Buddha Purnima: बुद्ध पूर्णिमा 2021 कब है

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बुद्ध  पूर्णिमा (Buddha Purnima)
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बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima)

बुद्ध पूर्णिमा कब मनाई जाती है ?

बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima) : भगवान बुद्ध का नाम तो आपने सुना ही होगा. जी हां भगवान गौतम बुद्ध की ही बात कर रहे हैं. आज भगवान बुद्ध का जन्म दिवस हैं. जिन्होंने बौद्ध धर्म की शुरुआत की थी. ये बौद्ध धर्म के प्रवर्तक थे. इनका नाम सिद्धार्थ था, और इन्होने गौतम गोत्र में जन्म लिया था इसलिए इन्हें गौतम नाम से भी जाना जाता था.

भगवान बुद्ध का जन्म सिद्धार्थ नाम के एक राजकुमार के रूप में पूर्णिमा तिथि पर 563 ईसा पहले पूर्णिमा के दिन लुंबिनी में हुआ था. इनके पिता का नाम शुद्धोधन था, जो शाक्य गण के प्रमुख थे और माता का नाम माया देवी था। सिद्धार्थ के जन्म से 7 दिन बाद ही उनकी माता का निधन हो गया था। इसके बाद सिद्धार्थ की परवरिश उनकी सौतेली मां प्रजापति गौतमी ने किया था।

उन्होंने अपने कार्यों से सिद्धि प्राप्त की थी. इसलिए इनका नाम सिद्धार्थ से गौतम बुद्ध हो गया और फिर ये भगवान बुद्ध कहे जाने लगे. और उनकी जयंती के दिन पूजा करने लगे. गौतम बुद्ध का जन्म पूर्णिमा के दिन हुआ था. और इसी दिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति भी हुई थी, अर्थात वे सिद्धार्थ से गौतम बुद्ध बने थे.

इसलिए उस दिन को लोगों ने बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima) नाम दिया. बुद्ध पूर्णिमा यह पर्व वैशाख की पूर्णिमा हिंदी महीने के दुसरे माह में मनाया जाता है, इसलिए इसे वैसक भी कहते हैं. विशेष कर यह पर्व बौद्ध धर्म में प्रचलित हैं.

Buddha Purnima:बुद्ध पूर्णिमा (वैशाख पूर्णिमा) 2021 कब है, तिथि, व्रत विधि, कथा

इसलिए उनकी जयंती के दिन को बुद्ध पूर्णिमा या बैसाखी बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima) के रूप में मनाते हैं. श्रीलंका, म्यांमार, कंबोडिया, जावा, इंडोनेशिया, तिब्बत, मंगोलिया ये सब देश बुद्ध जयंती के विशेष दिन को एक बड़े उत्सव के रूप में मनाते हैं. दरअसल बुद्ध जयंती की तारीख एशियाई चन्द्र सौर कैलेंडर पर आधारित है, इसलिए हर इसकी तारीख में बदलाव होता है.

भगवान गौतम बुद्ध एकमात्र ऐसे थे जिन्होंने जन्म और पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति पाई थी. वो एक दार्शनिक, आध्यात्मिक मार्गदर्शक और धार्मिक नेता थे. जिन्होंने बोधगया में बरगद के पेड़ के नीचे 49 दिनों तक निरंतर ध्यान के बाद ज्ञान प्राप्त किया था और दर्द को समाप्त करने के रहस्य को उजागर किया था.

Buddha Purnima: बुद्ध पूर्णिमा  2021 कब है
Buddha Purnima: बुद्ध पूर्णिमा 2021 कब है

सारनाथ में दिया था पहला उपदेश

भगवान गौतम ने अपना पहला उपदेश सारनाथ में दिया था. जहां उन्हें पूरी तरह से जागृत माना जाता है. उन्होंने 45 सालों तक धर्म, अहिंसा, सद्भाव और दया के रास्ते पर चलने का उपदेश दिया था. बौद्ध धर्म पूरी तरह से भगवान बुद्ध की शिक्षाओं पर आधारित है. जानकारी के मुताबिक एक शाही परिवार में पैदा होने के बावजूद उन्होंने विलासी जीवन को त्याग दिया और 30 साल की उम्र में घर छोड़ दिया था.

बुद्ध पूर्णिमा 2021 में कब है

जैसा कि हमने बताया कि वैशाख माह में पड़ने वाली पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima) कहा जाता है. इस पूर्णिमा पर भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था. इसलिए इसदिन को बुद्ध पूर्णिमा नाम दिया गया है. इस साल वैशाख माह की पूर्णिमा 26 मई को हैं अतः बुद्ध पूर्णिमा भी 26 मई दिन बुद्धवार को है.

बुद्ध पूर्णिमा मुहूर्त

बुद्ध पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त 25 मई को रात 8:20 मिनिट से 26 मई को शाम 4:40 तक के बीच में है.

बुद्ध पूर्णिमा कैसे मनाते हैं

बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima) के दिन सबसे पहले सुबह सूर्योदय होने से पहले उठकर पूजा स्थल पर भगवान् बुद्ध से प्रार्थना की जाती हैं और उनके सामने सांस्कृतिक नृत्य किया जाता है. यह त्यौहार दुनिया भर में मनाया जाता है इसलिए कुछ स्थानों पर लोग परेड एवं शारीरिक कसरत करते हुए इस दिन का उत्सव मनाते हैं. इस दिन धर्मिक स्थानों पर बौद्ध झंडा भी फहराया जाता है

बुद्ध पूर्णिमा व्रत विधि

व्रत प्रारंभ करने से पहले व्रत का संकल्प लें.
वरुण देव को नमस्कार करें .इसके बाद पवित्र नदी या फिर किसी पवित्र कुंड में स्थान करें, 
इसके बाद सूर्य देव की जल चढाते हुए मन्त्रों के साथ उनको नमन करें
इसके बाद भगवान मधुसूदन की पूजा करनी चाहिए, और उन्हें नैवेध अर्पित करना चाहिए. इस दिन लोग भगवान विष्णु की भी पूजा सकते हैं.
दीपक जलाते हैं, हल्दी, रोली, कुमकुम, एवं फूल अर्पित करते हैं.
इसके आलवा बौधिवृक्ष की भी पूजा करते हैं उसकी जड़ों में दूध चढाते हैं.
और फिर दान दक्षिणा करते हुए सूर्यास्त के समय चंद्रमा को जल चढाते हुते अपने व्रत को समाप्त करते हैं.

बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima) क्यों मनाई जाती है

शास्त्रों के अनुसार कहा जाता है कि भगवान बुद्ध जिन्होंने बौद्धित्व की प्राप्ति की थी. वे भगवान विष्णु के 9 वें अवतार थे. इसलिए भगवान बुद्ध को बौद्ध धर्म के अलावा हिन्दू धर्म के लोग भी मानते हैं, और उनकी पूजा करते हैं. बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima) का बहुत बड़ा महत्व है.

इसलिए इस दिन दुनिया भर के बौद्ध समुदाय, मठ प्रार्थना और मंत्रोच्चार करते हैं. साथ ही इस दिन उनके उपदेशों पर चर्चा और उनकी शिक्षाओं को याद किया जाता है. बुद्ध जयंती (Buddha Purnima) पर पवित्र गंगा में डुबकी लगाने से सभी पाप दूर हो जाते हैं.

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