International Family Day 2021: विश्व परिवार दिवस का इतिहास महत्व एवं थीम

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International Family Day 2021: विश्व परिवार दिवस का इतिहास महत्व एवं थीम

International Family Day 2021: ‘वसुधैव कुटुंबकम्’अर्थात पूरी पृथ्वी हमारा परिवार है। परिवार के बिना मानव अस्तित्व के विषय में कभी सोचा नहीं जा सकता। लोगों से परिवार बनता हैं और परिवार से राष्ट्र और राष्ट्र से विश्व बनता हैं।
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अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस (International day of families 2021) हर साल 15 मई को मनाया जाता है। परिवार समाज की मूल इकाई है। यह दिन परिवारों से संबंधित मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और उन्हें प्रभावित करने वाली सामाजिक, आर्थिक और जनसांख्यिकीय प्रक्रियाओं के बारे में ज्ञान बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है। 

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International Family Day 2021 : परिवार के महत्व और उसकी उपयोगिता को प्रकट करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 15 मई को संपूर्ण विश्व में ‘अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस’ (International day of families 2021) मनाया जाता है। इस दिन की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र अमेरिका ने 1994 को अंतरराष्ट्रीय परिवार वर्ष घोषित कर की थी। तब से इस दिवस को मनाने का सिलसिला जारी है।

अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस 2021 (International Day of Families 2021)

अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस शनिवार, 15 मई 2021 को दुनिया भर में मनाया जायेगा।

कहते हैं कि परिवार से बड़ा कोई धन नहीं होता हैं, पिता से बड़ा कोई सलाहकार नहीं होता हैं, मां के आंचल से बड़ी कोई दुनिया नहीं, भाई से अच्छा कोई भागीदार नहीं, बहन से बड़ा कोई शुभ चिंतक नहीं इसलिए परिवार के बिना जीवन की कल्पना करना कठिन है।

एक अच्छा परिवार बच्चे के चरित्र निर्माण से लेकर व्यक्ति की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कोई भी व्यक्ति परिवार में ही जन्म लेता है, उसी से उसकी पहचान होती है और परिवार से ही अच्छे-बुरे लक्षण सीखता है। परिवार सभी लोगों को जोड़े रखता है और दुःख-सुख में सभी एक-दूसरे का साथ देते हैं।

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परिवार एक ऐसी सामाजिक संस्था है जो आपसी सहयोग व समन्वय से क्रियान्वित होती है और जिसके समस्त सदस्य आपस में मिलकर अपना जीवन प्रेम, स्नेह एवं भाईचारापूर्वक निर्वाह करते हैं। संस्कार, मर्यादा, सम्मान, समर्पण, आदर, अनुशासन आदि किसी भी सुखी-संपन्न एवं खुशहाल परिवार के गुण होते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस का इतिहास

International Family Day 2021 : 20 सितंबर 1993 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ए/आरईएस/47/237 नामित एक संकल्प पारित किया जिसने 44/82 नामक संकल्प को दोहराया जिसे दिसंबर 1989 में उत्तीर्ण किया गया था और 46/92 नामित संकल्प पारित किया गया जिसे दिसंबर 1991 में उत्तीर्ण किया गया था।

इन्हें पुन: निर्दिष्ट और दुनिया भर के परिवारों के बेहतर जीवन मानकों और सामाजिक प्रगति को प्रोत्साहित करने और संयुक्त राष्ट्र के दृढ़ संकल्प को प्रदर्शित करने के लिए पारित किया गया।

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1994 में संयुक्त राष्ट्र ने आधिकारिक रूप से संशोधित आर्थिक और सामाजिक संरचनाओं के जवाब में परिवारों के अंतर्राष्ट्रीय दिवस (International day of families 2021) को घोषित किया जो दुनिया के कई हिस्सों में स्थिरता और परिवार इकाइयों की संरचना को प्रभावित करते हैं।

यह दिन 1993 में शुरू किया गया था और दुनिया भर में लोगों, समाजों, संस्कृतियों और परिवारों के सार को मनाने के लिए काम करने के लिए एक अवसर के रूप में कार्य करता है।

‘अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस’ (International day of families 2021) के प्रतीक (सिंबल) में एक हरे गोलाकार चित्र में लाल रंग की छवि शामिल है। इस प्रतीक (सिंबल) में एक घर और एक दिल शामिल हैं। इससे यह तथ्य साफ़ होता है कि परिवार किसी भी समाज का केंद्र हिस्सा हैं और वे सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए एक समर्थन और स्थिर घर प्रदान करते हैं।

International Family Day 2021
International Family Day 2021
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अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस क्यों मनाया जाता है

हर साल ‘अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस’ (International Family Day 2021) मनाया जाता है। इस अंतरराष्ट्रीय दिवस का उद्देश्य परिवार के महत्व को स्वीकार करना और दुनिया भर के लोगों को परिवारों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने का है।

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यह वार्षिक उत्सव इस बात को दर्शाता है कि वैश्विक समुदाय परिवारों को समाज की प्राथमिक इकाइयों के रूप में जोड़ता है। ‘अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस’ (International day of families 2021) उचित परिस्थितियों को बढ़ावा देने के अलावा परिवारों से संबंधित मुद्दों पर जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए परिस्थितियों का सही मेल प्रदान करता है।

यह दिन सभी देशों में परिवारों के सर्वोत्तम हित में एक शक्तिशाली जागृति कारक के रूप में कार्य करता है जो इस अनुकूल अवसर से स्वयं को लाभ देता है और प्रत्येक समाज के लिए अनुकूल परिवारों से संबंधित मुद्दों के समर्थन का प्रदर्शन करता है।

वर्षों से इस दिवस ने, अपने स्वयं के परिवार दिवस या जागरूकता कार्यक्रमों को बनाने के लिए दुनिया के कई देशों को प्रेरित किया है जो कि परिवार के मुद्दों पर ध्यान देने के लिए समुदाय पर आधारित हैं।

परिवार दो प्रकार के होते हैं। एक एकाकी परिवार और दूसरा संयुक्त परिवार। भारत में प्राचीन काल से ही संयुक्त परिवार की धारणा रही है। संयुक्त परिवार में वृद्धों को संबल प्रदान होता रहा है और उनके अनुभव व ज्ञान से युवा व बाल पीढ़ी लाभान्वित होती रही है।

संयुक्त पूंजी, संयुक्त निवास व संयुक्त उत्तरदायित्व के कारण वृद्धों का प्रभुत्व रहने के कारण परिवार में अनुशासन व आदर का माहौल हमेशा बना रहता है। लेकिन बदलते समय में तीव्र औद्योगीकरण, शहरीकरण, आधुनिकीकरण व उदारीकरण के कारण संयुक्त परिवारों का बिखराव होने लगा है।

एकाकी परिवारों की जीवनशैली ने दादा-दादी और नाना-नानी की गोद में खेलने व लोरी सुनने वाले बच्चों का बचपन छीनकर उन्हें मोबाइल का आदी बना दिया है। उपभोक्तावादी संस्कृति, अपरिपक्वता, व्यक्तिगत आकांक्षा, व्यक्तिगत स्वार्थ सिद्धि, लोभी मानसिकता, आपसी मनमुटाव और सामंजस्य की कमी के कारण संयुक्त परिवार की संस्कृति छिन्न-भिन्न हुई है।


इसके साथ ही बुजुर्ग वर्ग और आधुनिक पीढ़ी के विचार मेल नहीं खा पाते हैं। बुजुर्ग पुराने जमाने के अनुसार जीना पसंद करते हैं तो युवा वर्ग आज की स्टाइलिश लाइफ जीना चाहते हैं। इसी वजह से दोनों के बीच संतुलन की कमी दिखती है, जो परिवार के टूटने का कारण बनती है।

यदि संयुक्त परिवारों को समय रहते नहीं बचाया गया तो हमारी आने वाली पीढ़ी ज्ञान संपन्न होने के बाद भी दिशाहीन होकर विकृतियों में फंसकर अपना जीवन बर्बाद कर देगी। अनुभव का खजाना कहे जाने वाले बुजुर्गों की असली जगह वृद्धाश्राम नहीं बल्कि घर है।

गांवों में रोजगार का अभाव होने के कारण अक्सर एक बड़ी आबादी का विस्थापन शहरों की ओर गमन करता है। शहरों में भीड़भाड़ रहने के कारण बच्चे अपने माता-पिता को चाहकर भी पास नहीं रख पाते हैं। यदि रख भी ले तो वे शहरी जीवन के अनुसार खुद को ढाल नहीं पाते हैं। गांवों की खुली हवा में सांस लेने वाले लोगों का शहरी की संकरी गलियों में दम घुटने लगता है।

इसके अलावा पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव बढ़ने के कारण आधुनिक पीढ़ी का अपने बुजुर्गों व अभिभावकों के प्रति आदर कम होने लगा है। वृद्धावस्था में अधिकतर बीमार रहने वाले माता-पिता अब उन्हें बोझ लगने लगे हैं। वे अपने संस्कारों और मूल्यों से कटकर एकाकी जीवन को ही अपनी असली खुशी व आदर्श मान बैठे हैं।

देश में ‘ओल्ड एज होम’ की बढ़ती संख्या इशारा कर रही है कि भारत में संयुक्त परिवारों को बचाने के लिए एक स्वस्थ सामाजिक परिप्रेक्ष्य की नितांत आवश्यकता है। वहीं महंगाई बढ़ने के कारण परिवार के एक-दो सदस्यों पर पूरे घर को चलाने की जिम्मेदारी आने के कारण आपस में हीन भावना पनपने लगी है।

ऐसा कौन-सा घर परिवार है जिसमें झगड़े नहीं होते? लेकिन यह मनमुटाव तक सीमित रहे तो बेहतर है। मनभेद कभी नहीं बनने दिया जाए। बुजुर्ग वर्ग को भी चाहिए कि वह नए जमाने के साथ अपनी पुरानी धारणाओं को परिवर्तित कर आधुनिक परिवेश के मुताबिक जीने का प्रयास करें।

अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस की थीम -Theme of World Family Day

अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस 2020 का थीम “विकास में परिवार: कोपेनहैगन और बीजिंग + 25 (Families in Development: Copenhagen & Beijing + 25)” था।
2019:“फैमलीस एंड क्लाइमेट एक्शनः फोकस आन एस.डी.जी 13”।
2018: “परिवार और समावेशी समाज” था।
2017: “परिवार, शिक्षा और कल्याण” था।
2016: “परिवार, स्वस्थ जीवन और टिकाऊ भविष्य” था।
2015: “प्रभारी पुरुष? समकालीन परिवारों में लिंग समानता और बच्चों के अधिकार ” था।
2014: “विकास लक्ष्यों की उपलब्धि के लिए परिवार मामले; परिवार का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष+20 ” था।
2013: ” सामाजिक एकीकरण और अंतर-पीढ़ी के सॉलिडेरिट को आगे बढ़ाएं” था।
2012: “कार्य-परिवार संतुलन सुनिश्चित करना” था।
2011: “परिवार गरीबी और सामाजिक बहिष्कार का सामना करना” था।
2010: “दुनिया भर के परिवारों पर प्रवासन का प्रभाव” था।
2009: “माताओं और परिवार: एक बदलती दुनिया में चुनौतियां” था।
2008: “पिता और परिवार: जिम्मेदारियां और चुनौतियां” था।
2007: “परिवारों और विकलांग व्यक्तियों” था।
2006: “परिवार बदलना: चुनौतियां और अवसर” था।
2005: “एचआईवी/एड्स और परिवार कल्याण” था।
2004: “परिवार के अंतर्राष्ट्रीय वर्ष की दसवीं सालगिरह: कार्य के लिए एक फ्रेमवर्क” था।
2003: “2004 में परिवार के अंतर्राष्ट्रीय वर्ष की दसवीं सालगिरह के पालन के लिए तैयारी” था।
2002: “परिवार और उम्र: अवसर और चुनौतियां” था।
2001: “परिवार और स्वयंसेवक: बिल्डिंग सोशल कंजेशन” था।
2000: “परिवार: एजेंट और विकास के लाभार्थियों” था।
1999: “सभी उम्र के लिए परिवार” था।
1998: “परिवार: शिक्षक और मानव अधिकार के प्रदाता” था।
1997: “साझेदारी के आधार पर परिवार बनाना” था।
1996: “परिवार: गरीबी और बेघरता के पहले पीड़ित” था।

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