महाकुंभ 2021: बेन बाबा स्विट्जरलैंड से 6000 Km कुंभ स्नान करने पैदल उत्तराखंड पहुंचे, 18 देश पार किए

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Ben Baba arrives in Uttarakhand from Switzerland
Ben Baba arrives in Uttarakhand from Switzerland

Mahakumbh 2021 : बेन बाबा स्विट्जरलैंड से 6000 Km कुंभ स्नान करने पैदल उत्तराखंड पहुंचे, 18 देश पार किए
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जब व्यक्ति जान जाता हैं, कि जीवन में क्या जरूरी है। मानसिक जगत में आगे बढ़ने को हम प्रगति नहीं कह सकते। सिर्फ भौतिक समृद्धि हमें शांति के पथ पर नहीं ले जा सकती। तब वह अध्यात्म से जुड़ जाता है . ऐसी ही कहानी हैं, स्विट्जरलैंड के बेन बाबा कि जो जीवन से जुड़े रहस्यों को सुलझाना चाहते थे।

मन में उठ रहे इन सवालों का जवाब उन्हें भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और योग में मिला। जीवन में शांति की तलाश स्विट्जरलैंड से बेन बाबा को हजारों किलोमीटर दूर भारत के हरिद्वार ले आई।


स्विट्जरलैंड के रहने वाले बेन बाबा ने हरिद्वार पहुंचने के लिए साढ़े छह हजार किलोमीटर की दूरी पैदल तय की। इस दौरान उन्होंने यूरोप से टर्की, ईरान, आर्मेनिया, जॉर्जिया, रशिया, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, चीन और पाकिस्तान समेत कुल कुल 18 देश पार किए।

Mahakumbh 2021: Ben Baba reached Uttarakhand on foot to take 6000 Km Kumbh bath from Switzerland, crossed 18 countries


सनातन धर्म और योग से प्रभावित बेन बाबा पांच साल में करीब साढ़े छह हजार किलोमीटर पैदल सफर कर हरिद्वार कुंभ स्नान (Mahakumbh 2021) करने पहुंचे हैं। 33 साल के बेन बाबा पेशे से वेब डिजाइनर हैं। स्विट्जरलैंड में बेन बाबाहर घंटे करीब 10 यूरो कमाते थे। यानी कि720 भारतीय रुपये कमाते थे।

घर, गाड़ी और लग्जरी लाइफ सब कुछ बेन के पास था, लेकिन मन अंदर से खुश नहीं था। स्विट्जरलैंड की लग्जरी जिंदगी छोड़कर अध्यात्म और योग में रम गए हैं। सनातन धर्म और योग का प्रचार-प्रसार जिंदगी का मकसद और पैदल विश्व यात्रा को अपनी साधना बना लिया है।

33 वर्षीय बेन बाबा बताते हैं भारतीय संस्कृति, परंपरा और सभ्यता अद्भुत है। योग ध्यान और भारतीय वेद पुराण सबसे मूल्यवान हैं। इनमें अलौकिक ताकत हैं। इन्हीं से प्रभावित होकर भारत भ्रमण का लक्ष्य बनाया। स्विट्जरलैंड में ही हिंदी सीखी।

Mahakumbh 2021: Ben Baba arrives in Uttarakhand from Switzerland

बेन बाबा न केवल हिंदी बोलते हैं, बल्कि उन्हें गायत्री मंत्र और गंगा आरती कंठस्थ याद है। बेन किसी अखाड़े से नहीं जुड़े हैं। इसलिए हरिद्वार में कभी हरकी पैड़ी तो कभी गंगा किनारे टहलते रहते हैं। गंगा किनारे घाटों को अपना ठिकाना बनाया है।

चार साल के लंबे सफर के बाद भारत के पहुंचे। पांचवें साल में भारत में भ्रमण कर रहे हैं। मंदिरों, मठों में जाकर भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म का अध्ययन कर रहे हैं। बेन पतंजलि से योग भी सीख रहे हैं।हिमाचल के कांगड़ा से 25 दिनों के पैदल सफर के बाद हरिद्वार पहुंचे हैं।

अब इन दिनों बेन के पास न तो पैसा है और न ही ठिकाना। पैदल सफर में जहां थकान लगी, वहीं अपना ठिकाना ढूंढ लेते हैं। मंदिर, गुरुद्वारा, आश्रम और स्कूल में रात बिताते हैं।

कई बार जंगल और फुटपाथ पर ही खुले आसमान के नीचे रात बिताते हैं। पैदल सफर में रास्ते में खाने के लिए जिसने जो दिया उसे खाकर पेट भरते हैं।बेन बाबा ने बताया कि जिस देश का बॉर्डर आने वाला होता था, वो उसके लिए पहले ही वीजा अप्लाई कर देते थे। इन दिनों बेन बाबा हरिद्वार में कुंभ स्नान ((Mahakumbh 2021)) के लिए आए हुए हैं।

बेन कहते हैं खुशी को पैसों से कभी नहीं खरीदा जा सकता है। खुशी तो योग और ध्यान से मिलती है। अब वो अपना पुराना जीवन पीछे छोड़कर अध्यात्म और योग में रम गए हैं।

ये बहुत ही अच्छी बात हैं। की कोई व्यक्ति भारतीय संस्कृति से इतना प्रभावित हुआ की उसने अपना सारा जीवन भारतीय संस्कृति को ही समर्पित कर दिया हैं। बहुत खुसी होती हैं। जब भारतीय संस्कृति और सभय्ता से प्रभावित होने की खबरे आती हैं।

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