Khuda Haafiz movie review

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अगर आप इस रविवार को कोई फिल्म देखने का मन बना रहे है तो विद्युत जामवाल की Disney plus Hotstar पर रिलीज हुई फिल्म खुदा हाफिज(Khuda Haafiz) देख सकते है।

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ऐसा कहा जा रहा है की यह Khuda Haafiz विद्युत जामवाल की अब तक की बेस्ट परफॉर्मेंस फिल्म है ।

‘खुदा हाफिज’ फारुक कबीर के निर्देशन में बनी एक romantic action thriller फिल्म है जिसमें विद्युत जामवाल, शिवालिका ओबेरॉय, आहना कुमरा, शिव पंडित और अनु कपूर मुख्य भूमिकाओं में हैं।

फिल्म में नरगिस नाम शिवालिका ओबेरॉय का है जो कहीं खो जाती है। और विद्युत जामवाल का किरदार समीर चौधरी उसे खोजने की कोशिश करता है। आपको नरगिस का रोल (उसकी खूबसूरती, उसकी हंसी, उसका दर्द, उसकी तड़प.) बहुत प्रभावित करेगा।

फिल्म देखने के लिए यहां क्लीक करे

क्या स्टोरी है खुदा हाफिज की ?

Khuda Haafiz की कहानी में लखनऊ के एक साधारण परिवार की है। जिनका बेटा समीर चौधरी (विद्युत जामवाल) सॉफ्टवेअर इंजिनियर हैं। समीर चौधरी (विद्युत जामवाल) की शादी नरगिस (शिवालिका ओबेरॉय) से होती है। होती है। जो एक इंटर-रिलीजन (अन्तर्जातीय विवाह) मैरेज है। नरगिस की शादी हिंदू और मुस्लिम दोनों रीति-रिवाजों से होती है। समीर और नरगिस की शादी में कुबूल है, कुबूल है, कुबूल है…भी होता है और सात फेरे भी.

फिर आता है 2007-08 का इकनॉमिक स्लोडाउन (मंदी का दौर) इसमें समीर और नरगिस दोनों का काम-धंधा ठप पड़ जाता है। 3 महीने घर बैठने के बाद दोनों सोचते हैं कि किसी बाहर देश में जाकर पैसा कमाएंगे और दोनों खाड़ी देशों में नौकरी के लिए एक एजेंट के माध्यम से अप्लाई करते है। जिसमे नरगिस पहले नोमान जाती है. (नोमान वैसे तो सऊदी अरब का एक आईलैंड है) .

जो लड़की कभी लखनऊ से बाहर नहीं निकली है वह अकेले नोमान जाने के लिए तैयार हो जाती है. समीर उसे जाने भी देता है। इन मसलों में परिवार कहीं नहीं आता है। लेकिन नरगिस को नोमान जाते ही पता चलता है कि वह गलत लोगों के चंगुल में फंस चुकी है।

समीर को नरगिस (शिवालिका ओबेरॉय) की आखिरी कॉल मिलती है तो वह मुसीबत में होती है। और समीर से मदद मांगती है। समीर को कुछ समझ में नहीं आता है। और पुलिस के साथ समीर एजेंट के पास पहुंचता है। एजेंट बताता है कि नरगिस तो मिली ही नहीं नोमान में इसके बाद समीर बिना कुछ सोचे समझे अपनी बीवी को वापस घर लाने के मिशन पर निकल पड़ता है।

वहां उसे टैक्सी ड्राइवर उस्मान मिलता है. इसके बाद शुरू होती है नरगिस को खोजने की समीर की जंग.

फिल्म खुदा हाफिज में समझ ना आने वाली कुछ बाते

एक हिंदू लड़के की मुस्लिम लड़की से अरेंज मैरिज होती है। यह फिल्म में क्या सोचकर दिखाया गया है समझ में नहीं आता है। और उसके बाद परिवार कहीं दिखाई नहीं देता, एक ऐसी मूवी है जिसके एक चौथाई संवाद न हिंदी में हैं न अग्रेंजी में, कई जगहों पर अंग्रेजी सब टाइटल से काम चलाना पड़ता है.
समीर नोमान में नरगिस की तलाश में भटक रहा है लेकिन इस बिच परिवार से उसकी एक बार भी बात नहीं होती।
ऐसा कौन सा देश है जहां हर तीसरा आदमी हिंदी बोलता है. हालांकि टोन अरबी होती है। अरबी बोलने वाले देश में उर्दू या हिंदी बोलते हुए पुलिसवाले एकदम अजीब से लग रहे हैं।

खुदा हाफिज की कुछ -कुछ अच्छी बाते

खुदा हाफिज के म्यूजिक में ऐसा कुछ खास नहीं है। हां सोनू निगम की आवाज में गाया हुआ ‘तेरे संग हूं आखिरी कदम तक’ सुनने में अच्छा लग रहा है।
अन्नू कपूर का अफगानी पठान उस्मान का किरदार और उनके डायलॉग, एक्सप्रेशन अच्छे और मजबूत हैं विद्युत जामवाल कि बेस्ट परफॉर्मेंस फिल्म है । अन्नू कपूर हमेसा अपने हर किरदार को बखूबी निभाते है।

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