how to check tds of water at home |पीने के पानी का न्यूनतम टीडीएस स्तर | what is minimum tds for drinking water

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 minimum tds for drinking water
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how to check tds of water at home |पीने के पानी का न्यूनतम टीडीएस स्तर | minimum tds for drinking water

RO : हमारे दादाजी ने पानी को नदी में देखा, पिताजी ने कुंए में देखा, हमने पानी को नल में देखा और आजकल के बच्चे पानी को बोतल में देख रहे है। ये सब देखने सुनने के बाद क्या आपने कभी सोचा है कि अगर एक दिन के लिए भी आपको पीने का पानी न मिले तो क्या होगा.

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आप शायद अभी ये सोच भी न पाएं लेकिन ये आने वाले कल की सच्चाई हो सकती है.क्युकी हमारी धरती पर पानी लगातार घटता जा रहा है. इस सच्चाई को हम सभी जानते है. लेकिन फिर भी हम में से ज्यादातर लोग इसे लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं और इसका नतीजा ये है कि हमने घरों में लगे नालो सावर एवं RO सिस्टम से होने वाली पानी की बर्बादी और इससे स्वास्थ्य को पहुंचने वाले नुकसान के बारे में सोचना भी बंद कर दिया है.तो आइये आज की इस पोस्ट में इन सभी विषयो पर जानते है

पानी एक अच्छा विलायक होता है और इसमें गन्दगी भी आसानी से घुल जाती है। शुद्ध पानी को यूनिवर्सल सॉलवेंट कहा जाता है। ऐसा पानी बेस्वाद, बेरंग और बिना किसी गंध का होता है।और आजकल ज्यादातर लोगों के घरों में RO सिस्टम लगे हैं. उससे फिल्टर होकर आने वाले पानी को हम शुद्ध पानी मान लेते हैं.

हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैण्डर्ड ने RO या दूसरी तकनीक से साफ़ किये गए पानी के लिए एक आदर्श पैमाना तय किया है. पानी की शुद्धता को Total dissolved solids (TDS) में मापते हैं.

Bureau of Indian Standards के मुताबिक अगर एक लीटर पानी में TDS यानी Total Dissolved Solids की मात्रा 500 मिलीग्राम से कम है तो ये पानी पीने योग्य है. लेकिन ये मात्रा 250 मिलीग्राम से कम नहीं होनी चाहिए क्योंकि, इससे पानी में मौजूद खनिज आपके शरीर में नहीं पहुंच पाते

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आईए अब जानते हैं कि क्या उपयोगिता है TDS की 

TDS (Total Dissolved Solids) का अर्थ :- पूर्णत: घुले हुए ठोस पदार्थ। टीडीएस पानी में घुले हूए सभी कार्बनिक और अकार्बनिक ठोस पदार्थों का मापदंड है।
पानी में अकार्बनिक पदार्थ जैसे कैल्शियम, मैग्नेशियम, पोटैशियम, सोडियम, क्लोराइड और सल्फेट्स आदि पाए जाते हैं और कुछ मात्रा में कार्बनिक पदार्थ भी होते हैं।

पानी में इन खनिजों की एक निश्चित मात्रा तक उपस्थिति स्वास्थ के लिए आवश्यक है। लेकिन एक स्तर से ज़्यादा ये नुक़सानदायक है।

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टीडीएस का उपयोग :- पानी की शुद्धता को जांचने के लिए किया जाता है। इसके माध्यम से पता लगाया जाता है कि पानी शुद्ध है या नहीं और पीने योग्य है या नहीं।

minimum tds for water
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टीडीएस का मापन :- TDS को एमजी प्रति इकाई मात्रा (मिलीग्राम/लीटर) की यूनिट्स में लिखा जाता है या इसे Parts Per Miillion (PPM) के रूप में भी व्यक्त किया जाता है।

टीडीएस पानी की शुद्धता जांचने का एक मापक होता है। अगर आप पानी की कठोरता का मापन करना चाहें तो टीडीएस मीटर उपकरण लाकर इसकी जांच कर सकते हैं। 500 ppm पानी की TDS वैल्यू को बहुत कठोर माना जाता है।

WHO द्वारा तय मानक :- प्रति लीटर पानी में TDS की मात्रा 300 मिलीग्राम से कम होनी चाहिए. अगर एक लीटर पानी में 300 मिलीग्राम से 600 मिलीग्राम तक TDS हो तो उसे पीने योग्य माना जाता है. हालांकि अगर एक लीटर पानी में TDS की मात्रा 900 मिलीग्राम से ज्यादा है तो वो पानी पीने योग्य नहीं माना जाता है.

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कैसे TDS को कम करने की बिधि

पानी का टीडीएस कम करने के लिए कार्बन फिल्टर और RO जैसी प्योरिफाइंग तकनीकें काम में ली जाती हैं। RO यानी रिवर्स ओस्मोसिस ( Reverse Osmosis) प्रक्रिया कठोर पानी को नरम पानी में बदल कर देता है और पानी में मौजूद टीडीएस समाप्त हो जाते हैं।

पीने के पानी के लिए न्यूनतम टीडीएस स्तर क्या होना चाहिए और आरओ (RO) या दूसरी तकनीकों से पानी की शुद्धता का क्या हो पैमाना ?

पानी में TDS 100 मिलीग्राम से कम हो तो उसमें चीजें तेजी से घुल सकती हैं. प्लास्टिक की बोतल में बंद पानी में कम TDS हो तो उसमें प्लास्टिक के कण घुलने का खतरा भी रहता है. जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है. वहीं कई RO कंपनियां पानी को मीठा करने के लिए उसका टीडीएस घटा देते हैं.

65 से 95 टीडीएस होने पर पानी मीठा तो हो जाता है लेकिन उसमें से कई जरूरी मिनरल्स (Minerals) भी निकल चुके होते हैं, अधिकतर लोग इससे होने वाले नुक्सान को समझ नहीं पाते हैं. वाटर क्वालिटी इंडियन एसोसिएशन (Water Quality India Association) के सदस्यों ने एनजीटी (NGT) में RO का केस लड़ते हुए ये दलील दी थी कि देश के 13 राज्यों के 98 जिले ऐसे हैं जहां पानी को RO तकनीक से ही पीने योग्य बनाया जा सकता है.

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RO प्रणाली के लिये RO इनलेट पानी का टीडीएस लेवल जितना कम होगा RO मेम्ब्रेन की लाइफ उतनी ही ज्यादा बढ़ जाती है। उच्चतम स्तर पर यह वैल्यू 800 से 1000 mg/l हो तो RO system अच्छी तरह से काम करेगा नहीं तो अधिक टीडीएस होने पर RO सिस्टम का मेंटेनेन्स कार्य बढ़ जाता हैं।

how to check tds of water at home
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ध्यान रखने योग्य बातें

300 टीडीएस से कम लेवल वाला पानी स्वाद में सबसे अच्छा होता है और 900 टीडीएस से ज़्यादा वाला पानी स्वाद में ख़राब होता है।

जीरो टीडीएस को सही मानने की भूल ना करें क्योंकि पानी में कुछ खनिजों का मौजूद होना भी हमारे शरीर के लिए जरुरी होता है।इसलिए अपने घर में RO या UV सिस्टम लगवाने से पहले पानी के टीडीएस लेवल की जांच कर लें।

एक और जरूरी बात :- केवल TDS ही पानी की शुद्धता का मापक नहीं है। TDS सही होने के बावजूद कठोर पानी (Hard Water) हो सकता है। उसमें आर्सेनिक जैसी भारी धातुएँ हो सकती है, जो की पीने के लिए सुरक्षित नहीं है।

शरीर के लिए जरुरी है कैलोरी के मुताबिक पानी

शरीर के लिए जरुरी पानी की मात्रा पर दो शोध पर गौर करना जरुरी है. पहला 1945 में अमेरिका के फूड एंड न्यूट्रिशन बोर्ड ऑफ नेशनल रिसर्च काउंसिल (FNBNRC) ने शोध हर कैलोरी खाने को पचाने के लिए एक मिलीलीटर पानी पियें. मतलब यह कि कोई महिला या पुरुष दो हजार कैलोरी लेते हैं तो उन्हें दो लीटर पानी पीना होगा. जिसमें ना सादा पानी नहीं, बल्कि फलों, सब्जियों और दूसरे पेय पदार्थ से मिलने वाला पानी शामिल है.

इसी तरह 1974 में मारर्गेट मैक्लिलियम्स और फ्रेडरिक स्टेयर ने अपनी किताब “न्यूट्रिशन फॉर गुड हेल्थ” की पानी के ऊपर लिखे गए शोध की खूब चर्चा हुई. जहां यह सुझाया गया था कि हर वयस्क को रोज आठ गिलास पानी पीना चाहिए. पूरे दिन में आठ गिलास पानी पीने की अवधारणा का चलन इसी किताब की दें मानी जाती है. किताब के लेखकों ने आठ गिलास में फलों और सब्जियों से मिलने वाले पानी के अलावा कोल्ड ड्रिंक और बीयर को भी शामिल किया.

पानी के लिए जरुरी है कि शरीर की जरूरत को समझें

इन दोनों शोधों ने दुनिया में पानी को लेकर एक जागरूकता जरुर आई, लेकिन कई दूसरे शोधों के मुताबिक पानी की यह मात्रा किसी तरह से न तर्कसम्मत है और न ही सभी के शरीर के लिए सही है.

दरअसल, किसी भी स्वस्थ शरीर में पानी की जरूरत होते ही दिमाग को पता चल जाता है और इस तरह इंसान के अंदर पानी की तलब होती है. ब्रिटेन की डॉक्टर और खिलाड़ियों की सलाहकार कोर्टनी किप्स कहती हैं, ‘अगर आप अपने शरीर की बात सुनेंगे, तो यह बता देता है कि आप को प्यास कब लगी है.”

वैज्ञानिकों को अब तक ऐसे कोई सबूत नहीं मिले, जो यह कहें कि अच्छी सेहत के लिए खूब पानी पीना चाहिए. इसका सीधा मतलब यह है कि जब प्यास महसूस हो, तभी आप पानी पियें. हालांकि थोड़ा-बहुत पानी ज्यादा पीने से या कम पीने से कोई नुकसान नहीं है.

अगर नल का पानी साफ यानी ठीक ठाक आता है तो स्टील के बर्तन में पानी को उबालकर और उसे ठंडा करके भी पीने योग्य बना सकते हैं. आप घड़े का प्रयोग भी कर सकते हैं. घड़ा प्राकृतिक तरीके से पानी को ठंडा भी रखता है और उसे फिल्टर करने का काम भी करता है.

ऋग्वेद के हिसाब से पानी

साफ और शुद्ध पानी क्या होता है इसका जि​क्र वेदों में भी मिलता है. ऋग्वेद के हिसाब से पानी,
शीतलम यानी ठंडा
सुशीनी यानी साफ
सिवम यानी उसमें जरूरी खनिज होने चाहिए
और पानी इश्टम यानी पारदर्शी होना चाहिए.

यानी पानी को साफ होना चाहिए, ठंडा होना चाहिए, पारदर्शी होना चाहिए और खनिज युक्त होना चाहिए. अगर आपका पानी इन पैमानों पर खरा नहीं उतरता तो समझ जाइए कि आप अपने स्वास्थ्य के साथ समझौता कर रहे हैं.

उम्मीद है पीने के पानी का टीडीएस कितना होना चाहिए और पानी की बर्बादी को कैसे रोके ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

अंत में एक अपील आप सब से :- “आपका RO सिस्टम औसतन 3 लीटर पानी मे से केबल 1 लीटर पानी ही फ़िल्टर करता हैं इसलिए आप सब से अनुरोध हैं कृपया उस 3 लीटर अशुद्ध पानी का उपयोग अपने अन्य घरेलू कार्यो में करें जिससे पानी की बर्बादी न हो”।

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