Police Commemoration Day 2021:पुलिस स्मृति दिवस” को मनाने के पीछे शोक, समर्पण, त्याग, बहादुरी की मिसाल की कहानी

Top News
Police Commemoration Day
Police Commemoration Day

Police Commemoration Day 2021:पुलिस स्मृति दिवस” को मनाने के पीछे शोक, समर्पण, त्याग, बहादुरी की मिसाल की कहानी

Police Commemoration Day 2021:पुलिस स्मृति दिवस” को मनाने के पीछे छिपी है शोक, समर्पण, त्याग, बहादुरी की मिसाल की वो कहानी जो आज भी धूमिल नहीं पड़ी है. उस तारीख को याद करके अब से 62 साल पहले विश्वासघाती चीनी सैनिकों की गद्दारी और हिंदुस्तानी रणबांकुरों की जाबांजी की यादें ताजा हो उठती हैं.

Advertisement

Police Memorial Day 2021: हमारे पुलिसकर्मियों का शौर्य और बलिदान का इतिहास है। उन्होंने चीन के साथ हमारी सीमा की रक्षा करते हुए जो बलिदान दिया था, उसकी याद में हर साल पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है।

हिंदुस्तान (India) आज (21 अक्टूबर 2021) 62वां ‘पुलिस स्मृति दिवस’ (Police Commemoration Day 2021) मना रहा है. पुलिस-अर्धसैनिक बलों से जुड़े तमाम हिंदुस्तानी जवान इस दिन को ‘पुलिस परेड डे’ और ‘पुलिस शहीदी दिवस’ के रूप में भी जानते,पहचानते, बोलते और याद करते हैं. आज से पहले तक 61 पुलिस स्मृति दिवस आयोजित किए जा चुके हैं. इस दिन देशभर के पुलिस बल, चाहे वो राज्य पुलिस हो, केंद्रीय सुरक्षा बल या फिर अर्धसैनिक बल, सभी एक साथ मिलकर इस दिन को ‘खास’ नजर से देखते हैं. आईए जानते हैं कि हमारे बहादुर 62 साल बाद भी आखिर क्यों नहीं भूल पाते हैं बीती 21 अक्टूबर सन् 1959 की इस तारीख को.

1959 में चीन से लगी हमारी सीमा की रक्षा करते हुए 21 अक्टूबर को 10 पुलिसकर्मियों ने सर्वोच्च बलिदान (Police Commemoration Day 2021) दिया था। उन पुलिसकर्मियों का अंतिम संस्कार हॉट स्प्रिंग्स में पूरे पुलिस सम्मान के साथ हुआ. उन्हीं शहीदों के सम्मान में हर साल 21 अक्टूबर को नैशनल पुलिस डे या पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है.  पहले तिब्बत के साथ भारत की 2,500 मील लंबी सीमा की निगरानी की जिम्मेदारी भारत के पुलिसकर्मियों की थी।

Police Memorial Day 2021: देश की सीमा की रक्षा में लगे सैन्य बलों के बलिदान की आपने कई कहानियां सुनी होंगी. लेकिन हमारे पुलिसकर्मियों के शौर्य और बलिदान (Police Commemoration Day 2021) का इतिहास भी किसी से कम नहीं है. कुछ ऐसा ही साल 1959 में हुआ था जब पुलिसकर्मी पीठ दिखाने के बजाय चीनी सैनिकों की गोलियां सीने पर खाकर शहीद हुए चीन के साथ देश की सीमा की रक्षा करते हुए जो बलिदान दिया था, उसकी याद में हर साल पुलिस स्मृति दिवस मनाया जाता है. 

भारत-तिब्बत सीमा की रक्षा

1950 के दशक के अंत की. उस जमाने में देश की चीन से सटी लद्दाख सीमा की सुरक्षा-निगरानी की जिम्मेदारी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (Central Reserve Police Force) यानी सीआरपीएफ के कंधों पर थी.

20 अक्टूबर, 1959 को तीसरी बटालियन की एक कंपनी को उत्तर पूर्वी लद्दाख में हॉट स्प्रिंग्स (Hot Springs) नाम के स्थान पर तैनात किया गया था। कंपनी को 3 टुकड़ियों में बांटकर सीमा की सुरक्षा, निगरानी और चौकसी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सीमा की गश्त के लिए आगे तक गई दो टुकड़ी के सदस्य उस दिन दोपहर बाद तक लौट आए। लेकिन तीसरी टुकड़ी के सदस्य नहीं लौटे। उस टुकड़ी में दो पुलिस कॉन्स्टेबल और एक पोर्टर शामिल थे। अगले दिन सभी जवानों को इकट्ठा किया गया और गुमशुदा लोगों की तलाश के लिए एक टुकड़ी का गठन किया गया।

चीनी सैनिकों का हमला

गुमशुदा पुलिसकर्मियों की तलाश में उस तलाशी टीम का नेतृत्व खुद (लीड) खुद बल के डीसीआईओ (डिप्टी सेंट्रल इंटेलीजेंस ऑफिसर) सब-इंस्पेक्टर करम सिंह कर रहे थे .डीसीआईओ करम सिंह के नतृत्व में वह टुकड़ी 21 अक्टूबर, रवाना हुई। उस टुकड़ी में करीब 20 पुलिसकर्मी शामिल थे। कर्म सिंह घोड़े पर सवार थे जबकि बाकी पुलिसकर्मी पैदल थे।सुरक्षा के लिहाज से एहतियातन करम सिंह ने पैदल सैनिकों को 3 टुकड़ियों में बांट दिया। ताकि किसी एक टुकड़ी के मुसीबत में फंसने पर, बाकी टुकड़ियां या टुकड़ी मुसीबत में फंसी टुकड़ी के जवानों को मदद कर सके

करम सिंह तीनों टुकड़ियों के साथ अभी कुछ ही दूरी तय कर सके होंगे कि पहले से घात लगाए बैठे, सैकड़ों चीनी सैनिकों ने दोपहर के समय एक पहाड़ी से गोलियां चलाना और ग्रेनेड्स फेंकना शुरू कर दिया।

हमले के वक्त चूंकि चीनी सैनिक ऊंची पहाड़ी पर छिपे थे. जबकि करम सिंह और उनकी तीनो टीमें निचले हिस्से में हमलावरों के वार की जद में चारों ओर से फंस चुकीं थीं. लिहाजा चीनी सैनिकों के उस हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 10 बहादुर जवान मोर्चा लेते हुए मौके पर ही शहीद हो गए, जबकि 7 रणबांकुरे बुरी तरह ज़ख्मी हो गए.

शहीद 10 जवानों के शवों संग, घायल 7 हिंदुस्तानी जवानों को भी चीनी सैनिक बंधक बनाकर अपने साथ ले गए. हालांकि चीन द्वारा छिपकर किए गए उस कायराना हमले में भी मोर्चा लेते हुए कई हिंदुस्तानी बहादुर जवान खुद को सुरक्षित बचाने में कामयाब रहे थे.। जबकि बाकी अन्य पुलिसकर्मी वहां से निकलने में कामयाब रहे।

उस घटना के बाद चीन ने 13 नवंबर 1959 को यानी करीब 22-23 दिन बाद हमारे बहादुर शहीद सैनिकों के शव हिंदुस्तान को लौटाए.।उन शहीद पुलिसकर्मियों (Police Commemoration Day 2021) का अंतिम संस्कार हॉट स्प्रिंग्स में पूरे पुलिस सम्मान के साथ हुआ। इस सबके बाद जनवरी 1960 के मध्य में हमारे राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों के तमाम आला-पुलिस प्रमुखों के वार्षिक सम्मेलन का आयोजन किया गया उसी सम्मेलन में तय हुआ कि भारतीय पुलिस-सुरक्षा बल उस घटना में शहीद रणबांकुरों की याद को हमे्शा के लिए ‘अमर’ कर देंगे

ऐसे हुई स्मृति दिवस मनाने की शुरुआत 

जनवरी 1960 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिरीक्षकों का वार्षिक सम्मेलन हुआ था. इसी सम्मेलन में लद्दाख में शहीद हुए उन वीर पुलिसकर्मियों और साल के दौरान ड्यूटी पर जान गंवाने वाले अन्य पुलिसकर्मियों को सम्मानित करने का फैसला लिया उनके सम्मान में हर साल 21 अक्टूबर को ‘स्मृति दिवस’ (Police Commemoration Day 2021) मनाने का फैसला हुआ।

Police Commemoration Day
Police Commemoration Day

फिर यह भी हुआ बदलाव

इस घटना के बाद से भारत तिब्बत सीमा की सुरक्षा का जिम्मा एक विशेष सैन्य दल भारत-तिब्बत सीमा सुरक्षा बल आईटीबीपी इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस को सौंप दिया गया जो एक अर्धसैनिक बल है. लेकिन सीआरपीएफ की सुरक्षा की जिम्मेदारी तब भी जारी रही और 1965 में भारत पाक युद्ध के बाद सीमा सुरक्षा बल के गठन के बाद उसे सीमा सुरक्षा की जिम्मेदारी से मुक्त कर आंतरिक सुरक्षा हेतु पुलिस की सहायता करने की जिम्मेदारी दे दी गई.

पुलिस मेमोरियल

हॉट स्प्रिंग्स में एक पुलिस स्मारक बनाने का फैसला भी किया गया था। यह बात भी तय हुई थी कि हर साल देश के विभिन्न हिस्सों से पुलिस बलों के जवान हॉट स्प्रिंग्स की यात्रा करेंगे और उन वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित (Police Commemoration Day 2021) करेंगे।

स्मारक, जिसे हर हिंदुस्तानी पुलिस जवान देखना चाहता

हॉट स्प्रिंग्स में उन शहीद बहादुरों की याद में बने इस पुलिस स्मारक को देखना आज हर पुलिसकर्मी अपनी खुशकिस्मती समझता है. दूसरी ओर देश भर में शहीद बहादुरों की याद में सन् 2012 से हिंदुस्तान की राजधानी दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके में ‘पुलिस स्मृति दिवस परेड’ का भी आयोजन भी किया जाने लगा है.

राष्ट्रीय स्तर की यह परेड यहां मौजूद पुलिस मैमोरियल परिसर (National Police Memorial) में शहीद जवानों (Police Commemoration Day) की याद में निकाली जाती है. शहीद जवानों के नाम भी इस आयोजन में श्रद्धांजलि देने के वक्त पढ़कर सुनाए जाते हैं. साथ ही इस विशेष दिन का महत्व अब इस कदर बढ़ चुका है कि, देश के हर राज्य की पुलिस और देश के केंद्रीय बल, अर्धसैनिक बल

21 अक्टूबर 1959 को ‘हॉट स्प्रिंग्स’ में शहीद हुए बहादुरों को तो नमन करते ही हैं. साथ ही साथ उसके बाद भी देश के किसी भी कोने में शहीद हुए बाकी रणबांकुरे जवानों के प्रति भी अपनी श्रद्धांजलि इसी दिन समर्पित करते हैं.

पुलिस प्रणाली भारत की एक रक्षा प्रणाली है जो की देश की हर श्रेत्र एवं राज्य स्तर पर रक्षा करते है| किसी भी देश के लिए पुलिस एक अहम् ताकत है जो की देश के हर जगह को रक्षा करती है| भारत पुलिस भारत के हर श्रेत्र के लोगो की दिन रात एक करके रक्षा करती है|

पुलिस के सम्मान के प्रतीक इस दिवस को मीडिया ने एकदम महत्त्वहीन करार दिया वाकई यह दुःख की बात है।

किरन बेदी के अनुसार दिल्ली पुलिस द्वारा आयोजित परेडों की वह गवाह है। उन्होंने इस परेड की कवरेज के लिए एक-दो मीडिया कर्मियों को ज़रूर देखा है, परंतु शाम की खबरों हेतु ‘टेलीविजन कवरेज’ के लिए वहां कोई भी मीडिया कर्मी उपस्थित नहीं था। यहां तक कि अगले दिन अधिकतर समाचार पत्रों ने भी इस दिवस के बारे में कोई खबर नहीं छापी। अतः उन्होंने मीडिया से पूछा ऐसा क्यों हुआ ? इस, देश के 13 लाख से ज्यादा कर्मचारियों (पुलिस कर्मियों) के इस महत्त्वपूर्ण दिन को मीडिया कैसे नकार सकता है ?

प्रतिवर्ष लगभग 1000 पुलिसकर्मी अपना फर्ज निभाते हुए शहीद होते हैं, लेकिन इनमें से किसी को भी अपने कार्यों और फर्ज को अंजाम देते हुए शहीद हो जाने पर मीडिया की ओर से सराहना नहीं मिलती, न ही उनके बलिदानों की कहानी लोगों तक पहुँचती है। दरअसल फर्ज की बेदी पर अपनी जान कुर्बान करने वाले ये सिपाही छिपे हुए नायक होते हैं।

5 नवम्बर 1963 को जयपुर में पुलिस स्मारक का उद्घा़टन करते हुए पंडित नेहरू जी ने कहा था—‘हम प्रायः पुलिसकर्मी को अपना फर्ज पूरा करते देखते रहते हैं और अक्सर हम उनकी आलोचना करते हैं। उन पर आरोप भी लगाते हैं जिनमें से कुछ सच भी साबित हो जाते हैं, कुछ गलत, पर हम भूल जाते हैं कि ये लोग कितना कठिन कार्य करते हैं।’ देश के प्रथम प्रधानमंत्री के 1963 में पुलिस कर्मियों के बारे में यही उद्गार थे।

आज हमें पुलिस कर्मियों की सेवा के उस नजरिए को देखना है जिसमें वो दूसरों की जान – माल की रक्षा के बदले अपनी जिन्दगी से समझौता कर लेते हैं। https://sangeetaspen.com की और से पुलिस स्मृति दिवस’ (Police Commemoration Day) के अवशर पर मैं आप सभी पुलिस महिलाओं और पुरुषों को राष्ट्र के लिए आपके असाधारण योगदान के लिए सलाम करती हूं। आइए हम सभी उन्हें उचित सम्मान देने का संकल्प लें…….   जय हिन्द

Leave a Reply