दूब घास के फायदे, उपयोग और नुकसान । Durva (Doob) Grass Benefits and Side Effects in Hindi

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Durva (Doob) Grass Benefits and Side Effects in Hindi
Durva (Doob) Grass Benefits and Side Effects in Hindi

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दूब घास के फायदे, उपयोग और नुकसान। Durva (Doob) Grass Benefits and Side Effects in Hindi

Durva : शायद ही कोई ऐसा इंसान होगा जो दूब को नहीं जानता होगा। हाँ यह अलग बात है कि हर क्षेत्रों में तथा भाषाओँ में यह अलग अलग नामों से जाना जाता है। हिंदी में इसे दूब, दुबडा, संस्कृत में दुर्वा, सहस्त्रवीर्य, अनंत, भार्गवी, शतपर्वा, शतवल्ली, मराठी में पाढरी दूर्वा, काली दूर्वा, गुजराती में धोलाध्रो, नीलाध्रो, अंग्रेजी में कोचग्रास, क्रिपिंग साइनोडन, बंगाली में नील दुर्वा, सादा दुर्वा आदि नामों से जाना जाता है। 

दूर्वा की खासियत है कि यह पैरों से दबाए जाने और रगड़ खाने के बाद भी सभी विपरीत परिस्थितियों में हरी-भरी बनी रहती है. इसके पीछे मान्यता है कि समुद्र-मंथन के समय जब देवता अमृत कलश को राक्षसों से बचाकर ले जा रहे थे तो उसमें से कुछ बूंदें पृथ्वी पर उगी हुई दूर्वा

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यानी घास पर गिर गई थी. यही कारण है कि नष्ट करने के बाद भी पुनर्जीवित हो जाती है.इसके आध्यात्मिक महत्वानुसार प्रत्येक पूजा में दूब को अनिवार्य रूप से प्रयोग में लाया जाता है।

हिंदू धर्म में ऐसा कोई मंगल कार्य नहीं है, जिसमें दूर्वा का प्रयोग न किया जता हो. मंगलकारी दूर्वा का ईश्वर की साधना आराधना के दौरान विशेष रूप से प्रयोग किया जाता है. विवाह के समय इस मंगलकारी दूर्वा के माध्यम से तेल की रस्म पूरी की जाती है. गणपति की पूजा तो बगैर दूर्वा के अधूरी ही मानी जाती है.

अक्सर पूजा में भगवान गणेश को अर्पित की जाने वाली दूब का लोग सिर्फ धार्मिक महत्व जानते हैं. गणेश चतुर्थी पूजा के समय इस दूर्वा घास का इस्तेमाल जरूर किया जाता है। लेकिन पूजा के अलावा लेकिन जिन लोगों को इसके औषधीय गुणों की समझ होती है वो दूब का इस्तेमाल सेहत ही नहीं अपनी खूबसूरती को बनाए रखने के लिए भी करते हैं. 

दूब या दुर्वा (वानस्पतिक नाम  Cynodon dactylon) एक घास है जो जमीन पर पसरती है। हिन्दू संस्कारों एवं कर्मकाण्डों में इसका उपयोग किया जाता है। मारवाडी भाषा में इसे ध्रो कहा जाता हैँ।

देवता, मनुष्य और पशु तीनों को प्रिय है दूर्वा

अमृत के समान फल देने वाली दूर्वा जैसा मंगलकारी कोई पदार्थ हो नहीं सकता है क्योंकि यह देवता, मनुष्य और पशु तीनों के काम आती है. दूब के आचमन से जहां देवता प्रसन्न होते हैं तो वहीं हरी घास का मैदान मनुष्यों को सुकून देने वाला होता है, जबकि पशु इसे चारा के रूप में खाकर तृप्त होते हैं.

दूब घास क्या है,

दूर्वा घास (durba) के हरी-हरी मखमली नैसर्गिक सौन्दर्य को देखकर हृदय दिव्य आनन्द से भर जाता है, वहीं इस पर नंगे पांव चलने के अनेक लाभ हैं। इससे न सिर्फ आँखों की ज्योति बढ़ती है वरन् शरीर के अनेक रोग भी शांत हो जाते हैं।लेकिन लोग दूब के फायदों से अनजान होते हैं।

बहुत कम लोगों को पता होगा कि दूब में मौजूद औषधीय गुण कई बीमारियों से बचाव करने और उनके लक्षणों को कम कर सकते हैं। इसी वजह से इस लेख में हम आसपास आसानी से मिलने वाले दूब घास के फायदे और नुकसान दोनों के बारे में बता रहे हैं। दूब घास के लाभ के साथ ही आप यहां दूब के उपयोग के तरीके भी जानेंगे।

वर्षभर दूब खूब फलती फूलती है। निघंटुओं में सफेद व नील एवं गंड दूर्वा, दूब के तीन भेदों का उल्लेख मिलता है। सफेद दूब वास्तव में कोई अलग तरह की वनस्पति नहीं है। हरी दूब ही जब सफेद हो जाती है तो श्वेत दूब कहलाती है।

यह पूरे वर्ष भर उगने वाला, आरोही, चिकना, बहु शाखाओं वाला तृण या घास होता है। दूब फैलकर बढ़ने वाला पौधा होता हैं, जो भूमि पर चारों ओर फैलते हैं। नवीन तने या कांड भूमि पर आगे-आगे प्रसरण करता जाता है और पीछे-पीछे प्रत्येक पर्व से जड़ निकलकर भूमि में घुसती जाती है और वाह्य कांड से निकल कर नया पौधा जन्म लेता जाता है। जैसे विश्व विजय पर निकला कोई रथी पीछे सैनिक तैनात करता जाता है।

इसका काण्ड अनेक पर्वयुक्त, जड़ निकल कर जमीन पर लगी हुई तथा शाखाएँ छोटी जमीन से उठी हुई, कोमल, सीधी, लगभग 30 सेमी लम्बी होती हैं। इसके पत्ते संकुचित, 2-10 सेमी लम्बे, 1.2-3 मिमी चौड़े, सुदृढ़ आवरण-युक्त, नरम, रेखीय,भालाकार, आगे का भाग सुई की तरह होता है।

इसके फूल हरे बैंगनी रंग के होते हैं। इसके फल छोटे-छोटे दानों के रुप में होते हैं। दाने 1 मिमी लम्बे, बड़े होते हैं तथा बीज छोटे, आयताकार भूरे रंग के होते हैं। यह ज्यादातर मूल रुप से जुलाई से जनवरी तक फलते फूलते हैं।

दूब कड़वी तथा शीतल गुण वाली होती है। यह उल्टी, विसर्प या हर्पिज़ , प्यास, कफ, पित्त, गर्मी, आमातिसार या दस्त, रक्त-पित्त (नाक -कान से खून बहना) तथा खांसी को दूर करती है। गंड दूब अर्थात् गाडर दूब शीतल, लोहे को गलाने वाली, मल को रोकने वाली, हल्की, कसैली, मधुर, वातकारक, जल्दी हजम होने वाली तथा प्यास-गर्मी-कफ-रक्त संबंधी रोग, कुष्ठ, पित्त और बुखार को दूर करने वाली होती है।

सफेद दूर्वा-कड़वी, मधुर, तीखी, शीतल गुण वाली तथा कफपित्त दूर करने वाली होती है। यह व्रण या घाव के लिए हितकर जीवनीशक्ति बढ़ाने वाली, खाने में रुची बढ़ाने वाली; आमातिसार या दस्त, खाँसी, जलन, प्यास, उल्टी, रक्तपित्त तथा विसर्प या हर्पिज़ में फायदेमंद होती है।

दूब घास के फायदे – Benefits of Durva (Doob) Grass in Hindi

दूब घास के नियमित इस्तेमाल करने पर शरीर को कई लाभ हो सकते हैं। दूब घास के फायदे के बारे में वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर जानकारी

  • इसके औषधीय गुणों के अनुसार दूब त्रिदोष को हरने वाली एक ऐसी औषधि है जो वात कफ पित्त के समस्त विकारों को नष्ट करते हुए वात-कफ और पित्त को सम करती है। दूब सेवन के साथ यदि कपाल भाति की क्रिया का नियमित यौगिक अभ्यास किया जाये तो शरीर के भीतर के त्रिदोष को नियंत्रित कर देता है,
  • यह दाह शामक, रक्तदोष, मूर्छा, अतिसार, अर्श, रक्त पित्त, प्रदर, गर्भस्राव, गर्भपात, यौन रोगों, मूत्रकृच्छ इत्यादि में विशेष लाभकारी है। यह कान्तिवर्धक, रक्त स्तंभक, उदर रोग, पीलिया इत्यादि में अपना चमत्कारी प्रभाव दिखाता है। श्वेत दूर्वा विशेषतः वमन, कफ, पित्त, दाह, आमातिसार, रक्त पित्त, एवं कास आदि विकारों में विशेष रूप से प्रयोजनीय है।
  • सेवन की दृष्टि से दूब की जड़ का 2 चम्मच पेस्ट एक कप पानी में मिलाकर पीना चाहिए। लान (Lawn) के रूप में भी दूब घास का प्रयोग किया जाता है। घर के आगे खाली जगह में इसे लगा कर सुंदरता देखी जा सकती है।

दूब घास का उपयोग – How to Use Durva (Doob) Grass in Hindi

  • इस घास के ताजे रस को निकालकर सेवन कर सकते हैं।
  • दूब घास को थोड़ी मात्रा में चबाया भी जा सकता है।
  • इसके जूस को कटी हुई जगह में लगाकर ब्लीडिंग को रोक सकते हैं।
  • दूब घास के पेस्ट को माथे पर भी लगा सकते हैं। इससे सिरदर्द कम हो सकता है।

अगर आपको काम के तनाव और भागदौड़ भरी जिंदगी के वजह से सिरदर्द की शिकायत रहती है तो दूब का घरेलू उपाय बहुत लाभकारी सिद्ध होगा। दूब घास तथा चूने को समान मात्रा में लेकर पानी में पीसकर कपाल पर लेप करने से सिरदर्द से आराम मिलता है।

आँखों का दर्द दूर करे दूर्वा घास (Doob Grass Benefits in Eye Disease in Hindi)

  • आजकल देर तक कंप्यूटर पर काम करने या दिन भर काम करने के बाद आँखों में दर्द होने लगता है इससे राहत पाने में दूर्वा बहुत काम आती है।
  • दूर्वा (doob ghas) को पीसकर पलकों पर बांधने से आँखों का दर्द कम होता है तथा नेत्र मल का आना बंद हो जाता है।

नकसीर (नाक से खून बहना) की समस्या से दिलाये राहत दूर्वा घास (Benefits of Durva grass in Nose Bleeding in Hindi)

  • कुछ लोगों को अत्यधिक गर्मी या ठंड के कारण भी नाक से खून बहने की समस्या होती है। दूब से बना घरेलू उपाय नाक से खून बहना कम करने में काम आता है।
  • अनार फूल के रस को दूब के रस (durva grass juice) के साथ अथवा लाक्षारस या हरड़ के साथ मिलाकर 1-2 बूंद नाक में डालने से नाक से खून बहना कम होता है।
  • दूब (durba) का रस या मुनक्का, ईख का रस या गाय के दूध या जवासा जड़ का रस या प्याज का रस या दाड़िम के फूल का रस के प्रयोग से नकसीर में आराम मिलता है।

ब्लीडिंग रोकने में करे मदद दूर्वा घास (Doob Grass to Treat Bleeding in Hindi)

  • मासिक धर्म या पीरियड्स होने के दौरान बहुत तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे- मासिक धर्म होने के दौरान दर्द होना, अनियमित मासिक धर्मचक्र, मासिक धर्म के दौरान रक्तस्राव या ब्लीडिंग कम होना या ज्यादा होना आदि। इन सब में बांस का घरेलू उपाय बहुत ही लाभकारी होता है।
  • दूर्वा रस (durva ras benefits)को घी के साथ बनाकर अथवा घृत को दूब रस में भली-भाँति मिला कर अर्श के अंकुरों पर लेप करने से तथा शीतल-चिकित्सा करने से रक्तस्राव शीघ्र रुक जाता है।

दूब घास के नुकसान – Side Effects of Durva (Doob) Grass in Hindi

  • इसमें एंटी डायबिटिक गुण होता है, इसलिए मधुमेह के मरीज को डॉक्टर की सलाह के बिना इसका उपयोग नहीं करना चाहिए ।
  • कुछ लोगों की मानें, तो इसे त्वचा पर लगाने से हल्की जलन महसूस हो सकती है।
  • इसके इस्तेमाल से कुछ लोगों के दांतों में दर्द हो सकता है। हालांकि, इससे संबंधित किसी तरह का वैज्ञानिक शोध उपलब्ध नहीं है।

शीतपित्त या पित्ती में फायदेमंद दूर्वा घास -Durva Grass Beneficial in Urticaria in Hindi

आजकल के प्रदूषण भरे वातावरण में त्वचा संबंधी रोग होने का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। अगर किसी एलर्जी के कारण पित्ती निकल रही है तो दूर्वा एवं हल्दी का पेस्ट लगाने से कण्डू या खुजली, पामा (Scabies), दद्रु (Ringworm)तथा शीतपित्त या पित्ती में लाभ होता है।

मुंह के छाले में दूर्वा के फायदे -Durva Grass Beneficial in Mouth Ulcer in Hindi

अगर आप मुँह के छालों से परेशान है तो दूर्वा का रस या दूर्वा की पत्तियों को चबाना होता है। आपके लिये फायदेमंद हो सकता है क्योंकि दूर्वा में रोपण हीलिंग का गुण पाया जाता है, जो छालों को जल्दी ठीक करने में मदद करता है।

चोट से रक्तस्राव कम करे दूर्वा – Durva Grass Beneficial in Wound in Hindi

चोट लगने पर यदि रक्त एक बहाना बंद नहीं हो रहा है तो दूर्वा का लेप आपके लिये फायदेमंद हो सकती है क्योंकि दूर्वा में रक्त को बहने से रोकने का गुण पाया जाता है जिस कारण से चोट पर लगाते ही रक्त स्त्राव होना कम होने लगता है।

मानसिक रोग में दूर्वा के फायदे – Durva Grass Beneficial to Treat Mental Disease in Hindi

मानसिक रोग की चिकित्सा में भी दूर्वा का उपयोग मुँह से द्वारा लेकर किया जाता है, जैसे एपिलेप्सी। इसके लिए दूर्वा को सेवन किया जाता है जो कि एपिलेप्सी के दौरों को कम कर देता है, क्योंकि इसमें एंटी कंवलसेन्ट का गुण पाया जाता है।

सिर दर्द में दूर्वा के फायदे – Benefits of Durva Grass in Headache in Hindi
headache relief

सिर दर्द की समस्या में भी दूर्वा का उपयोग फायदेमंद होता है। इसके लिए दूर्वा को लेप सिर पर लगाए जिससे सिरदर्द की समस्या में आराम मिलता है।

कामशक्ति की कमी को पूरा करने में दूर्वा घास – Durva Grass Beneficial in Sexual Urge in Hindi

दूर्वा का सेवन कामशक्ति की कमी को दूर करने में भी किया जाता है, आयुर्वेद के अनुसार दूर्वा में वाजीकरण का गुण पाया जाता है जो कामशक्ति को बनाये रखने मदद करता है।

पेशाब करने के समस्या पर दूर्वा घास फायदेमंद – Durva Grass Beneficial in Urinary Diseases in Hindi

अगर आपको पेशाब उतरने में कष्ट हो रहा है तो दूर्वा का रस आपको फायदा दे सकता है, क्योंकि दूर्वा में मूत्रल यानि ड्यूरेटिक का गुण पाया जाता है। जिस कारण ये मूत्र के प्रवाह को बढ़ाकर मूत्र संबंधी रोगो में आराम देता है।

चेहरे की झांइया को दूर करें – Benefit of Durva Grass in Pigmentation in Hindi

चेहरे की झाइयां दूर करने में भी दूर्वा का लेप फायदेमंद होता है इसके लिए दूर्वा को पीसकर दूध के साथ लेप बनाये कर चेहरे पर लगाए जिससे त्वचा संबंधी विकार दूर होते है।

अपस्मार या मिर्गी में लाभकारी दूर्वा घास – Doob Grass for Epilepsy in Hindi

मिर्गी के कष्ट को कम करने के लिए दूब का इस तरह से सेवन करने से लाभ मिलता है। 5-10 मिली दूर्वा पञ्चाङ्ग के रस को पीने से अपस्मार में लाभ होता है।

मलेरिया के लक्षणों से दिलाये राहत दूब घास – Durva Grass to Treat Maleria in Hindi

मलेरिया के संक्रमण से राहत दिलाने में दूर्वा का इस तरह से सेवन करने पर जल्दी आराम मिलता है। दूब के रस में अतीस के चूर्ण को मिलाकर, दिन में दो तीन बार चटाने से मलेरिया के बुखार में अत्यधिक लाभ मिलता है।

दूर्वा घास का उपयोगी भाग – Useful Parts of Durva Grass

आयुर्वेद में दूर्वा घास (doob grass in hindi)के पञ्चाङ्ग और जड़ का प्रयोग औषधि के लिए किया जाता है।

दूर्वा घास का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए? – How to Use Durva Grass in Hindi

बीमारी के लिए दूर्वा घास के सेवन और इस्तेमाल का तरीका पहले ही बताया गया है। अगर आप किसी ख़ास बीमारी के इलाज के लिए दूर्वा घास का उपयोग कर रहे हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें।

FAQ:

Q: दूर्वा घास क्या होती है?
Ans: दूब या दुर्वा (वानस्पतिक नाम : Cynodon dactylon) एक घास है जो जमीन पर पसरती है। हिन्दू संस्कारों एवं कर्मकाण्डों में इसका उपयोग किया जाता है

Q: दूब का रस पीने से क्या फायदा?
Ans: आयुर्वेद के अनुसार दूब का स्वाद कसैला-मीठा होता है. इसमें प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, फाइबर, पोटाशियम पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं. इसका सेवन करने से मुंह के छाले ही नहीं कई तरह के पित्त एवं कब्ज विकारों को ठीक करने में भी मदद मिलती है.

Q: दूर्वा कैसे उगाए?
Ans: सबसे अच्‍छे बीज का चुनाव करें। आप चाहें तो वीट ग्रास, राई ग्रास या फिर फूलों वाली घास के बीज का चुनाव कर सकते हैं। ध्‍यान रहे कि बीज सूखी हो न कि गीली।

  • गमले का चुनाव अपनी पसंद से करें। घास को उगाने के लिये शीशे और मेटल के कंटेनर सबसे अच्‍छे माने जाते हैं। आप मिट्टी के गमले भी ले सकते हैं लेकिन उसमें सही आकार का छेद होना जरुरी है।
  • घास लगाने से पहले गमले के अंदर कुद पत्‍थर रखें जिससे गमले में अधिक पानी न ठहरे और वह छेद के दा्रा निकल जाए। इससे घास की जड़े सड़ेंगी नहीं और घास हरी-भरी रहेगी।
  • घास हमेशा मिट्टी के ऊपर ही उगती हैं और इनकी जड़ें नीचे मिट्टी तक नहीं पहुंच पाती। इसलिये कोशिश करें कि गमले में तीन इंच तक मिट्टी पड़े और मिट्टी के बीच में कोई खाली जगह न बचे।
  • ध्‍यान रहे कि मिट्टी में बहुत ज्‍यादा नमी या फिर जैविक खाद न रहे। इससे मिट्टी को ज्‍यादा पानी की जरुरत पड़ने लगती है और यह घास के लिये बिल्‍कुल भी फायदेमंद नहीं है।
  • घास की बीज को बहुत ज्‍यादा अंदर मिट्टी में डालें वरना उनको ऊपर तक आने में बहुत समय लगेगा।
  • घास को पानी देने के लिये स्‍प्रे केन का प्रयोग करें। इससे पानी बौछार की तरह घास के हर कोने-कोने पर अच्‍छे से पड़ जाता है। और घास की पानी की जरुरत भी पूरी हो जाती है।

Q: क्या दूर्वा भी घास है?
Ans: हां, दूर्वा भी घास का ही नाम है। असल में दूर्वा को ही दूब घास भी कहा जाता है।

Q: क्या हम दूर्वा घास खा सकते हैं ?
Ans: हां, दूर्वा घास को चबाकर खा सकते हैं। इसे चबाने से खून साफ हो सकता है

Q: दूर्वा घास कहां पाया और उगाया जाता है?
Ans: दूर्वा अर्थात् हरी घास प्राणी मात्र के लिए प्रकृति का बहुमूल्य उपहार है। यह घास हर जगह पाया जाता है।

Q: दूर्वा घास की उत्पत्ति कैसे हुई?
Ans: समुद्र मंथन के दौरान एक समय जब देवता और दानव थकने लगे तो भगवान विष्णु ने मंदराचल पर्वत को अपनी जंघा पर रखकर समुद्र मंथन करने लगे। मंदराचल पर्वत के घर्षण से भगवान के जो रोम टूट कर समुद्र में गिरे थे, वही जब किनारे आकर लगे तो दूब के रूप में परिणित हो गये

Q: दूर्वा घास के टोटके
Ans: गणपति के आशीर्वाद के साथ धन की देवी माता लक्ष्मी की कृपा पाना चाहते हों तो गणेश चतुर्थी के दिन पूरी श्रद्धा एवं विश्वास के साथ भगवान गणेश जी को पांच दूर्वा में 11 गांठें लगाकर चढ़ाएं. गणपति को दूर्वा चढ़ाते समय ‘श्री गणेशाय नमः दूर्वांकुरान् समर्पयामि’ मंत्र पढ़ें

  • पूजा-पाठ में प्रयोग में लाई जाने वाली मंगलकारी दूर्वा का मनोकामना की पूर्ति के लिए विशेष उपाय बताया गया है. यदि आप किसी बड़ी मनोकामना को शीघ्र ही पूरा करना चाहते हैं तो दूर्वा को गाय के दूध में लेप बनाकर तिलक लगाएं. इस उपाय से आपके सभी कार्य सफल होंगे.

Q: सपने में दूर्वा घास देखने का मतलब
Ans: अगर कोई व्यक्ति सपने में सपने में दूर्वा घास या हरी घास देखता है | तो उसका संकेत है | कि वह हर तरफ से धन लाभ होने वाला है | और उसके सारे बिगड़े काम बन जायेंगे |

Q: सफेद घास
Ans: सफेद घास (सफेद दूब) वास्तव में कोई अलग तरह की वनस्पति नहीं है। हरी दूब ही जब सफेद हो जाती है तो श्वेत दूब कहलाती है। यह पूरे वर्ष भर उगने वाला, आरोही, चिकना, बहु शाखाओं वाला तृण या घास होता है।

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