World Water Day 2021: इस अमूल्य धरोहर के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मनया जाता है विश्व जल दिवस

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World Water Day 2021

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World Water Day 2021: जानिए विश्व जल दिवस का इतिहास, जल दिवस का उद्देश्य और अन्य महत्वपूर्ण जानकारीया 

आज से कुछ वर्षो पहले यह स्थिति हुआ करती थी कि छोटे- छोटे गांवों में नदी, नहर और तालाब दिखाई पड़ते थे।थोड़ा बारिश होने पर ही गांव के गांव जलमग्न

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हो जाया करते थे। लेकिन जैसे जैसे लो आधुनिकता की और बड़े धीरे-धीरे सारे ताल-तलैया, नदी, नहर सूखते जा रहे हैं।

यह बात भारत देश की जहां के हम निवासी हैं, जहां पीने योग्य जल की उपलब्धता है। लेकिन विश्व में बहुत सारे देश ऐसे हैं, जहां पीने का स्वच्छ जल न होने के कारण गन्दा पानी पिने को मजबूर हैं जिसका नतीजा बीमारी होती हे और बीमारी के कारण लोग जीवन त्याग देते हैं। इन सभी समस्याओ के समाधान एवं स्वच्छ जल के संरक्षण के लिए ही विश्व जल दिवस मनाने का निर्णय लिया गया।

विश्व जल दिवस कब मनाया जाता है – When is World Water Day celebrated ?

विश्व जल दिवस 22 मार्च को मनाया जाता है इसका उद्देश्य विश्व के सभी देशों में स्वच्छ एवं सुरक्षित जल की उपलब्धता सुनिश्चित करवाना है साथ ही यह जल संरक्षण के महत्व पर भी ध्यान केंद्रित करता है।और संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1992 में अपने ‘एजेंडा 21’में रियो डी जेनेरियो में इसका प्रस्ताव दिया था।’

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ब्राजील में रियो डी जेनेरियो में वर्ष 1992 में आयोजित पर्यावरण तथा विकास का संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में विश्व जल दिवस मनाने की पहल की गई संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, लगभग 4 बिलियन लोग वर्ष में कम से कम एक महीने के लिए पानी की भारी कमी का अनुभव करते हैं और लगभग 1.6 बिलियन लोग – दुनिया की आबादी का लगभग एक चौथाई भाग एक स्वच्छ, सुरक्षित जल की आपूर्ति तक पहुँचने में असमर्थ हैं।

तथा 1993 में संयुक्त राष्ट्र ने अपने सामान्य सभा के द्वारा निर्णय लेकर 22 मार्च 1993 को पहला विश्व जल दिवस (First World Water Day on 22 March 1993) मनाया गया। जिसका उद्देश्य लोगों के बीच में जल संरक्षण (water conservation) का महत्व साफ पीने योग्य जल का महत्व आदि बताना था।

इसके बाद से ही जल संरक्षण को लेकर संपूर्ण विश्व में कई तरह की योजनाएं बनाई गईं। हर साल एक विषय पर विश्व के बौद्धिक लोग काम करना शुरू करते हैं ताकि आने वाली पीढियों के लिए पीने योग्य पानी बचाया जा सके। 

जल ही जीवन है – water is life

हम सब लोग इस तथ्य को बहुत अच्छे से जानते हैं कि जल हमारे लिए कितना महत्त्वपूर्ण है। इसलिए कहा जाता है जल ही जीवन है, जल के बिना जीवन की कल्पना अधूरी है। लेकिन यह सब बातें हम तब भूल जाते हैं, जब अपनी पानी से भरी टंकी के सामने मुँह धोते हुए पानी को बर्बाद करते रहते हैं। हम कई लीटर मूल्यवान पानी अपनी कीमती कार को नहलाने में या फिर स्वयं भी काफ़ी देर तक नहाने में बर्बाद कर देते हैं।

इसी का नतीजा है कि आज समूर्ण विश्व के सामने पीने के पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है। धरातल पर तीन चौथाई पानी होने के बाद भी पीने योग्य पानी एक सीमित मात्रा में ही उपलब्ध है। उस सीमित मात्रा के पानी का इंसान ने अंधाधुध बर्बाद किया है।

पहले ही हम नदी, तालाबों और झरनों को कैमिकल की भेंट चढ़ा चुके हैं, और जो बचा हुआ है, उसे अब हम अंधाधुंध खर्च कर रहे हैं। 

विश्व जल दिवस का उद्देश्य

विश्व में पानी के बिना मानव अस्तित्व पर संकट गहरा सकता है। पानी हमारा मूलभूत संसाधन इसे बचाना कितना जरूरी है,इससे अनेको काम संचालित होते हैं और इसकी कमी से ज्यातार क्रिया कलाप ठप हो सकते हैं जैसी अनेक महत्वपूर्ण बातों को समझाना ही विश्व जल दिवस का उद्देश्य है ।

भारत में जल संकट

यदि हम भारत की बात करें तो देखेंगे कि एक तरफ दिल्ली, मुंबई जैसे महानगर हैं, जहाँ पानी की किल्लत तो है, किंतु फिर भी यहाँ पानी की समस्या विकराल रूप में नहीं है। लेकिन देश के कुछ ऐसे राज्य भी हैं, जहाँ आज भी कितने ही लोग साफ़ पानी के अभाव में या फिर रोग जनित गन्दे पानी से दम तोड़ रहे हैं।

राजस्थान, जैसलमेर और अन्य रेगिस्तानी इलाकों में पानी आदमी की जान से भी ज़्यादा कीमती है। पीने का पानी इन इलाकों में बड़ी कठिनाई से मिलता है। कई-कई किलोमीटर चल कर इन प्रदेशों की महिलाएँ पीने का पानी लाती हैं। इनकी ज़िंदगी का एक अहम समय पानी की जद्दोजहद में ही बीत जाता है।

जल के विषय में महत्त्वपूर्ण तथ्य

जल के विषय में एक नहीं बल्कि कई चौंका देने वाले तथ्य सामने आये हैं। विश्व में और विशेष रूप से भारत में पानी किस प्रकार नष्ट होता है, इस विषय में जो तथ्य सामने आए हैं, उस पर जागरूकता से ध्यान देकर हम पानी के अपव्यय (बर्बादी) को रोक सकते हैं

समस्त भारत में पानी किस प्रकार नष्ट होता है ? उसके आकड़े 

  • मुंबई में रोज़ वाहन धोने में ही 50 लाख लीटर पानी खर्च हो जाता है।
  • दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे महानगरों में पाइप लाइनों के वॉल्व की ख़राबी के कारण रोज़ 17 से 44 प्रतिशत पानी बेकार बह जाता है।
  • इज़राइल में औसतन मात्र 10 सेंटीमीटर वर्षा होती है। इस वर्षा से वह इतना अनाज पैदा कर लेता है कि वह उसका निर्यात कर सकता है। दूसरी ओर भारत में औसतन 50 सेंटीमीटर से भी अधिक वर्षा होने के बावजूद अनाज की कमी बनी रहती है।
  • पिछले 50 वर्षों में पानी के लिए 37 भीषण हत्याकांड हुए हैं।
  • भारतीय नारी पीने के पानी के लिए रोज ही औसतन 4 मील  (लगभग 6.4 कि.मी.) सफ़र पैदल ही तय करती है।
  • जल जनित रोगों से विश्व में हर वर्ष 22 लाख लोगों की मौत हो जाती है।
  • प्रत्येक व्यक्ति को कहीं भी प्रतिदिन 30 से 50 लीटर स्वच्छ तथा सुरक्षित जल की आवश्यकता होती है और इसके बावजूद 884 मिलियन लोगों को सुरक्षित जल उपलब्ध नहीं है।
  • दुनिया भर में प्रत्येक वर्ष 1,500 घन किलोमीटर गंदे जल का निर्माण होता है। भले ही गंदगी तथा गंदे जल कोऊर्जा तथा सिंचाई के लिए उपयोग में लाया जा सकता हैं, पर ऐसा होता नहीं है। विकासशील देशों में 80 फीसदी कचरों को बिना शुद्ध किये हीं निष्कासित कर दिया जाता है, क्योंकि उनमें इसके लिए कोई नियम तथा संसाधन उपलब्ध नहीं है।
  • यदि ब्रश करते समय नल खुला रह गया है, तो पाँच मिनट में क़रीब 25 से 30 लीटर पानी बरबाद होता है।
  • नहाने के टब में नहाते समय 300 से 500 लीटर पानी खर्च होता है, जबकि सामान्य रूप से नहाने में 100 से 150 लीटर पानी खर्च होता है।
  • विश्व में प्रति 10 व्यक्तियों में से 2 व्यक्तियों को पीने का शुद्ध पानी नहीं मिल पाता है।
  • प्रति वर्ष 3 अरब लीटर बोतल पैक पानी मनुष्य द्वारा पीने के लिए प्रयुक्त किया जाता है।

जल प्रदूषण

नदियाँ पानी का सबसे बड़ा स्रोत हैं। जहाँ एक ओर नदियों में बढ़ते प्रदूषण रोकने के लिए विशेषज्ञ उपाय खोज रहे हैं, वहीं कल कारखानों से बहते हुए रसायन उन्हें भारी मात्रा में दूषित कर रहे हैं। ऐसी अवस्था में जब तक क़ानून में सख्ती नहीं बरती जाती, अधिक से अधिक लोगों को दूषित पानी पीने पिने को मजबूर होना पड़ रहा है। 

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पृथ्वी में किन किन चीजों से हमे कितनी मात्रा में पानी खर्च करना पड़ता है ?

  • पीने के लिए मानव को प्रतिदिन 3 लीटर और पशुओं को 50 लीटर पानी की आवश्यकता होती है।
  • एक लीटर गाय का दूध प्राप्त करने के लिए 800 लीटर पानी खर्च करना पड़ता है। 
  • एक किलो गेहूँ उगाने के लिए एक हज़ार लीटर और एक किलो चावल उगाने के लिए चार हज़ार लीटर पानी की आवश्यकता होती है। इस प्रकार भारत में 83 प्रतिशत पानी खेती और सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है

पृथ्वी पर पैदा होने वाली सभी वनस्पतियो से हमें कितनी मात्रा में पानी मिलता है ?

पृथ्वी पर पैदा होने वाली सभी वनस्पतियाँ में से हमें आलू में और अनन्नास में 80 प्रतिशत और टमाटर में 15 प्रतिशत पानी मिलता है।।

‘जल ही जीवन है’ का सार्थक अर्थ  है – World Water Day Meaningful meaning of ‘water is life’

यह निर्विवाद सत्य है कि सभी जीवित प्राणियों की उत्पत्ति जल में हुई है। पृथ्वी का 71 प्रतिशत हिस्सा पानी से भरा हुआ है लेकिन स्वच्छ जल की बात करें तो उसका प्रतिशत बहुत ही कम है। कई सारे देश ऐसे हैं जहां के रहवासी गंदा पानी पीकर अपना जीवन काट रहे हैं। गंदा पानी पीने की वजह से इनका स्वास्थ्य प्रभावित होता है और कई बार तो यह समय से पहले मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं इसलिए जरूरी है कि जल का संरक्षण किया जाए ताकि लोग जिंदा रह सके और लोगों तक अच्छा पानी पहुंचे। 

जिसके चलते अब वैज्ञानिक पृथ्वी के अलावा अन्य ग्रहों पर पहले पानी की खोज को प्राथमिकता देते हैं। पानी के बिना जीवन जीवित ही नहीं रहेगा। इसी कारणवश अधिकांश संस्कृतियां नदी के पानी के किनारे विकसित हुई हैं … इस प्रकार ‘जल ही जीवन है’ का अर्थ सार्थक है। दुनिया में, 99% पानी महासागरों, नदियों, झीलों, झरनों आदि के अनुरूप है। केवल 1% या इससे भी कम पानी पीने के लिए उपयुक्त है।

हालाँकि, पानी की बचत आज की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। केवल पानी की कमी पानी के अनावश्यक उपयोग के कारण है। बढ़ती आबादी और इसके परिणामस्वरूप बढ़ते औद्योगिकीकरण के कारण, शहरी मांग में वृद्धि हुई है और पानी की खपत बढ़ रही है। आप सोच सकते हैं कि एक मनुष्य अपने जीवन काल में कितने पानी का उपयोग करता है, किंतु क्या वह इतने पानी को बचाने का प्रयास करता है? असाधारण आवश्यकता को पूरा करने के लिए, जलाशय गहरा गया है। इसके परिणामस्वरूप, पानी में लवण की मात्रा में वृद्धि हुई है।

वैश्विक जल संरक्षण के वास्तविक क्रियाकलापों को प्रोत्साहन देने के लिये विश्व जल दिवस को सदस्य राष्ट्र सहित संयुक्त राष्ट्र द्वारा मनाया जाता हैं। इस अभियान को प्रति वर्ष संयुक्त राष्ट्र एजेंसी की एक इकाई के द्वारा विशेष तौर से बढ़ावा दिया जाता है

जिसमें लोगों को जल से संबंधित मुद्दों के बारे में सुनने व समझाने के लिये प्रोत्साहित करने के साथ ही विश्व जल दिवस के लिये अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों का समायोजन भी शामिल है। इस कार्यक्रम की शुरूआत से ही विश्व जल दिवस पर वैश्विक संदेश फैलाने के लिये थीम (विषय) का चुनाव करने के साथ ही विश्व जल दिवस को मनाने की सारी जिम्मेवारी संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण तथा विकास एजेंसी की हैl

World Water Day 2021
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World Water Day 2021

समय से साथ और बढ़ती जनसंख्या के कारण साफ पानी हर किसी को नसीब हो, वर्तमान में वैश्विक स्तर पर यह असंभव सा हो गया है आज विश्व में जल का संकट कोने-कोने में व्याप्त है। आँकड़े बताते हैं कि विश्व के लगभग 1.5 अरब लोगों को पीने का शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है। हर क्षेत्र में विकास हो रहा है। दुनिया औद्योगीकरण की राह पर चल रही है,

किंतु स्वच्छ और रोग रहित जल मिल पाना कठिन हो रहा है। विश्व भर में साफ़ जल की अनुपलब्धता के चलते ही जल जनित रोग महामारी का रूप ले रहे हैं। कहीं-कहीं तो यह भी सुनने में आता है कि अगला विश्व युद्ध जल को लेकर होगा। इंसान जल की महत्ता को लगातार भूलता गया

और उसे बर्बाद करता रहा, जिसके फलस्वरूप आज जल संकट सबके सामने है इसलिए कोई भी व्यक्ति पानी को जरा सा भी बर्बाद न करे तभी हम उसका संरक्षण करने में कामयाब हो सकेंगे

बारिश के पानी का महत्त्व एवं जल संचयन – Importance of rain water and water harvesting

विश्व की बढ़ती हुई जनसंख्या तथा औद्योगिक विकास ने भी प्रदूषण में बढ़ोतरी की है, जिससे अब स्वच्छ जल की मांग और भी बढ़ गई है। मानव तथा पर्यावरण दशा, पेय जल तथा कृषि जल की वर्तमान और भविष्य की उपलब्धता खतरे में है। इसके बावजूद जल प्रदूषण एक प्रभावशाली मुद्दा नहीं बन पा रहा है।

आज का समय बहुत महत्त्वपूर्ण है, जब प्रत्येक व्यक्ति को वर्षा का पानी अधिक से अधिक बचाने की कोशिश करनी चाहिए। बारिश की एक-एक बूँद कीमती है। इन्हें सहेजना बहुत ही आवश्यक है। यदि अभी पानी नहीं सहेजा गया, तो संभव है कि पानी केवल हमारी आँखों में ही बच पाएगा। पहले कहा गया था

कि हमारा देश वह देश है, जिसकी गोदी में हज़ारों नदियाँ खेलती थीं, किंतु आज वे नदियाँ हज़ारों में से केवल सैकड़ों में ही बची हैं। वे सब नदियाँ कहाँ गई, कोई नहीं बता सकता। नदियों की बात छोड़ दी जाये तो हमारे गाँव-मोहल्लों से तालाब आज गायब हो गए हैं। इनके रख-रखाव और संरक्षण के विषय में बहुत कम कार्य किया गया है।

जागरुकता की आवश्यकता – World Water Day Need for awareness

पानी का महत्व भारत के लिए कितना है, यह हम इसी बात से जान सकते हैं कि हमारी भाषा में पानी पर आधारित कई मुहावरे और लोकोक्तियाँ हैं। विज्ञान और पर्यावरण के ज्ञान से मानव ने जो प्रगति की है, उसे प्रकृति संरक्षण में लगाना भी ज़रूरी है। तमिलनाडु ने वर्षा जल का संरक्षण करके जो मिसाल क़ायम की है, उसे सारे देश में विकसित करने की आवश्यकता है।

ऐसा नहीं है कि पानी की समस्या से हम जीत नहीं सकते। अगर सही ढ़ंग से पानी का सरंक्षण किया जाए और जितना हो सके पानी को बर्बाद करने से रोका जाए तो इस समस्या का समाधान बेहद आसान हो जाएगा। लेकिन इसके लिए जरुरत है- जागरुकता की। एक ऐसी जागरुकता की, जिसमें छोटे से छोटे बच्चे से लेकर बड़े-बूढ़े भी पानी को बचाना अपना धर्म समझें।

विश्व जल दिवस 2021 की थीम – Theme for World Water Day 2021

World Water Day 2021: हर साल विश्व जल दिवस को एक थीम (Theme) के साथ मनाया जाता है. इस साल की थीम- वेल्यूइंग वॉटर है, जिसका लक्ष्य लोगों को पानी का महत्व समझाना है. 

World Water Day 2021: इस अमूल्य धरोहर के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मनया जाता है विश्व जल दिवस

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