Parenting Tips in Hindi |Bes Tips for Parents |माता-पिता भूलकर भी बच्चों के साथ न करें ये गलतियां

हेल्थ
Parenting Tips in Hindi   Tips for Parents
Parenting Tips in Hindi Tips for Parents

Parenting Tips in Hindi | Tips for Parents | माता-पिता भूलकर भी बच्चों के साथ न करें ये गलतियां

माता-पिता अक्सर बढ़ते हुए बच्चों के साथ सख्ती से व्यवहार करते हैं और उनकी हर छोटी-छोटी बात पर रोक टोक करना शुरू कर देते हैं, लेकिन ऐसा करना बच्चे और माता-पिता के बीच दूरी लाने की वजह बन सकता है। दरअसल बढ़ती उम्र बच्चों को थोड़ी-सी आजादी चाहिए होती है, ताकि वह सामाजिक ढांचे को समझ सके।

Advertisement

हर माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे जीवन में बेहतर काम करके सफलता हासिल करें, जिसकी वजह से वह अक्सर बच्चों को गलती करने पर डांट या फटकार देते हैं। दरअसल आपको लगता है कि डांटकर या चिल्लाकर बच्चे को अनुशासन सिखाया जा सकता है। इसके लिए आप कई बार उसकी पिटाई या बाथरूम में बंद कर डराने से भी नहीं चूकते। लेकिन यहीं पर हमसे चूक हो जाती है, अपने बच्चे के पालन-पोषण में।

वैसे जब आप बच्चे पर चिल्लाते हैं तो उसे शारीरिक रुप से कोई नुकसान तो नहीं पहुंचता लेकिन, इससे उसके मानसिक स्वास्थ पर असर पड़ता है और उसका आत्म विश्वास को भी काफी हद तक कम कर देता है। आज के इस बदलते दौर में गलती करने पर बच्चों को मारना या उनके ऊपर हाथ उठाना बिल्कुल भी सही नहीं है,

क्योंकि इसका सीधा असर बच्चे के मासूम मन पर पड़ता है। अगर बच्चे से कोई गलती हो जाती है, तो उसके साथ मारपीट करने के बजाय उसे प्यार से समझाना चाहिए।माता-पिता को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे और उनका मन कच्ची मिट्टी की तरह होता है, जिसे मनचाहा आकार दिया जा सकता है। बच्चों के साथ न करें मारपीट

इसके साथ ही माता-पिता को बच्चे की बात को भी ध्यान से सुनना चाहिए, ताकि उन्हें यह पता चले कि बच्चे ने किस वजह से गलती की है। अगर आप बिना वजह जाने की बच्चे को डांटना शुरू कर देंगे या उसके साथ मारपीट करेंगे, तो बच्चा आपको सच्चाई बताने से घबराने लगेगा और माता-पिता से दूरी बना लेगा

बच्चो को समझने के कुछ अन्य तरिके (सुझाव)

एक साल से छोटा बच्चा- इस उम्र के बच्चों को प्यार, देखभाल, लगाव और बहुत अधिक धैर्य की ज़रूरत होती है, जिसकी मदद से वे नई दुनिया में समायोजित होने की कोशिश करते हैं। लेकिन अगर आप प्रेगनेंसी के बाद डिप्रेशन से जूझ रही हैं, तो हो सकता है कि आप झल्ला उठें और कई बार बच्चे पर चिल्ला उठें। ‘लेकिन इससे बच्चे को नुकसान ही होगा। भले ही आप किसी बहुत छोटे बच्चे पर भी चिल्लाकर उसे अपनी बात समझाना चाहती हों

कैसे असर करता है यह- एक साल से छोटा बच्चा इस उम्र में, आपका चिल्लाना बच्चे के लिए केवल शोर से अधिक कुछ न होगा, जिससे उसका कुछ लेना-देना नहीं। इतना ही नहीं, यह उसे चिड़चिड़ा बनाने और नींद में खलल डालने का काम ही करता है।, अगर एकाध बार ऐसा होता है। तो कोई बात नहीं है कि, लेकिन अगर आप ऐसा बार-बार न करें।
आपको क्या करना चाहिए- बच्चे को शांत कराएं, प्यार करें, उसके साथ खेलें, उसे ज़्यादा प्यारभरी बातें करें। इस तरह आपके बच्चे को सुरक्षा और आराम महसूस होगा।

1-3 साल के बच्चे को डांटना

इस उम्र में, बच्चे अधिक संवेदनशील होते हैं और ऐसे वक़्त में आप उनके साथ जैसा व्यवहार करते हैं उसकी छाप बच्चे के मन पर पड़ जाती है। ‘ज़्यादातर मामलों में जब हम अपने बच्चों पर चिल्लाते हैं या डांटने हैं, तो हम उन्हें अनुशासन सिखाने की बजाय उन्हें सुरक्षित करना चाहते हैं। गीली फर्श पर दौड़ने पर आप उसपर चिल्ला सकती हैं, पॉटी ट्रेनिंग या ठीक तरीके से खाना न खाने जैसी बातों पर गुस्सा कर सकती हैं। लेकिन यह ऐसी बातें हैं, जो बच्चे समझ नहीं पाते।’

इसका क्या असर पड़ता है- ‘इस संवेदनशील उम्र में बच्चे पर चिल्लाना या उसे डांटना उनकी बेचैनी बढ़ाने का काम करेगा। बहुत अधिक डांटने से उनका आत्मविश्वास और जिंदादिल सोच पर असर पड़ेगा। ऐसी हालत में वे अपनी हरकतों की वजह से डांट सुनने से बचने की कोशिश करेंगे और अपने मन की बातें नहीं बता सकेंगे।’

आपको क्या करना चाहिए- चिल्लाने और डांटने के बाद अपने और बच्चे के बीच प्यार को बनाए रखने के लिए उसके साथ प्यार और सावधानी से बात करें। ऐसी परिस्थियों में बच्चों को किसी के साथ की ज़रूरत पड़ती है। इसलिए शांति से उसके साथ बात करें कि आपको उसपर चिल्लाना क्यों पड़ा और उसकी किसी हरकत से उसे कितना नुकसान हो सकता था।

3-5 साल के बच्चे को डांटना- यह एक मुश्किलभरी उम्र होती है, ‘ध्यान दें कि इस उम्र में आपका बच्चा उसके आसपास के लोगों का उसके प्रति व्यवहार कैसा है, इस बात पर बहुत अधिक ध्यान देता है।

इसलिए आप अपने बच्चे से कैसे बात करतें हैं, तो वह अपने भाई-बहनों और दादा-दादी के साथ आपके व्यवहार की तुलना करेगा। साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि यह उम्र है जब बच्चे अपने बड़ों से अपने लिए सम्मानजनक व्यवहार की उम्मीद रखते हैं, जिन्हें मापने का पैमाना भी उनका अपना होता है।’

चिल्लाने का असर- बच्चे को बार-बार डांटने या चिल्लाने से आपके रिश्ते में तनाव आ सकता है। अगर आप पैरेंटिंग के तरीके को डांट-फटकार का सहारा लेना पड़ता है तो इससे आपका बच्चा जुनूनी, सनकी या ग्रस्त बन सकता है। ऐसे बच्चे जिनसे कोई कठोर शब्दों में बात करता है, वे अपने माता-पिता के गुस्से का शिकार होने की पूरी कोशिश करते हैं। यह उनके लिए विनाशकारी हो सकता है। इसी तरह, हो सकता है कि वे आपसे झूठ बोलना सीख जाएं, क्योंकि उन्हें शायद यह महसूस हो कि सच बोलने से शायद आप और गुस्सा होंगे। इस तरह उनका आप पर से भरोसा उठता जाएगा।

आपको क्या करना चाहिए- हमेशा डांटने-फटकारने के बाद बच्चे से प्यार से बात करें। गहरी सांस लें और अपने बच्चे को समझने में मदद करें कि उसे डांट क्यों पड़ी। अगर गिलास टूटने या दूध गिरने की वजह से आपने उसे डांटा है तो बच्चे को साफ-सफाई में मदद करें, लेकिन उससे सफाई के लिए जबरदस्ती न करें। जब आप उसे सकारात्मक तरीके से और उसकी अपनी ग़लतियों से सीखने में मदद करेंगे तो वह जल्दी सीखेगा।

बच्चो को समझने के कुछ अन्य तरिके (सुझाव)
बच्चो को समझने के कुछ अन्य तरिके (सुझाव)

क्यों डांटना है ज़रूरी- किसी भी चीज़ का ज़रूरत से अधिक होना किसी के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है, और डांट-फटकार के साथ भी ऐसा ही है। लेकिन आपने कभी भी अपने बच्चे को नहीं डांटा तो वह भी बच्चे के लिए नुकसानदायक हो सकता है। बहुत लाड़-प्यार से पाले गए बच्चे हमेशा आपके कहे अनुसार नहीं चल सकेगा।

अगर आपने अपने बच्चे को बचपन में नहीं डांटा और 8-10 साल की उम्र के होने के बाद जब उसे टोकेंगे, तो हो सकता है कि वह बगावत कर बैठे। इन सबकी वजह से वह सिगरेट पीने, दीवार पर सिर पटकने, चिड़चिड़ाने या दरवाज़ा बंद करके बैठ जाने जैसे काम सीख सकता है’। इसीलिए सावधानी और समझदारी से बच्चे के साथ काम लें। जब भी बच्चे को डांटें तो प्यार से उसे चूमने या गले लगाने और प्यारभरी बातों के साथ मामला समाप्त करें।

हर बात पर न करें रोक-टोक

माता-पिता अक्सर बढ़ते हुए बच्चों के साथ सख्ती से व्यवहार करते हैं और उनकी हर छोटी-छोटी बात पर रोक टोक करना शुरू कर देते हैं, लेकिन ऐसा करना बच्चे और माता-पिता के बीच दूरी लाने की वजह बन सकता है। दरअसल बढ़ती उम्र बच्चों को थोड़ी-सी आजादी चाहिए होती है, ताकि वह सामाजिक ढांचे को समझ सके।

ऐसे में अगर माता-पिता बच्चे को बंधन में रखने की कोशिश करते हैं, तो बच्चा उनसे झूठ बोलना शुरू कर देता है। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा सफल बने, तो उसे थोड़ी छूट दें और अच्छे व बुरे के बीच फर्क करना सिखाए। इससे उसका मानसिक और सामाजिक विकास होगा, इसके अलावा बच्चा माता-पिता से हमेशा सच बोलेगा।

बच्चों के साथ बिताना चाहिए वक्त

आज के मॉडन जमाने माता-पिता दोनों ही वर्किंग होते हैं, जिसकी वजह से वह घंटों तक अपने बच्चे से बात नहीं कर पाते हैं। ऐसे में बच्चा अकेलापन महसूस करने लगता है, जिसकी वजह से उसके मानसिक और सामाजिक विकास में बाधा आ सकती है।

इसलिए माता-पिता को यह ध्यान रखना चाहिए कि वह अपने बच्चे के साथ पर्याप्त समय बिताए, उसके साथ बातचीत करें और गेम्स खेलें। ऐसा करने से बच्चा माता-पिता के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ा रहता है, वरना वह आपसे झूठ बोल सकता है और बुरी संगत में पड़ सकता है।

हर जिद्द को न करें पूरा
हर जिद्द को न करें पूरा

हर जिद्द को न करें पूरा

बच्चे जब छोटे होते हैं, तो वह माता-पिता से कई तरह की जिद्द करते हैं। ऐसे में माता-पिता अपने बच्चे की खुशी के लिए उसकी हर जिद्द को पूरा करने की कोशिश करते हैं, लेकिन ऐसा करना बच्चे के मानसिक विकास में परेशानी खड़ी कर सकता है।

दरअसल बच्चे की हर जिद्द को पूरा करने पर वह अनुशासन हीन हो जाता है, जिसकी वजह से उसे आगे चलकर कठिनाई हो सकती है। इसलिए अगर आपका बच्चा गैर जरूरी चीजों के लिए जिद्द करता है, तो उसकी जिद्द पूरी करने के बजाय उसे समझाने की कोशिश करें। ऐसा करने से बच्चा चीजों की वैल्यू समझता है और अनुशासन का पालन भी करता है।

बच्चों पर न थोपे उम्मीदें

अक्सर माता-पिता अपने बच्चे पर इतनी ज्यादा उम्मीदें थोप देते हैं कि छोटा-सा बच्चा अपने मन की बातें कभी कह ही नहीं पाता है। अगर आपका बच्चा पढ़ाई लिखाई में थोड़ा कमजोर है, तो उसके ऊपर क्लास में फर्स्ट आने का दबाव न बनाए।ऐसा करने से बच्चे के मानिसक और शारीरिक विकास में बाधा आने लगती है, जबकि बच्चा अपने ही घर में प्रताड़ित महसूस करने लगता है। माता-पिता की ज्यादा उम्मीदें या दबाव अक्सर बच्चों को डिप्रेशन में डाल देती हैं, जिसकी वजह से वह गुमसुम और मायूस हो जाते हैं।

अगर आप अपने बच्चे के साथ एक पॉजिटिव रिलेशन रखना चाहते हैं, तो sangeetaspen.com ऑर्टिकल में बताई गई बातों (Tips for Parents) का विशेष ध्यान रखें। अपने बच्चों के साथ अच्छा समय बिताए और उनकी मनोदशा को समझने की कोशिश करें, ताकि उनका मानसिक व सामाजिक विकास बेहतर ढंग से हो सके।

ऐसे में अगर माता-पिता बच्चों को छोटी-छोटी बातों पर डांट देते हैं या फिर उनके ऊपर गुस्सा करते हैं, तो इसका असर बच्चे के दिल और दिमाग पर पड़ता है। तो आइए जानते हैं (Tips for Parents) कि माता-पिता की किन बातों से बच्चों के दिमाग और मन पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिससे आपको सावधान रहना चाहिए

यदि आपके पास स्वलिखित कोई अच्छे लेख, कविता, News, Inspirational Story,health tips या अन्य जानकारी लोगों से शेयर करना चाहते है तो आप हमें “sangeetaspen@gmail.com” पर ईमेल कर सकते हैं। अगर आपका लेख हमें अच्छा लगा तो उसे आपकी दी हुई details के साथ Publish करेंगे।
धन्यवाद!

One thought on “Parenting Tips in Hindi |Bes Tips for Parents |माता-पिता भूलकर भी बच्चों के साथ न करें ये गलतियां

  • Howdy! I simply wish to give you a huge thumbs
    up for your excellent info you have got here on this post.
    I’ll be returning to your site for more soon.

Leave a Reply