Copper water uses health benefits and side effects of in hindi | Tambe Ke Bhartan Ka Pani

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copper water usse health benefits and side effect of in hindi
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तांबे के बर्तन का पानी पीने के फायदे | Tambe Ke Bhartan Ka Pani|copper water usse health benefits and side effect of in hindi

Copper : भारत में तांबे को शुभ धातु माना जाता है और पूजा-पाठ में इसका उपयोग किया जाता है। यह एक कीटाणुनाशक धातु है, जिस कारण बहुत से लोग इससे बने बर्तन को प्रयोग में लाते हैं। सुबह खाली पेट तांबे (Copper) के बर्तन में रखा पानी पीना

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 स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होता है।

वैज्ञानिक शोधों में भी तांबे के स्वास्थ्य गुणों को प्रमाणित किया जा चुका है।जिस कारण सेहत की बेहतरी के लिए लोग कई तरीके अपनाते है. इन्हीं में से एख है तांबे (Copper) के बर्तन में पानी पीना.

आपने भी सुना होगा कि तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से सेहत अच्छी रहती है, खासतौर से सुबह के समय उठकर तांबे के बर्तन (Water In Copper) में रखा पानी या ताम्रजल को पिया जाए

तो इससे शरीर से विषैले पदार्थ (Toxic Substances) बाहर निकल जाते है. इसलिए हमारे आस पास लोग अक्सर सुबह तांबे के बर्तन में रखा पानी पीते हैं। तांबे में लाल और पीले रंग का मिश्रण होता है,

दोनों ही रंग गर्म प्रकृति के होते हैं, इसलिए इस बर्तन में रखा पानी भी गर्म तासीर का माना जाता है। इस पानी को गुनगुना करने की जरूरत नहीं पड़ती।

तांबे के बर्तन में इस तरह से रोज पिएंगे पानी तो मिलेंगे ढेरों लाभ

पुराने समय के लोग रोज सुबह उठकर तांबे के बर्तन का पीना पिया करते थे और लंबे समय तक सेहतमंद रहते थे। क्योंकि वे इन बर्तनों में पानी पीने के सही नियमों से परिचित थे।

तांबे के बर्तन में इस तरह से रोज पिएंगे पानी तो मिलेंगे ढेरों लाभ, जानें Copper glass में पानी पीने के सही नियम

आयुर्वेद के अनुसार ये भी कहा जाता है कि एक तांबे के बर्तन में तांबा ई.कोली और एस.ऑरियस (दो प्रकार के बैक्टीरिया जो दस्त और पेचिश का कारण बन सकते हैं।) से निपटने के लिए उत्कृष्ट है। स्वच्छ पेयजल के दुर्लभ स्रोतों वाले ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इसे शुद्ध करने के लिए तांबे के बर्तनों में पानी जमा करते हैं।

इन बर्तनों में 16 घंटे तक रखा हुआ पानी पीने से डायरिया के सभी रोग नष्ट हो जाते हैं।तो चलिए जानते है तांबे के बर्तन में रखे पानी के गुणों को और इसको पीने से शरीर पर होने वाले असर के बारें में कि इससे शरीर को किस तरह फायदा पहुंचता है

इसके अलावा तांबे के बर्तन का पानी औषधीय गुणों से भरपूर होता है। तांबे के बर्तन में रखा पानी पेट की समस्याओं के लिए रामबाण औषधि माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, तांबा एक अत्यंत महत्वपूर्ण धातु है।

ऐसा इसलिए है, क्योंकि हजारों सालों तक भारत और अन्य एशियाई देश तांबे के बड़े बर्तनों में पानी जमा करते थे। लोग गर्मी की तेज धूप में ठंडक महसूस करने के लिए तांबे के छोटे बर्तनों का पानी पीते थे। इस धातु में और भी बहुत कुछ था

तांबे के बर्तन में रखे पानी दिल को स्वस्थ बनाकर ब्लड प्रेशर को कम करके कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है. तांबे में एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण भी पाए जाते हैं जो शरीर में दर्द और सूजन की समस्या को दूर करते हैं. ऑर्थराइटिस की समस्या से निपटने में भी तांबे का पानी कारगर माना जाता है.जानते हैं तांबे के बर्तन का पानी पीने के फायदे

तांबे के बर्तन का पानी पीने के फायदे – Tambe Ke Bhartan Ka Pani Peene Ke Fayde In Hindi

मस्तिष्क के लिए फायदेमंद – तांबे माइलिन के निर्माण में मदद कर सकती है। यह एक शीट है जो तंत्रिका कोशिकाओं (nerve cells) की सुरक्षा करती है और यह सभी कॉग्निटिव फंक्शन के लिए महत्वपूर्ण है।

अगर किसी का तांबे का लेवल कम है तो इसे ठीक करना बेहद कठिन होगा। इसलिए शरीर में तांबे की कमी को समय रहते दूर करना चाहिए।

मेटाबॉलिक एनर्जी बैलेंस करता है – हर किसी के पास एक प्रमुख चयापचय ऊर्जा (dominant metabolic energy) होती है। इन्हें वात, पित्त और कफ के नाम से जाना जाता है। यदि इन ऊर्जाओं में कोई असंतुलन है, तो आपको चिकित्सा संबंधी समस्याओं और परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। तांबे के बर्तन का पानी पीने से इन सभी तरह की एनर्जी को बैलेंस करने में मदद मिलती है।

किडनी-लिवर की सफाई करता है – तांबे में रखे पानी पीने से शरीर की आंतरिक सफाई होने के साथ ही लिवर औक किडनी को भी सेहतमंद बनाए रखता है. इसके अलावा यह शरीर में होने वाले किसी भी तरह के इंफेक्शन को दूर करने में भी कारगर होता है.

डाइजेशन सिस्टम को मजबूत करता है – तांबा पेट, लिवर और किडनी सभी को डिटॉक्स करता है। इसमें ऐसे गुण मौजूद होते हैं जो पेट को नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टिरिया को मार देते हैं, जिस वजह से पेट में कभी भी अल्सर और इंफ्केशन नहीं होता।

अर्थराइटिस और जोड़ों के दर्द से दे राहत – तांबे में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज़ दर्द से राहत दिलाती है, इसलिए अर्थराइटिस और जोड़ों के दर्द से परेशान लोगों को जरूर पीना चाहिए। इसके साथ ही तांबा हड्डियों और रोग प्रतिरोध प्रतिरोधक क्षमता को भी स्ट्रॉंग बनाता है।

स्किन के लिए फायदेमंद – तांबे में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स चेहरे की फाइन लाइन्स और झाइयों को खत्म करता है। साथ ही फाइन लाइन्स को बढ़ाने वाले सबसे बड़े कारण यानी फ्री रेडिकल्स से बचाकर स्किन पर एक सुरक्षा लेयर बनाता है, जिस वजह से आप लंबे समय तक जवां रहते हैं।

वजन कम करने में कारगर – अगर आपको जल्दी वजन कम करना है, तो तांबे के बर्तन का पानी पिएं। इससे आपके डाइजेस्टिव सिस्टम को बेहतर कर बुरे फैट को शरीर से बाहर निकालता है।

दिमाग को तेज करने में मददगार – मस्तिष्क को उत्तेजित कर उसे सक्रिय बनाए रखने में तांबे का पानी बहुत सहायक होता है। इसके प्रयोग से स्मरणशक्ति मजबूत होती है और दिमाग तेज होता है।

ऐसे करें इसका इस्तेमाल – आयुर्वेद ही नहीं, विज्ञान ने भी तांबे के बर्तन में रखा पानी लाभकारी बताया है। किसी भी चीज़ का पूरा फायदा तभी मिलता है जब उसे सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए। तांबे के बर्तन में रखा पानी का पूरी तरह से लाभ तभी मिलता है, जब तांबे के बरतन में कम से कम 8 घंटे तक पानी रखा जाए। इसलिए लोग रात को तांबे के बर्तन में पानी भरकर सोते हैं, जिससे सुबह उठकर सबसे पहले इस पानी का सेवन कर सकें।

तांबे के बर्तन से पानी पीने का सही तरीका

  • ऐसा गिलास चुनें जो पूरी तरह से तांबे से बना हो और अन्य धातु के निशान के साथ मिश्रित न हो, अन्यथा, आपको तांबे के उपयोग का पूरा लाभ नहीं मिलेगा।
  • तांबे के बर्तन का इस्तेमाल करने से पहले उसे नींबू और पानी से धो लें। किसी डिशवॉशिंग साबुन का उपयोग न करें, क्योंकि यह बहुत नुकसानदायक हो सकता है।
  • अपने बर्तन में पानी भरकर अपने पलंग के पास रख दें और सुबह सबसे पहले इसे पिएं। ऐसा करने से पानी का स्वाद थोड़ा धात्विक लग सकता है लेकिन आपको समय के साथ इसकी आदत हो जाएगी।इसके अलावा, सुबह सबसे पहले शरीर को ऊर्जावान बनाने के लिए एक गिलास साफ, ठंडे पानी से अच्छा कुछ नहीं है।

खटाई को तांबे में नहीं मिलाना चाहिए

सेहत के लिहाज से तांबे में रखा पानी पीने से तो कई फायदेमंद होता है, लेकिन वहीं इसमें खट्टी चीजों जैसे- दही, सिरका, अचार, नींबू को तांबे के बर्तन में नहीं रखना चाहिए, दरअसल तांबे के बर्तन में कॉपर धातु होती है, जो कई चीजों के मिलने से रिएक्ट करती है, इश प्रतिक्रिया की वजह से फूड प्वॉइजनिंग हो सकती है

​आपको तांबे के बर्तनों के साथ क्या नहीं करना चाहिए?

  • आयुर्वेद तांबे के बर्तन से दिन में केवल दो बार पीने की सलाह देता है और इससे ज्यादा नहीं। विशेषज्ञ तांबे के बर्तनों को लगातार तीन महीने तक इस्तेमाल करने के बाद आपके शरीर को एक महीने का अंतराल देने की सलाह देते हैं।
  • जबकि तांबे के बर्तन से पानी पीना बिल्कुल ठीक है लेकिन उनमें खाना न पकाएं। कॉपर टॉक्सिटी एक वास्तविकता है। तांबे के बर्तन में खाना पकाने से हमारे भोजन में और हमारे सिस्टम में तांबे का रिसाव हो सकता है। यदि आपके के शरीर में अत्यधिक मात्रा में तांबा चला गया , तो आपको मतली और दस्त का लग सकते हैं।
  • यदि आप तांबे में खाना बनाना जारी रखते हैं, तो आप अपने लिवर को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाने के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। यही कारण है कि तांबे के खाना पकाने के बर्तन स्टेनलेस स्टील या टिन के साथ बने होते हैं।
  • अगर आप तांबे के बर्तन में रखे पानी का उपयोग गलत तरीकों से कर रहे है। तो यह सेहत के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। इसलिए तांबे के बर्तन से होने वाले फायदे और नुकसान दोनों की जानकारी जरूर होनी चाहिए। आइए तांबे के बर्तन से होने वाले फायदे जान्ने के बाद अब जानते हैं तांबे के बर्तन से होने वाले नुकसान
  • एक बात को हमेशा याद रखें कि इस बरतन को कभी भी जमीन पर न रखें वरना आपको इसका कोई भी लाभ नहीं मिलेगा।बल्कि किसी टेबल या किचन प्लेटफॉर्म पर ही रखें।
  • तांबे से बने बर्तनों की सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस बर्तन के अंदर वाले हिस्सों में कॉपर ऑक्साइड की परत (हरे रंग की) जमने लगती है, इसलिए अंदरूनी तले को अच्छे से साफ करें। तांबे के बर्तन में पानी रखने पर जो रासायनिक क्रिया होती है उसी वजह से कॉपर ऑक्साइड की परत जम जाती है।

तांबे के बर्तन उपयोग करते समय ये बातें रखें याद

  • अगर अल्सर की समस्या है या एसिडिटी है तो इस पानी को न पिएं, गर्म तासीर का होने की वजह से ये समस्या को बढ़ा सकता है.
  • किडनी या हार्ट के मरीज हैं तो डॉक्टर की सलाह से ही तांबे के बर्तन का पानी पिएं.
  • तांबे के बर्तन में दूध या दूध से बनी चीजें और खट्टी चीजें न डालें. ऐसा करने से ये विषाक्त हो सकती हैं और इससे फूड पॉयजनिंग भी हो सकती है.

FAQ:

Q: तांबे के बर्तन में पानी कब पीना चाहिए?
Ans: आयुर्वेद के अनुसार, पेट के रोग मिटाने के लिए रात भर तांबे के बर्तन में रखे पानी को सुबह खाली पेट पीना चाहिए।

Q : तांबे के बर्तन का पानी पीने से क्या नुकसान?
Ans : तांबे के बर्तन में नींबू पानी पीने से आपके पेट में गैस, पेट में दर्द, उल्टी जैसी परेशानी हो सकती हैदरअसल नींबू में पाए जाने वाला एसिड तांबे के साथ मिलकर रिएक्ट करता है. जो आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है

Q: तांबे के बर्तन में पानी कैसे पीना चाहिए?
Ans:रात को तांबे के बर्तन में पानी भरकर सोये, और सुबह उठकर सबसे पहले इस पानी का सेवन करे

Q: तांबे के बर्तन में गर्म पानी रखने से क्या होता है?
Ans: तांबे में लाल और पीले रंग का मिश्रण होता है, दोनों ही रंग गर्म प्रकृति के होते हैं, इसलिए इस बर्तन में रखा पानी भी गर्म तासीर का माना जाता है.

Q: तांबे का कड़ा पहनने से क्या होता है?
Ans: तांबे का कड़ा पहनने से जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है. यह पुराने से पुराने ऑस्टियो आर्थराइटिस में भी राहत देता है. ऐसे लोग जिनको ठंड के मौसम में हाथ-पैर में जकड़न होती है, उन्‍हें तांबे का कड़ा पहनने से राहत मिलेगी. – तांबा कोलेस्ट्रॉल को भी कंट्रोल करता है

Q: असली तांबे की पहचान कैसे करे?
Ans: चुंबक की मदद से तांबे की शुद्धता की पहचान सकते हैं। पांबे के लोटे, गिलास या बोतल पर चुंबक लगाकर देखें। यदि यह चिपक जाता है तो तांबा मिलावटी है। असली तांबे का रंग गुलाबी-नारंगी होता है।

Q: तांबे के बर्तन की सफाई
Ans:तांबे के बर्तन चमकने लगेंगे। तांबे के बर्तनों को नमक और नींबू के पानी से भी धो सकती हैं। इसके लिए आधे कटे नींबु पर नमक लगाकर उसे तांबे के बर्तन पर रगड़ें। या फिर नमक और नींबु के रस को मिलाकर पेस्ट बना लें और उसे तांबे के

Q: तांबे के बर्तन को नींबू या इमली से साफ करते हैं क्यों?
Ans: तांबे के मलीन बर्तन को नींबू या इमली के रस से साफ करते अवश्य देखा होगा। खट्टे पदार्थों में (नींबू) सिट्रिक अम्ल पाया जाता है। यह सिट्रिक अम्ल कॉपर के बदरंगे बर्तन में पाए जाने वाले कॉपर कार्बोनेट को घुलनशील बनाकर कॉपर को उसकी शुद्ध चमक प्रदान करता है

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