कलौंजी और प्याज के बीजों में क्या अंतर है

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कलौंजी और प्याज  के बीजों में क्या अंतर है
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कलौंजी और प्याज के बीजों में क्या अंतर है

कलोंजी को प्याज के बीज समझने की भूल ना करें (Do not forget to consider Nigella as onion seeds)

कलोंजी (Nigella) के काले दाने भारत लगभग में सभी रसोई में मसाले के रूप में इस्तेमाल किये जाते हैं। विशेष कर अचार बनाने में कलोंजी का उपयोग अक्सर किया जाता है। इसके छोटे छोटे काले दाने दिखने में जितने सुंदर होते हैं उतने ही लाभदायक भी होते हैं। ये अचार या सब्जी आदि के स्वाद और सुगंध में वृद्धि करते हैं।

कलोंजी के अन्य उपयोग (Use of Nigella)

कलोंजी का उपयोग अचार के अतिरिक्त कढ़ी, कचोरी , नान आदि अनेको व्यंजनों का स्वाद बढ़ानेके लिए भी किया जाता है। इसके अतिरिक्त यह आयुर्वेदिक दवा बनाने के लिए भी काम आती है। कलोंजी के दानो से तेल भी निकाला जाता है जो दवा के रूप में काम आता है।

कलोंजी में कोन – कोन से लाभदायक तत्व पाए जाते है
(Nigella ke poshak tatva)

कलौंजी में प्रोटीन , कार्बोहाईड्रेट , फैट , विटामिन A, B2 ,आदि अनेको तत्व पाए जाते है होते हैं।साथ ही कलोंजी में कैल्शियम , पोटेशियम , आयरन , जिंक , मैग्नीशियम आदि खनिज भी प्रचुर मात्रा में होते हैं। कलोंजी में एसिड तत्व के रूप में लिनोलिक एसिड,ओलियक एसिड तथा नाइजेलोन भी शामिल हैं।

कलोंजी के फायदे (Nigella Benefits)

  • कलोंजी हमारी स्मरण शक्ति को बढ़ाता है तथा ध्यान नीद ना आने एवं अन्य मानसिक परेशानियों को भी दूर करता है
  • कलोंजी के उपयोग से डायबिटीज में राहत मिलती है। यह रक्त में शक्कर की मात्रा को नियंत्रित बनाये रखने में सहायक होती है।
  • कलौंजी में हानिकारक LDL नामक कोलेस्ट्रोल तथा ट्राई ग्लाईसेराइड को कम की जाती है। एवं कलोंजी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है। क्युकी ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रोल ह्रदय रोग के मुख्य कारण होते हैं।
  • कलौंजी का तेल Nigella Oil सिरदर्द या जोड़ों के दर्द में उपयोग करने से आराम मिलाता है। आधा कप सरसों के तेल में एक चम्मच कलौंजी डालकर गर्म कर लें। ठंडा होने पर इसकी मालिश करने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।
  • यह त्वचा को निखारने में सहायक होती है। कई प्रकार की परेशानी जैसे ब्लेक हेड , मुहासे , दाग , धब्बे , झाइयाँ आदि में इससे लाभ होता है। कलोंजी का तेल नीबू के रस में या फेस पैक में मिलाकर लगाने से त्वचा में सुधर होता है।

कलौंजी कैंसर के उपचार में सहायक

जेफरसन फिलाडेल्फिया स्थित किमेल कैंसर संस्थान के शोधकर्ताओं ने चूहों पर प्रयोग कर निष्कर्ष निकाला है कि कलौंजी में विद्यमान थाइमोक्विनोन अग्नाशय कैंसर की कोशिकाओं के विकास को बाधित करता है और उन्हें नष्ट करता है।

शोध की आरंभिक अवस्था में ही शोधकर्ता मानते है कि शल्यक्रिया या विकिरण चिकित्सा करवा चुके कैंसर के रोगियों में पुनः कैंसर फैलने से बचने के लिए कलौंजी का उपयोग महत्वपूर्ण होगा।

थाइमोक्विनोन इंटरफेरोन की संख्या में वृद्धि करता है, कोशिकाओं को नष्ट करने वाले विषाणुओं से स्वस्थ कोशिकाओं की रक्षा करता है, कैंसर कोशिकाओं का सफाया करता है और एंटी-बॉडीज का निर्माण करने वाले बी कोशिकाओं की संख्या बढ़ाता है।

कलौंजी एच.आई.वी.उपचार में सहायक

मिस्र के वैज्ञानिक डॉ॰ अहमद अल-कागी ने कलौंजी पर अमेरीका जाकर बहुत शोध कार्य किया उन्होंने एड्स के रोगियों पर इस बीज और हमारी प्रति रक्षा प्रणाली के संबन्धों का अध्ययन करने के लिए प्रयोग किये।

उन्होंने सिद्ध किया कि एड्स के रोगी को नियमित कलौंजी, लहसुन और शहद के केप्स्यूल (जिन्हें वे कोनीगार कहते थे) देने से शरीर की रक्षा करने वाली टी-4 और टी-8 लिंफेटिक कोशिकाओं की संख्या में आश्चर्यजनक रूप से वृद्धि होती है। अमेरीकी संस्थाओं ने उन्हें सीमित मात्रा में यह दवा बनाने की अनुमति दे दी थी।

कलौंजी-एक रामबाण दवा

मिस्र, जोर्डन, जर्मनी, अमेरीका, भारत, पाकिस्तान आदि देशों के 200 से ज्यादा विश्वविद्यालयों में 1959 के बाद कलौंजी पर बहुत शोध कार्य हुआ है।1996 में अमेरीका की एफ.डी.ए. ने कैंसर के उपचार, घातक कैंसर रोधी दवाओं के दुष्प्रभावों के उपचार और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली सुदृढ़ करने के लिए कलौंजी से बनी दवा को पेटेंट पारित किया था।

कलौंजी जुकाम ठीक करती है और कलौंजी का तेल गंजापन भी दूर करता है। कलौंजी के नियमित सेवन से पागल कुत्ते के काटे जाने पर भी लाभ होता है। लकवा, माइग्रेन, खांसी, बुखार, फेशियल पाल्सी के इलाज में यह फायदा पहुंचाती हैं।

दूध के साथ लेने पर यह पीलिया में लाभदायक पाई गई है। यह बवासीर, पाइल्स, मोतिया बिंद की आरंभिक अवस्था, कान के दर्द व सफेद दाग में भी फायदेमंद है। कलौंजी को विभिन्न बीमारियों में इस प्रकार प्रयोग किया जाता है।

कलोंजी के अन्य भाषाओ में नाम (Names of Nigella in other languages)

कलोंजी को संस्कृत में कृष्णजीरा,बांग्ला में कालाजीरो, मलयालम में करीम जीराकम, रूसी में चेरनुक्षा, तुर्की में çörek otu कोरेक ओतु, फारसी में शोनीज, अरबी में हब्बत-उल-सौदा, हब्बा-अल-बराका, तमिल में करून जीरागम और तेलुगु में नल्ला जीरा कारा कहते हैं।

इसका स्वाद हल्का कड़वा व तीखा और गंध तेज होती है। इसका प्रयोग विभिन्न व्यंजनों नान, ब्रेड, केक और आचारों में किया जाता है। चाहे बंगाली नान हो या पेशावरी खुब्जा (ब्रेड नान या कश्मीरी) पुलाव हो कलौंजी के बीजों से जरूर सजाये जाते हैं।

कलोंजी क्या प्याज के बीज हैं ?(Does Nigella have onion seeds?)

जी नहीं। कलोंजी प्याज के बीज नहीं हैं।अधिकतर लोग कलोंजी को प्याज का बीज ही समझते हैं क्योंकि इसके बीज प्याज जैसे ही दिखते हैं। लेकिन प्याज और काला तिल (कलोंजी ) बिल्कुल अलग पौधे हैं। कलौंजी और प्याज के बीज दोनों अलग प्रजाति हैं। इनका सिर्फ रंग और आकार कुछ मिलता जुलता होता है। दिखने में लगभग एक जैसे होने के कारण ही कलौंजी को कुछ लोग प्याज के बीज समझ बैठते हैं।

यह भी पढ़े : कलौंजी किसे कहते है,तथा इसके फायदे एवं नुकसान क्या क्या है

कलोंजी और प्याज के बीज में अंतर (difference between Nigella and onian seeds)

कलोंजी में और प्याज के बीज में अंतर इनके स्वाद का होता है। यदि आप कलोंजी को मुंह में रखकर चबायेंगे तो आपको शुरू में जीरे जैसा लगेगा और फिर मुंह कडवा हो जायेगा । और यदि प्याज का बीज चबायेंगे तो पहले तो कुछ स्वाद ही नही आएगा फिर बाद में थोड़ा सा प्याज जैसा स्वाद आएगा। इस तरह आप खुद इनमे अंतर पता कर सकते हैं।

कलोंजी के दाने एक तरफ से नुकीले और दूसरी तरफ से गोल होते है तथा आकार में लम्बे होते हैं ये सभी लगभग एक ही आकार के और काले तिल की तरह होते हैं। जबकि प्याज के बीज लम्बे ना हो कर गोल , चोड़े , चपटे , गोलाई लिए हुए तथा अलग अलग आकार के होते हैं।

प्याज के बीज का आकार कलोंजी के बीज से थोड़ा बड़ा होता हैं। यह अंतर कलोंजी और प्याज के बीज पास पास रखेंने पर आसानी से किया जा सकता है।

वनस्पति विज्ञान के आधार पर ये दोनों (कलौंजी के बिज़ और प्याज के बीज) बिल्कुल अलग -अलग प्रजाति के हैं। कलौंजी बटरकप फैमिली से सम्बंधित निजेला सतिवा (Nigella sativa ) नामक पौधे के बीज हैं। जबकि प्याज के बीज के पौधे का नाम (allium cepa) है।

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