शर्मसार हुई मानवता: फटे पेट ही अस्पताल ने निकाला’: 3 साल की खुशी की हुयी मौत

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शर्मसार हुई मानवता: फटे पेट ही अस्पताल ने निकाला’: 3 साल की खुशी की हुयी मौत
शर्मसार हुई मानवता: फटे पेट ही अस्पताल ने निकाला’: 3 साल की खुशी की हुयी मौत
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शर्मसार हुई मानवता: फटे पेट ही अस्पताल ने निकाला’: 3 साल की खुशी की मौत पर NCPCR सख्त

पिता ने आरोप लगाया है कि अस्पताल ने सर्जरी के नाम पर उनसे 1.5 लाख रुपए ऐंठ लिए थे और 5 लाख की डिमांड की जा रही थी। NCPCR ने डीएम से इस बाबत रिपोर्ट माँगी है और अस्पताल कर्मचारियों

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व डॉक्टरों के खिलाफ FIR दर्ज करने को कहा है।

Humanity is ashamed: prayagraj 3 year old khushi died private hospital,

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज ( prayagraj) में एक प्राइवेट अस्पताल का अमानवीय चेहरा सामने आया है। इसके कारण अस्पताल के गेट पर शुक्रवार को 3 वर्षीय खुशी की मौत हो गई। आरोप है कि अस्पताल ने पूरे रुपए न मिलने के कारण बच्ची के पेट की स्टिचिंग नहीं की और फटे पेट के साथ ही उसे बाहर निकाल दिया।

निजी अस्पताल की इस हरकत के कारण बच्ची की मौत से आक्रोशित लोगों ने जमकर हंगामा किया। रास्ता जाम करने की कोशिश भी की गई, लेकिन अस्पताल वालों ने दरवाजा नहीं खोला। इस मामले में ट्विटर पर की गई शिकायत पर जिलाधिकारी ने एडीएम व सीएमओ की दो सदस्यीय टीम बनाकर मामले की जांच के आदेश दिए हैं। 

क्या है पूरा मामला

करेली के करेंहदा निवासी मुकेश मिश्र ने तीन साल की बेटी ख़ुशी को पेट दर्द की शिकायत के बाद 15 फरवरी को इस अस्पताल में दाखिल कराया था। डॉक्टरों ने बताया कि उसकी आंतें सिकुड़ रही हैं, जो ऑपरेशन बाद ठीक होगी। 2 दिनों बाद ऑपरेशन तो किया, लेकिन डॉक्टरों पर इसे ठीक तरीके से अंजाम नहीं किया।

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इसके बाद ख़ुशी को कोई आराम न मिलने के कारण 5 दिन बाद फिर से सर्जरी की गई। मुकेश का आरोप है कि इसके बाद डॉक्टरों ने टाँके भी नहीं लगाए और दो मार्च को डॉक्टरों ने दर्द से कराह रही खुशी का इलाज करने के बजाय उसे कहीं और लेकर जाने को कहा। बच्ची उस समय दर्द से कराह रही थी। ख़ुशी को इसके बाद चिल्ड्रन होम ले जाया गया,

लेकिन वहाँ भी डॉक्टरों ने बच्ची की गंभीर स्थिति को देख कर उसे दाखिल करने से इनकार कर दिया। खुशी की हालत में सुधार नहीं होता देख, परिजन हार कर शुक्रवार (मार्च 5, 2021) को बच्ची को लेकर पुनः उसी अस्पताल में पहुँचे।

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जहां खुशी का ऑपरेशन हुआ था वहाँ उन्हें दरवाजे पर ही रोक दिया गया। वे अपनी बच्ची को गोद में लेकर करीब दो घंटे इधर-उधर भटकते रहे

लेकिन गार्ड ने उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। इस बीच दर्द से तड़प रही खुशी ने अस्पताल गेट पर पिता की गोद में ही दम तोड़ दिया। मासूम की मौत से नाराज परिवारीजन हंगामा करने लगे। करेंहदा से भी परिचितों को बुलाया गया।

थोड़ी ही देर में वहां जुटी भीड़ हंगामा करने लगी। परिजनों और रिश्तेदारों के आक्रोश के बाद अस्पताल प्रशासन की सूचना पर वहां पिपरी, कोखराज, परिश्चम शरीरा सहित कई थानों की फोर्स पहुंच गई। सीओ चायल भी पहुंचे।

खुशी के परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि अस्पताल ने सर्जरी के नाम पर उनसे 1.5 लाख रुपए ऐंठ लिए थे और तब भी अस्पताल द्वारा 5 लाख की डिमांड की जा रही थी।

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सीओ ने लोगों को शांत कराया। सीओ ने बताया कि खुशी के परिजनों ने मुकदमा दर्ज कराने को तहरीर नहीं दी है। मंझनपुर में शव का पोर्टमॉर्टम हुआ। प्रयागराज के जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी ने कहा है कि मामला बेहद गंभीर है।

जिलाधिकारी ने आश्वासन देते हुए कहा है की जांच के लिए अपर जिलाधिकारी (नगर) व मुख्य चिकित्साधिकारी की दो सदस्यीय टीम गठित की है। च्ची की मौत के मामले में अस्पताल प्रशासन कि लापरवाही सामने आने पर के खिलाफ कार्रवाई होगी।

prayagraj DM
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बाल आयोग ने लिखा डीएम को खत

इस मामले के सुर्खियों में आने के बाद राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) ने डीएम से इस बाबत रिपोर्ट माँगी है तथा इस मामले की सख्ती से जांच करें और उचित धाराओं में केस दर्ज हो। और अस्पताल कर्मचारियों व डॉक्टरों के खिलाफ FIR दर्ज करने को कहा है।

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