Lockdown: में फँसे प्रवाशियो का पलायन

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Migrant workers

केंद्र सरकार की बड़ी खामी

Lockdown में Migrant workers की इस देश व्यापी समस्या के लिए सबसे पहले केंद्र सरकार की बड़ी खामी नजर आ रही है केंद्र सरकार को बहुत पहले ही इस महामारी को लेकर सजग होने की जरूरत थी।

केंद्र सरकार इटली से सबक लेते हुए प्रवासियों के पलायन को रोकना चाहती थी इटली ने Lockdown घोषित करने से पहले अपने नागरिको को  3 दिन का समय दिया था जिसके कारण कोरोना वायरस की महामारी और तेजी से फैली और इसके चलते आज इटली में 10023 लोग अपनी जान गवां चुके है

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15 फ़रवरी को देश में कोरोना वायरस संक्रमित 3 मरीजों की पुष्टि की गयी और 2 मार्च तक यह संख्या दोगुनी (6) हो गयी ठीक इसके दो दिन (4 मार्च) बाद यह संख्या बढ़कर 29 तक जा पहुंची यही वह समय था जब सरकार को इसके लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए थे जैसे पर्यटकों के लिए दिशा निर्देश जारी करना, राज्य सरकारों के बीच सूचना प्रदान करने के लिए कमेटी का गठन करना और आम नागरिको को आर्थिक सहायता के साथ दिशा निर्देश जारी किये जाने चाहिए थे, 

जो खबरे देश भर से आ रही है वह दुखी करने वाली है और देश भर में प्रवासी शहरियों में पलायन जारी है इससे देश की कोरोना के खिलाफ लड़ाई कहीं कमजोर ना हो जाये

मीडिया के एक वर्ग ने यह न्यूज़ फैलाई की केंद्र सरकार इस लॉकडाउन को 21 दिनों से बड़ा कर 3 महीने तक कर सकती है जिसने गरीबों में दहशत पैदा की और कोरोना वायरस के संक्रमण का भय और Lockdown से रोजगार का पूरी तरह बंद होना तथा खाद्य सामग्री की समस्या के चलते परेशान प्रवासी शहरियो को दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र आदि से वेस्ट बंगाल, बिहार, राजस्थान, उत्तरप्रदेश उत्तराखंड, आदि स्थानों के लिए पलायन को मज़बूर होना पड़ा

केजरीवाल सरकार दिल्ली के प्रवासी शहरियों के पलायन को रोकने में असफल.

केजरीवाल सरकार यह दावे कर रही है की वह हर रोज लाखो लोगो के भोजन की व्यवस्था कर रही और उनके पास ना जगह की कमी है नहीं संसाधनों की फिर भी केजरीवाल सरकार दिल्ली के प्रवासी शहरियों के पलायन को रोकने में असफल है और लोग अपनी जान दाँव पर लगा कर दिल्ली से पलायन करने को मजबूर है।

दिल्ली के उपमुख्य मंत्री मनीष सिसोदिया का यह ट्वीट यह दिखाता है की दिल्ली सरकार गरीबों को भरोसा ही नहीं दे पाई वह आम नागरिको को दिल्ली की सीमाओं पर छोड़ कर अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहती है और दिल्ली सरकार ग्राउंड पर लोगों को सहायता देने की जगह सिर्फ प्रेस कांफ्रेंस, ट्विटर और विज्ञापनों में व्यस्त है।

सरकार के इस रवैये के कारण कोरोना वायरस के खिलाफ यह लड़ाई महामारी में तब्दील हो सकती है देश संकट में है एक ग़लत निर्णय से ना केवल देश की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी अपितु ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है जिसे क़ाबू करना असम्भव हो सकता है

इन प्रवाशियो को अभी कोरन्टाइन करने की जरूरत है जिससे की कोरोना की महामारी को फैलने से रोका जा सके अन्यथा इस महामारी को फैलने से कोई नहीं रोक सकता है अब केंद्र और सभी राज्य सरकारों को अपने अपने नागरिको को सुरक्षा के साथ उनके घरो तक सकुशल पहुँचाना चाहिए 

ठीक उसी प्रकार जैसे अन्य देशो में फसे भारतीय नागरिको को स्वदेश लाकर उनकी जांच और सुरक्षा सुनिश्चित की गयी थी यह लोग भी इसी सुविधा के हक़दार है

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