Nakli Paneer kaise banta hai | Paneer banane ka method | मिलावटी पनीर कैसे बनाया जाता है ?

हेल्थ

Paneer : हमारा शरीर हमारी सबसे बड़ी विरासत है, हमारी यह जिम्मेदारी है की हम खुद इसकी रक्षा करे।हम जो खा रहे है उसके बारे में हमें पूरी जानकारी मिले तथा हम सुनिश्चित करे की उसकी गुणवत्ता कैसी है । हमें इस चीज के बारे में जरूर सोचना चाहिए, क्युकी आजकल खाद्य पदार्थो का नकली उत्पादन बहुत तेजी से किया जा रहा है। लोगो के लिए खाद्य पदार्थों में मिलावट कर बेचना आम बात हो गई है .. आज के समय में मिर्च मसालों से लेकर दूध, दही और पनीर तक में मिलावट की जा रही है।

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वहीं कुछ खाद्य पदार्थ तो आजकल मार्केट में नकली भी मिल रहे हैं।किसी भी प्रकार की कार्यवाही के बावजूद ये लोग अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। बाजार में नकली खाद्य पदार्थ जमकर बेचे जा रहे हैं। ऐसा ही एक खाद्य पदार्थ पनीर जिसका उपयोग हर छोटे बड़े उत्स्व में किया जाता है अनेक बार बिना उत्स्व के भी पनीर का उपयोग बहुत सारे डिश को स्वादिष्ट बनाने के लिए किया जाता है।पनीर प्रोटीन का एक पावर हाउस है और यह कैल्शियम का भी एक अच्छा स्रोत है जो दांतों और हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए अच्छा है।

सभी वयस्कों और बच्चों को नियमित रूप से अपनी डाइट में पनीर (Paneer) की एक अच्छी मात्रा को शामिल करना चाहिए ऐसा माना जाता है । कहा जाता है की पनीर को फ्रेश और कच्चा भी खाया जा सकता है क्योंकि यह स्वादिष्ट होता है। पनीर अधिकतर लोगों को पसंद होता है और सबसे अच्छी बात यह है कि यह स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है।लेकिन मै ये कहु की आपके पनीर में मिलावट है जो बीमारियों का कारण है।

तो क्या तब भी आप पनीर का उपयोग करेंगे मैं ये नहीं कहती की आप पनीर खाना छोड़ दे लेकिन पहले पनीर के विषय में कुछ बातो को जरूर जान ले हालांकि, पनीर को देखकर उसके असली या फिर नकली (Nakli paneer) होने का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। केवल खाने पर ही यह पता किया जा सकता है कि पनीर असली है या मिलावटी। 

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नकली मिलावटी पनीर कैसे बनाया जाता है ?

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पनीर (cheese) का गोरखधंधा बहुत तेजी से बढ़ रहा है। अवैध फैक्ट्रियो में हजारो किलो नकली पनीर प्रतिदिन उत्पादन किया जाता है और फिर देश भर में इसकी सप्लाई की जा रही है। कई गांव ऐसे है जहा के सारे लोग बड़े स्तर पर नकली पनीर बनाने है।

दरअसल आकड़ो की माने तो देश में करीब 15 करोड़ टन दूध (milk) का उत्पादन होता है। ऐसे में अगर इस पूरे दूध को पनीर बनाने में भी खर्च कर दें तो 7 लाख टन पनीर ही बन सकता है। जबकि हमारे देश में पनीर की डिमांड हर साल लगभग25% की दर से बढ़ रही है और एक अनुमान के मुताबिक इस वक्त देश में 5 लाख टन पनीर की खपत हो रही है।

जबकि देश में पूरे दूध का पनीर तो बनता नहीं है और एक लीटर दूध का पनीर लगभग 150 ग्राम के आसपास बनता है।ऐसे में ये साफ है कि हमारे आपके घर तक नकली या मिलावटी पनीर (Nakli Paneer kaise banta hai | Paneer banane ka method) भेजकर मुनाफा कमाने वाले अपना खेल कर रहे हैं।

पनीर जिसे आप बाजार से 300 र / किलो खरीद रहे है, हो सकता है वो नकली पनीर हो जिसकी लगता सिर्फ 30 रुपए किलो है अगर नकली पनीर बनाने की बात करें तो आपको बता दे कि मिलावटखोर सिर्फ 150 रुपए में पांच किलो नकली पनीर बनाते हैं।नकली/ मिलावटी पनीर बनाने के लिए वो लोग अक्सर यूरिया, डिटर्जेंट, कोल् तार डाई, सल्फारिक अम्ल, आरारोट में फार्मलीन का उपयोग करते है ।

नकली पनीर बनाने का सबसे प्रचलित तरीका कुछ ऐसा है

थोड़ा सा दूध में सोडियम बाई-कार्बोनेट यानि बेकिंग सोडा डालते है।
फिर इस मिश्रण को सस्ते वनस्पति तेल में मिलाया जाता है।
इसके बाद इसमें बेकिंग पाउडर डाल कर पनीर बनाने के लिए छोड़ दिया जाता है।और नकली पनीर तैयार

फार्मलीन डाल कर ऐसे बनता है मिलावटी पनीर

दूध से क्रीम निकाल लिया जाता है और फिर उस दूध में आरारोट मिला दिया जाता है। दूध में आरारोट की मात्रा इतनी होती है कि वह गाढ़ा हो जाता है, जिसमें फार्मलीन डाल दिया जाता है। दूध फाड़ने के लिए छेने का पानी का डाल दिया जाता है। बस, कथित छेना तैयार होकर पनीर बन गया।

अरारोट क्या है

अरारोट (Ararot) रसोई में काम आने वाला सफ़ेद रंग का बारीक़ पाउडर है जो अक्सर आलू की टिकिया बनाते समय काम लिया जाता है।

क्या है फार्मलीन

यह एक केमिकल है, जिसे ‘स्लो प्वाइजन’ भी कहा जाता है। इसका उपयोग दूध व पनीर को लंबे समय तक खराब होने से बचाने में किया जाता है। मिलावटी पनीर व दूध में इसका उपयोग आम तौर पर होता है।

सिंथेटिक दूध से पनीर

दूध से क्रीम निकालने के बाद बचे हुए दूध को टोंड कहा जाता है। इससे घी, मक्खन या पनीर निकालना संभव नहीं है। मिलावटी दूध का कारोबार करने वाले इस टोंड दूध में सोडियम बाइ कार्बोनेट मिला देते हैं। इससे दूध गाढ़ा हो जाता है। इससे धीमी आग पर कुछ देर गर्म करने के बाद पाम ऑयल मिला देते हैं। ऐसा करने पर दूध थक्के का रूप लेने लगता है। इस घोल में बेकिंग पाउडर डाल कर फाड़ दिया जाता है, जिससे दूध स्पंजी होकर पनीर का रूप ले लेता है।

लेकिन क्या आप जानते है अब पानी से भी पनीर बन रहा है

क्या आप भी खाते हैं पनीर, अगर हां तो हो जाएं सावधान, बन रहा पानी रिफाइंड और  केमिकल से, हुआ खुलासा | Paneer Being made From Water refined And chemical  video going

कई जगहों पर फैक्ट्री में पानी और रिफाइंड मिला कर भी पनीर बनाया जा रहा था। इन जगहों पर भारी मात्रा में रिफाइंड और केमिकल (दूध के स्थान पर ) मिला कर पनीर बनाया जा रहा था। सबसे बड़ी बात फैक्ट्री के मालिक का कहना की जो व्यक्ति जिस रेट के पनीर की मांग करता है, उसे उस तरह का पनीर बना कर देते हैं। अगर किसी को सस्ता चाहिए तो पानी से बनाते हैं।

थोड़ा महंगा चाहिए तो रिफाइंड और केमिकल मिलाते हैं। फैक्ट्री के मालिक का ये भी कहना है। कि दिल्ली, फरीदाबाद समेत उनके यहां से रोज 700 से 800 किलो पनीर बना कर भेजा जाता है। कर्मचारियों से पूछा तो वो बोले कि पानी और बर्फ मिलाते हैं, जहां पनीर बनाया जा रहा था उस स्थान पर बहुत ही गंदी बदबू थी और पूरी जगह पर मक्खीया भिनभिना रही थी।

किसी जगह रिफाइंड के डिब्बों को बड़े से भगोने में गर्म किया जा रहा था तो कहीं सफेद रंग का केमिकल मिलाया जा रहा था। जब उस केमिकल को अपने हाथ पर लेकर देखा तो वो केमिकल पूरी तरह हाथ पर जम गया। उस केमिकल को छुड़ाने की कोशिश भी की लेकिन वो हाथ पर ऐसे चिपक गया जैसे कोई ग्रीस या ऑइल हो।

इतना ही नहीं पनीर को सफेद करने के लिए उसमें केमिकल मिलाया जा रहा था।

जब इसकी वजह पूछी गई तो उसने लॉजिक दिया कि दूध गर्म होकर लाल हो जाता है तो उसे सफेद करने के लिए ये केमिकल मिलाते हैं, जिससे इसका रंग सफेद हो जाए।मैं आपसे यही कहूँगी की बाहर का मिलावटी पनीर खाने से आपकी सेहत अच्छी नहीं बल्कि और खराब हो जाएगा। आप अपने उपयोग के लिए घर पर ही पनीर बनाये

नकली पनीर की पहचान कैसे करे ?

कुछ तरीके है जिसकी मदद से आप घर बैठे भी जाँच कर सकते है और कुछ जाँच के लिए, दवाई कि दुकान से आपको एक चीज लानी रहेगी बस।

भौतिक जांच

इसमें हम पनीर के रंग, रूप, स्वाद, महक इत्यादि जांचा जाता है।

शुद्ध पनीर – मजबूत और मुलायम होता है, रंग बिल्कुल सफेद। इसकी सतह की बनावट एकदम बारीक़ बुनाई जैसी होगी। इसको मसलने पर टूटेगा नहीं। इसकी खुशबूऔर स्वाद दूध जैसी और लजीज लगती है।

नकली पनीर – ठोस और रबर जैसा महसूस होगा,रंग भी हो सकता है एकदम सफ़ेद न हो। और बेकिंग सोडा मिला होने का कारण हल्का सा मसलने पर भी टूट जाता है। इसकी महक अजीब होगा, बेस्वाद या हल्का स्वाद होगा। धुए जैसी भी महक हो सकती है।

आसानी से जांच करे घर पर

  • पनीर को लीजिये, उसको पानी में डाल के उबाल लिजिये और ठंडा होने होने के लिए छोड़ दे।
  • इसके बाद इसमें सोयाबीन या अरहर पाउडर दाल डाल कर 10 मिनट के लिए छोड़ दे।रंग के बदलाव हो तो ध्यान दे।

शुद्ध पनीर – मिश्रण का रंग नहीं बदलेगा।
नकली पनीर – मिश्रण का रंग धीरे धीरे लाल होने लगेगा जो डिटर्जेंट या यूरिया मिला होने का संकेत है।

The Difference Between Cheese And Paneer - Foods Guy

रासायनिक जाँच से स्टार्च मिलावट की पहचान

  • पनीर को एक बर्तन में पानी डालकर कुछ देर तक उबालिये, ठंडा होने दीजिये।
  • तबतक दवाई की दुकान से ‘टिंक्चर आयोडीन’ नाम की रसायन लाइये।
  • आयोडीन, भूरा लाल रंग का होता है, उसकी कुछ बुँदे उबले हुए पनीर में डालिये।

शुद्ध पनीर: आयोडीन का रंग भूरा लाल ही रहेगा। कुछ परिवर्तन ना होगा।

नकली पनीर: आयोडीन का रंग भूरा लाल से बदलकर नीला हो जाएगा जो स्टार्च की मिलावट दर्शाता है।

अगली बार आप पनीर लेने जाये तो निम्न बातों का ध्यान दे

  • पैकेट को ध्यान से पढ़े, उसपर बनाने वाली कंपनी का पता, बैच नंबर, लॉट नंबर, एक्सपायरी डेट, पोषक तत्वों की जानकारी, अवश्य होनी चाहिए।
  • पैक किये हुए पनीर को प्राथमिकता दे, खुले पनीर न खरीदे।
  • पनीर लेने/बनाने से पहले कम से कम भौतिक जांच जरूर कर ले।

 

नकली सामान बनाने पर सजा का प्रावधान भी है जिसमे सामान बनाने वाले व्यक्ति को ये सजा हो सकती है …

  • आईपीसी की धारा 272 : नकली चीजें तैयार करना। इस धारा में दोषी होने पर 6 महीने की सजा और एक हजार रुपए जुर्माना या दोनों ही सजा का प्रावधान है।
  • आईपीसी की धारा 273 : खाने-पीने की चीजों को तैयार करने में ऐसे पदार्थों का इस्तेमाल करना जो सेहत के लिए ठीक न हों। दोषी पाए जाने पर 6 महीने सजा और 1000 जुर्माने का प्रावधान है।
  • आईपीसी की धारा 420: धोखाधड़ी करना, इस धारा में दोषी पाए जाने पर सात साल की सजा और फाइन या दोनों होने का प्रावधान है।

जिस तरह से सिगरेट के पैकेट पर चेतावनी लिखी होती है कि सिगरेट पीना आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, उसी तरह उपलब्ध खाद्य पदार्थों के पैकेटों के ऊपर भी लिखा होना चाहिए कि इसमें रसायनों के तत्व मौजूद हैं। इसके बाद लोगों को फैसला लेने दें। मुझे पूरा भरोसा है कि इस तरह की स्पष्ट चेतावनी दी जायेगी

तो अभिभावक अपने बच्चों को कुछ भी खिलाने से पहले इन खाद पदार्थो के उपयोग से पहले दोबार जरूर सोचेंगे । भारत में भोजन के स्तर पर इसी तरह की क्रांति की जरूरत है। भूलिए मत, आप जैसा खाते हैं वैसे ही बन जाते हैं।


स्वस्थ रहे, खुश रहे।

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