peta India says protect cows this raksha bandhan

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peta India says protect cows this raksha bandhan

PETA इंडिया रक्षाबंधन पर गाय के चमड़े के उपयोग न करने की सलाह पर खुद ही फस गया

PETA इंडिया रक्षाबंधन पर गाय के चमड़े के उपयोग न करने की सलाह पर खुद ही फस गया लोगों ने पूछा- राखी में कहाँ और होता है चमड़े का उपयोग

पशु अधिकारों के संरक्षण के लिए काम करने का दावा करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था PETA ने गाय के चित्र वाले उस बैनर ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया, जिसमें रक्षाबंधन के दौरान राखी में चमड़े का उपयोग न करने की सलाह दी गई है।

दरअसल, बुधवार (जुलाई 15, 2020) को गुजरात से सोशल मीडिया यूज़र्स ने उस बैनर की तस्वीर शेयर की थी। तथा इस तरह के पोस्टर अहमदाबाद, भोपाल, चंडीगढ़, जयपुर, कानपुर, पटना और पुणे सहित अलग -अलग शहरों में लगाए गए हैं। जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया था

लेकिन इसके बाद भी PETA इंडिया ने कहा की हमारा उद्देश्य उन क्रूरताओं के बारे में लोगो में जागरूकता लाना है, जो गाय, भैंस, बकरियां और अन्य जानवरो की त्वचा को जूते, बैग और अन्य सामान में बदल देते हैं।

PETA इंडिया कितने ही दावे करे परन्तु यह बात लोगो के लिए आश्चर्यजनक है, कि रक्षा बंधन के साथ ऐसी बात क्यों लिखी गयी । सोशल मिडिया पर PETA इंडिया के खिलाप लोगो ने अपना गुस्सा व्यक्त करते हुए कहा है की

सबसे पहले हमें गायों की रक्षा के लिए किसी विशेष दिन की आवश्यकता नहीं है। रक्षा बंधन में दूसरे चमड़े का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। यह इन मूर्ख व्यवहार के कारण है लोग को गंभीरता से नहीं लेते हैं। आप सभी जानते हैं कि राखी में किसी भी तरह के चमड़े का उपयोग नहीं किया जाता है लेकिन फिर भी आपको इस त्योहार को लक्षित करना होगा।

PETA इंडिया के खिलाप इस प्रकार के अनेक ट्वीट सोशल मिडिया पर देखे जा सकते है

ऑपइंडिया से बात करते हुए PETA इंडिया के इस अभियान की कोऑर्डिनेटर राधिका सूर्यवंशी ने बताया, “रक्षा बंधन हमारी बहनों की रक्षा का समय है, और गाय हमारी बहनें हैं। हमारी तरह, वे भी रक्त, मांस और हड्डी से बनी हैं और जीना चाहती हैं। हमारा विचार प्रतिदिन गायों की रक्षा करने का है और रक्षा बंधन एक बहुत ही अच्छा दिन है। जिसमें हम आजीवन चमड़े से मुक्त रहने का संकल्प ले सकते है। ”

सोशल मीडिया पर PETA इंडिया के इस अभियान की अदूरदर्शिता पर भड़के आक्रोश पर अपनी नाराजगी जताते हुए राधिका सूर्यवंशी ने कहा, “अभियान से ज्यादा यह अपमानजनक है कि गायों और भैंसों को इतनी ज्यादा संख्या में वाहनों पर लाद दिया जाता है।

जिससे उनकी हड्डियाँ झुलस जाती हैं और उनका दम भी घुटने लगता है। जो बच जाते हैं, उनका गला दूसरे गाय भैसों के सामने रेत दिया जाता है। हमें इस हिंसा के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर करनी चाहिए। लेकिन लोग इस हिंसा के प्रति नहीं बल्कि अपना गुस्सा पेटा के खिलाफ निकालते है जब कि हम गायों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।”

इससे पहले PETA ने लखनऊ में एक बिलबोर्ड लगवाया था। जिसमें एक बकरी की तस्वीर के साथ लोगों को शाकाहारी बनने और लखनऊ में अप्रत्यक्ष रूप से मुस्लिमों द्वारा बकरी की हत्या को रोकने की अपील की गई थी।

जिसके बाद सुन्नी मौलवी ने इसका विरोध किया था। और यह दावा किया कि मुस्लिम इस त्यौहार के मौके पर कुर्बानी देते हैं। यह पोस्टर पूरी तरह आपत्तिजनक है। इस पोस्टर ने हमारी धार्मिक भावनाओं को आहत किया है। बकरी की कुर्बानी हमारे धर्म का एक हिस्सा है।

सुन्नी मौलवी के इस विरोध के बाद, उस होर्डिंग को वहाँ से हटा दिया गया था। जिसे हटाने को लेकर PETA ने दावा किया कि उन होर्डिंग्स को पुलिस अधिकारियों ने हटा दिया था। फिर भी, वे होर्डिंग्स को हटाने से सहमत नहीं थे।लेकिन तब उस पर लखनऊ पुलिस ने कहा था कि पेटा ने खुद ही होर्डिंग्स हटा दिए थे।

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