Millet Usage, Cooking Tips, Nutritional Values, benefits and Side effects

हेल्थ
benefits of eating millet Bajra
benefits of eating millet Bajra

Millet Usage, Cooking Tips, Nutritional Values and Side effects

बाजरा क्या है? What Is millet 

बाजरा एक प्रमुख अनाज है। यह एक प्रकार की बड़ी घास है। जिसकी बालियों में हरे रंग के छोटे छोटे दाने लगते हैं। यह खरीफ की फसल है इस अनाज को अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में उगाया जाता है, जो कि करीब 4.5 मीटर तक जमीन के ऊपर उगता है।इन दानों की गिनती मोटे अन्नों में होती है।बाजरे का बोटैनिकल नाम पनीसेतुम ग्लौसम (Pennisetum Glaucum)

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जो कि घास (Grasses)फैमिली से ताल्लुक रखता है।साथ ही बाजरे की खेती बहुत सी बातों में ज्वार की खेती से मिलती जुलती होती है।

Is millet good for health ?

बाजारा भारत समेत कई एशियाई और अफ्रीकन देशों में काफी इस्तेमाल किया जाता है। और दक्षिणी भारत में लोग इसे खाते हैं। इसका मतलब है कि यह अफ्रीका में भारत से पहले ही उगाया जाने लगा था। यह पश्चिमी अफ्रीका के क्षेत्र से निकल कर भारत में फैला है।बाजरा मोटे अन्नों में सबसे अधिक उगाया जाने वाला अनाज है। दुनिया का 97 प्रतिशत बाजरा सिर्फ एशिया और अफ्रीका में उगाया जाता है।

इसे अफ्रीका और भारतीय उपमहाद्वीप में प्रागेतिहासिक काल से उगाया जाता रहा है,लेकिन इसका मूल जन्म स्थान अफ्रीका में माना गया है। भारत में इसे बाद में पैदा किया गया था। भारत में इसे इसा पूर्व 2000 वर्ष से उगाये जाने के प्रमाण है।और तब से बाजरा मनुष्य और जानवरों के आहार का हिस्सा बना हुआ है।

इसमें पोषक तत्वों की भरमार है। यह एक पूर्ण अनाज है, जो कि कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में काम जाता है। इसका ग्लूटेन-फ्री गुण, मधुमेह के रोगियों के लिए इसे स्वास्थ्यवर्धक अनाज बनाता है।इसमें प्रचुर मात्रा में फाइबर, मैग्नीशियम जैसे मिनरल, फास्फोरस, आयरन, कैल्शियम, जिंक और पोटेशियम पाया जाता है। इसलिए, जुकाम और खांसी में इसका उपयोग किया जाता है।

बाजरा में मौजूद पोषण तत्व – Millet Nutritional ?

बाजरा काफी पौष्टिक अनाज है, जिसके 200 ग्राम वजन में निम्नलिखित पोषण होता है 

कैलोरी – 765
कार्ब्स – 145.7 ग्राम प्रो
टीन – 22.04 ग्राम
फैट – 8.44 ग्राम
फाइबर – 17 ग्राम
कैल्शियम – 16 मिलीग्राम
फास्फोरस – 570 मिलीग्राम
आयरन 6.02 मिलीग्राम

बाजरा के शोध के मुताबिक Millet benefits

एनसीबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार बाजरे के फेनोलिक गुण, एंटीऑक्सीडेंट एक्टिव होते हैं। बाजरे के दानों में फाइटोकेमिकल्स की मौजूदगी शरीर में कोलेस्ट्रॉल और फाइटेट्स को कम करके हमारी हेल्थ पर पॉजिटिव प्रभाव डालती है।

बाजरा के प्रयोग benefits of eating millet (Bajra)

बाजरे का प्रयोग भारत तथा अफ्रीका में रोटी, दलिया तथा बीयर बनाने में होता है। फसल के बचे भाग का प्रयोग चारे, ईंधन तथा निर्माण कार्य में भी होता है। विश्व के विकसित भागों में इसका प्रयोग भोजन में ना होकर चारे के रूप में होता है। मुर्गी जो इसे चारे के रूप में खाती है के अंडो में ओमेगा ३ फैटी अम्ल ज्यादा पाया जाता है। दूसरे जंतु भी इसे चारे के रूप में खाकर अधिक उत्पादन करते है।

बाजरा के फायदे

बाजरा शरीर के लिए आवश्यक पौष्टिक तत्वों की कमी पूरी करता है। इसमें आपको भरपूर मात्रा में मैग्नीशियम, फॉस्फोरस जैसे पौष्टिक तत्व होते हैं

सर्दियों के मौसम में वैसे तो कई तरह के खाद्य पदार्थ शरीर की ताकत और प्राकृतिक गर्मी बनाए रखने के लिए खाए जाते हैं लेकिन इनमें से एक बाजरा गुणों से भरपूर है। बाजरा का इस्तेमाल उत्तर भारत में ज्यादा किया जाता है। सर्दी में खाया जाने वाला बाजरा कई तरीके से शरीर के लिए असरकारी अनाज है।

आइए जानते हैं बाजरे के फायदे

  •  बाजरे में कुरकुमिन, एलेजिक एसिड आदि महत्वपूर्ण तत्व होते हैं, जो शरीर में एंजाइम्स को बैलेंस करते हैं। जिसकी वजह से शरीर से विषाक्त पदार्थ निकल जाते हैं।
  •  बाजरा को कई तरीके से खाया जाता है।बाजरे के दानों का आटा पीसकर और उसकी रोटी बनाकर खाई जाती है। इसकी रोटी बहुत ही बलवर्धक और पुष्टिकारक मानी जाती है। कुछ लोग दानों को यों ही उबालकर और उसमें नमक मिर्च आदि डालकर खाते हैं। इस रूप में इसे ‘खिचड़ी’ कहते हैं।
  • और राबड़ी के रूप में बाजरा खाया जाता है।कहीं कहीं लोग इसे पशुओं के चारे के लिये ही बोते हैं हालांकि अलग—अलग रूप मे खाए जाने वाले बाजरे के फायदे भी अलग—अलग है। जो एक गुण सभी रूपो में व्याप्त है वो है सर्दी के मौसम में जरूरी शारीरिक गर्मी की आवश्यकता की पूर्ति।
  • बाजारे में कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसलिए इसे खाने से कैल्शियम की कमी नहीं होती है और कैल्शियम की कमी से होने वाली बीमारियां पास नहीं आती है। इन बीमारियों में जोड़ों की समस्या व ऑस्ट‍ियोपोरासिस प्रमुख हैं।
  •  बाजारे में फाइबर होता है, जो पेट संबंधित समस्याओं में राहत प्रदान करता है और पाचन सुधारता है। इसके साथ यह गैस्ट्रो-इंटैस्टीनल समस्याओं से राहत देता है और कोलोन कैंसर की आशंका भी घटाता है।
  •  बाजरा शरीर के लिए आवश्यक पौष्टिक तत्वों की कमी पूरी करता है। इसमें आपको भरपूर मात्रा में मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और नियासिन जैसे पौष्टिक तत्व होते हैं। इनसे शरीर को ताकत मिलती है और मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
  •  बाजरा कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित रखता है। इसकी वजह है बाजरे में मौजूद मिथियोनिन और लेसिथिन नामक एमिनो एसिड। इसलिए आप इसे यूज करके मोटापे की समस्या से भी बच सकते हैं।
  • भारत दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा डायबिटीज के मरीजों वाला देश है। जिसकी वजह से बाजरे की खपत यहां बहुत है। क्योंकि, बाजरा ग्लूटेन फ्री होता है और मधुमेह के रोगियों के लिए यह उचित आहार बनता है। इससे डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद मिलती है। डायबिटीज होने पर यह खून में शुगर की मात्रा को कण्ट्रोल करने में मददगार होता है।
  • बाजरे में काफी पोषण होता है, जो दिल को स्वस्थ रखता है। क्योंकि, यह कोरोनरी ब्लॉकेज को भी घटाता है, जिससे रक्तचाप नियंत्रित रहता है और हृदयघात का खतरा कम होता है।

 हाल के कुछ रिसर्च में सामने आया है कि बाजरा अस्थमा पीड़ितों के लिए भी फायदेमंद है। इसमें बताया गया है कि बाजरा अस्थमा को रोकने में मददगार साबित हुआ। अध्ययन में पाया गया कि बाजरे का इस्तेमाल करने वाले लोगों में अस्थमा के अटैक कम हुए।

बाजरा खाने के बहुत फायदे हैं।ये तो आप जान चुके है लेकिन आप जानते है बाजरे भी कई प्रकार होते है जिनका सेवन हेल्दी है। यह एक अनाज है, जो काफी मात्रा में भारत में उगाया जाता है। इसको खाने के बहुत से हेल्थ बेनिफिट्स भी हैं। इसलिए कई फैंसी ब्रेकफास्ट असल में बाजारा से ही बनाए जाते हैं।

  •  आपने रागी का नाम तो सूना ही होगा बहुत से लोगो को रागी का खाना बहुत अच्छा लगता है क्युकी यह पौश्टिकता से भरपूर होता है लेकिन क्या आप जानते है रागी भी एक स्पेशल टाइप का बाजरा होता है हम इसको गेहूं, चावल के स्थान पर उपयोग कर सकते हैं।
  • इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन और अमीनो एसिड उपलब्ध होता है। इसकी तासीर गर्म होती है। ये बाजरा ( रागी) बच्चों के मानसिक विकास के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद होता है। वैज्ञानिकों के अनुसार बताया गया है, कि इस में कैल्शियम और अन्य खनिज पदार्थों की भरपूर मात्रा उपलब्ध होती है। जो कि हमारे शरीर में एंटी ऑक्सीडेंट की गतिविधियों को बनाए रखी है। इसे डायबटीज़ पेसेंट भी आसानी से खा सकते है।
  •  ज्वार या सोर्घुम बाजरा (Sorghum vulgare) यह बाजरा रोटी बनाने के लिए काफी ज्यादा प्रचलित है। भारत के अलग-अलग राज्यों में काफी ज्यादा मात्रा में उपयोग किया जाता है। इस बाजरे में सभी तरह के प्रोटीन पदार्थ ,आयरन और फाइबर मौजूद होते हैं।
  •  जो कि हमारे कोलेस्ट्रोल को कम करने में मदद करता है। आपको बता दें, कि ब्लूबेरी और अनार की तुलना में ज्वार में कई ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट होता है। यह कैलोरी का एक भरपूर स्रोत है। अगर आप इसका नियमित रूप से सेवन करते हैं तो यह आपके मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने में भी मदद करता है।

पर्ल बाजरा — यह भी एक स्पेशल किस्म का बाजरा है, जिसको नियमित रूप से हर एक क्षेत्र में खाया जाता है। इसका मुख्य रूप से इस्तेमाल रोटी बनाने के लिए किया जाता है। इसमें इसमें अच्छी मात्रा में आयरन, फाइबर, प्रोटीन और मैग्नीशियम के साथ-साथ कैल्शियम भी मौजूद होता है,जो कि हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है।

अमरनाथ बाजरा — क्या आप जानते है, जितने भी अमरनाथ ओट्स आते हैं वह बाजरे के माध्यम से तैयार किए जाते हैं। ये एक विशेष प्रकार का बाजरा होता है, जिसमें मौजूद प्रोटीन और फाइबर सेहत के लिए काफी फायदेमंद होते हैं। यह हमारे शरीर में लगने वाली चोटों के घाव भरने में काफी ज्यादा कार्य करते हैं। साथ ही हमारे कोलेस्ट्रॉल लेवल को भी बनाए रखते हैं। हमारे हृदय में रक्त संचार के माध्यम को भी आसान करते हैं।

छोटा बाजरा — जैसा कि आपके नाम से ही समझ समझा में आता हैं, इसका नाम है छोटा बाजरा। जिसको हम कुटकी, मोरैया के के नाम से भी जानते हैं। यह विटामिन बी, कैल्शियम आयरन, जिंक और पोटेशियम का एक अच्छा स्रोत है। जो कि अपने भारत में एक बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। यह वजन को कंट्रोल करने में भी काफी मददगार होता है।

बाजरा का सेवन करने से पहले सावधानियां

यदि आप गर्भवती हैं या स्तनपान करा रही हैं- गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिला बाजरे का सेवन करने से पहले अपने चिकित्सक या फार्मसिस्ट या हर्बलिस्ट से जरूर परामर्श करें क्युकी किसी भी आहार या दवा का सेवन करने से इसका सीधा प्रभाव बच्चे और मां के स्वास्थ्य पर पड़ता है।

यदि आप पहले से कोई अन्य दवा ले रहे हैं तो बिना डॉक्टर की राय के आपको बाजरा या अन्य दवाओं या अन्य जड़ी बूटियों के किसी भी पदार्थ का सेवन नहीं करना चाहिए क्युकी अनेक बार ऐसे अनाजों से एलर्जी होने की संभावना रहती है।

यदि आपको कोई अन्य बीमारी, विकार या चिकित्सा स्थितियां हैं।यदि आपको किसी अन्य प्रकार की एलर्जी है, जैसे कि खाद्य पदार्थ, डाई बीपी , डिब्बा बंद चीजें, या जानवर से परहेज़ तो बाजरे का उपयोग करने से पहले अपने चिकित्सक से विचार विमर्श अवश्य करे ।

बाजरे (Bajra) का उपयोग कितना सुरक्षित है ?

गर्भावस्था और स्तनपान : मां के दूध (breast milk) को बढ़ाने के लिए बाजरा (Bajra) का उपयोग किया जाता है।

लेकिन अभी तक इससे जुड़े कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिले हैं कि, यह मां के दूध में वृद्धि कर सकता है या नहीं। इसमें उपस्थित लैक्‍टोजेनिक (lactogenic) गुणों के कारण यह महिलाओं में दूध के उत्‍पादन को बढ़ाने की संभावना हो सकती है।

बाजरे से किस प्रकार के साइड इफेक्ट हो सकते हैं ?

  • बाजरा में गोइट्रोजन (Goitrogens) होता है जो थायरॉइड हार्मोन के उत्पादन को उत्तेजित करता है।
  • इसकी अधिक मात्रा में सेवन से थायरॉइड की समस्या हो सकती है।
  • अधिक मात्रा में बाजरा का सेवन करने से आपकी त्वचा भी रूखी हो सकती है।
  • बाजरे का अधिक उपयोग घेंघा (Goitre), तनाव और सोचने की क्षमता में कमी का कारण भी बन सकता है।

बाजरे से होने वाला प्रभाव ?

बाजरा शरीर में गर्मी पैदा करने वाला अनाज है । यह आपकी मौजूदा दवाओं पर असर डाल सकता है। इसके उपयोग करने से पहले अपने हर्बलिस्ट या डॉक्टर से परामर्श करें।

बाजरे की सामान्य खुराक क्या है?

मधुमेह के रोगियों के लिए – बाजरे के आटे को घर में इस्तेमाल किए जाने वाले आटे के साथ बराबर मात्रा में मिलाएं। अब इस आटे की दो रोटियां 2 हफ्तों तक दिन में दो बार खाएं।

मोटापे के लिए – 1 महीने तक दिन में एक बार बाजरे की खिचड़ी खाएं।

बाजरे की खुराक हर किसी के लिए अलग-अलग हो सकती है। आपके द्वारा ली जाने वाली खुराक आपकी उम्र, स्वास्थ्य और शरीर की कई अन्य स्थितियों पर निर्भर करती है। बाजरा हमेशा सुरक्षित नहीं होता है। कृपया उचित खुराक के लिए अपने हर्बलिस्ट या डॉक्टर से चर्चा करें।

बाजरा (Bajra) किन रूपों में उपलब्ध है?

कच्चा बाजरा

बाजरे की खेती

बाजरा शुष्क क्षेत्र में अनाज वाली प्रमुख फसल है।बाजरे की विशेषता है सूखा प्रभावित क्षेत्र में भी उग जाता है तथा यह अम्लीयता को भी झेल जाता है। यही कारण है कि यह उन क्षेत्रों में उगाया जाता है जहां मक्का या गेहूँ नही उगाये जा सकते। आज विश्व भर में बाजरा 260,000 वर्ग किलोमीटर में उगाया जाता है।

मोटे अन्न उत्पादन का आधा भाग बाजरा होता है।बाजरा असिंचित एवं सिंचित क्षेत्रों में खरीफ ऋतु में उगाया जाता है अनाज के साथ यह चारे की भी अच्छी उपज देता है। बाजरा पौष्टिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण फसल है। इसमें 155 प्रतिशत प्रोटीन, 5 प्रतिशत वसा एवं 67 प्रतिशत कार्बोहाइट्रेट पाया जाता है।

राज्य के पश्चिमी भाग में बाजरे की फसल 23 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में उगाई जाती है, लेकिन इसकी औसत उपज बहुत ही कम है।विभन्न तकनीकियों के प्रयोग से बाजरे की फसल से अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है। एम् यह मुनाफे का रोजगार है।

बाजरे की खेती के लिए भूमि एवं उसकी तैयारी

बाजरे की खेती दोमट, बलुई दोमट एवं बलुई भूमि में सफलतापूर्वक की जा सकती है। भूमि में जल निकास की उचित व्यवस्था होनी चाहिये। अधिक समय तक खेत में पानी भरा रहना फसल को नुकसान पहुंचा सकता हैं। वर्षा के पश्चात प्रथम जुताई मिट्टी पलटने वाले हल या डिस्क हैरो से करनी चाहिये। इसके पश्चात हैरो द्वारा एक क्रौस जुताई करके पाटा लगा कर खेत को ढेले रहित एवं समतल कर दें।

बीज दर एवं बुवाई की विधि

बाजरे की बुवाई का समय किस्मों के पकने की अवधि पर बहुत निर्भर करता है। बाजरे की दीर्घावधि (80-90 दिनों) में पकने वाली किस्मों की बुवाई जुलाई के प्रथम सप्ताह में कर दे। मध्यम अवधि (70-80 दिनों) में पकने वाली किस्मों की बुवाई 40 जुलाई तक कर दें तथा जल्दी पकने वाली किस्मों (65-70 दिन) की बुवाई 10 से 20 जुलाई तक की जा सकती है। बाजरे की फसल के लिए 4-5 किग्रा. बीज प्रति हैक्टेयर पर्याप्त होता है। अच्छी उपज के लिए खेत में पौधों की उचित संख्या हो। बाजरे की बुवाई पंक्तियों में 45 से 50 सेमी. की दूरी पर तथा पौधे से पौधे की दूरी 40 से 45 से.मी. रखें।

खाद एवं उर्वरक

बाजरे की अच्छी और मुनाफे की खेती के लिए भूमि की तैयारी करते समय 5 टन अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद या कम्पोस्ट खाद प्रयोग करें। इसके पश्चात बाजरे की वर्षा आधारित फसल में 40 किग्रा. नाइट्रोजन व 40 किग्रा. फास्फोरस प्रति हेक्टेयर की आवश्यकता होती है।

बुवाई करते समय 44 किग्रा. यूरिया एवं 250 किग्रा. सिंगल सुपर फास्फेट या 97 किग्रा. डी.ए.पी. व 9.5 किग्रा. यूरिया खेत में प्रति हेक्टेयर की दर से दें। उर्वरक सीड कम फर्टिलाइजर ड्रील के द्वारा बुवाई के साथ देना लाभप्रद रहता है।

शेष 20 किग्रा. नाईट्रोजन देने के लिए फसल जब एक महिने की हो जाये तो निराई-गुड़ाई करने के पश्चात यदि खेत में उचित नमी हो तो 43 किग्रा यूरिया प्रति हेक्टेयर की दर से समान रूप से छिडक़ाव कर देें। जहाँ पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो उस स्थिति में 60 किग्रा. नाईट्रोजन एवं 40 किग्रा. फास्फोरस की मात्रा प्रति हैक्टेयर की दर से प्रयोग करनी चाहिये। ध्यान रहे उर्वरकों का उपयोग मिट्टी की जांच के आधार पर ही करेें।

फसल चक्र – बाजरे की फसल से अधिक पैदाकर प्राप्त करने के लिए उचित फसल चक्र आवश्यक है। असिंचित क्षेत्रों के लिए बाजरे के बाद अगले वर्ष दलहन फसल जैसे ग्वार, मूंग या मोठ लें। सिंचित क्षेत्रों के लिए बाजरा – सरसों, बाजरा – जीरा, बाजरा – गेंहू फसल चक्र प्रयोग में लेें।

जल प्रबंध – पौधों की उचित बढ़वार के लिए नमी का सबसे महत्वूपर्ण स्थान है। वर्ष द्वारा प्राप्त जल के अधिक उपयोग के लिए खेत का पानी खेत में रखना आवश्यक है। इसके लिए खेत की चारों तरफ मेड़बन्दी करें। इसके द्वारा खेत का पानी बाहर बहकर नहीं जायेगा तथा भूमि का जल कटाव से बचाव भी किया जा सकेगा।

भूमि में उपलब्ध नमी का वाष्पीकरण द्वारा नुकसान को रोकने के लिए फसल की पंक्तियों के बीच बिछावन का प्रयोग लाभप्रद रहता है। बिछावन के लिए खरपतवार या फसल के अवशेषों को प्रयोग में लिया जा सकता हैं। इसके अतिरिक्त फसल की बुवाई, मेड एवं कूंड विधि द्वारा वर्षा जल गहरे कूडों में जो जाता है तथा खेत में नमी अधिक दिनों तक संचित रहती है। जिसके द्वारा फसल की अधिक पैदावार प्राप्त की जा सकती है।

सिचिंत क्षेत्रों के लिए जब वर्षा द्वारा पर्याप्त नमी न प्राप्त हो तो समय समय पर सिंचाई करें। बाजरे की फसल के लिए 3-4 सिंचाई पर्याप्त होती हैं ध्यान रहे दाना बनते समय खेत में नमी रहे। इससे दाने का विकास अच्छा होता हैं, एव दाने व चारे की उपज में बढ़ोतरी होती है।

पपड़ी प्रबंधन – फसल की बुवाई के बाद उगने से पहले वर्षा आ जाये तथा वर्षा के बाद तेज धूप निकल जाये तो भूमि की उपरी सतह सख्त हो जाती है, तथा सूखकर पपड़ी बनने के कारण बीज अंकुरित होकर बाहर नहीं आ पाता। पपड़ी बनने का मुख्य कारण भूमि की भौतिक संरचना है। पपड़ी की समस्या से बचने के लिए कूंडों में 8-10 टन गोबर या कम्पोस्ट खाद का प्रयोग करनालाभ दायक रहता है।

बाजरे की फसल में होने वाले रोग एवं रोग की पहचान तथा उनसे सुरक्षा

बाजरे की फसल में हानिकारक कीट एवं रोग और उनके रोकथाम 

दीमक – दीमक बाजरे के पौधे की जड़े खाकर नुकसान पहुँचाती है, इसकी रोकथाम के लिए खेत तैयार करते समय क्यूनालफास या क्लोरपायरीफास 1.5 प्रतिशत पॉउडर 25-30 किलो/हेक्टेयर की दर से जमीन में मिला देनी चाहिए। इसके अतिरिक्त बीज को क्लोरपायरीफास 4 मि.ली. /किलो बीज की दर से बीज उपचार करना चाहिए।

कातरा – बाजरे की फसल को कातरा की लट प्रारम्भिक अवस्था में काटकर नुकसान पहुंचाता है इसकी रोकथाम के लिए क्यूनालफास 1.5 प्रतिशत पाउडर की 20-25 किलो/हेक्टेयर की दर से भुरकाव करना चाहिए।

सफ़ेद लट – बाजरे में सफेद लट के नियंत्रण के लिए एक किलो बीज में 3 किलो कारबोफ्यूरान 3 प्रतिशत या क्यूनॉलफास 5 प्रतिशत कण 15 किलो डीएपी मिलाकर बोआई करें।

रूट बग – बाजरे में रूट बग के नियंत्रण के लिए क्यूनॉलफॉस डेढ़ प्रतिशत या मिथाइल पैराथियॉन 2 प्रतिशत चूर्ण का 25 किलो प्रति हैक्टेयर की दर से भुरकाव करें।

जोगिया – जोगिया के नियंत्रण के लिए बुवाई के 21 बाद मैंकोजेब 1 किलो/एकड़ का छिड़काव करे।

अरगट या चेपा – इसकी रोकथाम के लिए बीज को थिरम 75 प्रतिशत डब्लूएस 2.5 ग्राम और कार्बेण्डाजिम 50 प्रतिशत डब्लूपीकी 2.0 ग्राम प्रति किग्रा बीज की दर से उपचारित करके बोना चाहिए। रोग के लक्षण दिखने पर कार्बेन्डाजिम+मैंकोजेब 40 ग्रा/15 लीटर पानी के साथ मिलकर छिड़काव करना चाहिए।

स्मट – स्मट की रोकथाम के लिए बीज को थिरम 75 प्रतिशत डब्लूएस 2.5 ग्राम और कार्बेण्डाजिम 50 प्रतिशत डब्लूपीकी 2.0 ग्राम प्रति किग्रा बीज की दर से उपचारित करके बोना चाहिए।तथा रोग के लक्षण दिखने पर मेटलैक्सिल+मैंकोजेब के मिश्रित रसायन को 40 ग्रा/15 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करे।

भण्डारण

बाजरे की खेती से बाजरे का उत्पादन लगभग 25 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो जाता है। जबकि 70 क्विंटल तक सुखा चारा मिल जाता है। अनाज के भण्डारण के लिए नमी रहित स्थान पर बोरे भरकर रखना चाहिए।

अब आप जान गए हैं, कि बाजरे की कौन से प्रकार है जिसका सेवन करके आप अपनी स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों को कम कर सकती हैं और एक स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकती हैं। साथ ही बाजरे की खेती कैसे करे यह भी आप जान गए है

सुरक्षा के लिहाज से अभी बाजरे के उपयोग को लेकर और अध्ययन की जरूरत है । बाजरे के सेवन से होने वाले फायदे से पहले आपको उससे होने वाले नुकसान को भी समझ लेना चाहिए। अगर आपको यह पोस्ट उपयोगी लगे तो इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करे बाजरे के विषय में आप कोई राय या जानकारी देना चाहते है तो कमेंट अवश्य करे

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