Navratri fast and science : नवरात्री में व्रत क्यों रखते है क्या इसके पीछे भी कोई साइंस है

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नवरात्रि में व्रत क्यों रखते है क्या इसके पीछे भी कोई साइंस है
नवरात्रि में व्रत क्यों रखते है क्या इसके पीछे भी कोई साइंस है

नवरात्री में व्रत क्यों रखते है क्या इसके पीछे भी कोई साइंस (Navratri fast and science)

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है नवरात्रि पर्व मनाने का एक कारण जहां धार्मिक आस्था है वहीं नवरात्र मनाने का वैज्ञानिक कारण भी है।

Navratri fast and science : दरअसल, साल के दोनों प्रमुख नवरात्र ऋतु संधिकाल यानि दो ऋतुओं के सम्मिलित के समय मनाए जाते हैं। जब ऋतुओं सम्मिलित हो रही होती है तो शरीर में वात, पित्त, कफ का समायोजन घट जाता है, जिससे इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। ऐसे में इन 9 दिनों में उपवास, के साथ साथ साफ-सफाई, शारीरिक शुद्धि,का भी विशेष ध्यान रखा जाता है और हवन जप आदि किया जाता है, ताकि वातावरण शुद्ध हो और आप स्वस्थ रहें।

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मां दुर्गा (Maa Durga) की आराधना करने के लिए नवरात्रि (Navratri) का समय सबसे बेहतर होता है. इसके लिए साल में 4 बार नवरात्रि आती हैं, जिनमें से 2 नवरात्रि गुप्‍त होती हैं. वहीं अश्विन महीने की नवरात्रि में आराधना और उत्‍सव दोनों होते हैं. मां दुर्गा के 9 रूपों को समर्पित 9 दिनों में व्रत रखे जाते हैं. भक्ति-भाव से रखे गए ये उपवास (Fast) मां की कृपा तो दिलाते ही हैं, शरीर को भी स्‍वस्‍थ रखते हैं. वैज्ञानिक दृष्टि (Navratri fast and science) से ये व्रत-उपवास बहुत फायदेमंद हैं.

उपवास करने blood sugar control में सुधार आता है, जो मधुमेह होने की सम्भावना को कम करता है। कुछ शोधों में पाया गया है कि जब हृदय स्वास्थ्य की बात आती है तो उपवास (Fast) को अपनी दिनचर्या में शामिल करना विशेष रूप से फायदेमंद हो सकता है। मतलब यह हार्ट रोगियों के लिए भी फायदे मंद है। कॉलेस्ट्रॉल को कम करता है।

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टेस्ट-ट्यूब अध्ययनों से संकेत मिलता है कि उपवास से कैंसर के उपचार और रोकथाम में लाभ हो सकता है।

Navratri fast and science : एक टेस्ट-ट्यूब अध्ययन से पता चला है कि उपवास के कई चक्रों में कैंसर कोशिकाओं को उजागर करना ट्यूमर के विकास में देरी में कीमोथेरेपी के समान प्रभावी था और कैंसर के गठन पर कीमोथेरेपी दवाओं की प्रभावशीलता में वृद्धि हुई। 

नवरात्री में माँ दुर्गा की पूजा की जाती है जो की शक्ति का प्रतीक है। यह शक्ति हमारे शरीर के भीतर ही है इसको हम इम्युनिटी सिस्टम भी कह सकते है।

नौ दिनों में तीन शुद्धिकरण चक्र

इन 9 दिनों में तीन शुद्धिकरण चक्र होते हैं। प्रत्येक चक्र प्रतीकात्मक रूप से तीन रातों के तीन चक्रों में विभाजित है।

पहले चक्र – पहले चक्र का प्रतिनिधित्व देवी दुर्गा द्वारा किया जाता है, जो ज्यादातर भौतिक दुनिया में होने वाली शुद्धि का प्रतीक है। यह भौतिक शरीर और चेतना से जुड़ा हुआ है। इस अवधि के दौरान उपवास भौतिक शरीर और चेतना को शुद्ध करता है

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दूसरा चक्र – दूसरा चक्र देवी लक्ष्मी का प्रतीक है और हमारी भावनाओं की शुद्धि को बढ़ावा देता है। इस अवधि के दौरान उपवास और ध्यान भावनात्मक बंधनो को हटा देता है,

तीसरा चक्र – तीसरा चक्र देवी सरस्वती के अधीन है। यह मुख्य रूप से हमारे मन की शुद्धि से जुड़ा है। यह हमें हमारे झूठे विश्वासों से खुद को अलग करने में मदद करता है, जो हमें हमारी धारणा में सीमित करता है और हमें स्वयं को गहराई से पहचानने से रोकता है। यह मानसिक और आध्यात्मिक शरीर की शुद्धि से जुड़ा है।


भारत में साल भर में चार अलग-अलग नवरात्रि उत्सव होते हैं।इनमे शरद नवरात्रि सबसे लोकप्रिय है। यह त्योहार मां दुर्गा (Maa Durga) और राक्षस महिषासुर के बीच हुई प्रमुख लड़ाई से जुड़ा है और बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाता है।

नवरात्री में व्रत क्यों रखते है क्या इसके पीछे भी कोई साइंस (Navratri fast and science)है

नवरात्रि पर्व मनाने का एक कारण जहां धार्मिक आस्था है वहीं नवरात्र मनाने का वैज्ञानिक (Navratri fast and science) कारण भी है।

पहले एक नजर इन चारों नवरात्रियों पर

वसंत नवरात्रि चैत्र (मार्च-अप्रैल) के महीने में आती है और यह हिंदू चंद्र कैलेंडर में नए साल की शुरुआत का प्रतीक है। यह चैत्र मास के शुक्ल पक्ष दौरान मनाया जाता है।

आषाढ़ नवरात्रि आषाढ़ माह (जून-जुलाई) के शुक्ल पक्ष के दौरान मनाई जाती है।

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (प्रथम दिन) से मनाए जाने वाले नवरात्रों में शरद नवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण है। यह सर्दियों की शुरुआत (सितंबर – अक्टूबर) का प्रतीक है और इसे महा नवरात्रि या केवल नवरात्रि कहा जाता है।

पौष नवरात्रि – पौष (दिसंबर-जनवरी) के महीने में शुक्ल पक्ष के दौरान मनाई जाती है

बीमारियों से बचाते हैं व्रत

Navratri fast and science :अश्विन महीने की नवरात्रि बारिश के जाने और ठंड का मौसम आने का समय होता है. इस समय यदि खान-पान को लेकर सावधानी बरती जाए तो कई मौसमी बीमारियों (Seasonal Diseases) से बचा जा सकता है. इस समय में सर्दी-जुकाम, बुखार, पेट संबंधी बीमारियां होना आम बात है.

ऐसे में नवरात्रि के 9 दिन तक व्रत-उपवास करने से इन बीमारियों से बचाव होता है क्‍योंकि नवरात्रि में फलाहार किया जाता है. साथ ही व्रत में आम दिनों की तुलना में कम खाया जाता है. इससे पाचन तंत्र को आराम मिलता है और शरीर को चलाने के लिए जरूरी ऊर्जा (Energy) भी मिल जाती है.

व्रत के दौरान अनाज और मसाले नहीं लिए जाते हैं. कोशिश करें कि फलाहार में भी तली चीजें न खाएं. बल्कि फलों का सेवन ज्‍यादा करें. वहीं कुट्टू, सिंघाड़ा जैसी चीजें ही खाएं. इनसे शरीर को जरूरी पोषण मिलता है.

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व्रत न करें तो भी इन नियमों का करें पालन

ऐसे लोग जो किसी कारणवश व्रत नहीं कर रहे हैं, उन्‍हें भी नवरात्रि के दौरान तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए. यानी कि लहसुन-प्‍याज, नॉनवेज और मसालेदार चीजें नहीं खानी चाहिए. ताकि उनका शरीर स्‍वस्‍थ रहे. इसके अलावा नवरात्रि खत्‍म होने पर कन्‍या पूजन करके उन्‍हें भेंट या रुपये जरूर दें.

आप नवरात्रि के दौरान मंत्रो के गलत उच्चारण करने से या गलत उच्चारण हो रहे मंत्रो को सुनने से बचे ये मन्त्र बहुत शक्तिशाली होते हैं इनका आप पर गलत प्रभाव भी पड़ सकता हैं आप बस सच्ची श्रद्धा और भाव से माता रानी का स्मरण करें माँ आपके सारी मनोकामनायें पूरी करेंगी इसी के साथ आप सभी को नवरात्री की शुभकामनायें, जय माता दी

 

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