What is Diabetes in hindi | How many types of diabetes are there

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What is Diabetes in hindi | How many types of diabetes are there
What is Diabetes in hindi

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What is Diabetes in hindi | How many types of diabetes are there | मधुमेह क्या है हिंदी में | मधुमेह कितने प्रकार का होता है

डायबिटीज मेलेटस (डीएम), जिसे सामान्यतः मधुमेह कहा जाता है, चयापचय संबंधी बीमारियों का एक समूह है जिसमें लंबे समय तक रक्त में शर्करा का स्तर उच्च होता है शरीर में जब पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बन पाता है तो लोग डायबिटीज की समस्या से ग्रस्त हो जाते हैं। डायबिटीज (Diabetes) एक आजीवन रहने वाली बीमारी है। यह एक मेटाबॉलिक डिसॉर्डर है, जिसमें मरीज़ के शरीर के रक्त में ग्लूकोज़ का स्तर बहुत अधिक होता है।

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दुनिया भर में हर साल लगभग 1.6 मिलियन लोगों की जान डायबिटीज के कारण जाती है।इस तरह तो साल 2030 तक दुनिया में ये बीमारी 7वीं सबसे घातक बीमारी बन जाएगी।मधुमेह (डायबिटीज Diabetes) एक जीवन शैली से जुड़ी हुई बीमारी है जिसमें एक स्ट्रिक्ट डाइट प्लान को फॉलो करने, एक्सरसाइज और स्लीपिंग पैटर्न पर ध्यान देने की जरूरत होती है। साथ ही Foot wears या शुगर शूज भी इस बीमारी को कम करने में मददगार होते हैं, 

डायबिटीज क्या है? डायबिटीज़ के प्रकार कितने हैं ?

हम जो भोजन करते हैं उससे, शरीर को ग्लूकोज प्राप्त होता है जिसे कोशिकाएं शरीर को ऊर्जा प्रदान करने में उपयोग करती हैं। यदि शरीर में इंसुलिन (Insulin) मौजूद नहीं होता है तो वे अपना काम सही तरीके से नहीं कर पाती हैं और ब्लड से कोशिकाओं को ग्लूकोज नहीं पहुंचा पाती हैं।

और शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति ठीक से प्रतिक्रिया नहीं कर पाती हैं। जैसा कि, इंसुलिन का बनना शरीर के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह रक्त से शरीर की कोशिकाओं में ग्लूकोज़ का संचार करता है। इसीलिए, जब इंसुलिन सही मात्रा में नहीं बन पाता तो पीड़ित व्यक्ति के बॉडी मेटाबॉलिज्म (Body Metabolism) पर भी इसका प्रभाव पड़ता है।

आमतौर पर डायबिटीज़ 3 प्रकार का होता है

  • टाइप-1 डायबिटीज
  • टाइप-2 डायबिटीज और
  • जेस्टेशनल डायबिटीज, जो कि प्रेगनेंसी के दौरान होने वाली हाई ब्लड शुगर की समस्या है।

डायबिटीज के कारण क्या हैं ?

जब शरीर सही तरीके से रक्त में मौजूद ग्लूकोज़ या शुगर का उपयोग नहीं कर पाता। तब, व्यक्ति को डायबिटीज़ की समस्या हो जाती है। आमतौर पर डायबिटीज के मुख्य कारण ये स्थितियां हो सकती हैं-

  • इंसुलिन की कमी
  • परिवार में किसी व्यक्ति को डायबिटीज़ होना
  • बढ़ती उम्र
  • हाई कोलेस्ट्रॉल लेवल
  • एक्सरसाइज ना करने की आदत
  • हार्मोन्स का असंतुलन
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • खान-पान की ग़लत आदतें

डायबिटीज़ के लक्षण क्या हैं ?

पीड़ित व्यक्ति के शरीर में बढ़े हुए ब्लड शुगर के अनुसार उसमें डायबिटीज़ के लक्षण दिखाई देते हैं। ज्यादातर मामलों में अगर व्यक्ति प्री डायबिटीज या टाइप-2 डायबिटीज का से पीड़ित हो तो, समस्या की शुरूआत में लक्षण दिखाई नहीं पड़ते। लेकिन, टाइप-1 डायबिटीज के मरीज़ों में डायबिटीज़ लक्षण बहुत तेजी से प्रकट होते हैं और ये काफी गंभीर भी होते हैं।

टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज के मुख्य लक्षण ये हैं-

  • बहुत अधिक प्यास लगना
  • बार-बार पेशाब आना
  • भूख बहुत अधिक लगना
  • अचानक से शरीर का वजह कम हो जाना या बढ़ जाना
  • थकान
  • चिड़चिड़ापन
  • आंखों के आगे धुंधलापन
  • घाव भरने में बहुत अधिक समय लगना
  • स्किन इंफेक्शन
  • ओरल इंफेक्शन्स
  • वजाइनल इंफेक्शन्स

डायबिटीज का निदान क्या है ?

डायबिटीज या मधुमेह के लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए। डायबिटीज़ के निदान के लिए इस प्रकार के कुछ टेस्ट कराने की सलाह दी जा सकती है-

ए1सी टेस्ट (A1C test or glycohaemoglobin test)

इस प्रकार का टेस्ट टाइप 2 डायबिटीज़ के लिए किया जाता है। जिसमें, मरीज़ को हर 3 महीने में एक बार ब्लड टेस्ट कराना होता है और उसका एवरेज ब्लड ग्लूकोज़ लेवल जांचा जाता है। ए1सी टेस्ट में 5 से 10 तक के अंकों में ब्लड में ग्लूकोज़ का स्तर मापा जाता है। अगर टेस्ट रिपोर्ट में 5.7 से नीचे का आंकड़ा दिखाया जाता है तो वह नॉर्मल होता है। लेकिन अगर किसी का ए1सी लेवल 6.5% से अधिक दिखायी पड़ता है तो वह, डायबिटीज़ का मरीज़ कहलाता है।

फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज टेस्ट

हाई ब्लड शुगर की स्थिति को समझने के लिए यह सबसे आम ब्लड टेस्ट है। इस टेस्ट के लिए व्यक्ति को खाली पेट रहते हुए ब्लड सैम्पल देना पड़ता है। जिसके लिए 10-12 घंटों तक भूखे रहने के लिए कहा जाता है। उसके बाद फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज टेस्ट किया जाता है। यह टेस्ट डायबिटीज या प्रीडायबिटीज का पता लगाने के लिए किया जाता है।

ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट

इस टेस्ट में भी खाली पेट रहते ही ब्लड सैम्पल लिया जाता है। यह टेस्ट करने से दो घंटे पहले मरीज को ग्लूकोज युक्त पेय पदार्थ पिलाया जाता है।

रैंडम ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट

इस प्रकार के टेस्ट में पीड़ित व्यक्ति के ब्लड सैम्पल की 4 बार जांच की जाती है। अगर ब्लड शुगर लेवल दो बार नॉर्मल से ज़्यादा पाया जाता है तो प्रेगनेंट महिला को जेस्टेशनल डायबिटीज होने की पुष्टि की जाती है।

डायबिटीज़ का उपचार क्या है ?

टाइप-1 डायबिटीज का कोई स्थायी उपचार नहीं है इसीलिए, व्यक्ति को पूरी ज़िंदगी टाइप-1 डायबिटीज का मरीज़ बनकर रहना पड़ता है। ऐसे लोगों को इंसुलिन लेना पड़ता है जिसकी मदद से वे अपनी स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं। 

How many types of diabetes are there

टाइप-2 डायबिटीज के लक्षणों से बिना किसी दवा के प्रतिदिन एक्सरसाइज, संतुलित भोजन, समय पर नाश्ता और वजन को नियंत्रित करके छुटकारा पाया जा सकता है। सही डायट की मदद से टाइप-2 डायबिटीज को नियंत्रित करने में मदद करता है। इसके अलावा कुछ ओरल एंटीबायोटिक्स दवाएं टाइप-2 डायबिटीज को बढ़ने से रोकने में मदद करती हैं।

डायबिटीज की बीमारी में क्या क्या चुनौतियां हैं ?

मधुमेह ऐसी बीमारी है जिसका असर दूसरे अंगों पर भी पड़ता है। हालांकि इस बीमारी में दूसरे अंगों में इसका असर नहीं दिखता है लेकिन अगर ब्‍लड में शुगर की मात्रा अधिक बढ़ जाये तो इसके कारण 5-10 साल में दूसरे अंग भी प्रभावित होने लगते हैं। इसके कारण गुर्दे में, आंखों में, पैर की नसों में कुछ खराबी आ सकती है।

दिल की बीमारी के बढ़ने की संभावना सबसे अधिक रहती है। इसके कारण लकवा होने और पैर में रक्‍त संचार बाधित होने का खतरा अधिक रहता है। इसके कारण अगर कोई आर्टरी ब्‍लॉक होती है तो हार्ट अटैक हो सकता है। इसके अलावा ब्रेन में भी रक्‍त की सप्‍लाई बाधित होने से ब्रेन स्‍ट्रोक की संभावना बढ़ जाती है।

यह स्थिति अचानक से नहीं आती है बल्कि यह 10 साल पुराने इतिहास के कारण होता है। इसके अलावा माइक्रोवैस्‍कुलर संबंधित समस्‍यायें होने लगती है, यह किडनी से संबंधित है, अगर यह हो जाये तो उपचार मुश्किल हो जाता है।

डायबिटीज से बचाव के उपाय क्या हैं

डायबिटीज़ एक गंभीर बीमारी है जिससे, आपको आजीवन परेशानियां हो सकती हैं। डायबिटीज़ से पीड़ित व्यक्ति को स्वास्थ्य से जुड़ी कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं। लेकिन, कुछ सावधानियां बरतकर डायबिटीज की बीमारी से बचा जा सकता है।

  • मीठा कम खाएं। शक्कर से भरी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन करने से बचें।
  • एक्टिव रहें, एक्सरसाइज करें, सुबह-शाम टहलने जाएं।
  • पानी ज़्यादा पीएं। मीठे शर्बत और सोडा वाले ड्रिंक्स पीने से बचें। आइसक्रीम, कैंडीज़ खाने से भी परहेज करें।
    वजन घटाएं और नियंत्रण में रखें।
  • स्मोकिंग और अल्कोहल लेने से परहेज करें।
  • हाई फाइबर डायट खाएं,प्रोटीन का सेवन भी अधिक मात्रा में करें।
  • विटामिन डी की कमी ना होने दें। क्योंकि, विटामिन डी की कमी से डायबिटीज़ का ख़तरा बढ़ता है।
  • फुट वियर्स पर ध्यान दे

डायबिटीज के मरीज किन चप्पलों का करें चुनाव

पहले के समय में कई लोग हरी घास जैसे नरम सतहों पर नंगे पैर चला करते थे। इससे पैर, घुटने और पीठ हेल्दी रहते थे। लेकिन आज के समय में जब लोग दिन भर में 3 हजार कदम भी नहीं चलते हैं, वो भी हार्ड सर्फेस पर और गलत तरह के फुट वियर्स के साथ। इन जूते-चप्पलों के कठोर सोल्स (soles) पैरों को सही ढ़ंग से सपोर्ट प्रदान नहीं कर पाते हैं।कई डॉक्टर्स इस बात को मानते हैं कि आप जिस तरह के फुट वियर्स का इस्तेमाल करते हैं,वो आपके स्वास्थ्य को दर्शाता है।

डायबिटीज के मरीज को वैसे चप्पल का चुनाव करना चाहिए जो शरीर के वजन को समान रूप से वितरित करके पैर के दबाव को कम करते हैं। इसके अलावा, जो फुट वियर कुशन कम्फर्ट के साथ डिजाइन किये गए हों, उन्हें भी पहन सकते हैं। इनका इस्तेमाल करने से टखने और एड़ी को सपोर्ट मिलता है

और प्रेशर पॉइंट्स में होने वाले दर्द से भी राहत मिलती है। जूते-चप्पलों का साइज भी बेहद अहम है। सही साइज के फुट वियर्स को पहनना चाहिए ताकि पैर में होने वाले घाव और छालों से बचा जा सके। ऐसा इसलिए क्योंकि इन मरीजों की हीलिंग क्षमता कम होती है।

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डायबिटीज के लिए घरेलू नुस्खे

  1. डायबिटीज में करेला काफी फायदेमंद होता है, करेले में कैरेटिन नामक रसायन होता है, इसलिए यह प्राकृतिक स्टेरॉयड के रुप में इस्तेमाल होता है, जिससे खून में शुगर लेवल नहीं बढ़ पाता। करेले के 100 मिली. रस में इतना ही पानी मिलाकर दिन में तीन बार लेने से लाभ होता है।
  2. मधुमेह के रोगियों के लिए मेथी बहुत फायदेमंद होता है। अगर आप रोज़ 50 ग्राम मेथी नियमित रुप से खाएगें तो निश्चित ही आपका ग्लूकोज़ लेवल नीचे चला जाएगा, और आपको मधुमेह से राहत मिलेगी।
  3. जामुन- जामुन का रस, पत्ती़ और बीज मधुमेह की बीमारी को जड़ से समाप्त कर सकता हैं। जामुन के सूखे बीजों को पाउडर बना कर एक चम्मच दिन में दो बार पानी या दूध के साथ लेने से राहत मिलती है।
  4. एक चम्मच आमले का रस करेले के रस में मिला कर रोज पीएं , यह मधुमेह की सबसे अच्छी दवा है।
  5. 15 ग्राम ताजे आम के पत्तों को 250 एमएल पानी में रात भर भिगो कर रख दें। इसके बाद सुबह इस पानी को छान कर पी लें। इसके अलावा सूखे आम के पत्तों को पीस कर पाउडर के रूप में खाने से भी मधुमेह में लाभ होता है।
  6. कार्बोहाइर्ड्रेट, कैलोरी और कई तरह के माइक्रो न्यू ट्रिएंट से भरपूर शहद मधुमेह के लिए लाभकारी है। शहद मधुमेह को कम करने में सहायता करता है।

FAQ

Q : डायबिटीज क्यों हो जाती है?

Ans : जब शरीर के पैंक्रियाज में इंसुलिन कम पहुंचता है तो खून में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है. इस स्थिति को डायबिटीज कहा जाता है. इंसुलिन एक हार्मोन है जो हमारे शरीर में पाचक ग्रंथि से बनता है. इसका काम भोजन को एनर्जी में बदलने का होता है

Q : डायबिटीज का लेवल कितना होना चाहिए?

Ans : खाली पेट में शुगर का लेवल नॉर्मल यानि कि 70 से 100 के बीच नॉर्मल माना जाता है। खाना खाने के एक दम बाद ब्लड शुगर लेवल 170-200 mg/dl तक नार्मल है। खाना खाने के 2-3 घंटे बाद ब्लड शुगर लेवल 120-140 mg/dl तक होना चाहिए।

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