Brisk walking | Morning Brisk Walk Benefits in Hindi

हेल्थ
Brisk walking | Morning Brisk Walk Benefits in Hindi
Brisk walking | Morning Brisk Walk Benefits in Hindi

अगर वर्कआउट या अन्‍य फि‍जिकल एक्टिविटी के लिए आप समय नहीं निकाल पाते तो बेहतर है कि दस मिनट तेज चाल से चलें। यानि दस मिनट की ब्रिस्‍क वॉक आपको वर्कआउट की ही तरह फायदे देगी।ब्रिस्‍क वॉक कई तरह के स्‍वास्‍थ्‍य जोखिमों से बचाने में मदद करती है।

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ज्‍यादातर लोगों का लाइफस्‍टाइल ऐसा हो गया है कि वे बिल्‍कुल भी शारीरिक श्रम नहीं करते। बौद्धि‍क काम में बढ़ोतरी हुई है पर शारीरिक श्रम घटा है। जिससे मांसपेशियां कमजोर हुई हैं। मोटापा भी इसी वजह से लोगों में बढ़ता जा रहा है। अगर आप दिन भर एक ही सीट पर बैठे रहते हैं या आपकी फिजिकल एक्टिविटी न के बराबर हैं तो आपको कम से कम दस मिनट तेज चाल चलने का समय निकालना चाहिए। इससे आप सेहत को होने वाले कई खतरों से बच सकते हैं।

आसान शब्दों में कहे तो दौड़ने और पैदल चलने के बीच की मुद्रा को ब्रिस्क वॉक कहा जाता है। इसमें व्यक्ति को न तो धीरे चलना होता है और न ही दौड़ना होता है।तो आज जानेगे की ब्रिस्क वॉकिंग क्या है या ब्रिस्क वॉक किसे कहते हैं और इसके क्या-क्या फायदे हैं | Brisk walking | Morning Brisk Walk Benefits in Hindi

ब्रिस्क वॉक कैसे करते हैं

वजन कम करने के लिए अक्सर लोग वॉक करते हैं।लेकिन रोजाना घंटों वॉक के बाद भी कोई असर नहीं होता। दरअसल, पैदल चलने भर से होना भी कुछ नहीं। इसके लिए तो ब्रिस्क वॉकिंग करनी होगी। ब्रिस्क वॉकिंग यानी ऐसी चाल जो तेज चलने से ज्यादा हो और दौड़ने से कम।

ब्रिस्‍क वॉकिंग यानी तेज चलना और जब आप ऐसा करते हैं तो शरीर से पसीना निकलने लगता है और आप ज्यादा से ज्यादा कैलोरी बर्न कर सकते हैं।

ब्रिस्क वॉक से बढ़ती उम्र के चलते होने वाली मेमोरी लॉस को भी रोका जा सकता है। इसके लिए हफ्ते में 5 दिन ब्रिस्क वॉक करना होगी। इससे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और दिमाग पर बढ़ती उम्र का असर रोका जा सकता है।

ब्रिस्क वॉक है क्या

ब्रिस्क वॉक एक सरल और सहज एक्सरसाइज है, जिसे किसी भी उम्र के व्यक्ति आसानी से कर सकते हैं। हालांकि, ब्रिस्क वॉक अलग इसलिए है, क्योंकि इसमें तेजी से चलना होता है। आसान शब्दों में कहे तो दौड़ने और पैदल चलने के बीच की मुद्रा को ब्रिस्क वॉक कहा जाता है। इसमें व्यक्ति को न तो धीरे चलना होता है और न ही दौड़ना होता है।

ब्रिस्क वॉक कैसे करें

इसके लिए आप स्पोर्ट्स शूज का इस्तेमाल करें। इससे आपको आराम मिल सकता है। तेज चलने के क्रम में अच्छे जूते पहनना बेहद जरूरी है। आप ब्रिस्क वॉक पार्क या मैदान में कर सकते हैं। इसमें तेजी से चलना होता है, जिससे शरीर के सभी अंगों में खिंचाव पैदा होता है।

ब्रिस्‍क वॉकिंग क्‍यों जरूरी है?

ब्रिस्‍क वॉकिंग यानी तेज चलना, यह बाकी प्रकार की एक्‍सरसाइज के विपरीत है, जिनमें बहुत अधिक पैराफरनेलिया की आवश्यकता होती है। ब्रिस्‍क वॉकिंग यानी तेज चलना और जब आप ऐसा करते हैं तो शरीर से पसीना निकलने लगता है और आप ज्यादा से ज्यादा कैलोरी बर्न कर सकते हैं।

Brisk walking | Morning Brisk Walk Benefits in Hindi
Brisk walking | Morning Brisk Walk Benefits in Hindi

Brisk Walk Benefits in Hindi

मेमोरी के लिए ऐसे काम करती है ब्रिस्क वॉक

ब्रिस्क वॉक से मेमोरी पर बुरा असर पड़ने से रोका जा सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है, वॉक करने से इंसान के दिमाग में ब्लड का सर्कुलेशन बढ़ता है। इस कारण ब्रेन की कोशिकाओं में ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचते हैं। नतीजा, दिमाग स्वस्थ रहता है

स्ट्रेस को दूर करता है

ब्रिस्क वॉक करने से स्ट्रेस दूर होता है। जब आप ब्रिस्क वॉक करते हैं तो कुछ ही सेकंड के भीतर दिमाग एक हार्मोन रिलीज करने लगता है, जिससे नेचुरल तरीके से मूड फ्रेश हो जाता है।

स्मोकिंग की लत से छुटकारा

दौड़ने से आत्मविश्‍वास बढ़ता है। सोच पॉजिटिव होती है और स्मोकिंग जैसी बुरी लत से मन हटने लगता है।

डायबिटीज का रिस्क कम होता है

हफ्ते में 4-5 दिन तक 30 मिनट की ब्रिस्क वॉक डायबिटीज का रिस्क 12 फीसदी तक कम कर देती है।

वजन पर कंट्रोल

ब्रिस्क वॉक एक बेस्ट कैलोरी बर्नर है। हफ्ते में कम से कम 5 दिनों तक 30 मिनट की ब्रिस्क वॉक से 340 कैलोरी बर्न होती है।

दिल का ख्याल

एक रिसर्च के मुताबिक जो लोग हफ्ते में 6 किलोमीटर चलते हैं, उन्हें दिल की बीमारी का खतरा 45 फीसदी तक कम होता है।

हड्डियां मजबूत होती हैं

ब्रिस्क वॉक से हड्डियों पर दबाव पड़ता है, जिसकी वजह से जरूरी मिनरल्स हड्डियों तक पहुंचते हैं और हड्डियां मजबूत बनती हैं।

उम्र बढ़ती है

रिसर्च के मुताबिक हफ्ते में एक घंटे की ब्रिस्क वॉक जीवनकाल का औसतन तीन साल बढ़ा देती है।

कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण

ब्रिस्क वॉक करने से गुड कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ता है।

ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण

ब्रिस्क वॉक करते वक्त धमनियां फैलती व संकुचित होती हैं। इससे धमनियां स्वस्थ रहती हैं और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है।

2014 के एक अध्ययन में निष्कर्ष निकाला गया कि छह महीने तक हफ्ते में दो बार तेज चलने से उन वृद्ध महिलाओं में हिप्पोकैम्पस की मात्रा में वृद्धि पाई गई, जिनमें हल्के संज्ञानात्मक हानि के लक्षण नजर आ रहे थे. हालांकि, शोधकर्ताओं ने इन निष्कर्षों का समर्थन करने के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता पर जोर दिया है.

वर्ष 2017 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, तेज चलना लोगों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. साथ ही यह लोगों की शारीरिक व मानसिक गतिविधि के स्तर को बढ़ाने में भी मदद करता है. रिपोर्ट में लेखकों ने नतीजों के आधार पर दावा किया था कि हर दिन 10 मिनट तेज तथा कम से कम 3 मील प्रति घंटे की गति से चलने पर अधिक स्वास्थ्य लाभ देखे जा सकते हैं.

वहीं, 2018 के एक अध्ययन में 50,000 से अधिक अंग्रेजी और स्कॉटिश वॉकरों के सर्वेक्षण के आंकड़ों को एकत्र किया गया और लोगों के स्वास्थ्य पर उनके चलने की गति के प्रभावों की जांच की गई. जिसमें शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि धीमी गति से चलने की तुलना में औसत या तेज गति से चलने वालों में सभी कारणों से या हृदय रोग से मृत्यु के जोखिम कम होने की संभावना हो सकती है.ब्रिस्क वॉकिंग से ब्रेन हेल्थ को भी फायदा हो सकता है.

रोजाना 25 मिनट पैदल चलने के हैं अनगिनत फायदे | health benefits of daily  walking

ब्रिस्क वॉक के कुछ अन्य फायदे इस प्रकार हैं

1 – ब्रिस्क वॉक करने पर शरीर में ब्लड सर्कुलेशन तेजी से बढ़ता है, जिसके कारण मस्तिष्क की कोशिकाओं में ऑक्सीजन और अन्य जरूरी पोषक तत्व बेहतर तरीके से पहुंचते हैं.नाइजीरियन जर्नल (Nigerian Journal) में छपे एक शोध में दावा किया गया है कि रोजाना वॉकिंग करने से मेटाबॉलिज़्म सुचारू ढंग से काम करता है. साथ ही मेटाबॉलिक सिंड्रोम का खतरा कम हो जाता है.

2 – अगर आप सप्ताह में पांच दिन ब्रिस्क वॉक करें तो आपका वजन तो तेजी से कम होगा ही, इसके साथ-साथ आप कई बीमारियों से कोसों दूर रह सकते हैं. अगर आप रोजाना करीब 30 मिनट तक ब्रिस्क वॉकिंग करते हैं तो आपका मेटाबॉलिज़्म तेजी से काम करता है.

3 – जिससे आप करीब 150 कैलोरी बर्न कर सकते हैं.2017 की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिन में 10 मिनट तेज चलने से शारीरिक रूप से निष्क्रिय और मोटापे का शिकार लोगों को मध्यम वजन तक पहुंचने में मदद मिल सकती है. शोध में हालांकि यह भी कहा गया है कि केवल तेज चलने से वजन घटाने में मदद नहीं मिलेगी.

4 – यदि कोई व्यक्ति अपना वजन कम करना चाहता है, तो उसे अपने दैनिक आहार विकल्पों और कैलोरी सेवन पर भी विचार करने की आवश्यकता है.अगर आप सप्ताह में पांच बार ब्रिस्क वॉकिंग करते हैं तो यह डायबिटीज के खतरे को करीब 12 फीसदी तक कम कर देता है.एक शोध के अनुसार सप्ताह में करीब 15-16 किलोमीटर तक ब्रिस्क वॉकिंग करने वालों में दिल संबंधी बीमारी होने का खतरा 35 फीसदी तक कम हो जाता है

5 – ब्रिस्क वॉक करने से आपकी धमनियां बेहतर तरीके से संकुचित और फैलती हैं, जिससे आपका स्वास्थ्य अच्छा रहता है और रक्तचाप नियंत्रण में रहता है.जब आप ब्रिस्क वॉक करते हैं तो आपकी हड्डियों में प्रेशर पड़ता है, जिसके कारण आपकी हड्डियों को जरूरी मिनरल्स मिल जाते हैं और हड्डियां मजबूत हो जाती हैं.

6 – तेज चलने और अन्य गतिविधियों से बर्न होने वाली कैलोरी का डेटातेज चलने से बर्न की गई कैलोरी व्यक्ति के वजन और अन्य कारकों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है. उसी तरह अलग-अलग गतिविधियों में अलग-अलग मात्रा में कैलोरी बर्न हो सकती है.

7 – मेडिकल न्यूज टुडे में प्रकाशित एक सूची के अनुसार, अलग-अलग गतिविधियों में प्रति घंटे बर्न होने वाली औसत कैलोरी की मात्रा इस प्रकार है:

3.5 मील प्रति घंटे चलना – 280 (कैलोरी)4.5 मील प्रति घंटे चलना – 460 (कैलोरी)दौड़ना या जॉगिंग करना – 590 (कैलोरी)एरोबिक्स – 480 (कैलोरी)भारोत्तोलन (हल्का कसरत) – 220 (कैलोरी)साइकिल चलाना (10 मील प्रति घंटे से अधिक)- 590 (कैलोरी)तैरना (धीमी फ्रीस्टाइल गोद) – 510 (कैलोरी)

ब्रिस्क वॉक क्यों जरूरी है

ब्रिस्क वॉक जरूरी है क्योंकि मेमोरी घटने का इलाज नहीं शोधकर्ताओं का कहना है, यह इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि डिमेंशिया के कारण होने वाले मेमोरी लॉस का अब तक कोई इलाज नहीं ढूंढा जा सका है। रोजाना की ब्रिस्क वॉक मेमोरी को घटने से रोकने के साथ उसे और बेहतर बनाने का काम करती है। अमेरिका में 65 साल या इससे अधिक उम्र के 20 से 25 फीसदी लोग घटती मेमोरी से जूझते हैं।

आखिर क्यों है घटती मेमोरी

टेक्सास यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का कहना है, जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, हमारा मस्तिष्क सिकुड़ता है। लेकिन, हम लोग अब तक यह पता नहीं लगा पाए हैं कि ऐसा होता क्यों है। इसकी वजह न्यूरॉन के इलेक्ट्रिक सिग्नल भेजने की घटती क्षमता हो सकती है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, युवा एरोबिक एक्सरसाइज करते हैं, इससे मस्तिष्क में ऑक्सीजन और ब्लड बेहतर सर्कुलेट होता है। वहीं, बुजुर्गों में एक्टिविटी उम्र बढ़ने के साथ घटती जाती है।

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