Savitribai Phule:देश की पहली महिला प्रिसिंपल, जिन्होंने लड़कियों को दिलाया शिक्षा का अधिकार

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Savitribai Phule
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खास बाते

1 सावित्रीबाई फुले की जीवनी – Savitribai Phule Biography
2 सावित्रीबाई फुले की शादी – Savitribai Phule Wedding
3 सावित्रीबाई फुले की शिक्षा – Savitribai Phule Education

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4 सावित्रीबाई फुले ने की बालिका विद्यालय की स्थापना – Savitribai Phule School
5 सावित्रीबाई फुले का निधन – Savitribai Phule Death

Savitribai Phule:first female Indian Principal

कौन है सावित्रीबाई फुले

सावित्रीबाई फुले (Savitribai Phule) भारत की पहली महिला शिक्षिका और समाज सुधारक थी. उन्होंने महिलाओं को शिक्षित करने और उनके अधिकारों की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी.भारत की पहली महिला शिक्षिका और समाज सुधारक

सावित्रीबाई फुले की आज जयंती (Savitribai Phule Jayanti) है आज से करीब डेढ़ सौ साल पहले फुले ने महिलाओं को भी पुरुषों की तरह ही सामान अधिकार दिलाने के लिए बहुत कठिन संघर्ष किया आइये जानते है सावित्रीबाई फुले  के इस महान सराहनीय योगदान के विषय में

सावित्रीबाई फुले की जीवनी – 

सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी, 1831 महाराष्ट्र के सतारा जिले के नायगांव गांव में हुआ था। सावित्रीबाई फुले के पिता का नाम खन्दोजी नेवसे और माता का नाम लक्ष्मी था। सावित्रीबाई फुले भारत (India) की पहली महिला शिक्षिका, समाज सुधारिका एवं मराठी कवयित्री थीं।

सावित्रीबाई फुले ने महिलाओ के लिए अनेको कार्य किये जिसमे विधवा विवाह करवाना, छुआछूत मिटाना, महिलाओं की आजादी और दलित महिलाओं को शिक्षित बनाना मुख्य है । लड़कियों के लिए शिक्षा के दरवाजे खोलना भी कार्य किया था।


सावित्रीबाई फुले की शादी – 

सावित्रीबाई फुले का मात्र नौ साल की उम्र में (1840) ज्योतिराव गोविंदराव फुले से हुआ था।और उस समय पति ज्योतिराव गोविंदराव फुले की उम्र 13 वर्ष थी

सावित्रीबाई फुले की शिक्षा – Savitribai Phule Education

जिस समय सावित्रीबाई फुले का विवाह हुआ था उस समय उनकी कोई स्कूली शिक्षा नहीं हुई थी। सावित्रीबाई फुले पढ़ने की बहुत इच्छुक थी लेकिन उनके माता और पिता ने साथ नहीं दिया। जब सावित्रीबाई फुले के पिता को यह मालूम हुआ कि सावित्रीबाई के पति उसे पढ़ाते हैं तो उन्होंने रूढ़िवादीता और समाज के डर से ज्योतिराव गोविंदराव फुले को घर से निकाल दिया।

इसके बाबजूद उनके पति ने उन्हें पढ़ाना जारी रखा। इसके बाद ज्योतिबा फुले ने सावित्रीबाई फुले का एडमिशन एक प्रशिक्षण विद्यालय में कराया। और समाज के विराध का सामने करते हुए उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की।

सावित्रीबाई फुले ने की बालिका विद्यालय की स्थापना- Savitribai Phule School

सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा ग्रहण करने के बाद अन्य महिलाओं शिक्षित करने में लगी रही ।और उन्होंने महिलाओं की शिक्षा के लिए अपने पति के साथ मिलकर साल 1848 में पुणे में बालिका विद्यालय की स्थापना की थी। इस विद्यालय में उस समय केवल नौ लड़कियों ने एडमिशन लिया था और सावित्रीबाई फुले इस स्कूल की प्रधानाध्यापिका बनीं थी।

सावित्रीबाई फुले ने सिर्फ महिलाओ के अधिकारो के लिए ही काम नहीं किया, उन्होंने कन्या शिशु हत्या को रोकने के लिए भी खास तौर पर काम किया।उन्होंने न सिर्फ अभियान चलाया बल्कि नवजात कन्या शिशु के लिए आश्रम खोले। ताकि उन्हें बचाया जा सके.इन्होने समाज में फैली कुरीतियों को भी खत्म किया जैसे छुआछूत मिटाना, महिलाओं की मुक्ति और दलित महिलाओं को शिक्षित बनाना।

सावित्रीबाई फुले का निधन – Savitribai Phule Death

कहा जाता है कि फुले दंपति ने एक ब्राह्मण विधवा के बेटे को गोद लिया था । जिसका नांम उन्होंने यशवंतराव रखा उन्होंने अपने बेटे यशवंतराव के साथ मिलकर अस्पताल भी खोला था. और इसी अस्पताल में प्लेग महामारी के दौरान सावित्रीबाई प्लेग के मरीज़ों की सेवा करती थीं।

यही पर प्लेग महामारी से प्रभावित बच्चे की सेवा करने के कारण सावित्रीबाई फुले को भी यह बिमारी हो गयी और 10 मार्च, 1897 को प्लेग के कारण इनका निधन हो गया था।

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