Alzheimer’s Disease : अल्जाइमर रोग क्या है ? संपूर्ण जानकारी, अल्जाइमर रोग के संकेत मिलते ही तुरंत उठाएं ये कदम

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what is alzheimer disease
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अल्जाइमर रोग क्या होता है

 Alzheimer : अल्जाइमर (Alzheimer) के शुरुआती चरण में ही इसके कुछ संकेत मिलने लगते हैं. जिन्हें पहचानकर आपको तुरंत डॉक्टर की मदद लेनी चाहिए. अगर आप ऐसा करते हैं, तो समय रहते अपने मानसिक स्वास्थ्य को बिगड़ने से बचा सकते हैं.

अल्जाइमर के शुरुआती संकेत – Alzheimer’s Signs in Early Stage

अल्जाइमर मरीज की याद्दाश्त और सोचने की क्षमता को धीरे-धीरे नष्ट कर देता है. नतीजतन, मरीज रोजाना के आसान-से दिखने वाले कामों को करने में भी असफल हो जाता है. आइए अल्जाइमर की शुरुआत में मिलने वाले संकेतों के बारे में जानते हैं.

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कमजोर याद्दाश्त – एक्सपर्ट के मुताबिक, याद्दाश्त कमजोर होना अल्जाइमर का सबसे आम संकेत है. इसमें खासतौर से हाल ही में हुई कोई घटना या चीज के बारे में भूल जाना या एक ही बात के बारे में किसी से बार-बार पूछना शामिल है.

नंबर्स के साथ मुश्किल – इस बीमारी में व्यक्ति नंबर्स यानी संख्याओं को जोड़ने-घटाने या याद रखने में मुश्किलों का सामना करने लगता है.

सामान्य जानकारी भूल जाना – अल्जाइमर का मरीज अक्सर सामान्य इवेंट या डे, घर या ऑफिस का पता, लोगों के नाम आदि भी भूलने लगता है.


समय और जगह को लेकर कंफ्यूजन – एक्सपर्ट के मुताबिक, इस गंभीर दिमागी समस्या में मरीज मौसम, समय और जगह को लेकर भी कंफ्यूज हो सकता है. वो भूल जाता है कि वो किसी जगह कब और कैसे आया.

आंखों की रोशनी का कमजोर होना – अल्जाइमर के साथ लोगों की आंखों की रोशनी भी कमजोर होने लगती है. उन्होंने पढ़ने, लिखने या दूर से आ रही चीजों को देखने में दिक्कत होने लगती है.

बोलने में दिक्कत – अल्जाइमर के कारण लोगों को बोलने या किसी बातचीत को शुरू करने में भी दिक्कत आ सकती है. वह भूल जाते हैं कि उन्हें क्या बात करनी है या कहां से शुरुआत करनी है या फिर जिसके बारे में वो बोलने वाले थे, उसका नाम क्या है.

चीजों को भूल जाना – इस न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर में व्यक्ति चीजों को रखकर भूल जाता है. इसके साथ ही वह टूथब्रश, कपड़े जैसी सामान्य चीजों को किसी नयी जगह रख देता है और फिर भूल जाता है.

निर्णय ना ले पाना – इस बीमारी के कारण मरीज आर्थिक मामलों में निर्णय लेने के तरीके या क्षमता में अंतर महसूस करते हैं.

अलग हो जाना – अल्जाइमर से पीड़ित होने के कारण मरीज ऑफिस, सोशल लाइफ आदि सार्वजनिक जगहों से अलग होने लगता है.

मूड और पर्सनैलिटी में बदलाव – इस दिमागी बीमारी के मरीज की पर्सनैलिटी किसी भ्रमित, शंकित, अवसादग्रस्त, चिंतित और डरी हुई हो जाती है. मूड और पर्सनैलिटी में आने वाले इन बदलावों को अक्सर घर, ऑफिस, दोस्तों के साथ आदि देखा जाता है.

सही शब्द ना मिल पाना – बातचीत की शुरुआत करने में मुश्किल होने लगती है. क्योंकि, वह वाक्य को शुरू करने या खत्म करने के लिए सही शब्द नहीं ढूंढ पाते हैं. यह समस्या बहुत आम होने लगती है.

अल्जाइमर की बीमारी को अक्सर भूलने की बीमारी के रूप में जाना जाता है. लेकिन यह समय के साथ दैनिक जीवन में गंभीर दिक्कतें भी खड़ी कर देती है. जिसमें बोलने व तालमेल बैठाने में दिक्कत, मूड स्विंग्स आदि शामिल हैं.

Alzheimer’s  : अल्जाइमर रोग किसी भी व्यक्ति को हो सकती है, जिसके कई सारे कारण हो सकते हैं। ऐसे में इसके सटीक कारणों की पहचान करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है।इसके बावजूद,अल्जाइमर रोग पर किए गए अध्ययनों से स्पष्ट है कि यह बीमारी निम्नलिखित कारणों से हो सकती है-

उम्रदराज़ होना- अल्जाइमर रोग होने का प्रमुख कारण उम्रदराज़ होना है। इस प्रकार, जिस व्यक्ति (महिला और पुरूष दोनों) की उम्र 60 साल से अधिक हो, तो उसे अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि उसे अल्जाइमर रोग जैसी बीमारी न हो।

जेनेटिक कारण का होना- अक्सर, अल्जाइमर रोग उस स्थिति में भी हो सकता है, जब किसी शख्स के परिवार में कोई व्यक्ति इस बीमारी से पीड़ित होता है। ऐसे लोगों को समय-समय पर हेल्थचेकअप करना चाहिए ताकि अल्जाइमर जैसी बीमारी का संकेत बता लग सके।

सिर पर चोट लगना- यदि किसी व्यक्ति के सिर पर चोट लगी है, तो उसे अल्जाइमर रोग होने की बीमारी की संभावना काफी ज्यादा रहती है।

किसी अन्य बीमारी से पीड़ित होना – अल्जाइमर रोग ऐसे लोगों में भी देखने को मिलता है, जो डायबिटीज या दिल संबंधी बीमारी से पीड़ित हो। ऐसे लोगों को अपनी बीमारियों का सही तरीके से इलाज कराना चाहिए ताकि उन्हें अल्जाइमर रोग जैसी गंभीर बीमारी न हो।

तनाव का शिकार होना- अल्जाइमर रोग का खतरा तनाव से पीड़ित लोगों में भी काफी अधिक रहता है। ऐसे लोगो को किसी तरह की लापरवाही नहीं करनी चाहिए क्योंकि ऐसा करना उन्हें गंभीर बीमारी का मरीज़ बना सकता है।

World Alzheimer’s Day  : अल्जाइमर रोग क्या है ?

विश्व अल्जाइमर दिवस (World Alzheimer’s Day) प्रतिवर्ष 21 सितम्बर को मनाया जाता है। यह दिवस अल्जाइमर रोग और डिमेंशिया के बारे में जागरूकता प्रसारित करने के लिए मनाया जाता है। वर्ष 2016 में विश्व अल्जाइमर दिवस अभियान का विषय था- “मुझे याद रखें”।

इस दिन का उद्देश्य विश्व भर के लोगों को डिमेंशिया के लक्षणों का पता लगाने के लिए प्रोत्साहित करना ही नहीं है, अपितु इसका उद्देश्य डिमेंशिया से पीड़ित रोगियों अथवा इस बीमारी के कारण मृत्यु को प्राप्त होने वाले रोगियों को भी न भूलना है।

अल्जाइमर (Alzheimer) की बीमारी एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जो विकसित होता रहता है और इसे रिवर्स नहीं किया जा सकता है. यानी याद्दाश्त या दिमागी क्षमता को पहले जैसा सामान्य नहीं किया जा सकता है.

अल्जाइमर रोग – कल्पना कीजिये कि कोई व्यक्ति सब कुछ भूल जाए, उसे कुछ याद ही न रहे। जाहिर है, ऐसे में ज़िन्दगी दुश्वार हो जाती है। अक्सर ऐसा देखा गया है कि बढ़ती उम्र के साथ लोगों में भूलने की आदत हो जाती है। ऐसे में लोगों को कुछ भी याद नहीं रहता है,

किसी को पहचानने में भी मुश्किल होती है, तो कई बार ऐसा होता है कि बुजुर्ग यदि टहल कर भी आते हैं तो उनको अपना घर पहचानने में दिक्क़त होती है। समझना मुश्किल नहीं है कि ऐसे में मानव मन किस कदर जद्दोजहद करता होगा?

इन सारी परेशानियों को हम बहुत ही हल्के में लेते हैं और सोचते हैं कि बढ़ती उम्र के साथ ऐसा होता ही है, लेकिन हकीकत यह है कि यह अल्जाइमर नाम की बीमारी है, जिसमें लोग सब कुछ भूलने लगते हैं।

1906 में जर्मन के न्यूरोलॉजिस्ट एलोइस अल्जाइमर ने इस बीमारी का पता लगाया था और इन्हीं के नाम पर इस बीमारी को ‘अल्जाइमर’ (Alzheimer) कहा जाता है।

दुनिया भर में लोगों को इस भूलने वाली बीमारी ‘अल्जाइमर’(Alzheimer) के बारे में जागरूकता फ़ैलाने के मक़सद से प्रत्येक साल 21 सितंबर को विश्व अल्जाइमर दिवस (Alzheimer day) मनाया जाता है।

स्मरण शक्ति कमज़ोर करने वाली यह बीमारी ज्यादातर बुजुर्गों को होती है, लेकिन कई बार इसके लक्षण युवाओं में भी पाये जाते हैं, इसलिए जागरूकता और इसका उचित इलाज बेहद आवश्यक है।

हालाँकि, इस बीमारी के लिए कोई प्रॉपर इलाज अब तक विकसित नहीं किया जा सका है, लेकिन इसके लिए सावधानियां और व्यायाम ज़रूर हैं,

जो इस बीमारी में काफ़ी हद तक सहायक साबित होते हैं। अल्जाइमर रोग (Alzheimer) का सबसे समान्य रूप डिमेंशिया है। यह निरंतर प्रगतिशील होने वाला मस्तिष्क का रोग है, जिसके परिणामस्वरूप याददाश्त और सोचने की क्षमता में कमी होती है। यह मस्तिष्क की कोशिकाओं को नष्ट कर देता है,

जिसके कारण याददाश्त में कमी और परिवर्तन, अनियमित व्यवहार तथा शरीर की प्रक्रियाओं को नुकसान पहुंचता है। सामान्य शब्दों में, अल्जाइमर सामान्य की तुलना में अधिकांशत: याददाश्त विकार वाला रोग है।

अल्जाइमर (Alzheimer) से पीड़ित रोगी अक्सर लोगों के नाम, जैसे- कि पुराने दोस्तों, पता, यहाँ तक कि सड़कों तथा अन्य वस्तुओं के नाम भी भूल जाते हैं।

अल्जाइमर रोग के आयुर्वेदिक इलाज क्या क्या हो सकते है ?

Benefits of Green Vegetables
Benefits of Green Vegetables

अल्जाइमर रोग (Alzheimer) के विषय में वैज्ञानिक भी मानते हैं कि आयुर्वेद में मौजूद कुछ हर्ब्स संज्ञानात्मक हानि (Cognitive Loss) को रोक सकती हैं।

आप जानकर हैरान होंगी, कि आयुर्वेद की ये जड़ी-बूटियां (Great Ayurvedic Herbs) आपकी रसोई में ही मौजूद हैं। आइए जानते हैं इन आयुर्वेदिक हर्ब्स के बारे में जो आपकी मेमोरी बूस्ट कर डिमेंशिया और अल्जाइमर रोग से बचा सकती हैं।

क्या कहते हैं शोध

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव मेडिसिन के अनुसार, कई आयुर्वेदिक हर्ब्स (Great Ayurvedic Herbs) या जड़ी -बूटियां अल्जाइमर रोग (Alzheimer) और न्यूरोडीजेनेरेटिव विकारों को रोक सकती हैं। आपकी रसोई में मौजूद ये हर्ब्स आयुर्वेदिक और वैज्ञानिक तौर पर प्रमाणित हैं, जिनका सेवन नियमित तौर पर आहार में शामिल करके किया जा सकता है।

Foods for Alzheimer: अल्जाइमर से लड़ाई में मदद करने वाले फूड

तिल का तेल – आयुर्वेद में तिल के तेल का प्रयोग अल्जाइमर (Alzheimer) की परेशानी को कम करके याददाश्त बढ़ाने में उपयोगी है।

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सही डाइट का सेवन – सही डाइट का सेवन (diet for alzheimer) करके भविष्य में अल्जाइमर (Alzheimer) के खतरे को करीब 40 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है. आइए अल्जाइमर से बचाव या लड़ने वाले फूड्स के बारे में जानते हैं. जिन्हें अपनी डाइट में शामिल किया जा सकता है.

अश्वगंधा – अश्वगंधा ऐसी जड़ीबूटी है जो रोग को बढऩे से रोकती है।2015 में अल्जाइमर रोग की पत्रिका बताती है कि अश्वगंधा ऑक्सीडेटिव तनाव को कम करके मस्तिष्क को लाभ पहुंचा सकता है।

यह एक कारक जो अल्जाइमर रोग (Alzheimer) के विकास और प्रगति में योगदान कर सकता है। इतना ही नहीं, यह मस्तिष्क को मजबूती प्रदान करता है, जो वृद्धावस्था में बहुत ज़रूरी है।

MIND Diet : अल्जाइमर की बीमारी को गंभीर होने से बचाने के लिए Mediterranean- DASH Intervention for Neurodegenerative Delay Diet यानी MIND Diet की मदद ली जा सकती है.

इसके अंतर्गत आपको आहार में साबुन अनाज, गहरी हरी-पत्तेदार सब्जियां, नट्स, बीन्स, बेरी, सीफूड और ऑलिव ऑयल को शामिल करना होता है. इसके साथ ही आपको प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करना होता है.

हल्दी – 2010 में प्रकाशित एक समीक्षा के अनुसार, प्रारंभिक शोध से पता चलता है कि हल्दी मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बढ़ावा दे सकती है और बीटा-एमिलॉइड (एक प्रोटीन टुकड़ा) के मस्तिष्क को साफ करके अल्जाइमर रोग को दूर कर सकती है।

हल्दी में मौजूद curcumin दिमागी क्षमता को सुधारने में मदद करता है.-एमिलॉइड के निर्माण को अल्जाइमर से संबंधित मस्तिष्क पट्टिका बनाने के लिए जाना जाता है। इसके अलावा, हल्दी मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिकाओं के टूटने को रोककर मस्तिष्क के स्वास्थ्य की रक्षा कर सकती है।

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थाइम – यह स्वादिष्ट जड़ी बूटी मस्तिष्क में न्यूरॉन्स को समय से पहले बूढ़ा होने से बचाने में मदद करती है। यह मस्तिष्क में सक्रिय ओमेगा -3 डीएचए (डोकोसाहेक्सैनोइक एसिड) की मात्रा को भी बढ़ाता है। ओमेगा -3 फैटी एसिड स्मृति, फंकशन और मूड को बढ़ा सकता है और मस्तिष्क शोष को कम कर सकता है।

ओमेगा-3 फैटी एसिड : अल्जाइमर (Alzheimer) की बीमारी में ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर फूड्स राहत देते हैं. खासतौर से फैटी फिश में मौजूद DHA को प्रभावी देखा गया है. क्योंकि, सामान्य दिमागी विकास के लिए डीएचए का हाई लेवल मददगार होता है. इसके लिए आप अखरोट, फ्लैक्स सीड्स और ऑलिव ऑयल का सेवन करें. जो ब्रेन इंफ्लामेशन को कम करने में प्रभावशाली होते हैं.

केसर – 2016 के एक अध्ययन में पाया गया कि केसर अल्जाइमर रोग से ग्रसित लोगों में याददाश्त में सुधार कर सकता है। इसके अलावा, ईरान में तेहरान विश्वविद्यालय में कई अध्ययनों में पाया गया कि केसर हल्के से मध्यम अवसाद वाले लोगों के इलाज में अवसादरोधी दवा के रूप में प्रभावी था। अवसाद स्मृति समस्याओं और भूलने की बीमारी से जुड़ा है।

विटामिन सी और ई वाले फूड्स : दिमाग में होने वाले केमिकल रिएक्शन के दौरान फ्री-रेडिकल्स का उत्पादन होता है. जो दिमागी कोशिकाओं को नष्ट करके मानसिक स्वास्थ्य बिगाड़ते हैं. एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर फूड्स इन फ्री-रेडिकल्स को निष्क्रिय कर देते हैं. इसलिए विटामिन सी से भरपूर फूड्स (जैसे लाल शिमला मिर्च, ब्रॉकली, स्ट्रॉबेरी) और विटामिन ई से भरपूर फूड्स (जैसे बादाम और ऑलिव ऑयल) का सेवन करना चाहिए

अरोमा थेरेपी – अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी कुछ मानसिक बीमारियों से बचाव में अरोमा थेरेपी काफी कारगर साबित हो सकती है। चूंकि अरोमा थेरेपी तनाव कम करती है, इसलिए इन रोगों से ग्रस्त लोगों को इस थैरेपी से काफी आराम होता है। कुछ मामलों में यह भी देखा गया कि अरोमा थेरेपी दिमाग तेज करने व भूली हुई यादों को वापस लाने में भी साहयक होती है।

Flavonoid से भरपूर फूड और ड्रिंक: एक्सपर्ट के मुताबिक सेब, ब्लूबेरी, क्रैनबेरी और ग्रेपफ्रूट जैसे फल Flavonoid से भरपूर होते हैं. वहीं, पत्ता गोभी, लहसुन, केल, किडनी बीन्स, प्याज, मटर और पालक जैसी सब्जियां में भी Flavonoid की काफी मात्रा होती है.

काम का है पीपल –  अल्जाइमर (Alzheimer) से जूझ रहे लोगों के लिए एक शोध से उम्मीद जगी है। उनके शोध में यह बात सामने आई कि अल्जाइमर के एन्जाइम की गतिशीलता को रोकने में पीपल काफी मददगार हो सकता है।

पीपल के तने से लिये गए टिश्यू का लेबोरेटरी ट्रायल इसके समर्थन में रहा। गौरतलब है कि यह शोध चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के बायो टेक विभाग ने पीपल के पेड़ की मेडिसन प्रापर्टी पर किया गया।

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टमाटर – 40 साल की आयु के बाद कोलेस्ट्रॉल का स्तर बिगड़ने से लेकर बीपी बढ़ने या घटने आदि समस्याएं होने की आशंका बढ़ जाती हैं। साथ ही इस आयु के बाद हृदय रोग और मधुमेह की भी आशंका बढ़ती है।

एक शोध के अनुसार, 40 की आयु पार कर जाने के बाद अपने भोजन में बादाम, टमाटर, मछली आदि को नियमित रूप से शामिल करना चाहिए। शोध में यह भी पाया गया कि 20 मिनट की एक्सरसाइज के बाद 150 मिलीग्राम टमाटर का जूस पीने से कैंसर से भी बचाव होता है, दिल दुरुस्त रहता है और कई अन्य बीमारियां भी नियंत्रित होती हैं।

फोलेट वाले फूड्स : फोलेट जैसे विटामिन-बी की कमी के कारण दिमागी क्षमता में गिरावट आने लगती है. इस अमीनो एसिड की कमी नाटकीय रूप से अल्जाइमर का खतरा बढ़ा देती है. इसलिए गहरी हरी-पत्तेदार सब्जियां, ड्राई बीन्स आदि का सेवन जरूर करें.

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बेरीज : ब्लूबेरी, ब्लैकबेरी, रैस्पबेरी और स्ट्रॉबेरी एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती हैं. जो ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाव करके दिमाग को फायदा पहुंचाती हैं.

सीड्स : अगर आप अल्जाइमर (Alzheimer) जैसी बीमारी का खतरा कम करना चाहते हैं, तो सूरजमुखी के बीज, फ्लैक्स सीड्स, कद्दू के बीज आदि का सेवन करें. इनमें एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिन ई, जिंक, ओमेगा-3, कोलीन जैसे तत्व होते हैं, जो दिमागी क्षमता को बिगड़ने नहीं देते और दिमागी स्वास्थ्य को सही रखते हैं

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सबसे अधिक पूछे जाने वाले सवाल (FAQ’S)

Q : अल्जाइमर रोग कितनी तेज़ी से बढ़ता है?
Ans : अल्जाइमर रोग 2 या 2.5 सालों तक रह सकता है। यह काफी तेज़ी से बढने वाली बीमारी है, जो 4 से 20 सालों की अवधि में बद से बदतर बन जाती है।

Q : अल्जाइमर रोग किसकी कमी से होता है?
Ans : दरअसल, अल्जाइमर बीमारी में मस्तिष्‍क में दो प्रोटीन, एमिलॉयड बीटा और टाउ का निर्माण होता है, जो न्यूरॉन्स को परेशान करते हैं और उसे नष्ट करते हैं। इससे मस्तिष्‍क की स्मृति क्षमता में कमी आती है।

Q : आमतौर पर, अल्जाइमर रोग की शुरूआत किस उम्र में होती है?
Ans : अल्जाइमर रोग की स्थिति में उम्र काफी बढ़ा तत्व होता है। इसी कारण, यह बीमारी मुख्य रूप से 60 या उससे अधिक लोगों में देखने को मिलती है।

Q : अल्जाइमर कौन सा रोग है?
Ans : अल्जाइमर रोग (Alzheimer’s Disease) रोग ‘भूलने का रोग’ है। इसका नाम अलोइस अल्जाइमर पर रखा गया है, जिन्होंने सबसे पहले इसका विवरण दिया।

Q : अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोग कितने सालों तक जीवित रह सकते हैं?
Ans : हालांकि, समय बीतने के साथ-साथ अल्जाइमर रोग (Alzheimer) के लक्षण भी खराब होने लगते हैं, इसके बावजूद इस बीमारी के बढ़ने की दर अलग-अलग लोगों में अलग-अलग होती है। अल्जाइमर रोग पर अभी तक किए गए अध्ययनों से यह बात स्पष्ट है कि इस रोग की पहचान होने पर इससे पीड़ित व्यक्ति अगले 4-8 सालों तक जीवित रह सकता है।

Q : क्या अल्जाइमर रोग की रोकथाम की जा सकती है?
Ans : जी हां, अल्जाइमर रोग की रोकथाम संभव है। इसके लिए धूम्रपान न करना, डायबिटीज, हृदय संबंधी बीमारियाँ, हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखना, संतुलित भोजन करना इत्यादि कारगर उपाय साबित हो सकते हैं

Q : अल्जाइमर रोग के उपचार में कौन सी अच्छी दवा का उपयोग किया जाता है?
Ans : अभी तक इसका कोई कारगर इलाज नहीं है, लेकिन अब उम्मीद जगी है. अमेरिका और स्विट्जरलैंड के वैज्ञानिकों ने एक साल तक अल्जाइमर के मरीजों का नई दवा एडु-कैनू-मैब से इलाज किया है. उन्हें कामयाबी मिली है.

Q : याददाश्त क्यों कमजोर हो जाती है?
Ans : यदि कोई व्यक्ति गंभीर रूप से अल्जामइर (Alzheimer) या डेमेंशिया से पीड़ित है उनको भूलने की समस्या होते रहती है। बहुत से लोगो में याददाश्त खोने की समस्या अक्सर किसी दुर्घटना के कारण होती है जिसमे व्यक्ति के सिर पर गंभीर चोट लगती है। अत्यधिक तनाव में होने के वजह से व्यक्ति अपनी याददाश्त खो देता है

Q : अल्जाइमर Meaning in Hindi
Ans : अल्जाइमर को हिंदी में भूलने की बीमारी कहते है।

Q : अल्जाइमर रोग का प्रमुख कारण क्या है?
Ans : अल्जाइमर रोग (Alzheimer) का प्रमुख कारण दिमाग कोशिकाओं का खत्म होना है। इसके अलावा, यह बीमारी पारिवारिक इतिहास (जेनेटिक कारण), खराब खान-पान, अधिक उम्र होना इत्यादि कारणों से भी हो सकती है।

Q : अल्जाइमर रोग के शुरूआती संकेत क्या हैं?
Ans :  अल्जाइमर रोग के शुरूआती संकेत काफी सारे होते हैं, जिन्हें इसका लक्षण भी कहा जाता है। इनमें यादाश्त का कम होना, योजना बनाने या निर्णय लेने में परेशानी होना, धुँधला दिखाई देना इत्यादि शामिल हैं।

Q : क्या अल्जाइमर रोग किसी व्यक्ति की मौत की वजह बन सकता है?
Ans : अल्जाइमर रोग (Alzheimer) मुख्य रूप से दिमागी मांसपेशियों के संपर्क को तोड़ देता है। इसकी वजह से शरीर के अन्य अंग भी सही तरीके से काम नहीं कर पाते हैं, जब यह स्थिति काफी लंबे समय तक रहती है, तो यह किसी भी व्यक्ति की मौत की संभावना को बढ़ा देती है।

Q : अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोग कितने सालों तक जीवित रह सकते हैं?
Ans : हालांकि, समय बीतने के साथ-साथ अल्जाइमर रोग के लक्षण भी खराब होने लगते हैं, इसके बावजूद इस बीमारी के बढ़ने की दर अलग-अलग लोगों में अलग-अलग होती है। अल्जाइमर रोग पर अभी तक किए गए अध्ययनों से यह बात स्पष्ट है कि इस रोग की पहचान होने पर इससे पीड़ित व्यक्ति अगले 4-8 सालों तक जीवित रह सकता है।

साभार : bhartdiscovery.org

यहां दी गई जानकारी किसी भी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है. यह सिर्फ शिक्षित करने के उद्देश्य से दी जा रही है.

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