International Day of Women and Girls in Science

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International Day of Women and Girls in Science
International Day of Women and Girls in Science
mage by :gktoday

प्रतिवर्ष 11 फरवरी को विज्ञान महिलाओं व बालिकाओं के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस (International Day of Women and Girls in Science) मनाया जाता है। इस दिन विज्ञान और प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली महिलाओं और लड़कियों को याद किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा दिसंबर 2015 में, 11 फरवरी को विज्ञान में महिलाओं एवं बालिकाओं का अंतर्राष्ट्रीय दिवस

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मनाने का प्रस्ताव अपनाया गया था।

तथा इसे पहली बार 2016 में मनाया गया था। जिसका उद्देश्य महिलाओं को विज्ञान, प्रौद्योगिकी तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित के क्षेत्र में लाने के लिए प्रोत्साहित करना है। के क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डालना है।इस दिवस को संयुक्त राष्ट्र द्वारा विश्व भर में विज्ञान व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महिलाओं को बढ़ावा देने वाले संगठनों के साथ मिलकर मनाया जाता है।

Theme: Women Scientists at the forefront of the fight against COVID-19

महिलाओं व बालिकाओं को विज्ञान व प्रौद्योगिकी (International Day of Women and Girls in Science) क्षेत्र में बढ़ावा देना अति आवश्यक है। क्युकी वर्तमान में विश्व में महिलाओं अनुसंधानकर्ता केवल 30% है। STEM (Science, Technology, Engineering and Mathematics) क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी पुरुषों की अपेक्षा बहुत कम है।

विज्ञान क्षेत्र में महिलाओं और लड़कियों की कम भूमिका के वैश्विक आकड़ें

  • वर्ष 1901 से 2019 के मध्य फिजिक्स, केमिस्ट्री और मेडिसिन के क्षेत्र में 616 लोगों को कुल 334 नोबेल पुरस्कार दिए गए एवं इनमें सिर्फ 20 महिलाएं शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि फ्रांस की महान वैज्ञानिक मैरी क्यूरी को दो बार यह पुरस्कार मिला है।
  • वर्तमान में शोधकर्ता महिलाओं की हिस्सेदारी 30% से भी कम है।
  • स्टैम/STEM विषयों में महिलाओं द्वारा प्रकाशित शोध की संख्या कम है, उन्हें अपने शोध का मेहनताना भी कम मिलता और पुरुष सहकर्मियों की तुलना में वे करियर में उतना आगे नहीं बढ़ पातीं।
  • यूनेस्को के आंकड़ों (2014 से 2016) पर हम नजर डालें तो हमें पता चलता है कि कुल महिला छात्रों में से मात्र 30% महिलाएं उच्च शिक्षा में STEM(विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी और गणित -एसटीईएम या स्टेम) क्षेत्रों का चयन करती हैं।
  • अगर हम STEM क्षेत्र में महिलाओं का नामांकन देखे तो निम्न तथ्य सामने आते हैं-आईसीटी (3 प्रतिशत), प्राकृतिक विज्ञान, गणित और सांख्यिकी (5 प्रतिशत) और इंजीनियरिंग, विनिर्माण और निर्माण (8 प्रतिशत)।
  • 2015 के ‘जेंडर बायस विदाउट स्टडीज’की रिपोर्ट के अनुसार STEM क्षेत्रों की नौकरियों में महिलाओं का हिस्सा मात्र 12% था।
  • 2016 के केली ग्लोबल वर्कफोर्स इनसाइट सर्वेक्षण के अनुसार स्टेम में नामांकित पूर्व स्नातक छात्र-छात्राओं का प्रतिशत 46 है, लेकिन आगे चलकर बड़ी संख्या में महिलाएं इसे करियर नहीं बनातीं।
  • 2016 में हुए केली ग्लोबल वर्कफोर्स इनसाइट सर्वेक्षण के अनुसार स्टेम के क्षेत्रों में नौकरी कर रही महिलाओं में 81 प्रतिशत का मानना है कि प्रदर्शन आकलन में पुरुषों की तुलना में उनके साथ भेदभाव किया जाता है।

इस प्रकार हमारे सामने जो निष्कर्ष आता है वह यही दर्शाता है कि विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका काफी कम है एवं इसे बढ़ाने के लिए इस दिशा में सभी को सम्मिलित प्रयास करना होगा।

विज्ञान क्षेत्र में महिलाओं और लड़कियों की कम भूमिका के भारतीय आकड़ें

  • दुनिया 28. 8 प्रतिशत महिला शोधकर्ता के विपरीत भारत में केवल 13.9 फीसदी महिला शोधकर्ता हैं।
  • नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 2015-16 में ग्रेजुएट कोर्स में 9.3% छात्राओं ने इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था एवं 4.3 % महिलाओं ने चिकित्सा विज्ञान में दाखिला लिया। मास्टर और डॉक्टरेट स्तर पर महिलाओं का पंजीकरण और भी कम रहा।

  • नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार आईआईटी, एनआईटी, इसरो और डीआरडीओ सहित 620 से अधिक संस्थानों और विश्वविद्यालयों में महिला वैज्ञानिक और प्रशासनिक कर्मचारियों की संख्या की स्थिति भी काफी चिंतनीय है। इन संस्थानों में महिला वैज्ञानिकों की संख्या 20 प्रतिशत, पोस्ट डॉक्टरेट में 28.7 फीसदी और पीएचडी महिलाओं की संख्या 33.5 प्रतिशत है।

विज्ञान क्षेत्र में महिलाओं और लड़कियों की कम भूमिका के प्रमुख कारण

  • लैंगिक रूढ़िवादी दृष्टिकोण
  • रोल मॉडल का अभाव
  • सहयोग न देने वाली या प्रतिरोधी नीतियां
  • पितृसत्तात्मक मानसिकता
  • बच्चों के पालन-पोषण इत्यादि दोहरे पारिवारिक दायित्व के कारण नौकरी छोड़ना
  • प्रदर्शन आकलन में पुरुषों की तुलना में उनके साथ भेदभाव

विज्ञान क्षेत्र में महिलाओं और लड़कियों की भूमिका बढाने हेतु भारत सरकार के प्रयास

विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी और गणित (एसटीईएम या स्टेम) में महिलाओं की कम हिस्सेदारी को देखते हुए भारत सरकार के द्वारा छात्राओं में इन क्षेत्रों के प्रति रुचि विकसित करने और इन विषयों के अध्ययन के लिए कई सारी योजना समय-समय पर लाई गई है

विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका बढ़ाने हेतु महत्वपूर्ण कार्यक्रम निम्न है

  • ‘किरण’ (तालीम के माध्यम से अनुसंधान विकास में ज्ञान भागीदारी) योजन
  • ‘क्यूरी’ (महिला विश्वविद्यालयों में नवाचार और उत्कृष्टता के लिए अनुसंधान कार्यों का समेकन) कार्यक्रम
  • महिला वैज्ञानिक योजना (WOS)
  • STEMM में महिलाओं के लिए इंडो-यूएस फैलोशिप
  • इंस्पायर योजना और इंस्पायर अवार्ड मानक योजना
  • बायो-टेक्नोलॉजी करियर एडवांसमेंट एंड रेओरिएंटशन (बायो -केयर ) स्कीम

न्यूज़ सौजन्य  : dhyeyaias.com

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