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foxtail millet kangni khane ka fayde
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foxtail Millets | kangni millet also knwon as world oldest millet | foxtail Millet / kangni health benefits | foxtail millet kangni khane ka fayde aur nuksaan | दुनिया का सबसे पुराना मिलेट कैंसर टॉनिक के नाम से मशहूर

Foxtail Millet : रोजाना कुछ मात्रा में मिलेट का सेवन करने पर आपकी सेहत एक दम दुरुस्त रहेगा. ऐसा sangeetaspen.com ही नहीं, डॉक्टर्स का भी मानना है, हालांकि मोटा अनाज का सेवन करने के लिए आपको गेहूं-चावल छोड़ने की जरूरत नहीं है.

रोजाना की डाइट में 14 से 15 प्रतिशत मोटा अनाज जोडें. इससे शरीर को सभी पोषक तत्वों की आपूर्ति होगी और कैंसर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों का खतरा भी टल जाएगा.

मिलेट कोई चमत्कार नहीं है, बल्कि विज्ञान है. आज मोटे अनाजों में बाजरा के बाद सबसे ज्यादा खेती कंगनी ने कवर किया हुआ है. एशिया में कंगनी की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है.

आइए बताते हैं कि कंगनी (Foxtail Millet) क्यों इतना खास है.कंगनी की खेती उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर की जाती है, लेकिन बढ़ते पलायन के बीच उत्पादन कम हो गया है. ये दुनिया का सबसे पुराना मिलेट (Millet)भी है, जिसे कौणी और चीन में छोटा चावल भी कहते हैं.

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फॉक्‍सटेल मिलेट क्‍या है | What is Foxtail Millet in Hindi

फॉक्‍सटेल मिलेट सकारात्‍मक अनाज (positive grains) की श्रेणी में आता है। इसे हिंदी में ‘कंगनी’ कहते हैं। यह एक प्रकार की चारा घास हैं। आप इसे मोटा अनाज भी कह सकते हैं। इस घास में छोटे गोल बीज होते हैं। जिनका रंग पीला होता। इन बीजों का स्‍वाद मीठा और कड़वा होता हैं।

फॉक्‍सटेल मिलेट की उत्‍पत्ति | Origin of Foxtail millet in Hindi

फॉक्‍सटेल मिलेट (Foxtail Millet) की उत्‍पत्ति के विषय पर जब हमने रिसर्च की तो हमें पता चला, फॉक्‍सटेल मिलेट कोई नया अनाज नहीं है। इस अनाज के संकेत 2000 से 1000 ईसा पूर्व की चीनी संस्‍कृति में पाए गए थे। यह चीन में उत्‍पन्‍न सबसे पुरानी उगने वाली फसलों में से एक हैं।

इतना ही नहीं इसे ‘इतावली’और ‘जर्मन मिलट’ (Foxtail Millet) के रूप में भी जाना जाता हैं। संभवत: इसकी खेती धीरे-धीरे पश्चिम योरप और एशिया के अन्‍य क्षेत्रों में फैली होगी।अब आपके मन में यह प्रश्‍न उठना भी स्‍वभाविक है कि वर्तमान में फॉक्‍सटेल मिलेट की खेती कहाँ- कहाँ होती हैं? तो चलिए इस विषय पर प्रकाश डाल लेते हैं।

फॉक्‍सटेल मिलेट की खेती वर्तमान में कहाँ हो रही हैं? | Where is Foxtail Millet currently being cultivated in Hindi

वर्तमान में फॉक्‍सटेल मिलेट की खेती- करने वाले देश हैं

चीन,भारत, रूस आदि देशों में फॉक्‍सटेल मिलेट (Foxtail Millet) की खेती हो रही हैं। कंगनी का सबसे ज्यादा उत्पादन उत्तराखंड में होता था, लेकिन पहाड़ों से बढ़ते पलायन के बीच अब इसकी उपज कम होती जा रही है. कंगनी को फॉक्सटेल मिलेट (Foxtail Millet) भी कहते हैं, जिसका रंग पीला और स्वाद हल्का मीठा-कड़वा होता है. कई लोग कंगनी को गेहूं और चावल में मिलाकर भी खाते हैं.

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उत्तराखंड में कंगनी से कई पारंपरिक व्यंजन भी बनाए जाते हैं. कई इलाकों में कंगनी को चीनी बाजरा भी कहते हैं. चीन में इसका उत्पादन ई0पु0 600 वर्ष से हो रहा है और आज इससे रोटियां, खीर, भात, इडली, दलिया, मिठाई बिस्किट आदि बनाए जाते हैं.

फॉक्‍सटेल मिलेट में पाए जाने वाले पोषक तत्‍व | कंगनी की खूबियां | Nutrient content in Foxtail millets in Hindi

कंगनी में मैग्नीशियम, फाइबर, आयरन, फास्फोरस, कैरोटिन, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, विटामिन, राइबोफ्लेविन, थियामिन आदि मौजूद होता है. कंगनी को गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए बेहद फायदेमंद बताया गया है.

इसके नियमित सेवन से जोड़ों के दर्द, आर्थराइटिस, सूजन के साथ-साथ पाचन की समस्या को भी दूर किया जा सकता है. कंगनी में मौजूद प्रोटीन और आयरन एनीमिया यानी खून को कमी को पूरा कर देते हैं. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स से तनाव और कैंसर जैसी घातक बीमारियों का खतरा भी कम किया जा सकता है.

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फॉक्‍सटेल मिलेट खाने के फायदे | Benefits of eating Foxtail Millet in Hindi

1 – फॉक्‍सटेल मिलेट बच्‍चों और गर्भवती महीलाओं के लिए अच्‍छा भोजन है क्‍योंकि यह असानी से पच जाता है।

2 – फॉक्‍सटेल मिलेट असानी से पच जाता है। इसलिए इसे भोजन के रूप में लेने से पेट दर्द (stomachache) से राहत मिलती है।

3- फॉक्‍सटेल मिलेट को खाने से मूर्त्राविसर्जन के समय होने वाली जलन (burning sensation while urinating से छुटकारा मिलता है।

4 – फॉक्‍सटेल मिलेट अतिसार (diarrhea) के रोगियों के लिए फायदें मंद होता है।

5 – इस मिलेट में फाइबर की मात्रा अधिक होती है। इसलिए इसे खाने से कब्‍ज के रोग से छुटकारा मिलता हैं।

6 – फॉक्‍सटेल मिलेट में प्रोटीन और आयरन की मात्रा अधिक होती है। इसलिए इसे खाने से रक्‍तहीनता (anemia) का रोग दूर होता है।

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7 – फॉक्‍सटेल मिलेट जोड़ों के दर्द (arthritis) को दूर करने में फायदे मंद है।

8 – यह मि‍लेट मोटे आनाज की श्रेणी में आता है। इनमें फाइवर की मात्र अधिक होती है। अत: इनको खाने से मोटापे (obesity) से छुटकारा मिलता है।

9- यदि फॉक्‍सटेल मिलेट की पेस्‍ट बनाकर जलने से बने घाव पर लगाया जाए तो जलन में राहत मिलती हैं।

10 – कंगनी की छांछ (gruel) पीकर। चादर ओढ़कर सोने से बुखार को भी ठीक किया जा सकता है।

11 – फॉक्‍सटेल मिलेट नियासिन (Vitamin B3) का प्रकृतिक स्‍तोत्र हैं। विटामिन बी3 यानी नियासिन हमारे शरीर के लिए अवश्‍यक पोषक तत्‍व हैं। यदि इस तत्‍व की हमारे शरीर में कमी हो जाए तो हमें कई रोग हो सकते है। दूसरी तरफ यदि इसे दवा के रूप में लिया जाए तो कई साइड इफेक्‍ट्स हो सकते हैं। किंतू यदि इसे भोजन के रूप में लिया जाय तो इससे बचाव हो सकता है।

12 –  कंगनी में एंटीऑक्‍सीडेंट तत्‍व होते हैं। जो फ्री रेडिकल्‍स के प्रभाव को कम करते हैं। जिससे स्‍वस्‍थ त्‍वचा की प्राप्ति होती है।

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13 – फॉक्‍सटेल मिलेट में केराटिन प्रोटिन होती है। जिससे बालों संबंधित स्‍मस्‍याओं से छुटकारा मिलता हैं।

14 –कंगनी में फाइबर की मात्रा अधिक होने से डायबिटीज रोग से बचाव संभव है।

15 – फॉक्‍सटेल मिलेट में प्‍लांट लिगनेन पाया जाता है। जिस कारण कैंसर रोग से बचाव संभव होता है।

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फॉक्‍सटेल मिलेट खाने के नुकसान | Disadvantage of eating Foxtail Millet in Hindi

1 – फॉक्‍सटेल मिलेट को पकाने से पहले 4 से 5 घंटे भिगो कर रखना जरूरी है। नहीं तो इसे पचाने में समस्‍या आ सकती हैं।

2 – थायराइड रोगियों को मिलेट ना खाने की सलाह दी जाती है। इसमें हाइपोथायरायडिज्‍म (Hypothyroidism) यानी की अंडर एक्टिव थायराइड रोगी और हाइपरथायराडिज्‍म (Hyperthyroidism) या‍नी की ओवर एक्टिव थायराइड रोगी शामिल है। क्‍योंकि मिलेट में गोइटेरोगेनिक (Goiter genic) पदार्थ की छोटी मात्र पाई जाती है। गोइटेरोगेनिक पदार्थ शरीर में आयोडिन को अवशोषण (सोखने) करने से रोकता है। जब मिलेट को पकाया जाता है या गरम किया जाता है। तब गोइटेरोगेनिक का प्रभाव बड़ जाता है। जिस कारण शरीर में आयोडिन की कमी हो सकती है।

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कैसे खाएं कंगनी

गेहूं और चावल की तरह ही कंगनी का सेवन किया जाता है. आप इससे रोटी, पराठे, खीर, दलिया के अलावा स्नैक्स भी बना सकते हैं. कंगनी से कोई भी व्यंजन बनाने से पहले इसे 6 घंटे पहले ही भिगो दें, ताकि इसका टेक्सचर सही हो जाए.

FAQ:

Q : कंगनी कौन सा अनाज होता है?

Ans:फॉक्‍सटेल मिलेट सकारात्‍मक अनाज (positive grains) की श्रेणी में आता है। इसे हिंदी में ‘कंगनी’ कहते हैं। यह एक प्रकार की चारा घास हैं। आप इसे मोटा अनाज भी कह सकते हैं।

Q : फॉक्सटेल मिलेट को हिंदी में क्या बोलते हैं?

Ans:इस मिलेट को हिंदी में कंगनी या टांगुन कहते है। इसका वानस्पतिक नाम सेतिरिया इटालिका है। Foxtail Millet सकारात्‍मक अनाज (Positive Grains) की श्रेणी में आता है।

Q : Millet कितने प्रकार के होते हैं?

Ans:Types of Millet: वैसे तो दुनिया में मिलेट की 13 वैरायटी मौजूद है, लेकिन अंतर्राष्ट्रीय पोषक अनाज वर्ष 2023 के लिए 8 अनाजों- बाजरा, रागी, कुटकी, संवा, ज्वार, कंगनी, चेना और कोदो को शामिल किया गया है.

Q : फॉक्सटेल किसके लिए प्रयोग किया जाता है?

Ans: कंगनी को आहार में शामिल करने से इसमें मौजूद फाइबर वजन कम करने में सहयोग करता है। इसे खाने के बाद भूख जल्दी नहीं लगती ,जिससे एक्स्ट्रा कैलोरी लेने से बच जाते हैं।

निष्‍कर्ष | Conclusion

आशा है sangeetaspen.com के इस लेख के माध्‍यम से आप ‘फॉक्‍सटेल मिलेट (कंगनी) खाने के फायदें और नुकसान’को अच्‍छी तरह से जान चुके होंगे।यदि यह जानकारी आपको अच्‍छी लगी हो तो कृपया अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें। इस जानकारी को अपने मित्रों और परिवार वालों के साथ share जरूर करें।

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