Navratri 2020: Durga Ashtami,Navami व्रत कब है

आस्था

Table of Contents

Navratri 2020: Durga Ashtami व्रत कब है

Navratri 2020: Durga Ashtami,Navami
Navratri 2020: Durga Ashtami,Navami

महाष्टमी (Maha Ashtami) की पूजा 23 अक्टूबर 2020 दिन में शुक्रवार को की जाएगा। महाष्टमी का व्रत 24 अक्टूबर 2020 शनिवार को रखा जाएगा।

Advertisement

Durga Ashtami 2020 Date : शारदीय नवरात्रि (Navaratri 2020) का दस दिवसीय पावन पर्व, भारत ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व में धूमधाम से मनाया जाता है. शारदीय नवरात्रि (Navaratri 2020) में भक्त मां दुर्गा (Maa Durga) के नौ स्वरूपों की पूजा,आराधना कर, मां दुर्गा (Maa Durga) कि असीम कृपा प्राप्त करते हैं।

यह पर्व प्रतेक वर्ष अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आरंभ होता है, जो नवमी तक चलता है. नवरात्रि में अष्टमी (Ashtami) और नवमी (Navami) तिथि का महत्व विशेष होता है।

प्रतेक वर्ष सभी लोगो द्वारा नौ दिनों के नवरात्रों में व्रत कर अष्टमी (Maha Ashtami)और नवमी (Maha Navami)को कन्या पूजन किया जाता हैं। और दशमी तिथि को दशहरा Dussehra) पर्व मनाया जाता है। परन्तु इस वर्ष (2020) नवमी और दशहरा एक ही दिन है।

जिसके कारण नवमी पूजन, व्रत और अष्टमी का व्रत करने की तारीख को लेकर सभी लग कंफ्यूजन है।तो चलिए इस कंफ्यूजन को दूर करते हे और बताते है। अष्टमी (Maha Ashtami) नवमी (Maha Navami) और दशमी तिथि यानी कि दशहरा (Dussehra) तिथि कब के और कैसे पूजा करे इन तिथियों में

Read more at: Shardiya Navratri 2020 : 17 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक

महाष्टमी तिथि कब से कब तक है

कब मनाए जाने हैं सप्तमी, अष्टमी, महानवमी और दशहरा

पंचांग के अनुसार 23 अक्टूबर, शुक्रवार को सप्तमी की तिथि 12:09 बजे तक है. इसी के तुरंत बाद से अष्टमी की तिथि शुरू हो जाएगी जो 24 अक्टूबर, शनिवार को दिन में 11:27 तक रहेगी. वहीं नवमी की तिथि 25 अक्टूबर, रविवार को दिन में 11:14 बजे तक रहेगी.

इस साल अष्टमी का व्रत 24 अक्टूबर को रखना उत्तम है, वहीं व्रत का पारण यानी नवमी 25 अक्टूबर को मनाई जाएगी. 25 अक्टूबर की शाम से दशमी तिथि लगने के कारण दशहरा या विजयादशमी का त्योहार भी इसी दिन मनाया जाएगा

महानवमी 25 अक्टूबर 2020 दिन रविवार को मनाई जाएगी। इसी दिन नवमी रविवार को ही दिन में 11:14 बजे तक नवरात्रि व्रत अनुष्ठान से सम्बंधित यज्ञ- हवन, कन्या पूजन, आदि किया जाएगा।

Read more at : नवरात्रि में देवी के नौ (9) स्वरूपों का नाम एवं देवी के पसंदीदा भोग, यहां जानिए कब लगाएं किस देवी को कौनसा पसंदीदा भोग

तथा जिन वयक्तियो का पहला और आखरी व्रत होता हैं। वो 24 अक्टूबर को ही अष्टमी का व्रत रखेंगे और 25 अक्टूबर को नवमी के दिन कन्या पूजन करेंगे। 25 अक्टूबर को ही शाम को दशहरा का त्योहार मनाया जाएगा।

महानवमी तिथि कब से कब तक है

महानवमी 24 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 58 मिनट से – 25 अक्टूबर को सुबह 7 बजकर 41 मिनट तक

अष्टमी और नवमी तिथि के दिन ही कन्या पूजन किया जाता हैं. साथ ही कई अन्य मांगलिक कार्यक्रम जैसे मुंडन, अन्नप्राशन संस्कार और गृह प्रवेश भी इन तिथि पर किया जाना शुभ माना जाता है. शारदीय नवरात्रि 2020 में अष्टमी और नवमी पूजन 24 अक्टूबर (शनिवार) को किया जा रहा है.

अष्टमी तिथि पर करें देवी महागौरी की आराधना

देवी महागौरी को मां दुर्गा का आठवां अवतार माना गया है. उनके अवतार को लेकर मान्यता है कि मां पार्वती ने भगवान शिव को पाने के लिए, देवी महागौरी के रूप में ही जन्म लेकर कड़ी तपस्या की थी.

उस तप के चलते, मां पार्वती का रंग काला पड़ गया था. बाद में जब भगवान शिव उस कठोर तपस्या से प्रसन्न हुए, तो उन्होंने मां पार्वती को पवित्र गंगा के जल से स्नान कराया.

माना जाता है कि इसके बाद ही देवी का रंग बेहद गोरा हो गया और तब से ही वो विश्वभर में देवी महागौरी के नाम से विख्यात हुई. देवी दुर्गा के इस स्वरूप को गंगा के जल की भांति बेहद शांत और निर्मल माना गया है,

जिनका वाहन वृषभ होता है. इसलिए जो भी भक्त सच्ची भावना से मां महागौरी की उपासना जो भी भक्त सच्ची भावना से करता है, उसके अपने सभी पाप, दोष खत्म हो जाते है

देवी महागौरी की पूजा मंत्र

ॐ देवी महागौर्यै नमः॥


प्रार्थना मंत्र

श्वेते वृषेसमारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा॥

देवी महागौरी का पसंदीदा रंग

देवी महागौरी को सफेद व पीले पुष्प बेहद प्रिय हैं।

देवी महागौरी का भोग

देवी को नारियल का भोग लगाया जाता है. नारियल का भोग लगाने से घर में सुख-समृद्धि आती है. महागौरी की पूजा करने के बाद पूरी, हलवा और काला चना एकसाथ 9 कन्याओं को खिलाया जाता है.

देवी महागौरी की आरती


महागौरी माता की आरती
जय महागौरी जगत की माया।

जया उमा भवानी जय महामाया।।

हरिद्वार कनखल के पासा।

महागौरी तेरा वहां निवासा।।

चंद्रकली और ममता अंबे।

जय शक्ति जय जय मां जगदंबे।।

भीमा देवी विमला माता।

कौशिकी देवी जग विख्याता।।

हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा।

महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा।।

सती ‘सत’ हवन कुंड में था जलाया।
उसी धुएं ने रूप काली बनाया।।

बना धर्म सिंह जो सवारी में आया।

तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया।।

तभी मां ने महागौरी नाम पाया।

शरण आनेवाले का संकट मिटाया।।

शनिवार को तेरी पूजा जो करता।

मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता।।

भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो।

महागौरी मां तेरी हरदम ही जय हो।

कब मनाए जाने हैं सप्तमी, अष्टमी, महानवमी और दशहरा

नवमी तिथि पर करें मां सिद्धिदात्री की पूजा

मां दुर्गा का नौवां स्वरूप, माता सिद्धिदात्री को माना गया है. सिद्धिदात्री का अर्थ होता है सिद्धि देने वाली. ऐसे में मां के इस रूप की आराधना करने से व्यक्ति को सिद्धि यानी, सफलता के साथ-साथ ज्ञान की प्राप्ति भी होती है.

मां दुर्गा अपने इस स्वरूप में बेहद सुंदर प्रतीत होती हैं जो लाल साड़ी पहन कर, सिंह की सवारी करती हैं. माना जाता है कि स्वंय महादेव ने भी कई प्रकार की सिद्धियों की प्राप्ति करने के लिए देवी सिद्धिदात्री की उपासना की थी.

इसके लिए महादेव को वर्षों तक तप करना पड़ा था, जिसके बाद जाकर मां उनकी तपस्या से प्रसन्न हुईं और शिव जी को आशीर्वाद के रूप में सभी सिद्धियां दीं. मान्यता है कि सिद्धियों को प्राप्त करते समय, शिव जी का आधा शरीर देवी सिद्धिदात्री का हो गया था. इसलिए ही उन्हें बाद में अर्धनारीश्वर भी कहा जाने लगा.

मां सिद्धिदात्री की पूजा हेतु मंत्र

ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः॥

मां सिद्धिदात्री का प्रार्थना मंत्र

सिद्ध गन्धर्व यक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

मां सिद्धिदात्री का भोग

मां सिद्धिदात्री का मनपसंद भोग नारियल, खीर, नैवेद्य और पंचामृत हैं।

मां सिद्धिदात्री का पसंदीदा रंग

मां सिद्धिदात्री को रंगों में लाल और पीला रंग बेहद पसंद है।

मां सिद्धिदात्री की आरती (Maa Siddhidatri Ki Aarti)

जय सिद्धिदात्री मां, तू सिद्धि की दाता।

तू भक्तों की रक्षक, तू दासों की माता।

तेरा नाम लेते ही मिलती है सिद्धि।

तेरे नाम से मन की होती है शुद्धि।

कठिन काम सिद्ध करती हो तुम।

जभी हाथ सेवक के सिर धरती हो तुम।

तेरी पूजा में तो ना कोई विधि है।

तू जगदम्बे दाती तू सर्व सिद्धि है।

रविवार को तेरा सुमिरन करे जो।

तेरी मूर्ति को ही मन में धरे जो।

तू सब काज उसके करती है पूरे।

कभी काम उसके रहे ना अधूरे।

तुम्हारी दया और तुम्हारी यह माया।

रखे जिसके सिर पर मैया अपनी छाया।

सर्व सिद्धि दाती वह है भाग्यशाली।

जो है तेरे दर का ही अम्बे सवाली।

हिमाचल है पर्वत जहां वास तेरा।

महा नंदा मंदिर में है वास तेरा।

मुझे आसरा है तुम्हारा ही माता।

भक्ति है सवाली तू जिसकी दाता।

Leave a Reply