Christmas day 2022-23|All History of Christmas day

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Christmas day 2021-22 and History of Christmas day
Christmas day 2022 -23

क्रिसमस डे क्या है ? ( what is Christmas day History In Hindi)

Christmas day 2022-23 : दुनियाँ में जितने भी त्यौहार मनाये जाते हैं, उनका मकसद केवल प्रेम हैं. एकता को बनाये रखने के लिए ही त्यौहार शुरू किये गये, लेकिन आज हम इन सभी वास्तविक्ता से धीरे धीरे बहुत दूर हो गए और आपसी बैर में एकता को खत्म कर रहे हैं. क्रिसमस डे दूनियाँ में सर्वाधिक मनाये जाने वाले त्यौहारों में से एक हैं. यह ईसाई धर्म का विशेष फेस्टिवल हैं. इस दिन गॉड ईसा मसीह का जन्म हुआ था. इस फेस्टिवल को क्रिश्चियन समुदाय के लोग बहुत उत्साह से मनाते हैं

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यह दिन (Christmas day) 25 दिसम्बर के दिन मनाया जाता हैं. इसे बड़ा दिन कहा जाता हैं. माना जाता हैं इस दिन ईसा मसीहा का जन्म हुआ था, जो कि क्रिश्चियन समुदाय के भगवान कहे जाते हैं. क्रिसमस 12 दिनों तक मनाया जाता है, इस प्रकार यह 6 जनवरी तक चलता हैं.

Christmas day 2022-23|All History of Christmas day

क्रिसमस टाइड क्या है ?

क्रिसमस के 12 दिन के फेस्टिवल को क्रिसमस टाइड के नाम से जाना जाता हैं. इन दिनों सभी एक दुसरे को गिफ्ट्स, फ्लावर्स, कार्ड्स आदि देते हैं. साथ ही इन दिनों क्रिसमस के सॉंग गाये जाते हैं और कई देशो में इस दिन सांता की प्रथा का अनुसरण किया जाता हैं. छोटे बच्चे सांता क्लॉज़ से नये-नये गिफ्ट की विश करते हैं और इस दिन सांता उनकी इच्छा पूरी करते हैं.
संयुक्त राष्ट्र संघ के आंकड़ों के अनुसार, विश्व के करीब डेढ़ सौ करोड़ लोग ईसाई धर्म के अनुयायी हैं। क्रिसमस (Christmas) को बड़ा दिन भी कहते हैं। 

Christmas day 2021-22 and History of Christmas day
Christmas day 2022-23 and History of Christmas day

क्रिसमस ट्री को सजाने की परम्परा कहा से सुरु हुयी थी ?

क्रिसमस के दिन सदाबहार वृक्ष को सजाकर सेलिब्रेशन किया जाता हैं यह परम्परा जर्मनी से शुरू हुई, जिसमे एक बीमार बच्चे को खुश करने के लिए उसके पिता ने सदाबहार वृक्ष को सुंदर तैयार करके उसे गिफ्ट दिया.इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि जब जीजस का जन्म हुआ, तब ख़ुशी व्यक्त करने के लिए सभी देवताओं ने सदाबहार वृक्ष को सजाया तब ही से इस वृक्ष को क्रिसमस ट्री का प्रतीक समझा जाने लगा और यह परंपरा प्रचलित हो गई.

क्रिसमस की क्या कहानी है – What is the story of christmas ?

लगभग 2 हजार साल पहले की बात है उस समय रोम का शासन होता था तथा लोगो को बहुत प्रतारित किया जाता था लोगो के कष्टों को कम करने तथा रोम के शासन से मुक्ति दिलाने के लिए ईश्वर के द्वारा जीसस (यीशु )को पृथवी पर भेजा गया था ।

प्रभु के द्वारा ग्रैबियल नामक दूत मैरी नामक युवती के पास भेजा गया तथा ईश्वर के दूत ग्रैबियल ने मैरी को जाकर कहा कि उसे ईश्वर के पुत्र को जन्म देना है यह बात सुनकर मैरी हैरान -परेशान हो गई क्योंकि वह कुंवारी थी तब उसने ग्रैबियल से पूछा कि यह कैसे संभव हो सकता है ।


तब ग्रैबियल ने कहा कि ईश्वर की यही इच्छा है और ईश्वर सब ठीक करेगे धीरे-धीरे समय बीतता गया और मैरी की शादी जोसेफ नाम के युवक से हो गई । भगवान के दूत ग्रैबियल जोसेफ के सपने में आते है और उससे कहते है ।

कि जल्द ही मैरी गर्भवती होगी और आपको उसका खास ध्यान रखना पड़ेगा । क्योंकि उसकी होने वाली संतान और कोई नहीं स्वयं प्रभु यीशु हैं उस समय जोसेफ और मैरी नाजरथ (इजराइल का एक भाग है) में रहते थे ।

उस समय नाजरथ रोमन साम्राज्य का एक हिस्सा हुआ करता था। एक बार किसी कारण से जोसेफ और मैरी बैथलेहम( जोकि इस समय फिलस्तीन में है) चले गए । उस समय वहा पर बहुत लोग रहते थे ।

वहा की सभी शरणालय और धर्मशालाएं भरे हुए थे जिसके कारण जोसेफ और मैरी रहने की जगह नहीं मिली बहुत खोजने के बाद उन्हें एक अस्तबल (जहा पर घोड़ो को रखा जाता हे ) में स्थान मिला ।

और इसी अस्तबल में मध्य रात्रि को प्रभु यीशु का जन्म हुआ । और अस्तबल के पास में ही कुछ गडरिए अपनी भेड़ो को चरा रहे थे । तब वहां पर ईश्वर के दूत प्रकट हुए गडरियों को प्रभु यीशु के जन्म की जानकारी दी इसके बाद गडरिए नवजात शिशु के समक्ष जाते है और शिशु को नमन किया ।


समय के साथ यीशु बड़े हुए और जगह जगह घूम कर लोगो को सन्देश देने लगे तथा लोगो के अनेको बीमारियों को भी दूर किया ।और इस प्रकार यीशु की प्रसिद्धि विश्व में चारो और फैलने लगी यीशु के अच्छे कार्यो को देखते हुए कुछ लोग उनके दुश्मन भी बन गए यीशु की प्रसिद्धि के कारण ही उन्हें अंत समय में अनेको यातनाये दी गयी ।


तथा क्रूस पर लटका कर मार दिया परन्तु जब यीशु को क्रूस पर लटका रहे थे तब भी उन्होंने अपने हार्डी से लोगो को दवा दी और प्रभु से प्रार्थना की ‘हे परम पिता परमेश्वर इन लोगो को क्षमा कर दीजिये ये लोग अज्ञानता के कारण ऐसा कर रहे है’ ।

प्रभु यीशु की याद में ही 25 दिसम्बर (25 December) को क्रिसमस (Christmas) का त्यौहार मनाया जाता है ।

आइए जानते हैं कि 2020 में क्रिसमस कब है
आइए जानते हैं कि 2021 में क्रिसमस कब है

Christmas day 2022-23| All History of Christmas day

आइए जानते हैं कि 2022-23 में क्रिसमस कब है ?
2021 में क्रिसमस (Christmas day ) 25 दिसंबर को शनिवार है

25 दिसम्बर के दिन विश्व में क्रिसमस (Christmas) का त्यौहार बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है यह त्यौहार ईसाइयों का मुख्य त्योहारों में से एक है जिस प्रकार हिन्दुओ के लिए दीपावली का महत्व है और मुसलमानो के लिए ईद का महत्व है

ठीक उसी प्रकार ईसाइयों के लिए क्रिसमस का त्यौहार है तथा इसकी पूरी तैयारियां क्रिसमस से एक दिन पहले यानि की 24 दिसंबर की संध्या से ही आरंभ हो जाती है


विश्व के अनेक देशो (यूरोपीय और पश्चिमी देशों ) में क्रिसमस की पूर्व संध्या से ही अनेको रंगारग कार्यकर्म होने प्रारंभ हो जाते है भारत के गोवा राज्य में भी क्रिसमस की धूम देखि जाती है इसके अतिरिक्त अन्य शहरों के बाजारों में तथा चर्चो में भी क्रिसमस की धूम देखि जा सकती है

आज के समय में क्रिसमस (Christmas) का त्यौहार सभी धर्मो के लोगो द्वारा मनाया जाने लगा है और बहुत से लोग प्रभु यीशु का ध्यान करते हैं और कैरोल गाते हैं तथा प्यार व भाईचारे का संदेश देते हुए एक -दूसरे के घरो में उपहार व मिठाइयां ले जाते हैं


हमेसा कहा जाता है खुसिया बाटने से बढ़ती है इस लिए अब क्रिसमस का त्यौहार एक धार्मिक पर्व नहीं रहा अब यह एक सामाजिक पर्व बन गया है पहले से क्रिसमस को सभी ईसाई लोग मनाते थे और अब कई गैर ईसाई लोग भी एक धर्मनिरपेक्ष उत्सव के रूप में मनाते हैं

आज के समय में बाजारवाद ने भी इस पर्व के प्रचार में बड़ी भूमिका निभाई है क्रिसमस (Christmas) के दौरान उपहारों का लेन-देन तथा सजावट का सामान एवं छुट्टी के कारण यह एक बड़ी आर्थिक गतिविधि भी बनता जा रहा है

कैसे मनाते हैं क्रिसमस डे (Christmas Day Celebration)

यह फेस्टिवल क्रिसमस के कई दिनों पहले शुरू हो जाता है, जिसमे क्रिश्चियन जाति के लोग अथवा जो इसे मानते हैं. वे सभी इन दिनों बाइबिल पढ़ते हैं, मैडिटेशन करते हैं और अपने धर्म के अनुसार फ़ास्ट अथवा उपवास भी करते हैं.


क्रिसमस -Christmas 2022-23

क्रिसमस पर्व की खास बात – Special thing of Christmas festival

क्रिसमस (Christmas) का पर्व आते ही लोगों में इसे लेकर बहुत उत्साह देखा जाता है। लोग अपने मित्रों और परिजनों को ग्रीटिंग्स कार्ड, सेंटा, क्रिसमस ट्री, और अन्य उपहार दे कर उन तक अपनी शुभकामनाएँ भेजते हैं। क्रिसमस कार्ड डे के रूप में कार्ड लेने और देने के इस प्रचलन के कारण हर साल नौ दिसंबर को क्रिसमस कार्ड डे मनाया जाता है।

क्रिसमस पर्व को खास बनाती है ये चीजे

क्रिसमट ट्री – Christmas Tree

क्रिसमस डे (Christmas day) पर क्रिसमस ट्री का बडा़ महत्व है। यह क्रिसमस ट्री डगलस, बालसम या फर के वृक्ष की होती है जिसे क्रिसमस डे  पर अच्छी तरह से सजाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि प्राचीन काल में मिस्र वासियों, चीनियों और हिबूर के लोगों ने सबसे पहले इस परंपरा की शुरुआत की थी।

उनका विश्वास था की इन पौधों को घरों में सजाने से घर में नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं। लेकिन आधुनिक क्रिसमस ट्री (Christmas Tree)की शुरुआत जर्मनी में हुई । जहाँ इस वृक्ष को स्वर्ग का प्रतीक माना गया है।

क्रिसमस ट्री

सेंटा क्लॉज (Santa clause)

क्रिसमस डे के मौक़े पर बच्चे सेंटा क्लॉज (Santa clause) का इंतज़ार बेसब्री से करते हैं। क्योंकि सेंटा बच्चों को गिफ्ट्स देता है। ऐसी मान्यता है कि सेंटा क्लॉज (Santa clause) की प्रथा संत निकोलस ने चौथी या पांचवी सदी में शुरू की।

वे एशिया माइनर के पादरी थे। वे बच्चों और नाविकों से बेहद प्यार करते थे। दरअसल वे क्रिसमस और नववर्ष के दिन गरीब-अमीर सभी को प्रसन्न देखना चाहते थे। उनसे जुड़ी हुई कई कथाएँ और कहानियों सुनने प्रचलित हैं ।

मैं आशा करती हु कि क्रिसमस से संबंधित यह लेख आपको पसंद आया होगा। अगर आपका कोई सवाल है । तो Coment करके अवश्य बताये क्रिसमस डे 2022-23 ( Happy Christmas 2022-23)की आपको हार्दिक शुभकामनाएँ ।

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