर्थ है

अनहोनी को होनी कर देना, अहोई माता को समर्पित भारतीय पर्व अहोई अष्टमी के नाम से जाता है यह व्रत मुख्य रूप से उत्तर भारत में अधिक मनाया जाता है यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आता है और यह पर्व हमेसा करवा चौथ के चार दिन बाद तथा दीपावली से आठ दिन पहले आता है

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Ahoi Ashtami 2020 : अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami Vrat) कब है ? संतान की दीर्घायु कामना के लिए कैसे रखें अहोई अष्टमी व्रत (Ahoi Ashtami Vrat)

अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami Vrat) व्रत की खास बात

करवा चौथ व्रत के चार दिन बाद आता है अहोई अष्टमी व्रत, यह करवा चौथ व्रत के सामान ही होता है सिर्फ करवा चौथ व्रत में चन्द्रमा को अर्घ्य देने से व्रत सम्पूर्ण होता है। और अहोई अष्टमी व्रत में तारो को अर्घ्य देने से व्रत सम्पूर्ण होता है।

अहोई अष्टमी व्रत में भी करवा चौथा की भाति ही निर्जला रहना होता है। इस दिन चांदी के दाने या चांदी की माला से पूजा की जाती है। इस माला को अहोई माला भी कहते है। तथा हर साल अहोई अष्टमी व्रत पर दो दाने चांदी के बढ़ाये जाते है।

और फिर यह माला पूजा में पहनी जाती है तथा दिवाली के बाद किसी भी शुभ दिन माला को गले से उतार कर गुड़ का भोग लगा कर माथे से लगाते हुए पानी के छीटे मार कर सभाल दे । 

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Ahoi Ashtami 2020 : अहोई अष्टमी का शुभ मुहूर्त (Ahoi Ashtami Vrat muhurt )


अष्टमी तिथि प्रारंभ: 8 नवंबर को सुबह 7 बजकर 30 मिनट
अष्टमी तिथि समाप्त: 9 नवंबर को सुबह 6 बजकर 50 मिनट पर
पूजा करने का शुभ चौघड़िया मुहूर्त: सायं 5 बजकर 29 मिनट से 7 बजकर 9 मिनट तक
अमृत चौघड़िया : सायं 7 बजकर 9 मिनट से 8बजकर 48 मिनट तक
चर चौघड़िया: रात्रि 8 बजकर 48 मिनट से 10 बजकर 27 मिनट तक।

कैसे रखें इस दिन उपवास ? (Ahoi ashtami vrat kaise kare / ahoi ashtami vrat karne ki vidhi)

प्रातः स्नान करके अहोई की पूजा का संकल्प लें. अहोई माता (Ahoi Mata) की आकृति, गेरू या लाल रंग से दीवार पर बनाएं. सूर्यास्त के बाद तारे निकलने पर पूजन आरम्भ करें. पूजा की सामग्री में एक चांदी या सफेद धातु की अहोई, चांदी की मोती की माला, जल से भरा हुआ कलश, दूध-भात, हलवा और पुष्प, दीप आदि रखें.

पहले अहोई माता (Ahoi Mata) की रोली, पुष्प, दीप से पूजा करें और उन्हें दूध भात अर्पित करें. फिर हाथ में गेंहू के सात दाने और कुछ दक्षिणा  लेकर अहोई की कथा सुनें. कथा के बाद माला गले में पहन लें और गेंहू के दाने तथा बयाना सासु मां को देकर उनका आशीर्वाद लें. अब तारों को अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करें.


अहोई अष्टमी के व्रत का महत्व (Ahoi ashtami 2020 vrat ka mahtv )

अहोई अष्टमी के व्रत (पर्व ) को माताए अपनी सन्तानो के कल्याण के लिए रखती हैं पहले से इस व्रत को केवल पुत्रों (संतान) प्राप्ति के लिए रखा जाता था लेकिन अब यह व्रत सभी संतानों के कल्याण के लिए किया जाता है

माताएं, बहुत ही उत्साह के साथ अहोई (अहोई अष्टमी) माता का व्रत करते हुए अपनी संतानों को दीर्घायु एवं स्वस्थ्य रखने की प्रार्थना माता से करती हैं यह व्रत तारों या चन्द्रमा को देखने (दर्शन) तथा पूजन करके समाप्त किया जाता है।

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यह व्रत संतानहीन दम्पति के लिए महत्वपूर्ण है या फिर जो महिलाओं को गर्भधारण नहीं होता हैं अथवा जिन महिलाओं को गर्भपात की समस्या हो उन्हें संतान प्राप्ति के लिए अहोई माता व्रत करना चाहिए

अहोई अष्टमी व्रत कथा और पूजा विधि (Ahoi ashtami 2020 vrat katha or puja vidhi)

बहुत समय पहले की बात है किसी गांव में एक साहुकार रहता था जिसके सात बेटे सात बहुएं थी और एक बेटी भी थी जो दीपावली पर्व के अवसर पर मायके में आई थी दीपावली के उत्तसव् के लिए घर को लीपने की तैयारी चल रही थी

इसी के लिए साहूकार की सातो बहुये जंगल से मिटटी लेन को जाती है तो ननद भी साथ चलने की बात बोलती है और भाबियों के साथ जंगल की ओर चल पड़ती है साहुकार की बेटी जहां से मिट्टी खोद रही थी

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उसी स्थान पर स्याहु (साही) अपने बच्चो के साथ रहती थी मिटटी खोदते समय ग़लती से साहूकार की बेटी की खुरपी से स्याहू का एक बच्चा मर जाता है स्याहू इस पर क्रोधित होकर बोली मैं तुम्हारी कोख बांधूंगी स्याहू की यह बात सुनकर साहूकार की बेटी अपनी सातों भाभीयों से एक एक करके विनती करती हैं

कि वह उसके बदले अपनी कोख को बंधवा लें सबसे छोटी भाभी ननद के बदले अपनी कोख बंधवाने के लिए तैयार हो जाती है इसके बाद छोटी भाभी के जो भी बच्चे होते है वह सभी सात दिन बाद मर जाते हैं इस प्रकार सात पुत्रों की मृत्यु होने के बाद उसने पंडित जी को बुलाया

और इसका कारण पूछा तब पंडित जी ने सुरही गाय की सेवा करने की सलाह दी सुरही गाय बहु की सेवा से प्रसन्न होती है और उसे स्याहु के पास ले जाती है रास्ते में थक जाने के कारण दोनों आराम करने लगते हैं

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की अचानक साहुकार की छोटी बहू की नज़र दूसरी ओर जाती हैं वह देखती है कि एक सांप गरूड़ पंखनी के बच्चे को डंसने जा रहा है और वह सांप को मार देती है इतने में गरूड़ पंखनी वहां आ जाती है

और खून बिखरा हुआ देखकर उसे लगता है कि छोटी बहु ने उसके बच्चे के मार दिया है इस पर वह छोटी बहू को चोंच मारना शुरू कर देती है तब छोटी बहू बताती है

कि उसने तो उसके बच्चे की जान बचाई है गरूड़ पंखनी इस बात पर खुश होती है और सुरही सहित उन्हें स्याहु के पास पहुंचा देती है। स्याहु छोटी बहू की सेवा से प्रसन्न होकर उसे सात पुत्र और सात बहुएं होने का अशीर्वाद देती है। स्याहु के आशीर्वाद से छोटी बहु का घर पुत्र और पुत्र वधुओं से हरा भरा हो जाता है


अहोई अष्टमी के व्रत में क्या खाना चाहिए क्या नहीं ? (Ahoi ashtami 2020 vrat me kesha bhojan kare)

अहोई अष्टमी व्रत में तामसिक भोजन (लहसुन प्याज, नॉनवेज/शाकाहारी आदि ) न करें। अहोई अष्टमी में जल चढ़ाने के बाद भी व्रत की तिथि ही लगी मानी जाती है। इसलिए व्रत के दिन नॉनवेज/शाकाहारी ( तामसिक) भोजन शामिल न करें।

ऐसा करने से आपके व्रत का फल नष्ट हो जाता है। और ना ही इस दिन जीव हत्या न करें। इस दिन आप शुद्ध शाकाहारी (वेज) भोजन करे अहोई अष्टमी व्रत के नियम के अनुसार इस व्रत में सोना नहीं चाहिए। जितना हो सके बड़े बुजुर्गो और जरुरतमंदो की सेवा करे तथा प्रभु सेवा करे।

राधा कुंड तीर्थ कहा है और इसका अहोई अष्टमी व्रत में क्या महत्व है ? (Rhadha kund tirtha kaha he tatha iska Ahoi ashtami  vrat me mahtv)

मथुरा से लगभग 26 किलोमीटर दूर गोवर्धन परिक्रमा में राधा कुंड तीर्थस्थान है। यह परिक्रमा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी को अहोई अष्टमी का व्रत किया जाता है। इस दिन माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत करती हैं।

इससे एख दिन पहले सप्तमी तिथि को राधाकुंड में स्नान करने की भी परंपरा है। ऐसा कहा जाता है इस दिन राधाकुंड में स्नान करने से राधा जी और भगवान कृष्ण प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। यहां सप्तमी की अर्ध रात्रि से स्नान किया जाता है।

अहोई अष्टमी व्रत में राधाकुंड श्यामकुंड मेला (महा स्नान) का महत्व (Rhadha kund tirtha me maha snaan ka mahtv)

कार्तिक मास की अष्टमी को निर्जला व्रत रखते हैं और सप्तमी की रात्रि को पुष्य नक्षत्र में रात्रि 12 बजे से राधा कुंड में स्नान करते हैं। इसके बाद राधा की भक्ति कर आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। पुराणों के अनुसार महारास के बाद श्रीकृष्ण ने राधाजी की इच्‍छानुसार उन्हें वरदान दिया था

कि जो भी विवाहित जोड़ा राधा कुंड में इस विशेष दिन स्नान करेगा उसे संतान की प्राप्ति होगी। ऐसा माना जाता है कि आज भी कार्तिक मास के पुष्य नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण रात्रि बारह बजे तक राधाजी के साथ राधाकुंड में अष्ट सखियों संग महारास करते हैं। इसलिए अहोई अष्टमी के दिन यहां अष्टमी मेला लगाया जाता है।

अहोई माता की पूजा में चांदी की माला का महत्व (Ahoi ashtami 2020 vrat me chaandi ki maala ka mahtv)


अहोई माता की पूजा के लिए कई जगहों पर चांदी के दानें लाएं जाते हैं और हर अहोई अष्टमी पर दो दानें माला में पिरोए (डाले) जाते हैं. इस तरह हर साल माला में दो चांदी के दाने पिरोए जाते हैं

और उस माला को माताएं पूजा के बाद धारण करती हैं. इसके बाद किसी भी अच्छे दिन इस माला की पूजा करके उतारा जाता है. इसके बाद अगली अहोई पर फिर चांदी के दो मनके माला में पिरोए जाते हैं. इस माला को भी पूजा में शामिल किया जाता है


2020 में राधाकुंड श्यामकुंड मेला (महा स्नान) नहीं होगा (2020 Rhadha kund tirtha me maha snaan nahi hoga)


इस बार अहोई अष्टमी मेले पर राधाकुंड श्यामकुंड में अर्ध रात्रि को होने वाले महा स्नान से वंचित रह जाएंगे। 8 नवंबर को लगने वाला मेला अहोई अष्टमी कोरोना के चलते प्रशासन द्वारा निरस्त कर दिया गया है।

ahoi ashtami 2020 : के नियम (ahoi ashtami 2020 : vrat ke niyam)

  • अहोई अष्टमी के व्रत में तारों को जल चढ़ाने (अर्घ्य देने) के लिए नए करवा चौथ के करवे का प्रयोग करने का विधान बताया गया है।सिर्फ जिन स्त्रियों ने करवा चौथ व्रत नही किया था , केवल वही नए करवे का उपयोग करें।
  • अहोई अष्टमी के दिन घर में पोछा न लगाएं।
  • अहोई अष्टमी के व्रत में व्रती को चाकू-कैंची आदि से कुछ नहीं काटना चाहिए। और ना ही सुई-धागे का कोई काम करें
  • अहोई अष्टमी के दिन अधिक से अधिक समय पूजा-पाठ में बिताये।इस दिन को सोकर (सोना नहीं चाहिए) समय व्यतीत नहीं करे ।
  • अहोई अष्टमी के दिन व्रती को बड़े – बुजुर्गों का अपमान नहीं करना चाहिए नहीं तो उसके व्रत के सारे पुण्य कर्म नष्ट हो जाते है। (हमें कभी भी किसी का भी अपना नहीं करना चाहिए)
  • अहोई अष्टमी के दिन व्रती को तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए इस दिन शुद्ध शाकाहारी भोजन करे।
  • अहोई अष्टमी के दिन व्रती के द्वारा बच्चों को नही मारना चाहिए चाहे बच्चे अपने हो या किसी अन्य मित्र के बच्चों को न मारे इससे अहोई माता नाराज हो जाती है और व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता है।
  • अहोई अष्टमी व्रत संतान के लिए किया जाता है। अतः जैसा व्यवहार आप अपने बच्चे के साथ करते है वैसा ही अन्य सभी पारिवारिक सदस्यों के साथ भी करे

अहोई माँ की आरती

जय अहोई माता जय अहोई माता ।
तुमको निसदिन ध्यावत हरी विष्णु धाता ।।
ब्रम्हाणी रुद्राणी कमला तू ही है जग दाता ।
जो कोई तुमको ध्यावत नित मंगल पाता ।।
तू ही है पाताल बसंती तू ही है सुख दाता ।
कर्म प्रभाव प्रकाशक जगनिधि से त्राता ।।
जिस घर थारो वास वही में गुण आता ।
कर न सके सोई कर ले मन नहीं घबराता ।।
तुम बिन सुख न होवे पुत्र न कोई पता ।
खान पान का वैभव तुम बिन नहीं आता ।।
शुभ गुण सुन्दर युक्ता क्षीर निधि जाता ।
रतन चतुर्दश तोंकू कोई नहीं पाता ।।
श्री अहोई माँ की आरती जो कोई गाता ।
उर उमंग अति उपजे पाप उतर जाता ।।

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