Who is Alluri sitarama raju and Komaram bheem |

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आइये जानते है कौन है RRR  फिल्म के असली हीरो
आइये जानते है कौन है RRR फिल्म के असली हीरो
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Who is Alluri sitarama raju and Komaram bheem |आइये जानते है कौन है राईज रोअर रिवॉल्ट (RRR) फिल्म के असली हीरो सीताराम राजू और कोमाराम भीम…

इस साल ( 25 मार्च 2022) की सफलतम फिल्मों में से एक (एसएस राजामौली द्वारा निर्देशित) साउथ की फिल्म राईज रोअर रिवॉल्ट (RRR) 25 मार्च को रिलीज हो गई और जबरदस्त कमाई कर रही है।फिल्म RRR ने पर्दे पर रिलीज होने के बाद पहले ही दिन इतिहास रचते हुए कमाई के सारे रिकॉर्ड को ध्वस्त करते हुए वर्ल्डवाइड 257.15 करोड़ रुपए की कमाई की है।

साथ ही इस फिल्म समीक्षकों ने शानदार रेटिंग भी दी है। फिल्म में राम चरण (Ram Charan) और जूनियर एनटीआर (Jr NTR) ने प्रमुख भूमिका निभाई है। उनके आलावा फिल्म में अजय देवगन (Ajay Devgn) और आलिया भट्ट (Alia Bhatt) भी है। कई सितारे और समीक्षक फिल्म राईज रोअर रिवॉल्ट (RRR) को मास्टरपीस बता रहे हैं।

इससे पहले SS राजामौली (ss rajamouli) ने साल 2015 में ‘बाहुबली’ (baahubali) फिल्म बनाई। तब किसी ने भी नहीं सोचा था कि ये फिल्म (baahubali) देश ही नहीं, दुनिया में भी जबरदस्त तहलका मचा देगी। इसका दूसरा पार्ट भी आया और उसने भी बेंचमार्क सेट कर दिया। अब लोग राजामौली की अगली क्रिएशन RRR को देखकर भी यही कह रहे है और इस फिल्म ने राजामौली (ss rajamouli) की बनायीं फिल्म ‘बाहुबली’ (baahubali) के रिकॉड को तोड़ दिया है ।

ये मूवी 25 मार्च को थियेटर्स (RRR release date) में रिलीज लेकिन ‘बाहुबली’ (baahubali) एक फिक्शन मूवी थी और ‘आरआरआर’ उन किरदारों की जिंदगी पर बनी हैं, जो रियल लाइफ में ‘हीरो’ हैं। जी हां, अल्लूरी सीताराम राजू (Alluri Sitarama Raju ) और कोमाराम भीम ( Komaram Bheem) दो ऐसे तेलुगू फ्रीडम फाइटर, जिन्होंने देश के लिए अपनी जान की बाजी तक लगा दी।

आइये जानते है कौन है RRR फिल्म के असली हीरो
आइये जानते है कौन है RRR फिल्म के असली हीरो

फिल्म के असली हीरो सीताराम राजू और कोमाराम भीम

यह फिल्म एक रियल लाइफ ‘हीरो की कहानी है जो भारत के स्वतंत्रता सेनानियों, अल्लूरी सीताराम राजू और कोमाराम भीम के इर्द – गिर्द घूमती है,जिन्होंने ब्रिटिश हुकुमत के दौरान अंग्रेजों के नाको-चने चबवा दिए थे। आज इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से मैं आपको इस फिल्म (राईज रोअर रिवॉल्ट) के रियल लाइफ के दो हीरो के बारे में बता रही हु

फिल्म में कोमाराम भीम का किरदार जूनियर NTR निभा रहे हैं। कोमाराम भीम को लोग आज भी पूजते हैं। बात तब की है, जब सिर्फ जमीन पर ही नहीं, नदियों और जंगलों पर भी अंग्रेजों का राज था।।

अल्लूरी सीताराम राजू और कोमाराम भीम ने उन क्षेत्रों में आदिवासियों के वन अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी थी, जो अब आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के अंतर्गत आते हैं। कहा जाता है कि 1882 में भारत की ब्रिटिश सरकार ने मद्रास फॉरेस्ट एक्ट पास कर स्थानीय आदिवासियों को जंगल में जाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसी लेकर दोनों ने अपने-अपने समय में आदिवासियों की लड़ाई लड़ी। आइए जानते हैं, कौन थे अल्लूरी सीताराम राजू और कोमाराम भीम।

अल्लूरी सीताराम राजू -Alluri Sitarama Raju

सीताराम राजू का जन्म 1897 में विशाखापटनम में हुआ था। राजू ने बेहद छोटी उम्र में जीवन के मोह-माया को त्यागकर आध्यात्म का रास्ता अपना लिया था। उन्होंने देश के कई बड़े धार्मिक स्थानों की यात्रा की। राजू महात्मा गाँधी के विचारों से काफी प्रभावित थे और अंग्रेजों के जुल्म के खिलाफ उठ खड़े हुए थे।

वह आदिवासियों को शराब छोड़ने के लिए प्रेरित करते थे और आपसी झगड़े को किसी तीसरे पक्ष के पास ले जाने के बजाय आपस में ही मिलकर हल करने की सलाह देते थे। सीताराम राजू पर अंग्रेजों ने खूब जुल्म किए, लेकिन कभी घुटने नहीं टेके। उन्हें 1922 से 1924 तक चले राम्पा विद्रोह के नेतृत्वकर्ता के रूप में याद किया जाता है। साल 1924 में अंग्रेजों ने सीताराम राजू को एक पेड़ से बाँध दिया और उन्हें गोलियों के भून दिया।

कोमाराम भीम – Komaram Bheem

कोमाराम भीम का जन्म 1900 ईस्वी में आदिलाबाद के संकेपल्ली में हुआ था। वह गोंड समाज से ताल्लुक रखते थे और अंग्रेजों तथा हैदराबाद के निजाम के अत्याचारों के खिलाफ उठ खड़े हुए थे। उन्होंने आदिवासियों के साथ मिलकर हैदराबाद की आजादी के लिए विद्रोह का बिगूल फूँक दिया था। कोमाराम गोरिल्ला युद्ध में माहिर थे और आदिवासियों के मसीहा के रूप में जाने जाते थे।

कहा जाता है कि एक बार फसल की कटाई के दौरान निजाम के पटवारी लक्ष्मण राव और पट्टेदार सिद्दीकी ने आकर गोंड लोगों से टैक्स भरने को कहा और गाली-गलौज करने लगे। इसके बाद कोमाराम के हाथों सिद्दीकी की हत्या हो गई और वे जान बचाने के लिए भाग गए।

उन्होंने अंग्रेज़ी-हिंदी-उर्दू लिखना सीखा और प्रेस में काम किया। उसके बाद असम के चाय बगानों में काम करने लगे। वहाँ उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ मजदूरों के लिए आवाज़ उठाई और जेल में डाल दिए गए। उसके बाद आदिवासियों को इकट्ठा कर निजाम के खिलाफ 1928 से लेकर 1940 तक गुरिल्ला युद्ध करते रहे। अंत में निजाम के सैनिकों के साथ युद्ध में वह वीरगति को प्राप्त हो गए।

परन्तु इस फिल्म में न‍िर्देशक ने हीरो को आग और पानी के रूप में द‍िखाया है. आग हैं राम (राम चरण) जो एक खतरनाक पुल‍िसवाले हैं और अंग्रेजों की सेना में ही काम करते हैं. ये एक ऐसा पुल‍िसवाला है जो अपने ऑफिसर के एक आदेश पर हजारों की भीड़ में अकेला घुस जाता है. दूसरा है पानी- सीधा, शांति और बस अपनी ही दुन‍िया में खुश रहने वाला भीम (जूनियर एनटीआर). भीम गोंड जाति का है, जो लोग जो बेहद शांति प्र‍िय हैं और झुंड में ही रहते हैं. कहानी इन दोनों के अपने-अपने संग्राम की है.

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