Ganesh Jayanti : गणेश जयंती पूजा का शुभ मुहूर्त और गणेश जी को प्रसन्न करने के उपाय जानें

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Ganesh Jayanti : गणेश जयंती पूजा का शुभ मुहूर्त और गणेश जी को प्रसन्न करने के उपाय जानें
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Ganesh Jayanti : गणेश जयंती पूजा का शुभ मुहूर्त और गणेश जी को प्रसन्न करने के उपाय जानें
  • खास बातें
  • प्रथम पू्ज्य देव गणेशकी पूजा से प्राप्त होगा लाभ
  • गणेश जयंती पर शुभ मुहूर्त एवं विघ्नहर्ता की पूजा अर्चना
  • आज के दिन भूल से भी ना करें ये काम होगा मानसिक कष्ट

Ganesh Jayanti : गणेश जयंती पूजा का शुभ मुहूर्त और गणेश जी को प्रसन्न करने के उपाय जानें

Ganesh Jayanti : हिन्दू परम्पराओ एवं के मान्यताओं के अनुसार माघ मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन भगवान गणेश का जन्म हुआ था इसलिए गणेश जयंती के दिन गणेश जी की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. कहते हैं कि इस दिन विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करने से भक्तों को मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

Ganesh Jayanti 2021  : गणेश जयंती (Ganesh Jayanti) का त्योहार इस बार 15 फरवरी 2021 दिन सोमवार को मनाया जा रहा है. गणेश जयंती के पर्व को माघ विनायक चतुर्थी (Magh Vinayak Chaturthi), वरद चतुर्थी, तिलकुंड चतुर्थी आदि अन्य के नाम से भी जाना जाता है.

गणेश जयंती पर बन रहा रवि योग

इस वर्ष (2021) गणेश जयंती विशेष रवि योग (Ravi Yog) में मनायी जाएगी जो 15 फरवरी की सुबह 6.59 बजे से लेकर शाम में 6.29 बजे तक जारी रहेगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजन करने वालों की सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और ईश्वर अपने भक्त को सभी संकटों और विघ्नों से मुक्ति दिलाते हैं.

गणेश जयंती का शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)


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गणेश जयंती पर पूजा का शुभ मुहूर्त
गणेश जयंती की तिथि – 15 फरवरी 2021 दिन सोमवार

चतुर्थी तिथि आरंभ – 15 फरवरी 2021 की रात 1.58 बजे से.


चतुर्थी तिथि समाप्त – 16 फरवरी 2021 की प्रातःकाल 3.36 पर.

गणेश जयंती पूजा मुहूर्त- 15 फरवरी सुबह 11.28 बजे से दोपहर 1.43 बजे तक शुभ मुहूर्त.

पूजा की कुल अवधि – 2 घंटे 14 मिनट

गणेश जयंती पर रवि योग- 15 फरवरी प्रातःकाल 6.59 बजे से शाम में 6.29 बजे तक.

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गणेश जयंती पर क्या करें, पूजा विधि

  • गणेश चतुर्थी के दिन सुबह गणपति बप्पा के व्रत का संकल्प लें
  • शुभ मुहूर्त में किसी पाटे, चौकी लाल कपड़ा बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा या चित्र को स्थापित करें और पूजा आरंभ करें
  • गणेश जी को सिंदूर अर्पित करें और धूप-दीप जलाएं.
    विघ्नहर्ता . गणेश भगवान को मोदक, लड्डू, फूल, जनेऊ और 21 आदि अर्पित करें.
  • पूरे परिवार सहित गणेश जी की आरती करें.
  • इस दिन भगवान गणेश को तिल के लड्डू अर्पित करने चाहिए और तिल का प्रसाद भी बांटा जाता है.
  • नहाने के पानी में भी तिल मिलाकर स्‍नान करते हैं.

गणेश जयंती पर

कहा जाता है कि गणेश जयंती के दिन भूल से भी चंद्रमा का दर्शन नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा करने वाले व्यक्ति को मानसिक कष्ट से होते है और साथ ही व्रत ,पूजा का फल नहीं मिलता है इसके अलावा गणेश जयंती के दिन वाद-विवाद और घर में क्लेश आदि से भी बचना चाहिए.

विनायक चतुर्थी की व्रत कथा

एक दिन भगवान भोलेनाथ स्नान करने के लिए कैलाश पर्वत से भोगवती गए। महादेव के प्रस्थान करने के बाद मां पार्वती ने स्नान प्रारंभ किया और घर में स्नान करते हुए अपने मैल से एक पुतला बनाकर और उस पुतले में जान डालकर उसको सजीव किया गया।

पुतले में जान आने के बाद देवी पार्वती ने पुतले का नाम गणेश रखा। पार्वतीजी ने बालक गणेश को स्नान करते जाते वक्त मुख्य द्वार पर पहरा देने के लिए कहा। माता पार्वती ने कहा कि जब तक में स्नान करके न आ जाऊं किसी को भी अंदर नहीं आने देना।

भोगवती में स्नान कर जब श्रीभोलेनाथ अंदर आने लगे तो बाल स्वरूप गणेश ने उनको द्वार पर रोक दिया। भगवान शिव के लाख कोशिश के बाद भी गणेश ने उनको अंदर नहीं जाने दिया।

गणेश द्वारा रोकने को उन्होंने अपना अपमान समझा और बालक गणेश का सर धड़ से अलग कर वो घर के अंदर चले गए। शिवजी जब घर के अंदर गए तो वह बहुत क्रोधित अवस्था में थे।

ऐसे में देवी पार्वती ने सोचा कि भोजन में देरी की वजह से वो नाराज हैं, इसलिए उन्होंने दो थालियों में भोजन परोसकर उनसे भोजन करने का निवेदन किया।जब शिवजी ने दो थालियां लगी देखि तो माता पार्वती से पूछा कि दूसरी थाली किसके लिए है? तब माता पार्वती ने जवाब दिया कि दूसरी थाली पुत्र गणेश के लिए है,

जो द्वार पर पहरा दे रहा है। इस पर भगवान शिव ने देवी पार्वती से कहा कि उसका सिर मैने क्रोधित होने की वजह से धड़ से अलग कर दिया। इतना सुनकर पार्वतीजी दुखी हो गई और विलाप करने लगी। उन्होंने भोलेनाथ से पुत्र गणेश का सिर जोड़कर जीवित करने का आग्रह किया।

पार्वती माता के विलाप को देख महादेव ने एक हाथी के बच्चे का सिर धड़ काटकर गणेश के धड़ से जोड़ दिया। अपने पुत्र को फिर से जीवित पाकर माता पार्वती अत्यंत प्रसन्न हुई। कहा जाता है कि जिस तरह शिव ने श्रीगणेश को नया जीवन दिया था, उसी तरह भगवान गणेश भी नया जीवन अर्थात आरम्भ के देवता माने जाते हैं।

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