Independence Day 2021:जानिए 15 अगस्त के पीछे की कहानी क्या है

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15 अगस्त का इतिहास
15 अगस्त का इतिहास
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Independence Day 2021: देश में स्‍वतंत्रता दिवस हर साल 15 अगस्त को मनाया जाता है. 15 अगस्‍त 1947 ये वो दिन है जब हमें आजादी मिली. आपको बता दें आजादी आधी रात के समय मिली थी. 15 अगस्त के दिन ही हम आजादी का ये दिन मनाते हैं,

जानिए 15 अगस्त के पीछे की कहानी क्या है. क्यों ये दिन आजादी के लिए चुना गया ?

15 अगस्त हमें महात्मा गांधी, भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद समेत सैंकड़ों महान स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, तपस्या और बलिदान की याद दिलाता है।

हर वर्ष आजादी की सालगिरह पर स्कूलों, कॉलेजों, दफ्तरों आदि में कई कार्यक्रमों का आयोजन होता है जहां देशभक्ति के गीत बजाए जाते हैं और लोग भाषण देते हैं। कोरोना की वजह से अधिकांश जगहों पर यह कार्यक्रम ऑनलाइन होगा। इस मौके पर हम स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद कर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं।

साल 2021 में स्वतंत्रता दिवस

इस साल हम अपना 75 वां आजादी दिवस मनाने जा रहे हैं और इस वर्ष यह दिन sunday के दिन आ रहा है. साथ में ही इस बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण के विषय को लेकर लोगों से सुझाव भी मांगे हैं

और उन्होंने लोगों से कहा है कि वो उन्हें बताए कि वो इस दिन दिल्ली के लाल किले से किस विषय पर भाषण दें. पीएम मोदी ने ट्वीट के जरिए लोगों से उनके ये सुझाव मांगे हैं और लोगों द्वारा उन्हें कई विषयों के सुझाव भी दिए जा रहे हैं.

स्वतंत्रता दिवस 2021 मुख्य अतिथि -Chief Guest

हर साल स्वतंत्रता दिवस के दिन हमारी सरकार द्वारा अन्य देश से किसी ना किसी व्यक्ति को बतौर मुख्य अतिथि के तौर पर निमंत्रण दिया जाता है. हालांकि इस साल इस दिवस पर सरकार द्वारा किसी भी व्यक्ति को मुख्य अतिथि के तौर पर नहीं बुलाया गया है.

राष्ट्रीय गान जागरूकता अभियान

स्वतंत्रता दिवस के दिन राष्ट्रीय गान जागरूकता अभियान भी शुरू किया जाएगा और इस अभियान के जरिए लोगों को बताया जाएगा, कि वो किस तरह से हमारे देश का राष्ट्रीय गान गाएं. क्योंकि हमारे देश में अभी भी कई ऐसे लोग हैं जिन्हें राष्ट्रीय गान के शब्द सही से बोलना नहीं आते हैं. ये अभियान सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति संतोष हेगड़े के नेतृत्व में शुरू होगा.

भारत के इतिहास का महत्वपूर्ण और गौरवशाली दिन 15 अगस्त 1947

15 अगस्त 2021 (independence day) को भारत देश की स्वतंत्रता को पूरे 75 साल पूरे हो जाएंगे। इतिहास के पन्नों पर सुनहरे अक्षरों में लिखा गया एक ऐसा दिन जिस दिन भारत के स्वतंत्रता सेनानियों ने सब कुछ न्योछावर कर देने के बाद स्वतंत्रता का स्वाद चखा था।

भारत के इतिहास का एक ऐसा दिन जब पहली बार देश में प्रधानमंत्री का चुनाव करके पंडित जवाहरलाल नेहरू को देश का प्रधानमंत्री घोषित कर सम्मानित किया गया था। भारत देश और देश की राजधानी के लिए ऐसा ऐतिहासिक दिन जब पहली बार दिल्ली में लाल किले पर स्वतंत्रता का तिरंगा झंडा लहराया गया था। भारतीय लोग आज भी प्रत्येक वर्ष इस दिन को एक उत्सव के रूप में मनाते है।

15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्त होने के बाद से ही इस दिन का नाम स्वतंत्रता दिवस रख दिया गया। आज भी प्रत्येक वर्ष इस दिन उन महान वीर जवानों को महान आत्माओं को पूरे देश वासियों की तरफ से नमन किया जाता है

और श्रद्धांजलि दी जाती है। भारत देश जिन वीर सेनानियों के नेतृत्व में आजाद हुआ आज भी उन्हें प्रत्येक भारतवासी सम्मान की दृष्टि से देखता है और अपने अपने अंदाज में उनको नमन करते हुए 15 अगस्त (independence day) के दिन को मनाता है।

भारतीय स्वतंत्रता दिवस का इतिहास

प्रारंभ में जब भारत बहुत ही पिछड़ा हुआ देश था तब 400 वर्ष पहले ईस्ट इंडिया कंपनी जो अंग्रेजों द्वारा बनाई गई थी, भारत में व्यापार करने के लिए आई। उन दिनों पाकिस्तान और बांग्लादेश भी भारत देश से अलग नहीं था। भारत देश पिछड़ा होने के साथ-साथ बहुत गरीब भी था

जिसके चलते अंग्रेजों ने अपना व्यापार यहां पर शुरू किया और गरीबों को मजदूर बनाना शुरु कर दिया। गरीबों पर अत्याचार करना धीरे-धीरे उनकी आदत बन गई और उनका फायदा उठाकर उन्हें पैसा उधार देकर उन्हें कर्ज में दबा दिया करते थे। बेचारे गरीब लोग उनसे पैसा देने के बाद जब पैसा चुका नहीं पाते थे, तो अंग्रेजों के गुलाम बनते चले गए। देश में बहुत से राजा थे

उस समय उनकी भी अंग्रेजों ने धन दौलत से मदद की और उनको अपने अधीन कर लिया कुछ राजा जिन्होंने अधीन होने से मना कर दिया उन पर आक्रमण करके उन राजाओं को अपने अधीन करते चले गए। कुछ समय के अंतराल में ही पूरे भारत पर अंग्रेजों ने अपना नियंत्रण जमा लिया।

भारतीयों पर अत्याचार

भारत पर नियंत्रण जमाने के बाद धीरे-धीरे उनका रवैया और ज्यादा सख्त होता गया। भारत के गरीब लोगों पर बेवजह अत्याचार करना, उनसे कर वसूलना, उनके खेतों पर कब्जा कर लेना अनाजों को हत्या लेना और भारतीय लोग भूख से तड़प कर मरने लगे। अंग्रेजों के अत्याचार का विरोध जब भी कोई करता तो उन पर गोलियां चला दी जाती थी। जलियांवाला बाग में जो कांड हुआ था वह आज भी गवाह है कि किस तरह अंग्रेजों ने भारतीय लोगों पर जुल्म ढाया था।

अंग्रेजो के खिलाफ भारतीयों का गुस्सा

जैसे जैसे अत्याचार बढ़ते गए वैसे वैसे अंग्रेजों के खिलाफ भारतीय लोगों के दिलों में भी गुस्सा और बदले की भावना बढ़ती चली गई। विरोध और गुस्से की उस भावना ने पहली बार 1857 में मंगल पांडे के रूप में जन्म लिया जब मंगल पांडे ने विद्रोह कर अंग्रेजो के खिलाफ आवाज उठाई। अंग्रेजो के खिलाफ उठे उस विद्रोह को अंग्रेजों ने तुरंत मार दिया जिससे भारतीय लोगों में अंग्रेजों के प्रति कई गुना गुस्सा बढ़ गया और नए-नए आंदोलनों ने जन्म लेना शुरू कर दिया।

आजादी की मांग

अब भारतीय लोग भारत के लोगों पर अत्याचार सहन नहीं कर पा रहे थे उनका गुस्सा अब सिर्फ आजादी चाहता था। मंगल पांडे के विरोध के बाद धीरे-धीरे देश के विभिन्न स्थानों पर विरोध की आवाज उठती चली गई, और अंग्रेजों के अत्याचार के खिलाफ देश में विद्रोह बढ़ता चला गया।

स्वतंत्रता के लिए स्वतंत्रता सेनानियों का महत्वपूर्ण योगदान

देश में विद्रोह की आग कुछ इस तरह फैल गई कि उस आग से भारत देश में बहुत बड़े-बड़े स्वतंत्रता सेनानियों ने जन्म ले लिया। स्वतंत्रता कि इस लड़ाई में महत्वपूर्ण और अतुल्य योगदान महात्मा गांधी ने निभाया। अंग्रेजों को भारत पर राज करते हुए लगभग 200 साल से भी ज्यादा का समय हो गया था,

तब गांधीजी ने अपनी आवाज उठाई और सत्य और अहिंसा जैसे दो हथियारों को अपना साधन बना लिया। अहिंसा का नारा लगाते हुए गांधी जी ने देश के बहुत सारे देशवासियों को अपनी ओर कर लिया और अत्याचार के खिलाफ लड़ना सिखाया। गांधी जी की बातों का लोगों पर बहुत असर हुआ

जिसके चलते देश के अधिकतम लोगों ने आजादी की लड़ाई में बढ़-चढ़कर अपना योगदान दिया। लोगों के प्यार सम्मान और गांधीजी के प्रति भाव ने गांधी जी को बापू के नाम से मशहूर कर दिया।

कुछ अन्य स्वतंत्रता सेनानियों का आजादी में योगदान

हालांकि बापू ने पूरे हिंदुस्तान को विरोध की आग से भड़का दिया था जिसकी वजह से स्वतंत्रता का संग्राम पूरे हिंदुस्तान में फैल गया। अब बाबू के पद चिन्हों पर चलने वाले और भी कई महान नेताओं ने देश में जन्म लिया जैसे  सरदार वल्लभभाई पटेल, बाल गंगाधर तिलक और अन्य बहुत से ऐसे स्वतंत्रता सेनानी अहिंसा की इस लड़ाई में उतर कर आए जिन्हें स्वतंत्रता सेनानी का खिताब दिया गया।

अंग्रेजी हुकूमत को खत्म करने के लिए बिना लड़ाई के जितना गांधी जी ने काम किया, उतना ही कुछ ऐसे क्रांतिकारी ने भी लड़ाई करके अंग्रेजो के खिलाफ आवाज उठाई. उन्होंने देश को आजाद कराने के लिए खुद को कुर्बान कर दिया जिनमें मुख्य क्रांतिकारियों के नाम आज भी याद किए जाते हैं

जैसे मंगल पांडे, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह राजगुरु आदि। देश के महान क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों की मेहनत और लग्न रंग लाई, आखिरकार 15 अगस्त 1947 (independence day) को अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। इसलिए प्रत्येक वर्ष बहुत इंतजार के बाद आए इस दिन को स्वतंत्रता दिवस के रुप में मनाया जाता है।

आजादी का जश्न

15 अगस्त (independence day) का दिन जैसे ही आता है सभी लोगों के दिलों में अपने आप देशभक्ति उमड़ पड़ती है, और देश भक्ति भरे गाने और फिल्मों को देखने का मन करता है। भले ही स्वतंत्रता की लड़ाई का हिस्सा आज के नौजवान नहीं बन पाए हो, लेकिन आज भी अपने देश को लेकर और उन सेनानियों को लेकर उनके दिल में वही प्रेम भाव और सम्मान जीवित है

जो हर 15 अगस्त (independence day) को हर जवान और बूढ़े की आंखों से जरूर झलकता है। टेलीविजन पर भी विभिन्न कार्यक्रम गीत संगीत प्रसारित किए जाते हैं जो भारत देश की स्वतंत्रता का महत्व समझाते हैं।

15 अगस्त 1947 का वह एक ऐसा दिन था जो यादगार होने के साथ-साथ बेहद भावुक कर देने वाला भी है। उस दिन पहली बार जवाहरलाल नेहरु जी ने जो भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के रूप में जाने गए देश के नागरिकों को संबोधित किया और देश का गौरव भारतीय झंडा लहराया।

इस प्रथा को 15 अगस्त 1947 को प्रारंभ किया गया था जिसे आज तक प्रत्येक प्रधानमंत्री द्वारा निभाया जाता है। दिन प्रतिदिन देशभक्ति वाले कार्यक्रम में बढ़ोतरी हुई है

हर साल लाल किले पर झंडा रोहण के साथ-साथ परेड होती है और देश के गौरव को दर्शाया जाता है। देश के गौरव के साथ-साथ लाल किले पर बहुत सारे ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं जो भारत देश की विभिन्न प्रकार की संस्कृति को दर्शाते हैं।

उपसंहार

भारत पूरी तरह से विविधताओं वाला देश है जहां पर करोड़ों लोग अलग-अलग धर्म विभिन्न परंपराओं और संस्कृति के होने के बावजूद भी एक साथ रहते हैं। भले ही वे अपने त्यौहार अलग-अलग मनाते हो लेकिन जब स्वतंत्रता दिवस की बात आती है तब पूरा भारत एक ही रंग में दिखाई देता है।

भारतीय होने के नाते प्रत्येक भारतीय अपने आप पर गर्व करता है और उन्हें गर्व करना भी चाहिए. साथ ही यह वादा भी करना चाहिए कि अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए हम हर मुश्किल से पूरी इमानदारी और श्रद्धा भाव के साथ टकराएंगे।

15 अगस्त के बारे में
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