Clay pots for use cooking and benefits

हेल्थ

मिट्टी के बर्तनो में खाना बनाने एवं खाना खाने के फायदे।

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अगर में ईमानदारी से कहु तो यह पोस्ट लिखने का मकसद केवल मिट्टी के बर्तनो को प्रमोट करना है। यह पोस्ट किसी ब्रांड को प्रमोट करने के लिए बिलकुल नहीं है।

कभी-कभी लगता है की हम अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे है। और हमारी उसी संस्कृति को विदेशो में अपनाया जा रहा है तथा उस पर वैज्ञानिक शोध भी किये जा रहे है।

उदाहरण के तोर पर जैविक खेती को ही ले लीजिये उसको आज एक नया नाम देकर प्रमोट किया जा रहा है ऑर्गेनिक फार्मिंग (Organic Farming) और हम Organic Products के लिए दोगुने-चौगुने दाम चूका रहे है। आज sciences खुद कृषि के लिए जैविक खाद को इस्तेमाल करने की सलाह दे रहा है जिसको कभी जैविक खाद में कोई scientific reason नजर नहीं आ रहा था और वह आज रासायनिक खाद को इस्तेमाल ना करने की सलाह दे रहा है।

आज के आधुनिक दौर में हम भोजन बनाने और खाने के लिए मिट्टी के बर्तनो का उपयोग बहुत कम करते है क्युकी प्लास्टिक, स्टील, नानस्टिक आदि ने इनकी उपयोगिता कम कर दी है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी इनका उपयोग किया जाता है। 

नॉनस्टिक कोटिंग्स, जैसे कि टेफ्लॉन को लेकर कुछ विशेसज्ञ दावा करते हैं कि वे हानिकारक हैं और कैंसर जैसी घातक बीमारी को जन्म दे सकते है। जबकि अन्य का कहना है कि नॉनस्टिक कुकवेयर के साथ खाना बनाना पूरी तरह से सुरक्षित है। इस पर शोध किये जा रहे वास्तविकता जल्द ही हमारे सामने होग।

प्लास्टिक के साथ भी यही विवाद जुड़ा है एक बात में स्पष्ट करना चाहती हु की प्लास्टिक हमारी प्रकर्ति के लिए नुक्सानदायक है

मिट्टी के बर्तनों का इतिहास हजारों साल पुराना है। बहुत बार आज भी पुरातत्व विभाग (Archaeological Department) को खुदाई में मिट्टी के बर्तन मिलते हैं। 

मिट्टी के बने बर्तनों का अपना एक अलग महत्व है मिट्टी के बर्तनों के पकाए जाने वाले खाने पीने से कई तरह की सूक्ष्म शारीरिक बीमारियां नष्ट हो जाती है। मिट्टी के बर्तनों का उपयोग धीरे-धीरे कम हो गया।

अगर आपको पूरी लाइफ हेल्‍दी रहना हैं तो प्रेशर कुकर की बजाय मिट्टी के हांडी में खाना बनाकर खाना चाहिए। हमारी बॉडी को रोजाना 18 प्रकार के सूक्षम पोषक तत्वों की जरूरत होती है, जो मिट्टी के बर्तनों में बने खाने से आसानी से मिल जाती है।

इन सूक्ष्म पोषक तत्वों में कैल्शियम, मैग्‍नीशियम, सल्‍फर, आयरन, सिलिकॉन, कोबाल्ट, जिप्सम आदि शामिल होते हैं। वहीं प्रेशर कुकर से बने भोजन में इन सारे पोषक-तत्वों नष्‍ट हो जाते है। इसलिए मिट्टी के ही बर्तन में खाना बनाना चाहिए।

मिट्टी के बर्तन में बनी दाल और सब्जी में 100 प्रतिशत माइक्रो न्यूट्रीएंट्स रहते हैं जबकि, प्रेशर कुकर में बनी दाल और सब्जी के 87 प्रतिशत पोषक तत्व एल्युमिनियम के पोषक-तत्वों द्वारा अवशोषित कर लिये जाते हैं। इसलिए अब डाइटिशियन और न्यूट्रिशियन भी मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने की सलाह देने लगे हैँ। साथ ही मिट्टी के तवे में रोटी बनाने से उसके पौष्टिक तत्व खत्म नहीं होते है। जबकि एल्यूमीनियम के तवे पर रोटी बनाने से उसमें से 87 प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं।

कब्ज से मिलती है राहत

आज के समय में बहुत से लोगों को कब्ज की समस्या हो जाती है। आजकल के समय में दिनभर ऑफिस में बैठे रहने से गैस की समस्या हो जाती है, इसलिए आपको मिट्टी के तवे की रोटी खानी चाहिए। अगर आप मिट्टी के तवे की रोटी खाती हैं तो आपको कब्ज की समस्या में राहत मिलती है

अगर आप खाने में मिनरल्‍स, विटामिन्‍स और प्रोटीन प्राप्त करना चाहते है तो आज से ही एल्युमिनियम के बर्तनों में खाना बनाना बंद करें और मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाना शुरू करें।

शहरों में कुछ स्थानों पर पेयजल (प्याऊ) के लिए सड़क किनारे रखे गए मिट्टी के घड़े आज भी दिखाई देते है।

मिट्टी के घड़े के फायदे

मिट्टी का घड़ा बिना इलेक्ट्रिसिटी के पानी को ठंडा करता है और यह फ्रीज़ के ठन्डे पानी के मुकाबले स्वस्थ के लिए लाभदायक भी है और लाभकारी मिनरल्स भी प्रदान होते है। 

यह पाचन किया को बेहतर बनाने में सहायक है और इस पानी को पीने से शरीर में टेस्टोरॉन का स्तर भी बढ़ता है।

ऑनलाइन भी मिट्टी के बर्तन मिलते हैं लेकिन इनकी बिक्री उतनी ज्यादा नहीं है मिट्टी के बर्तन कई तरह के मिलते हैं जिनमें सिरेमिक क्ले क्रीमवियर और टेराकोटा के बने हुए बर्तन मिल जाएंगे उनकी अलग-अलग रेंज है आप अपनी जरूरत के हिसाब से इनका चुनाव कर सकते हैं।

मिट्टी के बर्तन कैसे बनाये जाते है ? क्या है मिट्टी के बर्तनो का इतिहास

मिट्टी के बर्तनों का बनाने का कार्य कुम्हार करते हैं कुम्हार शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है जहां कुंभ मतलब घड़ा और कार मतलब कारीगर या घड़ों के कारीगर। कुछ जगहों पर आज भी कुम्हार हाथ से मिट्टी के बर्तन चाक के द्वारा बनाते हैं मिट्टी के बर्तनों के बनाने की आधुनिक मशीने बाजार में मौजूद है यही कारण है कि कुम्हार के द्वारा हाथ से बनाए गए बर्तनों की कला धीरे-धीरे विलुप्त हो रही है।

कुम्हार बर्तन बनाने के लिए मिट्टी तालाब से खोद कर लाते हैं। इसकी उपयोगिता की परीक्षा के लिए मिट्टी के ढेले पर पानी डालते हैं। यदि मिट्टी का ढेला पानी डालते ही पिघल कर बह गया तो यह मिट्टी खराब मानी जाती है। पानी डालने पर भी वह कुछ देर नहीं घुला तो वह मिट्टी बर्तन बनाने के लिए उपयुक्त मानी जाती है ।

सबसे पहले मिट्टी से अशुद्धियाँ निकलकर उसे कंकड रहित बर्तन बनाने के छान लिया जाता है।
कुम्हार मिट्टी तैयार करते समय उसमें रेत मिलाते हैं। रेत मिलाने से मिट्टी की पानी के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है और हांडी बनाने में फटती नहीं है।

कुम्हार चाक लकड़ी का बनाते हैं, यह चाक बैलगाड़ी के पहिये जैसा होता है। इसके बीच का भाग और ताने सर्गी लकड़ी की बनाई जाती हैं, सर्गी लकड़ी सबसे मजबूत मानी जाती है। अधिकांश कुम्हार चाक स्वयं ही तैयार करते हैं उसकी बाहरी परिधि बांस की खपच्चीयों पर मिट्टी चढ़ा कर बनाई जाती है। थोड़ा सूखने पर इस पर रस्सी लपेटी जाती है ताकि मिट्टी निकल न जाये, फिर एक बार और मिट्टी चढ़ाकर उस पर गोबर मिली मिटटी लीपकर सुखा लिया जाता है।

इस प्रकार तैयार चाक को उपयोग में लानें से पहले परीक्षण किया जाता है। इसे धुरी पर घुमाकर देखते हैं। परिधि पर चारों ओर एकसार मिट्टी न चढने से यह चाक समतल नहीं घूमता। तब जहां मिट्टी कम लगी हो वहां और मिट्टी लगाई जाती है और जहां ज्यादा हो वहां से निकाली जाती है। यह क्रिया तब तक दोहराई जाती है तब तक चाक समतल न घूमने लगे।

कुम्हार अनेक प्रकार के बर्तन बनाते हैं बनाये जाने वाले प्रमुख बर्तन पानी भरने और खाना बनाने हेतु काम में लाये जाते हैं। फिर इन बर्तनो को भटटी में पका लिया जाता है।

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