Ganesh Chaturthi 2021:

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Ganesh Chaturthi 2021: गणेश चतुर्थी 2021 (Ganesh Chaturthi 2021) आज पूरे देश में धूमधाम से मनाई जा रही है. सुबह से ही बप्पा को घर लाने की तैयारियां शुरू हो गईं. गणेश जी आज विराजमान होने के बाद 10 दिन बाद यानि 19 सिंतबर को अनंत चतुदर्शी पर विदा लेंगे.

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Ganesh Chaturthi 2021 

Puja Vidhi, Shubh Muhurat and Timings: आज से गणेशोत्सव (Ganesh Chaturthi) की शुरुआत हो गई है। वैसे तो ये पर्व पूरे भारत में मनाया जाता है लेकिन इसकी खास रौनक महाराष्ट्र में देखने को मिलती है।

गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) के दिन घर पर गणपति जी की स्थापना की जाती है और उनकी विधि विधान पूजा की जाती है। फिर एक निश्चित समय पर गणेश विसर्जन कर दिया जाता है। अगर आप घर पर गणपति बप्पा (Ganesh Chaturthi) की स्थापना करना चाहते हैं तो जानिए मूर्ति स्थापना, गणेश पूजन का शुभ मुहूर्त और विधि।

Ganesh Chaturthi 2021 Date

हरतालिका तीज (Hartalika Teej) के अगले दिन से गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2021) पर्व की शुरुआत हो जाती है। ये पर्व पूरे 10 दिनों तक चलता है। साल 2021 में इस उत्सव की शुरुआत 10 सितंबर से होने जा रही है और इसका समापन 19 सितंबर को अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi) के दिन होगा। जिसे गणेश विसर्जन (Ganesh Visarjan) के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश का जन्म हुआ था। जानिए गणेश चतुर्थी की पूजा विधि विस्तार से यहां।

गणेश चतुर्थी व्रत पूजन विधि

  • इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें।
  • इसके बाद तांबे या फिर मिट्टी की गणेश जी की प्रतिमा लें।
  • फिर एक कलश में जल भरें और उसके मुख को नए वस्त्र से बांध दें। फिर इस पर गणेश जी की स्थापना करें।
  • गणेश भगवान को सिंदूर, दूर्वा, घी और 21 मोदक चढ़ाएं और उनकी विधि विधान पूजा करें।
  • गणेश जी की आरती उतारें और प्रसाद सभी में बांट दें।
  • 10 दिन तक चलने वाले इस त्योहार में गणेश जी की मूर्ति को एक, तीन, सात और नौ दिनों के लिए घर पर रख सकते हैं।
  • ध्यान रहे कि गणेश जी की पूजा में तुलसी के पत्तों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।
  • गणेश पूजन में गणेश जी की एक परिक्रमा करने का विधान है।

Ganesh Chaturthi 2021 : गणेश चतुर्थी मुहूर्त

गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2021) पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11.03 AM से दोपहर 01.33 PM तक रहेगा। चतुर्थी तिथि की शुरुआत 10 सितंबर को 12.18 AM से हो जाएगी और इसकी समाप्ति रात 09.57 बजे होगी। इस दिन वर्जित चन्द्रदर्शन का समय 09:12 AM से 08:53 PM तक रहेगा।

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गणेश स्थापना विधि

गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2021) पूजा के लिए मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा सबसे उत्तम मानी जाती है। गणपति जी को इस दिन गाजे बाजे के साथ घर लाएं। एक चौकी पर पीले वस्त्र का आसन लगाकर उस पर गणेश प्रतिमा स्थापित करें। इस मंत्र से प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा करें-

अस्य प्राण प्रतिषठन्तु अस्य प्राणा: क्षरंतु च।
श्री गणपते त्वम सुप्रतिष्ठ वरदे भवेताम।।

इसके बाद गंगाजल और पंचामृत से गणेश जी का अभिषेक करें। उन्हें नए वस्त्र अर्पित करें। फिर चंदन, धूप, दीप, सिंदूर, फूल, मोदक और फल चढ़ाएं। उसके बाद गणेश जी की आरती करें। आप इन 10 दिनों में से जितने दिन के लिए गणेश जी को रखना चाहते हैं उतने दिन रख उनकी विधि विधान पूजा करें और निश्चित अवधि में उनका विसर्जन कर दें।

गणेश पूजन विधि

स्थापित की गई गणेश प्रतिमा की रोजाना विधि विधान पूजा करें। इसके लिए सूर्योदय से पहले उठ जाएं। स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें और गणेश जी की समक्ष बैठकर पूजा शुरू करें। भगवान गणेश का गंगाजल से अभषेक करें।

उन्हें अक्षत, फूल, दूर्वा चढ़ाएं। उन्हें उनके प्रिय मोदक का भोग लगाएं। इसके बाद धूप, दीप, अगरबत्ती जलाकर गणेश जी की अराधना करें। अंत में आरती उतार गणेश जी के मंत्रों को जाप करना चाहिए। शाम के समय गणेश जी का फिर से पूजन करना चाहिए। गणेश चालीसा का पाठ करें।

गणेश चतुर्थी पर नहीं देखा जाता चांद

मान्यता है गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2021) पर चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए क्योंकि इससे कलंक लगने का खतरा रहता है। अगर भूल से चंद्रमा के दर्शन हो जाएं तब इस मंत्र का 28, 54 या 108 बार जाप करने लेना चाहिए।

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चन्द्र दर्शन दोष निवारण मन्त्र:
सिंहःप्रसेनमवधीत् , सिंहो जाम्बवता हतः।
सुकुमारक मा रोदीस्तव, ह्येष स्यमन्तकः।।

गणेश जी के जन्म से जुड़ी कथा

पौराणिक मान्यताओं अनुसार एक बार पार्वती माता स्नान करने के लिए जा रही थीं। उन्होंने अपने शरीर की मैल से एक पुतले का निर्माण किया और उसमें प्राण फूंक दिए। माता पार्वती ने गृहरक्षा के लिए उसे द्वार पाल के रूप में नियुक्त किया। क्योंकि गणेश जी इस समय तक कुछ नहीं जानते थे

उन्होंने माता पार्वती की आज्ञा का पालन करते हुए भगवान शिव को भी घर में आने से रोक दिया। शंकरजी ने क्रोध में आकर उनका मस्तक काट दिया। माता पार्वती ने जब अपने पुत्र की ये दशा देखी तो वो बहुत दुखी हो गईं और क्रोध में आ गईं। शिवजी ने उपाय के लिए गणेश जी के धड़ पर हाथी यानी गज का सिर जोड़ दिया। गज का सिर जुड़ने के कारण ही उनका नाम गजानन पड़ा।

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गणेश जी को संकट हरता क्यूँ कहा गया

एक बार पुरे ब्रहमाण में संकट छा गया. तब सभी भगवान शिव के पास पहुंचे और उनसे इस समस्या का निवारण करने हेतु प्रार्थना की गई. उस समय कार्तिकेय एवम गणेश वही मौजूद थे, तब माता पार्वती ने शिव जी से कहा हे भोलेनाथ ! आपको अपने इन दोनों बालकों में से इस कार्य हेतु किसी एक का चुनाव करना चाहिए.

तब शिव जी ने गणेश और कार्तिकेय को अपने समीप बुला कर कहा तुम दोनों में से जो सबसे पहले इस पुरे ब्रहमाण का चक्कर लगा कर आएगा, मैं उसी को श्रृष्टि के दुःख हरने का कार्य सौपूंगा.

इतना सुनते ही कार्तिकेय अपने वाहन मयूर अर्थात मौर पर सवार होकर चले गये. लेकिन गणेश जी वही बैठे रहे थोड़ी देर बाद उठकर उन्होंने अपने माता पिता की एक परिक्रमा की और वापस अपने स्थान पर बैठ गये. कार्तिकेय जब अपनी परिक्रमा पूरी करके आये

तब भगवान शिव ने गणेश जी से वही बैठे रहने का कारण पूछा तब उन्होंने उत्तर दिया माता पिता के चरणों में ही सम्पूर्ण ब्रह्माण बसा हुआ हैं अतः उनकी परिक्रमा से ही यह कार्य सिध्द हो जाता हैं जो मैं कर चूका हूँ.

उनका यह उत्तर सुनकर शिव जी बहुत प्रसन्न हुए एवम उन्होंने गणेश जी को संकट हरने का कार्य सौपा. इसलिए कष्टों को दूर करने के लिए घर की स्त्रियाँ प्रति माह चतुर्थी का व्रत करती हैं और रात्रि में चन्द्र को अर्ग चढ़ाकर पूजा के बाद ही उपवास खोलती हैं.

आप सब से निवेदन है कि आप गणपति की स्थापना करें पर विसर्जन नही विसर्जन केवल महाराष्ट्र में ही होता हैं। क्योंकि गणपति वहाँ एक मेहमान बनकर गये थे। वहाँ लाल बाग के राजा कार्तिकेय ने अपने भाई गणेश जी को अपने यहाँ बुलाया और कुछ दिन वहाँ रहने का आग्रह किया था

जितने दिन गणेश जी वहां रहे उतने दिन माता लक्ष्मी और उनकी पत्नी रिद्धि व सिद्धि वहीँ रही इनके रहने से लालबाग धन धान्य से परिपूर्ण हो गया। तो कार्तिकेय जी ने उतने दिन का गणेश जी को लालबाग का राजा मानकर सम्मान दिया यही पूजन गणपति उत्सव के रूप में मनाया जाने लगा।

अब रही बात देश की अन्य स्थानों की तो गणेश जी हमारे घर के मालिक हैं। और घर के मालिक को कभी विदा नही करते वहीँ अगर हम गणपति जी का विसर्जन करते हैं तो उनके साथ लक्ष्मी जी व रिद्धि सिद्धि भी चली जायेगी तो जीवन मे बचा ही क्या। हम बड़े शौक से कहते हैं गणपति बाप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ इसका

मतलब हमने एक वर्ष के लिए गणेश जी लक्ष्मी जी आदि को जबरदस्ती पानी मे बहा दिया। तो आप खुद सोचो कि आप किस प्रकार से नवरात्रि पूजा करोगे, किस प्रकार दीपावली पूजन करोगे और क्या किसी भी शुभ कार्य कोकरने का अधिकार रखते हो जब आपने उन्हें एक वर्ष के लिए भेज दिया। इसलिए गणेश जी की. स्थापना करें पर विसर्जन कभी न करे।
ओम एकदंताय नमो नमः।।

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Q : गणेश चतुर्थी कब है ?
Ans : 10 सितंबर

Q : गणेश चतुर्थी कब मनाई जाती है ?
Ans : भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को

Q : गणेश चतुर्थी 2021 में पूजा का मुहूर्त क्या है ?
Ans : 11:11 से 13:41

Q : गणेश चतुर्थी का त्यौहार कैसे मनाते हैं ?
Ans : इस दिन मिट्टी से बने गणेश की स्थापना घर पर करके 10 दिनों तक उनकी पूजा की जाती है.

Q : गणेश चतुर्थी पर गणेश जी की घर पर स्थापना करने की प्रथा कब शुरू हुई ?
Ans : यह बाल गंगाधर तिलक जी ने सारे हिन्दू समाज में फैली असामाजिकता को दूर करके लोगों को एक साथ लाने के उद्देश्य से शुरू की थी.

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