Jimikand : जिमीकंद खाने के क्या क्या फायदे हैं

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जिमीकंद खाने के क्या क्या फायदे हैं

Jimikand : बाजार में आम सब्जियों के साथ कुछ ऐसी भी सब्जियां मौजूद होती हैं, जिनके विषय में ज्यादा लोगों को पता नहीं होता। जिमीकंद भी ऐसी ही एक सब्जी है, जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं।जिमीकंद ( सूरन ) एक बहुवर्षीय भूमिगत सब्जी है जिसका वर्णन भारतीय धर्मग्रंथों में भी पाया जाता है। यह एक प्रकार का कंद मूल है, जिसमें कई खास पोषक तत्व पाए जाते हैं। भारत

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के विभिन्न राज्यों में जिमीकंद के भिन्न-भिन्न नाम ओल या सूरन हैं।

पहले इसे गृहवाटिका में या घरों के अगल-बगल की जमीन में ही उगाया जाता था। परन्तु अब तो जिमीकंद पर हुए अध्ययनों से पता चलता है कि यह खाद्य पदार्थ शरीर को स्वस्थ बनाए रखने और स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने में मदद कर सकता है।इसलिए अब इसकी व्यवसायिक खेती होने लगी है। जिमीकंद एक सब्जी ही नहीं वरन यह एक बहुमूल्य जड़ीबूटी है जो सभी को स्वस्थ एवं निरोग रखने में मदद करता है।

लेकिन दिवाली पर सूरन की सब्जी खाने का बहुत प्रचलन है । आज के इस पोस्ट में मैं आपको sangeetaspen.com के माध्यम से बताऊगी की दिवाली पर सूरन यानी जिमीकंद (Jimikand) खाने की परंपरा कहां से चली और जिमीकंद बनाने के तरीके इससे होने वाले फायदे एवं नुकसान क्या क्या है।

जिमीकंद (सूरन) क्या है – What is Yam (Jimikand) in Hindi

अक्सर यह सवाल लोगों के मन में उठता है की जिमीकंद क्या है,। जिमीकंद यानी सूरन एक जड़ है, जिसे सब्जी के रूप में खाया जाता है। स्वास्थ्य के लिहाज से इसे प्राकृतिक जड़ी-बूटी भी माना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम अमोर्फोफ्लस पेओनिफोलियस (Amorphophallus Paeoniifolius) है।

इसे अंग्रेजी में याम (Yam) के नाम से भी जाना जाता है। यह दिखने में हाथी के पैर जैसा लगता है, इसलिए इसे एलिफेंट फुट याम भी कहा जाता है।यह भारत,अफ्रीका एव एशियाई देशो में अधिक खाया जाता है। इस सब्जी को देशी भाषा में सुरन कहते है। इसका वजन 25 से 30 किलो तक होता है। सूरन यानी जिमीकंद (Jimikand) एक कंद के रूप में होता है और यह अपने आप ही उगता है, लेकिन इसके गुणों को देखते हुए पिछले कुछ सालों से इसकी खेती भी की जाने लगी है। ये कई प्रकार के होते हैं, जिनकी चर्चा हम नीचे करेंगे।

जिमीकंद के प्रकार – Types of Yam in Hindi

जिमीकंद क्या है, इसका जवाब देने के बाद आगे हम जिमीकंद के प्रकार के बारे में बता रहे हैं। वैसे, तो जिमीकंद के कई प्रकार के होते हैं। हम यहां कुछ सामान्य और बाजार में मिलने में वाले जिमीकंद के बारे में बता रहे हैं।

वाइल्ड याम – इसे जंगली याम के नाम से भी जाना जाता है। यह दिखने में पतला होता है।

पर्पल याम – यह बाहर से दिखने में अन्य जिमीकंद की तरह ही भूरा होता है। अंदर से इसका रंग पर्पल होता है। इसी में एक और प्रकार आता है, जो बाहर से दिखने में भी हल्का बैगनी रंग का होता है।

चाइनीज याम – जिमीकंद का यह प्रकार भी काफी प्रचलित है। खाने में यह बहुत स्वादिष्ट होता है।

व्हाइट याम – इसे सबसे आम जिमीकंद में से एक है। इसका रंग अंदर से सफेद होता है, जिस वजह से इसे व्हाइट याम कहा जाता है।

यल्लो याम – यल्लो याम अंदर से पीले रंग का होता है, जो कैरोटीनॉयड की वजह से होता है। यह बाहर से व्हाइट याम जैसा ही दिखता है। यल्लो याम ठोस और हल्का उभरा हुआ होता है।

सेहत संवारती है सूरन

सूरन या जिमीकंद की पैदावार दिवाली के आसपास ही होती है. इसमें बहुत अच्छे एंटीऑक्सीडेंट्स, बीटा केरोटीन होता है, जो शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं. इसके अलावा कई विटामिन और खनिज भी होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं. इसमें कैलोरी, फैट, कार्ब्स, प्रोटीन, पोटेशियम, घुलनशील फाइबर पर्याप्त मात्रा में हैं. सूरन कैंसर के इलाज में भी बेहद कारगर है.

डायबिटीज मरीज भी खा सकते हैं सूरन

शुगर में जिमीकंद बेहद लाभदायक है. जिमीकंद में ग्लूकोज की मात्रा कम होती है. शर्करा ना होने से डायबिटीज वाले इसे आराम से खा सकते हैं और हर सप्ताह इसके सेवन से बहुत से लोगों का ब्लड शुगर सुधरता है. जिमीकंद के फायदे बहुत हैं, इसलिए इसे त्योहार से जोड़ दिया गया. परंपरा बना देने से सभी लोग इसे इस्तेमाल करने लगे हैं और बच्चे भी इसे खा सकेंगे. मान्यता है कि सब्जी के इसी गुण के चलते इसे दीपावली में खाना अनिवार्य बना दिया गया है.

जिमीकंद (सूरन) के फायदे – Benefits of Yam (Jimikand) in Hindi

तनाव के लिए – कुछ अध्ययन में जिमीकंद को तनाव दूर करने का अच्छा घरेलू माना गया है। इसमें तनाव विरोधी गुण होता है जो तनाव मुक्त करने में मदद करता है। इसमें विटामिन ए और पोटेशियम व आयरन होता है जो आपके शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है और आपके मूड में बदलाव करता है। आपको थकान दूर करने में मदद करता है।

कैंसर से बचाव करने में – आपको पता होगा कैंसर एक खतरनाक बीमारी है। जिसका सही समय पर अगर इलाज न किया जाये तो व्यक्ति की जान भी जा सकती है। कैंसर के ट्यूमर को बनने से रोकने के लिए जिमीकंद फायदेमंद साबित होता है। क्योंकि जिमीकंद में अधिक मात्रा में फाइबर व एंटीऑक्सीडेंट उपस्थित होता है जो कैंसर से कोशिकाओं की सुरक्षा करता है। वैज्ञानिको ने अपने शोध में जिमीकंद को कैंसर का बेहतर घरेलू उपचार माना है हालांकि इसपर और शोध जारी है।

वजन कम करने के लिए – सूरन यानी जिमीकंद (Jimikand) में उच्च मात्रा में फाइबर होता है। इसके अलावा कैलोरी कम होता है जो वजन कम करता है। लेकिन इस बात का रखे अधिक तेल में तलकर ना खाये। जो लोग अपना वजन कम करने के बारे में सोच रहे है उनके लिए जिमीकंद एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

जिमीकंद के फायदे तो बहुत है लेकिन अत्यधिक मात्रा में उपयोग करने नुकसान भी हो सकते है। यह नुकसान कुछ इस तरह है।

  • अगर कोई व्यक्ति किसी तरह का सेवन पहले से कर रहा है, तो उसे जिमीकंद का सेवन करने से पहले अपने चिकिस्तक की सलाह लेनी चाहिए।
  • अस्थमा व साइनस से पीड़ित लोगो को जिमीकंद के सेवन से परहेज करना चाहिए।
  • जिमीकंद ठंडा होता है इसलिए स्तनपान कराने वाली माता को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
  • अगर आप जिमीकंद को आहार में शामिल करना चाहते है तो पहले अपने चिकिस्तक से सलाह ले।

दिवाली पर सूरन की सब्जी खाने की परंपरा कहां से और कब से चली

Diwali 2021: दिवाली के दिन सफाई, सजावट और खरीदारी के साथ खानपान का भी महत्व है. मिठाई, खीर समेत विभिन्न पकवानों के बीच सूरन की सब्जी अनिवार्य है, आइए जानते हैं सूरन की सब्जी खाने की परंपरा कहां से और कब से चली आ रही हैं

सूरन या जिमीकंद की सब्जी यूं तो आम दिनों में भी घरों में लगभग न के बराबर ही बनती है, लेकिन दिवाली के खास अवसर पर घरों में इसे बनाना बेहद शुभ माना गया है. घर के बुजुर्ग बाकी पकवानों के बीच इसकी डिमांड जरूर रखते आए हैं.दीवाली पर सूरन या जिमीकंद बनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. आइए जानते हैं सूरन की सब्जी का दीवाली से क्या संबंध है

हिन्दू धर्म में दिवाली पर सूरन की सब्जी बनाने और खाने की परंपरा काशी यानी बनारस से आई है. वहां दिवाली के दिन इसकी सब्जी पूरे परिवार के लिए बनती है. यह गोलाकार एक ऐसी सब्जी होती है, जो आलू की तरह मिट्टी के नीचे उगाई जाती है और जड़ खोद कर इसे निकाला जाता है,

कहते हैं कि इसे निकालने के बाद भी इसकी जड़ें मिट्टी में ही रह जाती हैं और अगली दिवाली तक उसी जड़ से दोबारा सूरन तैयार हो जाती है. इसकी यही विशेषता दिवाली पर्व की उन्नति और खुशहाली से इसे जोड़ती है, जिसके चलते इसे दिवाली के दिन घर में बनाना और खाना दोनों ही बेहद शुभ माना जाता है.

काटना, बनाना और खाना तीनों मुश्किल

सूरन यानी जिमीकंद (Jimikand) की सब्जी देखने में गोलाकार होती है इसे काटना, पकाना दोनों आसान नहीं है, इसे काटते समय हाथों में खुजली होने लगती है, यह आलू या दूसरी सब्जियों की तरह जल्दी नहीं पकती है. इसे खाने से गले में खराश भी होने लगती है. इसे काटने के लिए विशेष विधि और सामान लगते हैं, इसे तेल से सने हाथों से इसे काटना चाहिए और खराश खत्म करने के लिए नींबू का रस डालकर छोड़ा जाता है.

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