Vitamins : विटामिन क्या है एवं इनकी खोज

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Vitamins : what is vitamins and important types of vitamins with chemical
Vitamins : what is vitamins and important types of vitamins with chemical

Vitamins : विटामिन (vitamins) ऐसे पदार्थ हैं जो आपके शरीर को सामान्य रूप से बढ़ने और स्वस्थ रखने के लिए सहायक होते है। जिन की पूर्ति भोजन के द्वारा शरीर में की जाती है जो हमारे शरीर की कई प्रकार के रोगों से रक्षा करने के साथ-साथ उपापचय तथा अन्य शारीरिक क्रियाओं पर नियंत्रण बनाए रखते हैं

विटामिन (Vitamins)शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग सी फंक द्वारा 1911 ईस्वी में किया गया था विटामिनों के नामकरण अंग्रेजी भाषा के वर्णमाला क्रम A, B, C, D, E, K पर किया गया है यह आपकी त्वचा, हड्डियों और कोशिकाओं के लिए महत्वपूर्ण है। यह आपके शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते है।

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यदि हम किसी भी प्रकार के विटामिन की पर्याप्त मात्रा नहीं लेते हैं,तो इससे स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याएं हो सकती है।

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Vitamine को बाद में छोटा करके Vitamin लिखा जाने लगा।

विटामिन की खोज किसने की थी

Vitamins : विटामिन की खोज 1912 हापकिंस (Hopkins) के द्वारा की गई थी लेकिन विटामिन (Vitamins) का नामकरण फंक (Funk) द्वारा किया गया । इसलिए फंक को भी विटामिन का खोजकर्ता माना जाता है। हापकिंस ने 1912 में यह सिद्ध किया कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए निश्चित मात्रा में विटामिनों (Vitamins) की आवश्यकता होती है।1929 में हापकिंस को नोबेल पुरस्कार दिया गया था।

सबसे पहले कौन से विटामिन की खोज हुई थी?

क्रिस्टियान इज्कमैन एक डच चिकित्सक और शरीर विज्ञान के प्रोफेसर थे। सन् 1890 में बेरीबेरी जैसे कुपोषणजन्य रोग पर शोध करते हुए उन्होंने एंटीन्योरिटिक विटामिन (थायमिन) की खोज की थी। इस अतिमहत्वपूर्ण खोज के लिए उन्हें वर्ष 1929 में मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार दिया गया था।

कैसे हुई विटामिन की खोज?

इज्कमैन को खाद्य-पदार्थों में विटामिन जैसे तत्व के होने का पता अचानक ही चला था। दरअसल, सन् 1890 में उन्हें जावा, जो उस समय डच उपनिवेश था, के कैदियों में बड़े स्तर पर हो रही बेरीबेरी जैसी बीमारी के अध्ययन के लिए भेजा गया था।

जावा में कुछ महीनों तक बीमार कैदियों की जांच-पड़ताल करने पर उन्हें लगा कि इस बीमारी का कारण कोई अज्ञात बैक्टीरिया है। लेकिन एक दिन अचानक उनका ध्यान अपनी प्रयोगशाला की मुर्गियों की ओर गया। मुर्गियों को ध्यान से देखने पर उन्हें मालूम हुआ कि पहले जब इन मुर्गियों को कैदियों का बचा रासन चारे के रूप दिया जा रहा था, तब इनमें भी बेरीबेरी के लक्षण दिखाई दे रहे थे लेकिन जब से चारा बदल दिया गया है तब से कुछ महीनों के अंदर ही ये मुर्गियां पुनः पूरी तरह ठीक हो गई हैं।

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आगे जब उन्होंने और जांच-पड़ताल की तो उन्हें पता चला कि मुर्गियां जब स्वस्थ थी तब उन्हें भूरा चावल (unpolished rice) चारे के रूप में दिया जाता था, वही जब उनमें कैदियों की तरह बेरीबेरी के लक्षण दिखने लगे थे, उस वक्त उन्हें कैदियों को दिया जाने वाला सफेद चावल (white rice) चारे के रूप में दिया जाता था।

मुर्गियों के चारे में हुई बदलाव की उस घटना से इज्कमैन ने यह निष्कर्ष निकाला कि सफेद चावल में भूरे चावल के विपरीत किसी आहार घटक या ऐसे तत्व की कमी होती है, जिसके शरीर में लगातार कमी से कैदियों के साथ-साथ मुर्गियों में भी यह बीमारी हो रही है। उन्होंने उस समय सफेद चावल में अनुपस्थित उस तत्व का नाम ‘anti-beriberi-factor’ रखा था।

हालांकि वर्ष 1895 में बीमार होने के कारण वह बेरीबेरी पर अपना अध्ययन जारी नहीं रख पाये। लेकिन आगे के वर्षों में उनके उस अध्ययन पर हुये शोध कार्यों से पता चला कि सफेद चावल में अनुपस्थित वह तत्व ‘थियामिन’ था, जिसे आज विटामिन बी1 के नाम से जाना जाता है। इसी विटामिन (Vitamins) की कमी से शरीर में बेरीबेरी जैसा रोग होता है।

विलेयता के आधार पर विटामिनों को दो प्रकारों में बांटा गया है

  • जल में घुलनशील विटामिन- विटामिन B और विटामिन C जल में घुलनशील विटामिन (Vitamins) होते है
  • वसा मे घुलनशील विटामिन – विटामिन A.D.E.K.

जल मे घुलनशील विटामिन 

विटामिन B (Vitamin B complex) – विटामिन B जल में घुलनशील विटामिन है जो ग्यारह प्रकार के विटामिनों (Vitamins) का समूह बनाता है जिनमे से कुछ विटामिन निम्न प्रकार है

विटामिन B1 (Thymine) – विटामिन B1 (vitamin B complex ) समूह का एक महत्वपूर्ण विटामिन है जो जल में घुलनशील है इसका रासायनिक नाम थायमिन है इसकी कमी से बच्चों में बेरीबेरी नामक रोग हो जाता है जिसमें बच्चों के पैरों की हड्डी टेड़ी व भुंगर हो जाती है विटामिन B1 गाजर गेहूं चावल दूध समुद्री भोजन सोयाबीन तथा हरी सब्जियों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है

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विटामिन B2 (Riboflavin) – विटामिन B2 का रासायनिक नाम राइबोफ्लेबिन है यह जल मे घुलनशील विटामिन है यह विटामिन हमारे शरीर रक्षा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण विटामिन (Vitamins) होता है इसके साथ यह कार्बोहाइड्रेट के पाचन में मदद करता है इस विटामिन की कमी से हमारी जीव्हा ओंठ की त्वचा रूखी तथा चेहरा बदसूरत दिखाई देता है विटामिन B2 मटर यीस्ट मांस अंडा तथा फलदार सब्जियों में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है

विटामिन B3 (Niacin) – विटामिन B3 का रासायनिक नाम नियासिन है यह भी जल मे घुलनशील है इसकी कमी से मनुष्य में पेलाग्रा नामक रोग हो जाता है जिससे मानसिक विकास पाचन क्रिया में कई प्रकार के अवरोध उत्पन्न होने लगते हैं इस प्रकार के रोगों से छुटकारा पाने के लिए हमें अंकुरित गेहूं आलू अनाज बादाम टमाटर पत्तेदार सब्जियों का सेवन करना चाहिए कियोकि इनमे विटामिन B3 प्रचुर मात्रा मे होता है

विटामिन B6 (pyridoxine) – विटामिन B6 जल मे घुलनशील विटामिन बी कांपलेक्स का ही एक विटामिन है जिसका रासायनिक नाम पायरीडॉक्सीन है विटामिन B6 की कमी से शारीरिक वृद्धि रुक जाती है शरीर कमजोर दिखाई देने लगता है और मनुष्य में रक्त की कमी होने लगती है विटामिन B6 कमी पूरी करने के लिए हरी सब्जियों मास कलेजी आदि चीजों का इस्तेमाल किया जाता है

विटामिन b7 (Biotin) – विटामिन B7 का रासायनिक नाम बायोटिन है इसकी कमी से मांसपेशियों में दर्द होने लगता है त्वचा रूखी हो जाती है कमजोरी आने लगती है भूख और रक्त में कमी आने लगती है यह श्वशन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है इसके मुख्य स्रोत हरी सब्जियां अंडा यीस्ट आदि है

विटामिन B9 (Folic acid) – विटामिन B9 का रासायनिक नाम फॉलिक एसिड है जिसकी कमी से मनुष्य में RBC में कमी आती है जिससे रक्त की कमी हो जाती है जिससे मनुष्य कमजोर और अल्सर जैसी बीमारियों से ग्रसित हो जाता है इन बीमारियों को दूर करने के लिए केला संतरा मछली के यकृत का तेल यीस्ट,अंडा आदि का प्रचुर मात्रा प्रयोग करना चाहिए क्योंकि विटामिन B9 फोलिक एसिड इनमें सबसे अधिक पाया जाता है

विटामिन B12 (Cyanocobalmine) – इस विटामिन (Vitamins) का रासायनिक नाम साइनोकोबालामिन है इसमे कोबाल्ट धातु पायी जाती है इस कारण इसका नाम साइनोकोबलमिन पड़ा RBC की परिपक्वता मे बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है इसकी कमी होने से शरीर में कई प्रकार के दोष उत्पन्न होने लगते हैं तथा इसकी कमी मांस कलेजी दूध अंडा आदि से दूर की जाती है

विटामिन सी (Ascorbic acid) – विटामिन C का रासायनिक नाम एस्कार्बिक एसिड है जो जल में घुलनशील विटामिन होता है यह विटामिन हमारे शरीर के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है इसकी कमी से स्कर्वी नामक रोग होने लगता है जिससे मसूड़ों और दांतों का क्षय होने लगता है विटामिन C मुख्यता खट्टे रसदार फलों में पाया जाता है जैसे नींबू संतरा मौसंबी आंवला चीकू टमाटर आदि

वसा में घुलनशील विटामिन 

विटामिन A (Retinol )- विटामिन ए का पूरा नाम एकसेरोफाइटोल है यह विटामिन ऊतक निर्माण मे सक्रिय भूमिका निभाता है यह ऊतकों की मरम्मत करने के साथ-साथ उन को सुरक्षा प्रदान करता है इसकी कमी से रतोंधी नामक रोग होने लगता है जिससे कॉर्निया सफेद और ढीली पड़ने लगती है तथा दृष्टि समाप्त होने लगती है विटामिन ए की कमी को दूर करने के लिए कलेजी अंडे गाजर मछली का तेल आदि का प्रयोग करना चाहिए

विटामिन D (Calciferol ) – इसका रासायनिक नाम कैल्सीफेरोल है यह वसा में विलेय विटामिन (Vitamins)  होता है इसका मुख्य काम हमारे शरीर की हड्डियों और दातों को बचाना है यह शिशु के लिए बहुत महत्वपूर्ण विटामिन होता है किसकी कमी से बच्चों में रिकेटस तथा बुजुर्गों में ओस्टियोमलेशिया नामक रोग होता है तथा हड्डियां भंगुर होने लगती हैं जिसे सूखा रोग के नाम से भी जाना जाता है विटामिन डी अंडे मछली मक्खन तथा सूर्य की रोशनी में पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है


विटामिन E (Tocopherol ) – विटामिन E का रासायनिक नाम टोकोफेरोल है यह विटामिन वसा में विलेय विटामिन है इस विटामिन का मुख्य काम प्रजनन क्षमता को बढ़ाना होता है यह विटामिन प्रजनन क्रियाओ में अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है इसकी कमी से मनुष्य नपुंसक हो जाता है यह विटामिन गेहूं चना मटर हरी पत्तेदार सब्जियां मे प्रचुर मात्रा में पाया जाता है

विटामिन K ( philoquinone) – विटामिन (Vitamins) के का पूरा नाम फिलोकिवलोन है यह वसा मे घुलनशील विटामिन है जो यकृत में प्रोथ्रॉम्बिन नामक प्रोटीन निर्माण के लिए अति आवश्यक होता है तथा रक्त का थक्का जमाता है यह टमाटर पनीर हरी पत्तेदार सब्जियों मे प्रचुर मात्रा मे पाया जाता है

विटामिन की कमी से होने वाले रोग का विस्तृत रूप 

विटामिन ए – वृद्धि रुकना रतौधी व जीरफ्थेल्मिया , संक्रमण के प्रति प्रभाव्यता, त्वचा और झिल्लियों में परिवर्तन का आना, दोषपूर्ण दांत आदि ।

विटामिन बी1 – वृद्धि का रुकना ,भूख और वजन का घटना ,तंत्रिका विकास ,बेरी बेरी ,थकान का होना ,बदहजमी ,पेट की खराबी आदि ।

विटामिन बी2- वृद्धि का रुकना , धुधली दृष्टि का होना ,जीभ पर छाले का पड़ जाना ,असमय बुढ़ापा आना ,प्रकाश ना सह पाना आदि ।

विटामिन बी3- जीभ का चिकनापान ,त्वचा पर फोड़े फुंसी होना,पाचन क्रिया में गड़बड़ी ,मानसिक विकारों का होना आदि 

विटामिन बी5- पेशियो में लकवा ,पैरो में जलन आदि ।

विटामिन बी6- त्वचा रोग ,मस्तिष्क का ठीक से काम ना करना ,शरीर का भार कम होना, अनीमिया आदि ।

विटामिन बी7- लकवा की शिकायत ,शरीर में दर्द , बालों का गिरना तथा वृद्धि में कमी आदि ।

विटामिन बी12- रुधिर की कमी ।

विटामिन सी – मसूड़े फूलना ,अस्थियों के चारो ओर श्राव , जरा सी चोट पर रुधिर निकलना (स्कर्वी ),अस्थियां कमजोर होना आदि ।

विटामिन डी – सूखा रोग (रिकेट्स),कमजोर दांत ,दातों का सड़ना आदि ।

विटामिन ई – जनन शक्ति का कम होना ।

विटामिन के – रुधिर का स्राव होना ,ऐंठन , हीमोफीलिया आदि ।

फोलिक एसिड – अनीमिया तथा पेचिश रोग होता है ।

Q. ‘विटामिन’ शब्द का नामकरण किसने किया था?
Ans.विटामिन (Vitamins) शब्द का नामकरण पोलिश बायोकेमिस्ट कैसिमिर फंक (Casimir Funk) ने 1912 में किया था। विटामिन शब्द दो शब्दों से मिलकर बना हैं – vita + amine. यहां ‘vita’ का अर्थ है जीवन एवं ‘amine’ शरीर में पाया जाने वाला एक यौगिक है।

Q. विभिन्न प्रकार के विटामिनों (A,B,C…) की खोज किन वैज्ञानिकों ने की थी?
Ans. शरीर के लिए जरूरी अभी तक कुल 13 विटामिनों (Vitamins) की खोज हो चुकी हैं। वर्तमान में ज्ञात सभी विटामिनों की पहचान वैज्ञानिकों द्वारा 1913 और 1948 के बीच ही कर लिया गया था।

Q.कृत्रिम रूप से पहली बार किस विटामिन को प्रयोगशाला में बनाया गया था?
Ans.विटामिन C कृत्रिम रूप से प्रयोगशाला में संश्लेषित होने वाला पहला विटामिन था। विटामिन C को कृत्रिम रूप से बनाने की प्रक्रिया की खोज 1935 में ज्यूरिख के स्विस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के रसायनशास्त्री तेदुसेज रिचस्टीन (Dr. Tadeusz Reichstein) ने किया था।

Q. Antivitamin क्या है?
Ans.एंटीविटामिन विटामिन (Vitamins) के विपरीत कार्य करते हैं। ये ऐसे यौगिक होते हैं, जो हमारे शरीर में विटामिनों के अवशोषण (absorption) तथा कार्यों को धीमा कर देते हैं।

उदहारण के लिए विटामिन K रक्त के थक्के बनाकर अत्यधिक रक्तस्राव को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है; वही Warfarin एक ऐसी एंटीविटामिन दवा है, जो शरीर में खून के जमने या blood clotting की प्रक्रिया को धीमा या निष्क्रिय कर देता है।

Q. विटामिन का खोज किसने किया था और कब?
Ans. विटामिन की खोज 1912 में कासिमिर फंक (Casimir Funk) नामक जीव रसायनज्ञानी द्वारा किया गया था. अपने एक प्रयोग के दौरान उन्होंने पाया की कुछ ऐसे सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients) होते है जो हमारे शरीर को रोगों से बचाते है.

Q. विटामिन का नामकरण कब किया गया?
Ans. विटामिन ए का रासायनिक नाम रेटिनॉल है। इसे antixerophthalmic विटामिन भी कहते हैं, इसकी खोज मेकुलन ने 1912 मे की थी।

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