Kartarpur Sahib Corridor: सिख श्रद्धालुओं को गुरु पर्व का तोहफा,फिर खुला करतारपुर साहिब कॉरिडोर

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Kartarpur Sahib Corridor 2021 :Guru Nanak Jayanti 19 NOV 2021
Kartarpur Sahib Corridor 2021 :Guru Nanak Jayanti 19 NOV 2021

Kartarpur Sahib Corridor: गुरु नानक जयंती

(Guru Nanak Jayanti 2021) से ठीक पहले सिख समुदाय के श्रद्धालुओं मोदी सरकार ने दिया गुरु पर्व का तोहफा, कल से फिर खुलेगा करतारपुर साहिब कॉरिडोर

गुरु पर्व से ठीक पहले सिख समुदाय के श्रद्धालुओं के लिए मोदी सरकार ने अच्छी खबर दी है। गुरु पर्व को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने कल यानी 17 नवंबर से करतारपुर साहिब कॉरिडोर को फिर से खोलने का फैसला किया है। यह खुशखबरी केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दी है और कहा है कि इससे बड़ी संख्या में सिख तीर्थयात्रियों को फायदा होगा। करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में किया था।

Kartarpur Sahib Corridor: गुरु नानक देव की जयंती और प्रकाश पर्व को देखते हुए करतार कॉरिडोर को फिर से खोला । हिंदू धर्म में दीपावली की तरह ही सिख धर्म में गुरु नानक जयंती मनाई जाती है. गुरु नानक जयंती को गुरु पर्व, प्रकाश पर्व, गुरु पूरब भी कहा जाता है.

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प्रकाश पर्व (prakash parav) हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि के दिन गुरु नानक जयंती मनाई जाती है. गुरु नानक देव जी ने ही सिख धर्म की स्थापना की थी. इस दिन सिख समुदाय के लिए लोग सुबह प्रभात फेरी निकालते हैं, गुरुद्वारे जाकर मत्था टेकते हैं, वाहे गुरू का जाप करते हैं और भजन कीर्तन करते हैं.

गुरु नानक देव की जयंती के मौके पर चारों ओर दीप जला कर रोशनी की जाती है. इस बार गुरु पर्व (गुरु नानक जयंती/Guru Nanak Jayanti 2021) 19 नवंबर को को मनाई जाएगी दीपावली के 15 दिन बाद कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन ही गुरु नानक जयंती मनाई जाती है. देशभर में ये पर्व काफी धूम-धाम से मनाया जाता है.

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धार्मिक मान्यता के अनुसार गुरु नानक ने समाज में बढ़ रही कुरीतियों और बुराइयों को दूर करने का काम किया था. गुरु नानक देव जी का जन्म 15 अप्रैल 1469 को हुआ था, वहीं उनकी प्रचलित तिथि कार्तिक पूर्णिमा है. बताया जाता है कि नानक देव जी काफी शांत प्रवृति के व्यक्ति थे. हमेशा आंखें बंद करके ध्यान में लगे रहते थे. नानक देव जी के प्रखर बुद्धि के लक्षण बचपन में ही दिखाई देने लगे थे.

हमेशा चिंतन और ध्यान में लगा देख घर में माता-पिता को चिंता सताने लगी थी. इस कारण उन्हें गुरुकुल में भेज दिया गया, लेकिन वहां भी वे ज्यादा समय नहीं रहे. गुरु नानक के प्रश्नों का उत्तर अध्यापक के पास भी न था. और उनके प्रश्नों से तंग आकर अध्यापक उन्हें वापस घर छोड़ गए और इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि भगवान ने उन्हें पहले से ही ज्ञान देकर धरती पर भेजा है. 16 साल की आयु में ही उनका विवाह करवा दिया गया. लेकिन पारिवारिक सुख में उन्हें कोई दिलचस्पी नहीं थी. अथवा सब कुछ छोड़-छाड़ कर यात्रा पर निकल गए.

कब हुआ था करतारपुर साहिब कॉरिडोर का उद्घाटन

इस कॉरिडोर का उद्घाटन 9 नवंबर, 2019 को किया गया था। अगस्त के महीने में पाकिस्तान ने भारत समेत 11 देशों की यहां यात्रा पर प्रतिबंध लगाया था। डेल्टा वैरिएंट के प्रकोप की वजह से पाकिस्तान ने 22 मई से लेकर 12 अगस्त तक भारत को ‘सी’ कैटेगरी में डाल दिया था। 16 मार्च, 2020 को भारत और पाकिस्तान ने कोविड-19 को देखते हुए अस्थाई तौर पर करतारपुर साहिब की यात्रा पर प्रतिबंध लगाया था।


सिख समुदाय के लिए क्यों खास है करतारपुर गुरुद्वारा

पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब सिखों के लिए सबसे पवित्र स्थान है। यह भारतीय सीमा से 4 किलोमीटर की दूरी पर है। सिखों के गुरु नानक जी ने करतारपुर को बसाया था और यहीं उन्होंने अंतिम सांस ली थी। करतारपुर साहिब, पाकिस्‍तान के नारोवाल जिले में है जो पंजाब मे आता है।

कहा जाता है कि गुरुनानक देव ने यहां अपने जीवन के 17 साल बिताए थे। करतारपुर गुरुद्वारा साहिब का निर्माण 1,35,600 रुपए की लागत में किया गया था। यह राशि पटियाला के महाराजा सरदार भूपिंदर सिंह ने दी थी। 1995 में पाकिस्तान सरकार ने इसकी मरम्मत कराई थी और 2004 में इसे पूरी तरह से संवारा गया।

कहा जाता है कि यही से सबसे पहले लंगर की शुरुआत हुई थी। नानकदेव ने गुरु का लंगर ऐसी जगह बनाई जहां बिना भेदभाव के पुरूष और महिला दोनों साथ में भोजन करते हैं।

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