गैस चैम्बर में तब्दील हुई दिल्ली पूरा शहर धुंध और धुंए की चादर में लिपटा

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फोटो सौजन्य से livelaw.in

दिल्ली में बीते एक हफ़्ते से प्रदूषण

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की स्थिति गंभीर बनी हुई है की जिसके चलते सूरज दिखाई नहीं दे रहा है, पूरा शहर धुंध और धुंए की चादर में लिपटा हुआ है दिल्ली-एनसीआर के लोग आँखो में जलन और सास लेने में परेशानी की समस्या से जूझ रहे है दिल्ली का AIQ जो की 0-50 तक सामान्य माना जाता है आज वह 999 के पार हो चूका है दिल्ली से सटे नॉएडा की स्थिति और भी ख़राब है यहां AIQ 1800 से ज्यादा है.

दीपावली से पहले ही पर्यावरण वैज्ञानिको ने सरकार को इस बारे में सचेत कर दिया था यह समस्या 2014 से लगातार बढ़ती जा रही है इससे पहले भी हमारे माध्यम से 22-October-2019 इस विषय पर बताया जा चूका है, दीपावली के बाद ये हालात गंभीर हो सकते है किन्तु हमारी सरकारे सोई रही सही समय पर इस मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया गया.

हम सभी इस समस्या का सामना कई वर्षो कर रहे है फिर भी सरकारों ने आज तक इसके लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, और दिल्ली एनसीआर की जनता राम भरोसे है ऐसे में आम जनता जाएं तो जाएं कहां, इस स्थिति के लिए पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश, दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार जिम्मेदार है इन सरकारों में कम्युनिकेशन और राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी साफ़ नजर आती है. इस प्रदूषण से सभी राज्य प्रभावित है.

दिल्ली के मुख्य मंत्री अरविन्द केजरीवाल ने Odd-Even की घोषणा सितम्बर में ही कर दी थी. उन्हें होने वाले प्रदूषण का पता था किन्तु जो समाधान उन्होंने चुना वो भी शानदार है की आम जनता इससे स्वयं निपटे और आज वो केंद्र सरकार से इस पर कार्य करने और उनको सहयोग करने की घोषणा सोशल मीडिया से करते है आप केजरीवाल सरकार की पर्यावरण से निपटने की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगा सकते है.

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AIQ

पंजाब और हरियाणा सरकारों को इससे कोई लेना देना नहीं है वह सब जानते हुए भी इस मुद्दे को अनदेखा करते रहे है.

केंद्र सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी उन्होंने गतवर्षो से चली आ रही इस समस्या को कभी महत्त्व दिया ही नहीं और राज्य सरकारों को इसके लिए जरुरी निर्देश जारी नहीं किये और अगर किये भी तो उनको मॉनिटर नहीं किया गया.

पंजाब और हरियाणा के किसान फसल काटने के बाद बचे हुवे अवशेषो को जला देते है जो की ऊर्जा का एक बहुत बड़ा स्रोत है और किसानो के पास इसको अपने खेतो से एकत्र कर उसको ट्रांसपोर्ट और स्टोर करने की सुविधा नहीं है, हमारी सरकारों को इसका आभास ही नहीं है इस ऊर्जा के स्रोत को कैसे इस्तेमाल करना है सरकार किसानो को इसके बारे में जागरूक कर उनको जरूरी सुविधाएं मुहैया करनी चाहिए.

प्रदूषण के चलते कई हवाई यात्राए रद्द कर दी गयी है.
दिल्ली एनसीआर के सभी स्कूल 5 November तक बंद है.

अगर आप दिल्ली एनसीआर में रहते है तो जान लीजिये हमारे बच्चो के शरीर में एक दिन में 3 पैकेट सिगरेट के बराबर धुआँ प्रवेश कर रहा है.

लोगो कुछ इस तरह से अपना गुस्सा जाहिर कर रहे है
“धुआँ-धुआँ सा मेरा शहर हुआ
पडोसी ने जो आग लगाई उसका ये असर हुआ
दोष किसी और का नहीं है मेरे दोस्त
ये तेरे कर्मो का है तुझ पर कहर हुआ
जो हवा देती है हमे जिंदगी
उसका कतरा-कतरा मौत देने वाला जहर हुआ
सूरज भी छुप गया है इस गुबार के पीछे
ये दिन में भी कैसा रात सा मंजर हुआ
धुआँ-धुआँ सा मेरा शहर हुआ”
विनोद रावत






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