Shree Ganga Dussehra in Uttarakhand : उत्तराखंड में कुछ ऐसे मनाया जाता है श्री गंगा दशहरा

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Shree Ganga Dussehra in Uttarakhand
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Shree Ganga Dussehra in Uttarakhand :उत्तराखंड में कुछ ऐसे मनाया जाता है श्री गंगा दशहरा

Ganga Dussehra 2021: कहा गया है कि इस गंगा दशहरा पर्व पर गंगा में अथवा किसी भी पवन नदी में स्नान, दान व तर्पण करने से पापों का नाश होता है और व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।

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Ganga Dussehra 2021: इस साल गंगा दशहरा (Ganga Dussehra 2021) 20 जून 2021, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन गंगा स्नान करने से बहुत लाभ होता है. हालांकि कोविड महामारी (covid -19) के कारण ऐसा करना उचित नहीं है, लिहाजा घर पर ही गंगाजल मिले पानी से स्‍नान करके भी पुण्‍य लाभ पाया जा सकता है।यह भी पढ़ें: Ganga Dussehra 2021: 20 जून को है गंगा दशहरा,इसी दिन स्वर्ग से धरती पर आई थी गंगा

Ganga Dussehra 2021: उत्तराखंड (Uttarakhand) में गंगा दशहरा कुछ अलग तरह से मनाया जाता है।इस दिन लोग सुबह जल्दी उठ कर नहा धोकर घरों को गोबर और लालमिट्टी से लिपते हैं और फिर मंदिरों में धुप बत्ती करके देहली और खिड़की दरवाजों पर पंडित जी द्वारा दिया हुआ गंगा दशहरा द्वारपत्र (Ganga Dushhera Dwarpatr) लगते है, साथ ही द्वारपत्र रोली, कुमकुम,पुष्प (अछत पिठां ) आदि लगाते है !


गंगा दशहरा (Ganga Dussehra) को “दसार”(Dasar) भी कहा जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ वर्षों तक ब्रहामंण (पंडित) जी अपने हाथों से सुन्दर द्वारपत्र बनाकर सुबह सवेरे इस दिन अपने अपने जजमानों को देने घरों पर आते थे।

लेकिन अब धीरे धीरे गंगा दशहरा (Ganga Dussehra) द्वारपत्र (Ganga Dushhera Dwarpatr) बाजार में बने बनाये आने जाने लगे हैं। जिन्हें लोग डाउनलोड (Download) और प्रिंटआउट (Printout) निकालकर प्रयोग करने लगे हैं ! प्राचीन काल से बूढ़े बुजुर्गों की मान्यता है कि इन द्वारपत्रों को लगाने से घर पर प्राकृतिक आपदाओं (Natural Digaster) वज्रपात, बिजली आदि प्राकृतिक प्रकोपों का विनाशकारी प्रभाव नहीं होता था।यह भी पढ़ें: sugarcane juice : जानिए मधुमेह के रोगी और मोटे लोग पी सकते हैं या नहीं गन्ने का जूस

वैसे वर्षाकाल में, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में बज्रपात की अनेक घटनाएं होती हैं इस प्रकार के वज्रनिवारक विधान का आयोजन साभिप्राय और यहां की सांस्कृतिक परम्परा का महत्त्वपूर्ण अंग माना जाता है।

गंगा दशहरा (Ganga Dussehra) का सबसे बड़ा उत्सव उत्तराखंड में मनाया जाता है। यह यहां इसलिए भी ज्यादा मनाया जाता है क्योंकि गंगा का उद्गम यहीं गंगोत्री से होता है। उत्तराखंड (Uttarakhand) में इस दिन लोग अपने घरों के दरवाजों पर न केवल गंगा दशहरा (Ganga Dussehra) के द्वार पत्र लगाते हैं, बल्कि पूजा कर मां गंगा का आशीर्वाद भी प्राप्त करते हैं।

Shree Ganga Dussehra in Uttarakhand
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श्री गंगा दशहरा द्वारपत्र (Ganga Dushhera Dwarpatr) आज भी पहाड़ गाँव के हर घर पर लगाये जाते हैं, ये दिखने में वर्गाकार कागज के टुकड़े पर वृताकार आकार में होते हैं जिसमें घेरे के चारों ओर त्रिभुजाकार डिजाइन बना होता है

कमल की पंखुड़ियों समान और मध्य में अधिकांस भगवान श्री गणेश, माँ गंगा, माँ लक्ष्मी, श्री हनुमान एवं भगवान् शंकर का चित्र बना होता है और उनके चारों ओर एक घेरे में संस्कृत में एक मन्त्र लिखा होता है जो निम्न प्रकार है;

“अगस्त्यश्च पुलस्त्यश्च वैशम्पायन एव च । र्जैमिनिश्च सुमन्तुश्च पञ्चैते वज्रवारका: ।।
मुनेःकल्याणमित्रस्य जैमिनेश्चाऽनुकीर्तनात् । विद्युदग्नि भयं नास्ति लिखितं गृहमण्डले ।।
यत्रानुपायी भगवान् दद्यात्ते हरिरीश्वरः। भङ्गो भवति वज्रस्य तत्र शूलस्य का कथा ।।”

जिसका मतलब है ‘अगस्त्य,पुलस्त्य,वैश्भ्पायन,जैमिनी और सुमंत ये पंचमुनि वज्र से रक्षा करने वाले मुनि हैं।


उमीद करती हु आपको हमारी आज की पोस्ट Shree Ganga Dussehra in Uttarakhand : उत्तराखंड में कुछ ऐसे मनाया जाता है श्री गंगा दशहरा पसंद आयी होगी।

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