Jagannath Rath Yatra 2021:जगन्नाथ रथ यात्रा आज से प्रारंभ हो रही है

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Jagannath Rath Yatra 2021:जगन्नाथ रथ यात्रा आज से प्रारंभ हो रही है, दूसरी बार भी बिना श्रद्धालुओं की उपस्थिति के होगी जगन्नाथ रथ यात्रा

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Jagannath Rath Yatra 2021 : कोरोना संकट के बीच ओडिशा और गुजरात में आज भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा धूमधाम से निकाली जा रही हैं. कोविड के चलते इस बार ओडिशा में सिर्फ पुरी में ही रथयात्रा को सीमित रखा गया है. गुजरात के अहमदाबाद में जगन्नाथ रथ यात्रा से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी सुबह की मंगला आरती में हिस्सा लिया कोरोना के खतरे को देखते हुए मंदिर परिसर में कुछ ही लोगों को जाने की अनुमति है.

Jagannath Rath Yatra 2021: कोविड महामारी के वर्तमान हालात के मद्देनजर इस वार्षिक धार्मिक आयोजन के सहज संचालन के लिए कम से कम 65 दस्तों की तैनाती की गई है। पुरी के जिलाधिकारी समर्थ वर्मा ने कहा कि लोगों से अपील की गई है कि वे कर्फ्यू की अवधि के दौरान रविवार आठ बजे से मंगलवार रात आठ बजे तक घरों से नहीं निकलें और ग्रांड रोड पर भीड़ एकत्र नहीं करें। 

पुरी में लगातार दूसरी बार बिना श्रद्धालुओं की उपस्थिति के भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकालने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसके साथ ही जिला प्रशासन ने रविवार रात आठ बजे से दो दिन के लिए कर्फ्यू लागू कर दिया। पवित्र रथों को सोमवार अपराह्न तीन बजे रवाना किया जाएगा।


प्रशासन ने श्री जगन्नाथ मंदिर (Jagannath Rath Yatra 2021) से श्री गुंडिचा मंदिर के बीच तीन किलोमीटर लंबे ग्रांड रोड पर प्रतिबंध लागू किया है जहां चिकित्सा आपातकाल के अलावा अन्य सभी गतिविधियों पर रोक रहेगी।

जगन्नाथ रथ यात्रा (Jagannath Rath Yatra 2021) सोमवार यानी आज से प्रारंभ हो रही है जिसका समापन 20 जुलाई को देवशयनी एकादशी के दिन होगा। हालांकि पिछले साल की तरह इस साल भी कोरोना गाइडलाइंस के चलते लाखों की संख्या में श्रद्धालु रथ यात्रा में भाग नहीं ले सकेंगे।

भगवान जगन्नाथ जी के स्मरण में निकाली जाने वाली जगन्नाथ यात्रा हिन्दू धर्म का बेहद प्रसिद्ध त्योहार है। हर साल पुरी (उड़ीसा) में जगन्नाथ रथ यात्रा का विशाल आयोजन होता है। 

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जगन्नाथ रथ यात्रा दस दिन तक चलती है

हिन्दू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को ही भव्य उत्साह के साथ जगन्नाथ रथ यात्रा निकाले जाने का विधान है।

इस वर्ष 2021 में यह पावन यात्रा 12 जुलाई, सोमवार से आरंभ होगी और इसका समापन 20 जुलाई, मंगलवार को देवशयनी एकादशी के पर्व के साथ ही पूरे विधि-विधान अनुसार किया जाएगा।

हालांकि इस दौरान भगवान की यात्रा के लिए रथ बनाने के कार्य का आरंभ अक्षय तृतीया यानी 15 मई 2021 से ही चल रहा है। भगवान जगन्नाथ की ये यात्रा लगभग दस दिनों तक चलती है, जिसमें प्रथम दिन भगवान जगन्नाथ को गुंडिचा माता के मंदिर लेकर जाया जाता है।

पुरी का श्री जगन्नाथ मन्दिर (Jagannath Rath Yatra 2021) एक हिन्दू मन्दिर है, जो भगवान जगन्नाथ (श्रीकृष्ण) को समर्पित है। यह भारत के ओडिशा राज्य के तटवर्ती शहर पुरी में स्थित है। जगन्नाथ शब्द का अर्थ जगत के स्वामी होता है। इनकी नगरी ही जगन्नाथपुरी या पुरी कहलाती है। इस मन्दिर को हिन्दुओं के चार धाम में से एक गिना जाता है।

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यह वैष्णव सम्प्रदाय का मन्दिर है, जो भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण को समर्पित है। इस मन्दिर का वार्षिक रथ यात्रा उत्सव प्रसिद्ध है। इसमें मन्दिर के तीनों मुख्य देवता, भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भ्राता बलभद्र और भगिनी सुभद्रा तीनों, तीन अलग-अलग भव्य और सुसज्जित रथों में विराजमान होकर नगर की यात्रा को निकलते हैं।

श्री जगन्नथपुरी पहले नील माघव के नाम से पुजे जाते थे। जो भील सरदार विश्वासु के आराध्य देव थे। अब से लगभग हजारों वर्ष पुर्व भील सरदार विष्वासु नील पर्वत की गुफा के अन्दर नील माघव जी की पुजा किया करते थे । मध्य-काल से ही यह उत्सव अतीव हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

इसके साथ ही यह उत्सव भारत के ढेरों वैष्णव कृष्ण मन्दिरों में मनाया जाता है, एवं यात्रा निकाली जाती है।यह मंदिर वैष्णव परम्पराओं और सन्त रामानन्द से जुड़ा हुआ है। यह गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय के लिये खास महत्व रखता है। इस पन्थ के संस्थापक श्री चैतन्य महाप्रभु भगवान की ओर आकर्षित हुए थे और कई वर्षों तक पुरी में रहे भी थे

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