sticker on the fruit | Why is there a sticker on the fruit | stickers on your fruits and some vegetables have an entire world of information

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sticker on the fruit
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sticker on the fruit | Why is there a sticker on the fruit | stickers on your fruits and some vegetables have an entire world of information | what do those codes on stickers of fruits | स्टीकर लगे फल या सब्जियां | सब्जियां फल या सब्जियों में लगे स्टीकर का क्या मतलब होता है ?

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sticker on the fruit : क्या आपने कभी मॉल, मेगा स्टोर्स या बाजारों में बिकने वाले स्टीकर लगे फल या सब्जियों की तरफ ध्यान दिया है। स्टीकर लगे ये फल या सब्जियां (sticker on the fruit) आम तौर पर लोगों को ब्रांडेड और कीमती समझ लेते हैं।

हालांकि ये स्टीकर केवल फल या सब्जियों की कीमत ही नहीं बताते, बल्कि ये उनकी गुणवत्ता की भी जानकारी देते हैं। फल या सब्जियों पर लगे इस स्टीकर को प्राइस लुक अप (पीएलयू) कोड कहते हैं।

दरअसल फलों में लगे स्टीकर (sticker on the fruit) फलों की गुणवत्ता को दर्शाता है। लेकिन इस स्टीकर वाले फलों खरीदने से पहले कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए, क्योंकि अगर आप गलत फल का चुनाव करेंगे तो यह आपकी सेहत भी बिगाड़ सकती है।

इन स्टिकर्स पर एक कोड दिया होता है जिसे PLU (प्राइस लुक-अप) कहा जाता है। ये अलग-अलग प्रकार को होते हैं, जिनका इनका मतलब भी अलग होता है। अगर इन स्टीकर्स पर लगे कोड को हम पहचान लें

तो फलों के बारे में कई तरह की जानकारियां ले सकते हैं। इससे हमें यह पता चल जाता है कि कौन-से फल हमें लेने हैं और कौन-से नहीं।इसे जेनेटिकली रूप से मोडिफाय किया जा सकता है।

पीएलयू कोड (sticker on the fruit) में एक्सापयरी तिथि और दाम के साथ कोड के जरिए ये भी लिखा होता है कि उसे रसायनिक विधि से उगाया गया है या जैविक विधि से। पीएलयू कोड की शुरूआत किसी विशेष अंक से होती है। आज sangeetaspen.com आपको बताएगा की इन कोड को कैसे डिकोड कर सकते हैं।

9 से शुरू होने वाला कोड

जिन फलों या सब्जियों पर 9 अंक से शुरू होने वाला पांच अंक का कोड होता है, वह जैविक होता है। अगर किसी फल पर 93437 लिखा है तो इसका अर्थ है कि उसे जैविक (ऑर्गेनिक) तरीके से उगाया गया है। जैविक विधि से उगाए जाने की वजह से इनकी कीमत अन्य फलों की अपेक्षा थोड़ी ज्यादा हो सकती है। हालांकि ये फल आम फलों के मुकाबले सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद होते हैं।

गैर-ऑर्गेनिक फल

कुछ फलों पर 5 अंकों की संख्‍या वाला स्‍टीकर होता है जिसका कोड 8 के अंक से शुरू होता है। जैसे किसी फल पर अगर 84131 लिखा स्टीकर चिपका हो तो उसका मतलब है कि इन फलों में अनुवांशिक संशोधन किया गया है। इस तरह के फल गैर-ऑर्गेनिक फल की श्रेणी में आते हैं।

Why is there a sticker on the fruit
Why is there a sticker on the fruit

कीटनाशक और रसायनों से तैयार फल

कुछ फलों में चार अंको की संख्‍या वाले स्‍टीकर (sticker on the fruit) लगे होते हैं। इन पर 4026 या 3283 आदि तरह का स्‍टिकर लगा होता है। इसका मतलब है कि इस तरह के फल कीटनाशक और रसायनों द्वारा उगाए गए हैं। इस तरह के स्‍टीकर (sticker on the fruit) वाले फल ऑर्गेनिक फलों की तुलना में काफी सस्‍ते होते हैं।

दुनिया भर में 2001 से शुरू हुए थे ये स्टीकर

स्टीकर का मतलब तो समझ गए, लेकिन ये भी जानना जरूरी है कि फल या सब्जियों पर ये कोडिंग कौन करता है। क्या फल या सब्जी उगाने वाले किसान ये कोडिंग करते हैं या दुकानदार खुद फलों या सब्जियों पर ये कोडिंग करते हैं।

जी नहीं, फलों पर होने वाली ये कोडिंग अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप होती है। ये कोडिंग दि इंटरनेशनल फेडरेशन फॉर प्रोड्यूस स्टैंडर्डस (आईएफपीएस) द्वारा की निर्धारित की जाती है।

आईएफपीएस पूरी दुनिया में फलों और सब्जियों पर होने वाली कोडिंग (sticker on the fruit) की नियामक संस्था (रेग्युलेट्री बॉडी) है। आईएफपीएस पूरी दुनिया के फल एवं सब्जी संबंधी एसोसिएशन का एक संघ है।

इसकी स्थापना वर्ष 2001 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फल व सब्जियों की गुणवत्ता बरकरार रखने के लिए पीएलयू कोडिंग तैयार करने के लिए की गई थी।

हालांकि आपको एक बात का हमेशा ध्यान देना चाहिए कि फलों के ऊपर लगे स्टीकर (sticker on the fruit) में कैमिकल होता है और कैमिकल की वजह से फल दूषित हो जाता है। स्टीकर के गोंद में खतरनाक कैमिकल होते है, जो मानव के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत खाद्य कारोबारी असुरक्षित खाद्य का संग्रह, वितरण, विक्रय नहीं करेगा।

कोई भी व्यक्ति सड़ी-गली फलों एवं सब्जियों का विक्रय नहीं करेगा। फल एवं सब्जियों में मोम, खनिज तेल, अन्य रंगों का पॉलिश भी अब कारोबारी नहीं कर सकते, इतना ही नहीं नए नियमों के मुताबिक अब फलों को कार्बाइट या एसीटिलिन गैस जैसे केमिकल से पकाकर बेचना भी प्रतिबंधित है।

फलों को खरीदते समय कौन सी बातें ध्यान रखनी चाहिए

  • बहुत ज्यादा शाइन कर रहे फलों और सब्जियों को खरीदने से बचना चाहिए।
  • कुछ विक्रेता फलों की शाइन बढ़ाने के लिए इस पर मोमबत्ती के वैक्स से पॉलिश कर देते हैं, अगर आपको जरा भी संदेह है तो फल को नाखुन से खरोंच कर देखें। यदि वैक्स लगा होगा तो समझ आ जाएगा।
  • जो फल कार्बाइड से पकाए जाते हैं, उनकी किनारी काली रह जाती है। जो लोग ये ट्रिक जानते हैं, वे इनके केमिकल को सूंघ कर इसका पता लगा लेते हैं और इसके छिलकों को नहीं खाते। इन्हें खाने से पेट से जुड़ी कई बीमारियां हो सकती है, इसलिए ऐसे फलों और सब्जियों को खाने से हमेशा बचना चाहिए।
  • फलों खासकर ऐसे फल जिनको छिलके के साथ खाया जाता है उनको पॉलिश करके या स्टीकर लगाकर नहीं बेचा जा सकता। क्योंकि इससे फल की नैचुरैलिटी खत्म होने का खतरा रहता है। जानकारों की मानें तो पॉलिश हुए या स्टीकर लगे फलों का सेवन बिना धुले करने से वह सेहत बिगाड़ सकते हैं।
  • जिन फलों पर पॉलिश होने की आशंका है उनको गुनगुने पानी में धुलने के बाद ही खाएं। जहां स्टीकर लगा हुआ हो वहां से काटकर फेंक दें।
  • कई बार स्टीकर के नीचे के हिस्से में फल का रंग और गुणवत्ता भी खराब हो जाती है। स्टीकर में लगे गोंद में खतरनाक केमिकल होते हैं। ये स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। शहर में बिकने वाले सेव, अनार, कीवी, मौसम्मी, चीकू आदि पर इस तरह के स्टीकर लगे हुए देखे जा सकते हैं।

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