National Pollution Control Day।2 दिसंबर को ही क्यों मनाया जाता है ‘राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस’

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National Pollution Control Day
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National Pollution Control Day 2021। know why we celebrate national pollution control day । 2 दिसंबर को ही क्यों मनाया जाता है ‘राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस’
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National Pollution Control Day : दो दिसंबर को राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाना है. 2 दिसंबर, 1984 को भोपाल गैस त्रासदी में अपनी जान गंवाने वाले लोगों की याद में हर साल 2 दिसंबर को भारत में राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस मनाया जाता है।उस गैस त्रासदी में पूरा शहर एक गैस चैंबर बन गया था जिसमें 3788 लोगों ने जान गंवा दी थी.इतने सालों बाद आज भी पूरी दुनिया में इतिहास की सबसे बड़ी औद्योगिक प्रदूषण आपदा के रूप में जाना जाता है।

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लेकिन देश का एक और शहर है जो पिछले पचास साल में रह-रहकर गैच चैंबर बन जाता है. वह शहर है देश की राजधानी दिल्ली. आइये जानते हैं कि साल दर साल दिल्ली में प्रदूषण के हालात बदतर होते गए

बढ़ते गए दिल्ली में गैस चैंबर वाले दिन

दिल्ली में ज्यादा प्रदूषण वाले दिनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. जैसे सीपीसीबी के नवंबर के आंकड़ों को देखें तो 1990 में नवंबर में 6 दिन प्रदूषण गंभीर श्रेणी में था. लेकिन 2016 में यह आंकड़ा 15 दिन का हो गया. हालांकि 2015 में इसमें गिरावट आई और गंभीर प्रदूषण वाले दिनों की संख्या 7 पहुंच गई. फिर 2018 में 5 दिन, 2019 में 7 दिन, 2020 और 2021 में 9 दिन नवंबर के प्रदूषण की गंभीर श्रेणी में रहे.

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हर साल 15 लाख लोगों की मौत

वहीं प्रदूषण से होने वाली मौतों पर नजर डालें तो पर्यावरणविद के अनुसार देश में हर साल 15 लाख लोग प्रदूषण से जान गंवा देते हैं. वहीं अत्याधिक जहरीली गैसों के चलते दिल्ली के लोगों की औसत उम्र 9.5 साल तक कम हो जाती है.

वायु प्रदूषण

  • वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारक वाहनों से निकलने वाला धुआं है। 40 फीसदी तक वायु प्रदूषण वाहनों से निकलने वाले धुएं की वजह से होता है।
  • ट्रैफिक लाइट रेड होने पर अधिकांश लोग अपने गाड़ियों का इंजन स्टार्ट रखते हैं। एक शोध के मुताबिक इंजन स्टार्ट रहने पर चलती गाड़ियों की तुलना में खड़ी गाड़ियों से निकलने वाले धुएं से वातावरण ज्यादा प्रदूषित होता है।

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10 माइक्रोन से ज्यादा बड़े साइज वाले कण नाक के बालों से रूक कर फेफड़े तक नहीं पहुंच पाते हैं। जबकि, इनसे छोटे कण सीधे हमारे फेफड़े तक पहुंच जाते हैं। वाहनों से निकलने वाले धुएं के कण 10 माइक्रोन से कम साइज के होते हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी होते हैं।

प्रदूषण का सेहत पर असर

प्रदूषण आज न केवल भारत, बल्कि पूरी दूनिया के लिए नासूर बनता जा रहा है, जिसकी वजह से बढ़ती बीमारियों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ कई गुना बढ़ता जा रहा है। हवा में मौजूद प्रदूषण के कण न केवल दिल, दिमाग और फेफड़ों पर गंभीर असर डालते हैं बल्कि कैंसर जैसी असाध्य बीमारियों का भी कारण बन रहे हैं।

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विशेषज्ञों का मत है कि प्रदूषण से उम्र पर पड़ने वाला प्रभाव धूम्रपान और टीबी जैसी बीमारियों से भी ज्यादा है और अगर प्रदूषण को लेकर WHO के मानकों का सख्ती से पालन किया जाए तो लोगों की उम्र में कई साल की बढ़ोतरी हो सकती है।

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दिल्ली में इन बिंदुओं पर काम करने की आवश्यकता

  • कंस्ट्रक्शन साइट पर बिल्डिंग मटेरियल को ढक कर रखा जाए।
  • समय समय पर पानी का छिड़काव किया जाए।
  • ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
  • लाल बत्ती पर गाड़ियों का इंजन बंद किया जाए।
  • चौराहों पर लगे फव्वारों को लगातार चलाया जाए।
  • पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (पीयूसी) सर्टिफिकेट जारी करते हुए गाड़ियों के इंजन को ट्यून किया जाए।
  • गाड़ियों का पॉल्यूशन नियमित अंतराल पर हो ।
  • औद्योगिक क्षेत्रों में लगे प्रदूषण नियंत्रण संयंत्रों की लगातार जांच की जाए।
  • औद्योगिक क्षेत्रों में पौधरोपण एवं वनीकरण को बढ़ावा दिया जाए।


प्रदूषण नियंत्रण दिवस को मनाने का उद्देश्य

इस दिन का उद्देश्य प्रदूषण को रोकने में मदद करने वाले कानूनों के बारे में लोगों को जागरुक करना, औद्योगिक आपदाओं के प्रबंधन तथा नियंत्रण के प्रति जागरूकता फैलाना और औद्योगिक प्रक्रियाओं व मानवीय लापरवाही से पैदा प्रदूषण को रोकना है। देश के कई हिस्सों में पर्यावरण प्रदूषण को लेकर जो विकराल स्थिति बरकरार है, ऐसे में इस दिन का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

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